महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शिवसेना (UBT) और तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसदों से मुलाकात को लेकर शिवसेना (UBT) प्रमुख और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने पीएम मोदी पर तीखा निशाना साधा है. मुंबई में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में ठाकरे ने प्रधानमंत्री की इस मुलाकात पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब देश में युवा और छात्र आंदोलन कर रहे हैं, तब प्रधानमंत्री के पास उनसे मिलने का समय नहीं है, लेकिन बागी सांसदों से मुलाकात के लिए उनके पास वक्त है.
'डरिए मत, मैं आपके साथ हूं' पर उठाया सवाल
उद्धव ठाकरे ने दावा किया कि प्रधानमंत्री मोदी ने बागी सांसदों
से मुलाकात के दौरान उन्हें भरोसा दिलाते हुए कहा कि 'डरिए मत, मैं आपके साथ हूं.'
ठाकरे ने इसी कथित संदेश को लेकर प्रधानमंत्री से सवाल किया कि आखिर यह संदेश किसके
लिए था?
उन्होंने पूछा कि क्या यह संदेश सर्वोच्च न्यायालय के लिए
था, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के लिए था या फिर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र
फडणवीस के लिए? ठाकरे ने कहा कि जब इस मामले से जुड़ी सुनवाई अदालत में चल रही थी,
तब प्रधानमंत्री को बागी सांसदों से मिलने की जरूरत क्यों पड़ी?
'युवाओं से मिलने का वक्त नहीं, लेकिन बागी सांसदों से मुलाकात'
उद्धव ठाकरे ने देश में चल रहे युवा और छात्र आंदोलनों का
मुद्दा भी उठाया. उन्होंने कहा कि पिछले कुछ समय से भारत की जेन-जी पीढ़ी के आंदोलन
की चर्चा देश-दुनिया में हो रही है. ठाकरे के मुताबिक, सरकार को आंदोलन कर रहे युवाओं
से संवाद करना चाहिए था, लेकिन इसके बजाय छात्रों के खिलाफ कथित तौर पर बल प्रयोग किया
गया.
उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलनकारी छात्रों पर लाठियां चलाई
गईं और उनके साथ ज्यादती की गई. ठाकरे ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय
गृह मंत्री अमित शाह को छात्रों से बातचीत की पहल करनी चाहिए थी.
ठाकरे ने कहा कि प्रधानमंत्री ने जिस तरह बागी सांसदों को
'मैं आपके साथ हूं' का भरोसा दिया, वही भरोसा उन्हें आंदोलन कर रहे युवाओं को भी देना
चाहिए था.
'जलियांवाला बाग की याद तक आई'
उद्धव ठाकरे ने छात्र आंदोलन से निपटने के सरकार के तरीके
पर भी सवाल उठाए. उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित कार्रवाई को
देखकर कुछ लोगों को ऐतिहासिक जलियांवाला बाग हत्याकांड की याद तक आई.
ठाकरे ने कहा कि युवाओं की बात सुनने और उनसे संवाद करने
के बजाय अगर सरकार उनके खिलाफ कार्रवाई करती है, तो इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर
गंभीर सवाल खड़े होते हैं.
प्रधानमंत्री का संदेश किसके लिए था?
ठाकरे ने प्रधानमंत्री मोदी और शिंदे गुट के सांसदों की मुलाकात
के समय को लेकर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि जिस समय केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह
मुंबई में थे, उसी दौरान शिंदे गुट के सांसदों ने प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की.
इसी घटनाक्रम को लेकर ठाकरे ने दोबारा सवाल किया कि प्रधानमंत्री
का 'डरिए मत, मैं आपके साथ हूं' वाला संदेश आखिर किसके लिए था? उन्होंने पूछा कि क्या
यह संदेश सर्वोच्च न्यायालय के लिए था, अमित शाह के लिए था या फिर मुख्यमंत्री देवेंद्र
फडणवीस के लिए?
'लड़ाई अब सिर्फ शिवसेना तक सीमित नहीं'
उद्धव ठाकरे ने कहा कि प्रधानमंत्री और शिंदे गुट के सांसदों
की मुलाकात की खबरें देशभर के अखबारों में प्रकाशित हुई हैं और वह इन खबरों को सर्वोच्च
न्यायालय के समक्ष भी रखेंगे.
उन्होंने दावा किया कि अब यह लड़ाई केवल शिवसेना तक सीमित
नहीं रह गई है. ठाकरे ने आरोप लगाया कि 'गद्दारी का वायरस' पूरे देश में फैल रहा है.
उन्होंने सवाल किया कि क्या प्रधानमंत्री का यह संदेश भविष्य
में किसी दूसरी पार्टी में बगावत करने वाले नेताओं के लिए भी है? क्या उन्हें यह भरोसा
दिया जा रहा है कि अगर वे सत्ता पक्ष के साथ आ जाएं तो उनका कुछ नहीं बिगड़ेगा?
उद्धव ठाकरे के इन तीखे सवालों के बाद महाराष्ट्र की राजनीति
में एक बार फिर सियासी हलचल तेज होने के संकेत हैं. प्रधानमंत्री मोदी की बागी सांसदों
से मुलाकात को लेकर ठाकरे ने कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं. अब सभी की नजरें महायुति
और बीजेपी की ओर हैं कि वह उद्धव ठाकरे के इन आरोपों पर क्या जवाब देती है.













