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'स्काइलर बनाम बॉनफायर' विवाद में घिरी दिल्ली सरकार, 90 करोड़ के घोटाले के लग रहे आरोप

06 अगस्त 2026
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'स्काइलर बनाम बॉनफायर' विवाद में घिरी दिल्ली सरकार, 90 करोड़ के घोटाले के लग रहे आरोप

विद्या वाहिनी योजना के तहत छात्राओं को बांटी जा रही साइकिलों की खरीद पर उठे सवाल, रेखा सरकार पर सरकार पर टेंडर में हेरफेर और कमीशनखोरी के आरोप, दावा- 4 हजार की साइकिल 7 हजार में खरीदी गई 


Delhi Politics: दिल्ली की राजनीति में 'विद्या वाहिनी योजना' के तहत छात्राओं को मुफ्त साइकिल वितरण को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है. आम आदमी पार्टी (AAP) ने दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार पर करीब 90 करोड़ रुपये के कथित घोटाले का आरोप लगाया है. पार्टी का दावा है कि सरकार ने 1.30 लाख साइकिलों की खरीद में भारी वित्तीय अनियमितता की है और बाजार में कम कीमत वाली साइकिलों को प्रीमियम मॉडल बताकर अधिक दाम पर खरीदा गया.

दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि सरकार ने चुनिंदा वेंडरों को लाभ पहुंचाने के लिए टेंडर की शर्तों में बदलाव किया. उनके अनुसार, प्रति साइकिल 6,957 रुपये का भुगतान किया गया, जबकि समान श्रेणी की साइकिल बाजार में लगभग 4,000 रुपये में उपलब्ध है.

'स्काइलर' की जगह 'बॉनफायर' मॉडल देने का आरोप -

AAP का दावा है कि सरकारी दस्तावेजों और वर्क ऑर्डर में 'Hero Skylark 26T' मॉडल का उल्लेख किया गया है. पार्टी के अनुसार, यह मॉडल 7 गियर, डिस्क ब्रेक और फ्रंट सस्पेंशन जैसे फीचर्स से लैस होता है और इसी वजह से इसकी कीमत अधिक होती है.

हालांकि, सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि छात्राओं को जो साइकिलें दी जा रही हैं, उनमें ये सुविधाएं मौजूद नहीं हैं. उनका दावा है कि वास्तव में 'Bonfire' मॉडल की साधारण साइकिलों पर 'Skylark' का स्टिकर लगाकर वितरण किया जा रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि होलसेल बाजार में 'स्काइलर' मॉडल का उत्पादन पहले ही बंद हो चुका है.

प्रति साइकिल 3 हजार के कमीशन का आरोप - 

AAP का आरोप है कि जिस साइकिल की थोक कीमत करीब चार हजार रुपए है, उसे सरकार लगभग सात हजार रुपए में खरीद रही है. पार्टी के मुताबिक, इससे प्रति साइकिल करीब तीन हजार रुपए का अतिरिक्त भुगतान हुआ, जिसे उसने कथित तौर पर 66 प्रतिशत कमीशन बताया.

सौरभ भारद्वाज ने सरकार से पूरे खरीद प्रक्रिया, मॉडल, स्पेसिफिकेशन और टेंडर से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग करते हुए कहा कि यदि सब कुछ पारदर्शी है तो सरकार को तथ्यों के साथ जवाब देना चाहिए.

AAP द्वारा लगाए गए इन आरोपों के बाद यह मामला राजनीतिक रूप से गरमा गया है. समाचार लिखे जाने तक दिल्ली सरकार की ओर से इन विशिष्ट आरोपों पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. फिलहाल सरकार की ओर से इस संबंध में विस्तृत जवाब का इंतजार है.

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