गहलोत सरकार की शिकायत पहुंची हाईकमान तक, सोनिया ने दिये निर्देश

राजस्थान कांग्रेस (Rajasthan Congress) में गुटबाजी अपने चरम पर है. सरकार और संगठन में चल रही खिंचतान अब जगजाहिर है. राजस्थान कांग्रेस में आपसी खींचतान की खबर हाईकमान को भी लग गई है. हाल ही में पार्टी के कई पदाधिकारियों व नेताओं ने संगठन महासचिव वेणुगोपाल के जरिये कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) से सरकार के मंत्रियों की शिकायत की है. सोनिया गांधी ने अविनाश पांडे (Avinash Pandey) को वास्तविक रिपोर्ट देने के निर्देश दिए है. राजस्थान में कांग्रेस की सरकार बने 8 माह से अधिक का समय हो चुका है. सरकार के मुखिया अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) हैं और संगठन के मुखिया हैं सचिन पायलट (Sachin Pilot).

गौरतलब है कि राजस्थान में चुनाव के पहले से अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर चली तनातनी अभी तक मतलब सरकार बनने के बाद तक भी बदस्तूर जारी है. इसके अनेकों उदाहरण हैं जो कि कई मौकों पर साफ देखे गए हैं. फिर चाहे वो टिकट विरतण के समय की खींचतान हो या चुनाव जीतने के बाद कि मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए चली लम्बी तनातनी. या फिर पिछले 8 माह में सरकार या संगठन का कोई कार्यक्रम हो. ऐसा कोई अवसर नहीं गया होगा जहां पार्टी की अंदरूनी खींचतान को सबने महसूस नहीं किया हो.

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सूत्रों ने बताया राजस्थान (Rajasthan) में कांग्रेस का शासन आने के बाद से ही कांग्रेस का आम कार्यकर्ता ही नहीं बल्कि पार्टी के पदाधिकारी भी सार्वजनिक तौर पर मंत्रियों के नहीं मिलने और काम नहीं करने को लेकर नाराज चल रहे थे. स्थानीय स्तर पर कई बार शिकायत किये जाने के बावजूद मंत्रियों का रवैया नहीं बदला तो पार्टी के कुछ नाराज पदाधिकारियों ने सरकार और मंत्रियों की आलाकमान से जुड़े नेताओं और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल से मिलकर शिकायत की. वेणुगोपाल ने इसकी जानकारी पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को दी.

बता दें, राजस्थान में कांग्रेस पार्टी की सरकार बनने के बाद कांग्रेस के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा था कि मंत्रियों के दरवाजे कार्यकर्ताओं के लिए हमेशा खुले रहेंगे. जबकि प्रदेश में सरकार बनने के 8 माह बाद भी बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ताओं की सरकार से नाराजगी अब कांग्रेस के आलाकमान को भी बहुत खल रही है. सोनिया गांधी ने इस संबंध में पार्टी के प्रभारी महासचिव अविनाश पांडे से वास्तविक रिपोर्ट मांगी है.

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पार्टी के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट के मुलाकात कर उन्हें भी यह रिपोर्ट दी थी कि सरकार के मंत्री न तो जिलों में जाते है और यदि जाते भी हैं तो सरकारी या निजी कार्यक्रम के बाद वापस आ जाते हैं. ये मंत्री कांग्रेस कार्यालय जाना तो दूर वहां के नेताओं से भी नहीं मिलते हैं. यही वजह थी कि हाल ही में राजीव गांधी के 75वें जन्मोत्सव के दो दिवसीय कार्यक्रम के दौरान सचिन पायलट ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से कार्यकर्ता को तवज्जो देने और मंत्रियों को जिले में जाने, कांग्रेस कार्यकर्ताओं से मिलने के साथ ही उनकी समस्याएं दूर करने की बात कही थी.

सचिन पायलट ने कहा था कि राजीव गांधी संगठन को महत्वपूर्ण मानते थे और पार्टी कार्यकर्ताओं के प्रति उनके मन में बहुत सम्मान था. मुख्यमंत्रीजी आप कार्यकर्ताओं और विधायकों की सुनिए. जब कार्यकर्ता और विधायक आपके पास काम लेकर जाएं तो आप डीपीआर बनाने की बात नहीं कहकर तुरंत उसकी घोषणा कर दिया कीजिए. राजीव गांधी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा था कि राजीव गांधी कहा करते थे कि हमेशा सरकार से ज्यादा संगठन को तवज्जो देनी चाहिए. अब यह बात भी आलाकमान के पास पहुंची है कि सरकार न तो प्रदेश कांग्रेस को तवज्जो दे रही है और ना ही कार्यकर्ताओं को.

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प्रदेश में सरकार ने अभी अपने एक वर्ष का कार्यकाल भी पूरा नहीं किया है और सरकार के प्रति इतनी जल्दी कार्यकर्ताओं में बढ़ती नाराजगी से अब पार्टी हाईकमान भी चिंता में है. हाईकमान कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों की शिकायतों को इसलिए भी सही मान रहा है कि यदि सरकार का कामकाज अच्छा होता और कार्यकर्ता तथा जनता खुश होती तो लोकसभा चुनावों में राजस्थान की सभी 25 सीटों पर करारी हार का मुंह नहीं देखना पड़ता. इसीलिए अब सोनिया गांधी ने प्रभारी महासचिव अविनाश पांडे से स्थिति की वास्तविक रिपोर्ट तैयार करने को कहा है. जिससे कार्यकर्ताओं और आम जनता से दूरी बनाने वाले मंत्रियों के बारे में तथ्यात्मक रिपोर्ट सामने आ सके और उसी के अनुसार उन ओर अनुशासनात्मक कार्यवाही की जा सके.

जयपुर में देर रात फिर से अशांति, तनाव के बीच घायलों के हालचाल जानने पहुंचे परनामी

जयपुर (Jaipur) के मोती डूंगरी रोड स्थित लोधों के मोहल्ले में बीती रात करीब 11 बजे दो पक्षों में हुई भाटा जंग के चलते तनाव की स्थिति पैदा हो गयी. विवाद का कारण गली में बाइक खड़ी करने को लेकर बताया जा रहा है. विवाद के बाद सोमवार सुबह बीजेपी नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी (Ashok Parnami) घटनास्थल पर पहुंचे और मौका मुआयना किया. यहां उन्होंने लोगों से घटना की जानकारी ली और घायलों की कुशलक्षेम पूछी. इस मौके पर परनामी ने कहा कि जयपुर एक शांतिप्रिय शहर है लेकिन कुछ दिनों से राजनैतिक संरक्षण प्राप्त उपद्रवियों को ने बेखौफ राजधानी का चैन और अमन खराब कर रखा … Read more

क्या राजस्थान में गहलोत दिखाएंगे पान मसाला बैन करने का पराक्रम?

पिछले कई वर्षों से पान मसाला और गुटखा (Gutkha) पर पाबंदी के प्रयास राष्ट्रीय स्तर पर किए जा रहे हैं. विभिन्न राज्यों में समय-समय पर पान मसाला, गुटखा की बिक्री पर रोक लगाने के आदेश जारी होते रहे हैं, लेकिन राजस्थान (Rajasthan) में इस तरह की कोई सुगबुगाहट नहीं है. इस सिलसिले में ताजा आदेश बिहार की नीतीश कुमार (Bihar CM Nitish Kumar) की सरकार ने जारी किया है, जिसके तहत राज्य में एक साल तक पान मसाला और गुटखा पर पाबंदी रहेगी. बिहार में पहले भी इस तरह के आदेश जारी किए जा चुके हैं. मौजूदा आदेश में खैनी (तंबाकू) को इस पाबंदी से अलग रखा गया है. यह आदेश बिहार सरकार के खाद्य संरक्षा आयुक्त की ओर से जारी किया गया है, जिसके तहत बिहार में बिकने वाले विभिन्न ब्रांड के पान मसाला की बिक्री पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई है.

जानकार बताते हैं कि राजस्थान में पिछले 2 से 3 वर्षों में जयपुर (Jaipur), उदयपुर (Udaipur), अजमेर (Ajmer) सहित सभी संभागों पर स्थित जनस्वास्थ्य प्रयोगशाला (Public Health Laboratory) में कई नामी कम्पनियों यथा तानसेन (Tansen), पान पराग (Paan Parag), विमल (Vimal), दिलबाग (Dilbag), नजर (Nazar), पान बहार (Paan Bahar), बहार सलेक्ट (Bahar Select), सिग्नेचर (Signature) आदि के पान मसाला ब्रांड्स के सैम्पल्स नमूना जांच के लिए आए. उनमें से करीब-करीब सभी ब्रांड्स में जहरीले तत्व मैग्नीशियम कार्बोनेट की उपस्थित पाई गई है (पॉलिटॉक्स के पास दस्तावेज मौजूद हैं). इनमें से कई मामलों में तो सम्बंधित मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने तथाकथित जहरीले ब्रांड वाले उत्पाद की बिक्री तुरन्त प्रभाव से रोकने और मार्केट से उक्त उत्पाद को हटाने के निर्देश भी दिए गए हैं. लेकिन आज तक राजस्थान में किसी भी नामी कम्पनी के पान मसाला ब्रांड्स पर कोई कार्रवाई कभी नहीं कि गई है.

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गौरतलब है कि बिहार के खाद्य संरक्षा विभाग ने इस साल जून और अगस्त के बीच पान मसाला, गुटखा के नमूनों की जांच की थी, जिसमें इनमें मैग्नीशियम कार्बोनेट की मौजूदगी मिली है, जो कि स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है. इससे हृदय रोग और अन्य गंभीर बीमारियों की आशंका पैदा होती है. इनमें रजनीगंधा (Rajnigandha), राज निवास (Raj Niwas), पान पराग, पान पराग पान मसाला, बहार, बाहुबली, राजश्री, रौनक, सिग्नेचर, कमला पसंद, मधु ब्रांड का पान मसाला शामिल है. सरकारी आदेश के अनुसार बिहार के लोगों के स्वास्थ्य और भलाई के उद्देश्य से अब पान मसाला के उत्पादन और बिक्री पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है.

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गुटखा, पान मसाला पर पाबंदी का मामला सबसे पहले सुप्रीम कोर्ट में अप्रैल 2013 में उठा था, जब गैर सरकारी संगठन सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशंस (Center for Public Interest Litigation) ने इस संबंध में जनहित याचिका दायर की थी, जिसमें गुटखा, पान मसाला की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगाने की मांग की थी. जस्टिस जीएस संघवी की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने इस पर सुनवाई करते हुए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य सचिवों को इस संबंध में हलफनामा पेश करने का आदेश दिया था. उस समय केंद्र सरकार के वकील ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र सहित विभिन्न राज्यों में कानून और नियमों की अनदेखी करते हुए गुटखा उत्पादन और बिक्री जारी रहने की बात कही थी. स्वास्थ्य सचिवों की रिपोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट ने गुटखा, पान मसाला की बिक्री रोकने के आदेश दिए थे. इसके बावजूद गुटखा, पान मसाला की बिक्री नहीं रुक पाई थी.

देश में गुटखा और पान मसाला का सेवन करने वालों की कमी नहीं है. अब तो महिलाओं में भी इसका चलन बढ़ रहा है. जब से पान, सुपारी के स्थान पर तैयार पान मसाला और गुटखा का चलन शुरू हुआ है, तब से इनकी खपत लगातार बढ़ रही है और अब गांवों, कस्बों तक इसका इस्तेमाल करने वालों की तादाद लगातार बढ़ती जा रही है. इस पर किए गए विभिन्न शोधों का निष्कर्ष यह है पान मसाला में मिलाए जाने वाले विभिन्न पदार्थों से देश में मुंह और गले के कैंसर के मरीजों की संख्या बढ़ी है. गुटखा चाहे महंगा हो या सस्ता, सभी ब्रांड के गुटखों, पान मसालों से सेहत को नुकसान ही होता है.

पान, पान मसाले, गुटखा, तंबाकू या सुपारी ज्यादा चबाने और देर तक मुंह में रखने से समबम्यबकस फाइब्रोसिस की बीमारी होती है, जो आगे चलकर कैंसर का रूप ले लेती है. इससे मुंह के भीतर की त्वचा के तंतु सख्त हो जाते हैं, जिससे मुंह, गला और नाक पर विपरीत असर पड़ता है. इससे ऐसी स्थिति भी आ सकती है कि मुंह का खुलना बंद हो जाता है. इससे धड़कनें अनियिमत हो जाती है, जिससे दिल की बीमारी बढ़ने की संभावना भी बढ़ जाती है. एक रिपोर्ट के अनुसार देश में हर साल औसतन आठ लाख लोग तंबाकू के सेवन से होने वाली बीमारियों से मर जाते हैं.

आश्चर्यजनक है कि राजस्थान में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद पान मसाला, गुटखा की बिक्री धड़ल्ले से जारी है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद तंबाकू मिश्रित पान मसाला की बिक्री तो रुक गई, लेकिन उसकी जगह पान मसाला और तंबाकू के पाउच अलग-अलग बिकने लगे. राजस्थान सरकार ने हर महीने की आखिरी तारीख को तंबाकू निषेध दिवस घोषित किया था. शुरू में इस नियम का पालन हुआ, लेकिन अब वह भी शिथिल हो चुका है. अब दुकानदार इस नियम को भूल चुके हैं.

इससे तो यही समझा जायेगा कि राजस्थान की गहलोत सरकार गुटखा और पान मसाला की बिक्री रोकने के लिए ठोस प्रयास नहीं कर रही है और विभिन्न ब्रांड तानसेन, पान पराग, विमल, दिलबाग, नजर, पान बहार, बहार सलेक्ट, सिग्नेचर, रजनीगन्धा, राज निवास जैसे महंगी कम्पनियों के ये जहर युक्त ब्रांड्स स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत से राजस्थान की हर गली मोहल्ले में धडल्ले से बेचे जा रहे हैं. राजस्थान सरकार को बिहार से प्रेरणा लेने की जरूरत है.

तंबाकू का सेवन करने वालों को ध्यान रखना चाहिए कि इसमें सिर्फ निकोटिन ही नहीं, बल्कित 33 तरह के जहरीले पदार्थ पाए गए हैं. निकोटिन से दिल की धड़कन और रक्तचाप बढ़ता है, शिराएं सिकुड़ जाती हैं, भूख कम होती है, आमाशय और आंत में विपरीत असर होता है, जिससे शरीर को बहुत नुकसान होता है. मुंह में तंबाकू रखने से सूजन, गांठ, उभार, लाल, बादामी, काले धब्बे, सफेद चकते, घाव, जलन, दर्द, खून आने जैसी समस्याएं उभरती है और दांतों को बहुत नुकसान पहुंचता है. कई लोगों के दांत तंबाकू, गुटखा के कारण ही समय से पहले गिर जाते हैं.

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इससे पहले सितंबर 2012 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उप्र सरकार को गुटखा, पान मसाला पर पाबंदी लगाने के लिए 14 दिन का समय दिया था. गुजरात में अगस्त 2012 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुटखा, पान मसाला पर पाबंदी लगाने की घोषणा की थी. इससे पहले जुलाई 2012 में हरियाणा सरकार ने गुटखा, पान मसाला, जर्दा, तंबाकू और निकोटीन से बने चबाने वाले अन्य पदार्थों के उत्पादन, भंडारण, वितरण या बिक्री पर 15 अगस्त से रोक लगाने की घोषणा की थी. इसी दौरान हिमाचल प्रदेश सरकार ने भी गुटखा, पान मसाला, मशेहरी, खैनी के भंडारण, विक्रय और वितरण को प्रदेश में अवैध घोषित किया था.

उत्तर प्रदेश सरकार ने जुलाई 2017 में उप्र की एक जेल में सरकार ने तंबाकू उत्पादों पर रोक लगाई थी, जिसके खिलाफ कैदियों ने भूख हड़ताल कर दी थी और एक कैदी की मौत हो गई थी. इससे पहले अप्रैल 2016 में दिल्ली सरकार ने राजधानी में तंबाकू, गुटखा, पान मसाला या कोई भी चबाने वाला तंबाकू उत्पाद बेचने, रखने या बनाने पर एक साल के लिए पाबंदी लगा दी थी, लेकिन हाईकोर्ट के आदेश के कारण यह फैसला लागू नहीं हो सका था.

महाराष्ट्र सरकार ने जुलाई 2012 में गुटखा और पान मसाला के उत्पादन, बिक्री, भंडारण और वितरण पर रोक लगाने के आदेश जारी किए थे. इसके बाद मार्च 2015 में घोषणा की थी गुटखे की बिक्री में शामिल लोगों पर गैर जमानती अपराध के तहत मामला दर्ज किया जाएगा. उस समय सरकार की तरफ से कहा गया था कि राज्य में गुटखे के उत्पादन और बिक्री पर प्रतिबंध है, लेकिन इसे प्रभावी तरीके से लागू नहीं किया गया है, जिसकी वजह से अन्य राज्यों से महाराष्ट्र में गुटखे की तस्करी हो रही है. महाराष्ट्र सरकार ने पाबंदी को सख्ती से लागू करने के लिए चेतावनी थी.

सिंधिया समर्थकों की इस्तीफे की धमकी के बीच सोनिया से मिले कमलनाथ, पर नहीं बनी बात

मध्यप्रदेश में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को लेकर उठा बवाल थमता नजर नहीं आ रहा है, प्रदेश के दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) की नाराजगी और उनके समर्थन में कार्यकर्ताओं की इस्तीफे की धमकी के बीच मुख्यमंत्री कमलनाथ ने शुक्रवार सुबह कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) से मुलाकात की. कमलनाथ (Kamalnath) और सोनिया गांधी के बीच चली आधे घंटे की मुलाकात के बाद कयास लगाए जा रहे थे कि पीसीसी चीफ का एलान हो जाएगा. लेकिन ऐसा नहीं हुआ, मुलाकात के बाद अब भी मप्र के नए पीसीसी चीफ को लेकर पेंच फंसा हुआ है. सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद सीएम कमलनाथ जब बाहर आए तो … Read more

‘जब राज नहीं होता तो जूते के जोर से काम कराना हमें आता है’- सर्राफ, भाजपा विधायक, पूर्व शिक्षामंत्री

राजस्थान (Rajasthan) के भाजपा विधायक (BJP MLA) और पूर्व शिक्षामंत्री कालीचरण सर्राफ (Kalicharan Saraf) ने एक विवादित बयान देते हुए कहा कि, ‘जब राज होता है तो कलम की ताकत से काम होता है, जब राज नहीं होता तो हमें जूते के जोर पर काम कराना आता है‘. इस पर राजस्थान प्रदेश कांग्रेस (PCC) प्रवक्ता अर्चना शर्मा ने पलटवार करते हुए कहा की, ‘सर्राफ ने इस तरह का बयान देकर मर्यादित भाषा का हनन करते हुए उनकी औंछी मानसिकता का उदाहरण दिया है.’ वहीं मुख्य सचेतक महेश जोशी ने कहा कि, ‘कालीचरण सर्राफ का यह बयान अलोकतांत्रिक है’.

दरअसल गुरूवार सुबह पूर्व शिक्षा मंत्री एवं राजधानी जयपुर के मालवीय नगर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के विधायक कालीचरण सर्राफ जयपुर के करतारपुरा फाटक के पास नाले में हो रहे कटाव, अतिक्रमण सहित अन्य मांगो के लिए धरना दे रहे थे धरना खत्म होने के बाद सर्राफ जब पत्रकारों से रूबरू हुए तो उन्होंने कहा- “जब राज होता है तो कलम की ताकत से काम होता है, जब राज नहीं होता तो जूते के जोर पर काम होते है, हमें जूते के जोर पर काम कराना आता है” सर्राफ का यह बयान धरना स्थल पर चर्चा का विषय बन गया और इसके बाद शुरू हुआ राजनीतिक बयानबाजी का सिलसिला.

पूर्व शिक्षामंत्री सर्राफ के इस अमर्यादित बयान पर राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी की उपाध्यक्ष एवं प्रदेश प्रवक्ता अर्चना शर्मा (Archana Sharma) ने एक प्रेस नोट और एक वीडियो जारी करते हुए कहा कि, ‘सर्राफ ने धरने के दौरान जिस भाषा का इस्तेमाल किया है वह उनकी औंछी मानसिकता का एक उदाहरण है.’ आगे उन्होंने कहा कि, ‘जब कालीचरण सर्राफ मंत्री थे तब उन्होंने अपनी कलम का इस्तेमाल भ्रष्टाचार व अपराध को संस्थागत करने के लिये किया था, यही कारण है कि जनता ने उनको नकार दिया. आगे उन्होंने कहा कि राजनीति के लम्बे अनुभव के बावजूद इस तरह के विवादित बयानों से स्पष्ट होता है कि उन्हें जनभावनाओं से कोई सरोकार नहीं है. सुर्खियों में बने रहने के लिये वे किसी भी हद तक जा सकते हैं.’

कालीचरण सर्राफ के द्वारा दिये गये धरने के पर अर्चना शर्मा ने कहा कि सर्राफ ने जिस क्षेत्र में धरना दिया वहॉं उनके मंत्री रहते हुए नाले में बहकर एक युवक की मौत हो गयी थी. तब सर्राफ ने इस पुरे मामले की सुध तक नहीं ली थी. आगे शर्मा ने सर्राफ पर आरोप लगाते हुए कहा कि सर्राफ जब मंत्री थे उस समय उनके एक समर्थक ने व्यापारी को सरेआम गोली मारी थी जिससे जाहिर होता है सर्राफ भ्रष्टाचार को ही पनपाने के माहिर नहीं हैं अपितु अपराधियों के भी संरक्षक है. कालीचरण सर्राफ द्वारा दिया गया धरना अपने राजनीतिक वजूद को बचाने के लिये रचा गया प्रपंच मात्र है.

वहीं भाजपा विधायक सर्राफ के विवादित बयान पर राजस्थान की कांग्रेस सरकार के मुख्य सचेतक महेश जोशी (Mahesh Joshi) ने पलटवार करते हुए कहा- ‘कालीचरण सराफ एक वरिष्ठ नेता हैं, उनका यह बयान अलोकतांत्रिक है, सर्राफ को उनकी पार्टी सीरियस नहीं लेती, भाजपा में उनकी स्वीकार्यता का अभाव है इसलिए सर्राफ की जुबान बार बार फिसलती रहती है.’

आपकों बता दें कि कालीचरण सर्राफ व अर्चना शर्मा दोनों एक ही विधानसभा क्षेत्र से अपनी राजनैतिक ताल ठोकते आये हैं. सर्राफ के सामने अचर्ना शर्मा को पिछले दो विधानसभा चुनाव में हार का मुंह देखना पडा है. कालीचरण सर्राफ भाजपा के वरिष्ट नेता हैं और मालवीय नगर विधानसभा क्षेत्र से लगातार 7वीं बार विधायक चुने गये हैं, सर्राफ पूर्व में राजे सरकार में दो बार कैबिनेट मंत्री भी रह चुके हैं साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के करीबी नेताओं में से एक माने जाते है.

हरियाणा में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से अशोक तंवर को हटाने की तैयारी

हरियाणा (Haryana) में विधानसभा चुनाव की तैयारी के मद्देनजर कांग्रेस ने पार्टी नेताओं के अंदरूनी मतभेद दूर करने के प्रयास शुरू कर दिए हैं. हरियाणा में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा (Bhupinder Singh Hooda) और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अशोक तंवर (Ashok Tanwar) के बीच भारी मतभेद चल रहे हैं. पांच साल पहले राहुल गांधी ने अशोक तंवर को हरियाणा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाया था. इन दिनों हुड्डा और तंवर के बीच भारी खींचतान चल रही है, जिससे विधानसभा चुनाव में पार्टी की संभावनाओं पर विपरीत असर पड़ सकता है. हुड्डा लंबे समय से अशोक तंवर को प्रदेशाध्यक्ष पद से हटाने की मांग कर रहे हैं.

कांग्रेस महासचिव हरियाणा के प्रभारी गुलाम नबी आजाद (Gulam Nabi Azad) ने हाल ही प्रदेश के प्रमुख नेताओं से बातचीत की है और सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) को भी परिस्थितियों से अवगत कराया है. इसके बाद तंवर को हटाने की संभावना मजबूत हो गई हैं. आजाद ने जिन नेताओं से विचार विमर्श किया है, उनमें हुड्डा और तंवर के अलावा कांग्रेस कार्यकारिणी सदस्य कुमारी शैलजा, विधायक दल की नेता किरण चौधरी, वरिष्ठ नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला (Randeep Singh Surjewala) और अजय यादव शामिल हैं. इन बैठकों को हरियाणा में नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है.

आजाद नए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को लेकर सभी गुटों में सहमति बनाने का प्रयास कर रहे हैं. कुमारी शैलजा के नाम पर सर्वसम्मति नजर आ रही है. कुमारी शैलजा (Kumari Selja) दलित नेता हैं और पार्टी में वरिष्ठ भी हैं. उनको प्रदेशाध्यक्ष बनाने से हरियाणा में पार्टी के अंदरूनी मतभेद दूर हो सकते हैं. शैलजा के अलावा रणदीप सिंह सुरजेवाला और अजय यादव भी प्रदेशाध्यक्ष बनने की दौड़ में शामिल हैं. अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी से जुड़े सूत्रों ने बताया कि फिलहाल कुमारी शैलजा का नाम तय नहीं हुआ है. भूपेन्द्र सिंह हुड्डा या उनके पुत्र दीपेन्द्र हुड्डा (Deependra Hooda) को भी प्रदेशाध्यक्ष बनाने पर विचार किया जा रहा है.

बड़ी खबर: हरियाणा चुनाव के मद्देनजर बीजेपी ने खेला बड़ा दांव

एक कयास यह भी है कि कांग्रेस हाईकमान भूपेन्द्र हुड्डा की पार्टी पर दबाव बनाने की नीति से खुश नहीं है. हाल ही में रोहतक की रैली में हुड्डा ने बगावती तेवर दिखाए थे, जिससे पार्टी हाईकमान सतर्क भी है. एक संभावना यह भी है कि हुड्डा को कांग्रेस विधायक दल का नेता बनाया जा सकता है, भले ही विधानसभा का कार्यकाल कुछ ही दिनों में समाप्त हो रहा हो. कांग्रेस हाईकमान का मानना है कि हुड्डा को महत्व देना जरूरी है, जिससे कि वह विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के प्रचार से पीछे न हटें.

सूत्रों ने बताया कि भूपेन्द्र सिंह हुड्डा को प्रदेशाध्यक्ष बनाए जाने की संभावना नहीं है, लेकिन प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) का पुनर्गठन किया जा सकता है. और प्रमुख नेताओं को सामूहिक जिम्मेदारी के आधार पर चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है. कांग्रेस हाईकमान को पूरा भरोसा है कि बगावती तेवर दिखाने के बावजूद हुड्डा कांग्रेस नहीं छोड़ेंगे.

सिंधिया समर्थकों की चेतावनी अगर 10 दिनों में पीसीसी अध्यक्ष नहीं बनाया तो देंगे इस्तीफा

सिंधिया समर्थकों की चेतावनी पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं मध्य प्रदेश कांग्रेस (Congress) के कद्दावर युवा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) के राजनीतिक भविष्य को लेकर उनके समर्थकों की नाराजगी बढ़ती जा रही है. समर्थकों का दबाव है कि सिंधिया को प्रदेश कांग्रेस संगठन की कमान सौंपी जाए. ज्‍योतिरादित्‍य को मध्‍यप्रदेश कांग्रेस अध्‍यक्ष (MP Congress President) बनाने की मांग करते हुए उनके समर्थकों ने चेतावनी तक दे डाली है कि यदि प्रदेश अध्‍यक्ष नहीं बनाए गए तो इस्‍तीफा दे देंगे.

ज्योतिरादित्य सिंधिया को पीसीसी चीफ (PCC Chief) बनाए जाने की मांग ने एक बार फिर से जोर पकड़ लिया है. मध्यप्रदेश में उनके समर्थक खुलकर समर्थन में उतर गए है और कमान सिंधिया को सौंपने की मांग पर अड़ गए है. दतिया जिला कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष अशोक दांगी बगदा ने इस्तीफा देते हुए हाईकमान को धमकी दी है कि अगर 10 दिन के अंदर ज्योतिरादित्य सिंधिया को प्रदेश अध्यक्ष की कमान नहीं सौंपी तो जिले के 500 सिंधिया समर्थक इस्तीफा देंगे. इस घटनाक्रम के बाद एक बार फिर कांग्रेस में घमासान मच गया है.

वहीं जिला कांग्रेस कमेटी मुरैना के अध्यक्ष राकेश मावई ने एलान किया है कि अगर ज्योतिरादित्य सिंधिया अध्यक्ष नहीं बने तो मुरैना की कार्यकारिणी सहित वे खुद भी इस्तीफा दे देंगे. यह मांग मावई ने सीधे सोनिया गांधी और राहुल गांधी से की है. मंगलवार को जबलपुर में भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सड़क पर उतरकर सिंधिया के पक्ष में प्रदर्शन किया.

कांग्रेस में ज्योतिरादित्य सिंधिया की भूमिका को लेकर अब उनके समर्थक चिंतित और परेशान होने लगे हैं. लोकसभा चुनाव से पहले जब प्रदेश अध्यक्ष का माहौल बना, तब उन्हें मध्य प्रदेश से हटाकर आधे उत्तर प्रदेश का प्रभारी बना दिया गया. उनके समर्थक सिंधिया की आम चुनाव में हुई हार के लिए इसी कारण को जिम्मेदार मानते हैं. समर्थकों का मानना है कि यदि सिंधिया मध्यप्रदेश में ही सक्रिय रहते तो न केवल खुद की, बल्कि आसपास की एक-दो सीटें और निकाल सकते थे.

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गौरतलब है कि लोकसभा में सिंधिया को प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi) के साथ उत्तरप्रदेश का चुनाव प्रभारी नियुक्त किया गया था और हाल ही में ज्योतिरादित्य सिंधिया को महाराष्ट्र में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिये बनी स्क्रीनिंग कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया है. इस पर सिंधिया समर्थकों की गहरी नाराजगी खुलकर सामने आ रही है. समर्थकों का कहना है कि अब जबकि राज्य में नए प्रदेश अध्यक्ष के चयन का वक्त आया तो उन्हें महाराष्ट्र विधानसभा के लिए बनी स्क्रीनिंग कमेटी का अध्यक्ष बनाकर महाराष्ट्र में उलझा दिया है.

सिंधिया समर्थक मंत्री इमरती देवी तो खुलकर मैदान में आ चुकी हैं, उनका कहना है कि सिंधिया को मप्र में ही कोई जिम्मेदारी दी जानी थी, महाराष्ट्र में कौन पूछ रहा है. बता दें, इससे पहले भी सिंधिया समर्थकों ने उनको मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री बनाने की मांग की थी. जबकि कुछ समर्थकों ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने की मांग को लेकर मध्यप्रदेश में पोस्टर भी लगवा दिए थे.

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मायावती एक बार फिर बनीं बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष, उपचुनाव के प्रत्याशियों के नामों पर लगी मुहर

बहुजन समाज पार्टी (Bahujan Samaj Party) की केंद्रीय कार्यकारिणी समिति की बुधवार को आयोजित बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री मायावती (Mayawati) को एक बार फिर पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष (National President) चुन लिया गया है. लखनऊ स्थित बसपा (BSP) कार्यालय में राष्ट्रीय स्तर की बैठक के दौरान देश भर से आये बसपा प्रतिनिधियों ने मायावती को राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना. बसपा सुप्रीमो मायावती अब नए सिरे से राष्ट्रीय कार्यकारिणी बाद में घोषित करेंगी. बैठक में यह तय किया गया कि बसपा विधानसभा उपचुनाव में सभी सीटों पर अपने प्रत्याशी खड़े करेगी.

बसपा की केन्दीय कार्यकारिणी समिति ने बैठक में यह भी तय किया कि बसपा उत्तर प्रदेश की सभी 13 सीटों पर विधानसभा उप चुनाव लड़ेगी. इसी के तहत बैठक उपचुनाव के प्रत्याशियों के नामों पर मुहर भी लगी. इसके साथ ही यह भी तय किया गया कि पार्टी दिल्‍ली, हरियाणा, महाराष्‍ट्र और झारखंड में होने वाले विधानसभा चुनावों में अपने प्रत्याशी उतारेगी.

बैठक में उत्तरप्रदेश (UttarPradesh) में 13 सीटों पर होने वाले विधानसभा उपचुनाव के प्रत्याशियों के नामों पर मुहर लगाते हुए घोषणा की – हमीरपुर-नौशाद अली, जैदपुर (बाराबंकी)-अखिलेश अम्बेडकर, मानिकपुर (चित्रकूट)- राज नारायण निराला, प्रतापगढ़-रणजीत सिंह पटेल, घोषी-कयूम अंसारी, बलहा (बहराइच)- रमेश गौतम, टुंडला-सुनील चित्तौर, रामपुर सदर-जुबेर अहमद, एगलस-अभय कुमार, लखनऊ कैंट -अरुण द्विवेदी, गोविंद नगर (कानपुर)- देवी प्रसाद तिवारी को चुनाव लड़ाया जाएगा वहीं जलालपुर और गंगोह के लिए प्रत्याशियों की घोषणा बाद में होगी.

गौरतलब है कि बसपा सुप्रीमो मायावती ने 28 अगस्त को जोनल व मंडल प्रभारियों की बैठक बुलाई थी. इसमें संगठन विस्तार और भाईचारा कमेटियों के गठन के बारे में चर्चा होनी थी. इसके साथ ही विधानसभा उप चुनाव की तैयारियों के बारे में भी समीक्षा होनी थी. बसपा सुप्रीमो ने उप चुनाव वाले क्षेत्रों में सबसे पहले विधानसभा, सेक्टर गठन के साथ ही भाईचारा कमेटी बनाने का निर्देश दिया है.

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गुर्जर समाज ने दी गहलोत को चेतावनी

लगातार विपक्ष के निशाने पर चल रही राजस्थान की गहलोत सरकार एक बार फिर मुसीबतों में फंसती नजर आ रही है. दरअसल, गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति ने सोमवार को गहलोत सरकार को चेतावनी दी है कि गुर्जरों के लिए मोर बैकवर्ड क्लास के तहत पांच फीसदी आरक्षण की व्यवस्था में अगर कोई फेरबदल हुआ तो गुर्जर समाज फिर सड़कों पर उतरेगा और आंदोलन करेगा. बैठक की अध्यक्षता किरोड़ी सिंह बैंसला ने की, जो गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के संयोजक हैं.