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'10 साल में 20 करोड़ नौकरियां गायब...'- टीकाराम जूली ने आंकड़े गिनाकर केंद्र और राज्य सरकार को घेरा

28 मई 2026
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'10 साल में 20 करोड़ नौकरियां गायब...'- टीकाराम जूली ने आंकड़े गिनाकर केंद्र और राज्य सरकार को घेरा

'अच्छे दिन के राज में युवा 'ग्रेजुएट वड़ा पाव' बेचने को मजबूर'- पुष्कर में टीकाराम जूली का भाजपा की आर्थिक नीतियों पर कड़ा वार,  न्यूनतम आय गारंटी कानून' को लेकर भी भजनलाल सरकार पर साधा निशाना!

Rajasthan Politics: राजस्थान विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली (Tikaram Jully) ने केंद्र और राज्य की भाजपा सरकारों पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि सरकार वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए बेरोजगारी को सांप्रदायिकता का हथियार बना रही है. पुष्कर में आयोजित कांग्रेस के प्रशिक्षण शिविर को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आज देश का युवा जुमलों की राजनीति का शिकार होकर दर-दर भटकने को मजबूर है. उन्होंने कहा कि सालाना 2 करोड़ नौकरियों का वादा करने वाली सरकार के 10 साल के कार्यकाल में 20 करोड़ नौकरियां गायब हैं और आज देश में बेरोजगारी दर 7 से 8 प्रतिशत के खतरनाक स्तर पर पहुंच चुकी है.

डिग्री हाथ में, पर जेब खाली: युवाओं की दुर्दशा पर तंज

प्रशिक्षण शिविर में युवाओं की बदहाली का जिक्र करते हुए कांग्रेस नेता जूली ने कहा कि आज देश के करोड़ों शिक्षित युवाओं की आँखों में सपने हैं, लेकिन जेब खाली है. 'स्टेट ऑफ वर्किंग इंडिया 2026' और मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि देश में हर साल 50 लाख ग्रेजुएट निकलते हैं, लेकिन नौकरी केवल 17 लाख को ही मिल पाती है, जिसके कारण युवा बेरोजगारी दर 15.2% तक पहुंच चुकी है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि 2014 में "अच्छे दिन" का नारा देने वालों के राज में आज 'ग्रेजुएट वड़ा पाव' और 'इंजीनियर उबर ड्राइवर' घूम रहे हैं, जो देश के युवाओं की डिग्रियों और उनके सपनों का सबसे बड़ा अपमान है.

गलत आर्थिक नीतियों से आर्थिक ढांचा पूरी तरह ध्वस्त

भाजपा की आर्थिक नीतियों पर कड़ा प्रहार करते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि 2016 की अचानक की गई नोटबंदी और उसके बाद लागू की गई जटिल जीएसटी (GST) प्रणाली ने देश के आर्थिक ढांचे को तबाह कर दिया. इन फैसलों के कारण लाखों छोटे व्यापारी और अनौपचारिक प्रतिष्ठान बंद हो गए, जिससे करोड़ों लोगों का रोजगार छिन गया. टीकाराम जूली ने आरोप लगाया कि छोटे दुकानदारों को बर्बाद कर पूरा मैदान चुनिंदा बड़े कॉरपोरेट घरानों को सौंप दिया गया है, और नए लेबर कोड लाकर श्रमिकों की सुरक्षा को भी पूरी तरह खत्म कर दिया गया है.

सरकारी विभागों में पद खाली, युवाओं को जानबूझकर विवादों में उलझाया

सरकारी नौकरियों के मुद्दे पर बोलते हुए पूर्व मंत्री ने 'मेक इन इंडिया' और 'स्किल इंडिया' जैसी योजनाओं को पूरी तरह असफल करार दिया. उन्होंने आंकड़े पेश करते हुए कहा कि रेलवे, आयकर विभाग और सीएजी सहित केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में कुल 8.45 लाख से अधिक पद रिक्त पड़े हैं, लेकिन भर्तियां नहीं की जा रही हैं. यूपीएससी जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं में भी पदों की संख्या आधी कर दी गई है. उन्होंने आरोप लगाया कि युवाओं को रोजगार देने के बजाय सरकार उन्हें जानबूझकर सांप्रदायिकता, जातिवाद और मंदिर-मस्जिद के विवादों में उलझा रही है ताकि वे नौकरियों पर सवाल न पूछ सकें.

न्यूनतम आय गारंटी कानून को ठंडे बस्ते में डालने का आरोप

पूर्ववर्ती अशोक गहलोत सरकार के फैसलों को याद करते हुए जूली ने कहा कि कांग्रेस ने युवाओं, बुजुर्गों और वंचितों के हित में ऐतिहासिक 'राजस्थान न्यूनतम आय गारंटी कानून 2023' बनाया था, जिसमें 125 दिन के पक्के रोजगार और न्यूनतम ₹1000 मासिक पेंशन का कानूनी अधिकार दिया गया था. उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि वर्तमान भजनलाल सरकार इस जनहितैषी कानून को लागू नहीं कर रही है और हकदार लोग आज सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं. अंत में उन्होंने कहा कि बांधों के निर्माण से लेकर मनरेगा और 1991 के आर्थिक उदारीकरण तक, कांग्रेस की नीतियों ने हमेशा देश में रोजगार की मजबूत नींव रखी है.


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