वीडियो खबर: प्रधानमंत्री मोदी पर जमकर बरसे मुख्यमंत्री गहलोत

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने छत्तीसगढ़ (chhattisgarh) के रायपुर जिले में एक किसान सम्मेलन को संबोधित करते हुए गहलोत ने कहा कि केंद्र सरकार देश के लोगों को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) का भय दिखाकर जेल में डाल रही है. यही वजह है कि देश में डर और हिंसा का माहौल है. उन्होंने आर्थिक अर्थव्यवस्था पर सवाल उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) और वित्तमंत्री को घेरा.

राजस्थान में फिर उजागर हुई गहलोत और पायलट के बीच की अदावत

राजस्थान (Rajasthan) में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट (Sachin Pilot) के बीच की अदावत पर आलाकमान के निर्देश कितना ही पर्दा डाल दें लेकिन उसकी झलक कहीं न कहीं से नजर आ ही जाती है. ताजा मामला बसपा छोड़ चुके छः विधायकों का है. इन सभी विधायकों ने अभी तक कांग्रेस की सदस्यता ही नहीं ली है. जबकि इन विधायकों को कांग्रेस पार्टी में शामिल करने को लेकर विधानसभा से स्वीकृति भी मिल गई है और बसपा छोड़ने के बाद से इन सभी विधायकों के गहलोत मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने के चर्चाएं जोरों पर थीं जो फ़िलहाल निकाय चुनाव तक रुक गई हैं. … Read more

खींवसर सीट पर बेनीवाल से तालमेल वसुंधरा राजे के लिए एक और झटका

खींवसर सीट (Khivansar Assembly) पर होने वाले विधानसभा उप चुनाव में भाजपा ने राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) से तालमेल करते हुए रालोपा प्रमुख हनुमान बेनीवाल (Hanuman Beniwal) के भाई नारायण बेनीवाल (Narayan Beniwal) को समर्थन देने की घोषणा कर दी. यह पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे (Vasundhara Raje) के लिए निराशाजनक है. विधानसभा उपचुनाव में भाजपा-रालोपा में तालमेल की घोषणा से एक दिन पहले बुधवार को हनुमान बेनीवाल ने कहा था कि अगर उनकी पार्टी का भाजपा से तालमेल हो गया तो पूर्व मुख्यमंत्री राजे अप्रासंगिक हो जाएंगी.हनुमान बेनीवाल के बयान के अगले ही दिन जयपुर में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सतीश पूनिया ने बेनीवाल के साथ संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस करते हुए खींवसर सीट पर भाजपा-रालोपा में तालमेल की घोषणा की थी.

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खींवसर सीट हनुमान बेनीवाल के 2019 में नागौर से लोकसभा सदस्य चुने जाने के बाद खाली हुई थी. पत्रकारों ने इस मौके पर उनसे एक दिन पहले दिए गए बयान का खुलासा करने के लिए कहा तो बेनीवाल ने तो इस पर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा कि आप समझे नहीं कि कल मैंने क्या कहा था. उन्होंने यह कह कर कि पिछले दस साल से उनकी राजे के साथ कोई बात नहीं हुई है, बयान की जैसे पुष्टि कर दी.

बेनीवाल ने कहा कि मेरे बयान को इस संदर्भ में देखा जाना चाहिए कि राजे और यूनुस खान सहित उनके समर्थकों ने मेरी उम्मीदवारी का विरोध किया था. लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा के साथ मेरा तालमेल हुआ था. इसमें राजे की कोई भूमिका नहीं थी. उन्होंने दावा किया कि मैं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए काम कर रहा हूं. मेरा लक्ष्य है कि प्रशासन का जो मॉडल मोदी ने लागू किया है, उसे पूरे देश में लागू होना चाहिए.

सूत्रों का कहना है कि इस मामले में भाजपा नेताओं, जिनमें राजे के समर्थक भी शामिल हैं, की चुप्पी को बेनीवाल के बयान का समर्थन माना जा रहा है. खींवसर सीट पर हनुमान बेनीवाल के भाई नारायण बेनीवाल का समर्थन भी भाजपा में वसुंधरा राजे का महत्व कम होने का संकेत है.

राजे के समर्थक एक भाजपा नेता ने पूरे घटनाक्रम को निराशाजनक बताया है. उन्होंने कहा कि बेनीवाल के बयान को लेकर शुरू हुए विवाद में कोई भी उलझना नहीं चाहता है. जब तक प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सतीश पूनिया की प्रतिक्रिया नहीं आती, तब तक कोई कुछ नहीं बोलेगा.वसुंधरा राजे ने अधिकृत तौर पर इस मामले में कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की है.

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हनुमान बेनीवाल ने 2009 में वसुंधरा राजे के साथ मतभेद होने के बाद भाजपा छोड़ दी थी. उन्होंने 2013 में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा और 2018 के विधानसभा चुनाव से दो माह पहले राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (रालोपा) नाम से अपनी नई पार्टी बना ली थी. भाजपा से जुड़े सूत्रों के मुताबिक लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा के राजस्थान प्रभारी प्रकाश जावड़ेकर ने बेनीवाल के साथ तालमेल की घोषणा से पहले राजे के साथ कोई सलाह-मशविरा नहीं किया था.

देश की चार विधानसभा सीटों पर उप चुनाव के नतीजे घोषित

चुनाव आयोग (Election Commission) में देश की चार विभिन्न विधानसभा चुनावों (By Election-2019) पर हुए उपचुनाव के नतीजे घोषित कर दिए हैं. इनमें त्रिपुरा की बधरगड और उत्तर प्रदेश की हमीरपुर सीटें भाजपा ने वापस जीत ली है. केरल की पाला सीट पर वामपंथी लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) ने जीती है, जबकि छत्तीसगढ़ की दंतेवाड़ा सीट कांग्रेस के खाते में चली गई है. त्रिपुरा और उप्र में भाजपा की सरकार है, छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार है और केरल में वामपंथी मोर्चे की सरकार है. तीनों राज्यों में सत्तारूढ़ पार्टियों ने उप चुनाव जीता है. केरल की पाला सीट पर हुए चुनाव में एक रिकार्ड टूटा है. यह सीट कांग्रेस समर्थित … Read more

देश में डर और हिंसा का माहौल बनाया जा रहा है: गहलोत

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) शुक्रवार को छत्तीसगढ़ (chhattisgarh) के रायपुर जिले के दौर पर रहे. यहां गोबरा नवापारा गांव में एक किसान सम्मेलन को संबोधित करते हुए गहलोत ने कहा कि केंद्र सरकार देश के लोगों को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) का भय दिखाकर जेल में डाल रही है. यही वजह है कि देश में डर और हिंसा का माहौल है. उन्होंने कहा कि ये लोकतंत्र और और लोकतंत्र में सरकारें आती जाती रहती हैं.

अशोक गहलोत ने कहा कि राजस्थान (Rajasthan) और छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) की राज्य सरकारें किसानों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध हैं. उन्होंने छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा किसानों के हित में लिए गए फैसलों की सराहना करते हुए कहा कि राजस्थान में भी हमारी सरकार तमाम वर्गों की बेहतरी के लिए काम कर रही है.

गहलोत ने देश की आर्थिक अर्थव्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि आर्थिक रूप से देशवासी दिक्कत में आ गए और सारे उद्योग-धंधे ठप हो रहे हैं. नौजवानों की नौकरी लगता तो दूर, लगी नौकरी भी जा रही है. राजस्थान मुख्यमंत्री (Rajasthan CM) ने कहा कि देश में 70 फीसदी आबादी नौजवानों की है और उन्हें नौकरी व रोजगार चाहिए, इसलिए देश में अब वहीं सरकारें चलेंगी जो नौजवानों का ख्याल रखेंगी. उन्होंने कहा कि यह सभी सरकारों का कर्तव्य है कि नौजवानों को कैसे अधिक से अधिक रोजगार के अवसर प्रदान किए जाएं.

इशारों-इशारों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए गहलोत ने कहा कि आज हम उपग्रह छोड़ रहे हैं, मंगल और चंद्रमा तक जा रहे हैं, ये जितने भी काम हुए हैं वे पिछले 70 साल में हुए हैं. पं.नेहरू और राजीव गांधी की सोच की वजह से हुए हैं. पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने पाकिस्तान के दो टुकड़े कर दिए लेकिन ये बात नई पीढ़ी को नहीं मालूम और कुछ लोग इसका दुरूपयोग कर रहे हैं. वे कहते हैं कि कांग्रेस ने कुछ नहीं किया. ऐसी बाते सत्तापक्ष और प्रधानमंत्रीजी को शोभा नहीं देता.

सेना के संबंध में भी गहलोत ने जमकर बोला. उन्होंने कहा कि आजादी के बाद से ही सेना का पराक्रम लगातार जारी रह है. चाहे पाकिस्तान या फिर चीन, सभी में सेना के जवानों ने दुश्मन को मुंह तोड़ जवाब दिया लेकिन इसका उपयोग राजनीति के लिए नहीं करना चाहिए.

इस मौके पर गहलोत ने छत्तीसगढ़ सकरार और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल (Bhupesh Baghel) की तारीफ करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री बघेल ने छत्तीसगढ़ में जो भी काम किए हैं वे देश के लिए प्रेरणादायक हैं. किसान सम्मेलन के दौरान छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, उनके मंत्रीमंडल के सदस्य और अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद रहे. इससे पहले यहां उन्होंने सुराजी गांव योजना के तहत ग्राम बनचरौदा में निर्मित आदर्श गौठान का अवलोकन किया. ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के इस मॉडल से गहलोत काफी प्रभावित दिखे.

राहुल गांधी ने कहीं राजनीति से संन्यास तो नहीं ले लिया?

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) इन लंबे समय से सियासी पटल पर नजर नहीं आ रहे हैं. लोकसभा चुनाव में हार के बाद वे ऐसे गायब हुए जैसे ओस की बूंद रोशनी पड़ते ही गायब हो जाती है. लोकसभा में भी वे ज्यादा नहीं दिखे. हां, वे दो बार अपने संसदीय क्षेत्र वायनाड जरूर गए थे और उसके बाद उनका नाम जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक (Satyapal Malik) से तीखी नोक-झोंक के चलते काफी उछला था. अब लंबे समय से वे कहीं भी नहीं दिख रहे. यहां तक की वे कांग्रेस पदाधिकारियों की बैठक तक में शामिल नहीं हुए. ऐसे में सत्ताधारी पक्ष तो छोडिए खुद की पार्टी तक में ये चर्चाएं गर्म है कि आखिर राहुल गांधी इन दिनों क्या कर रहे हैं? कहीं वे राजनीति की मोह माया से दूर होकर अखंड ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए सत्य का ज्ञान करने तो नहीं पहुंच गए.

प्रश्न बड़ा सरल सा है लेकिन जवाब उतना ही कठिन. पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के बाद उन्हें कांग्रेस कार्य समिति में बतौर सदस्य शामिल किया गया लेकिन कांग्रेस की अंतरिम राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) की बुलाई बैठक से भी राहुल गांधी नदारद रहे. यहां तक कि राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और डिप्टी सीएम सचिन पायलट के बीच सत्ता को लेकर चल रहे संकट में भी प्रियंका (Priyanka Gandhi) और सोनिया ने दोनों नेताओं से बात की जबकि इससे पहले राजस्थान (Rajasthan) और मध्यप्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) व कमलनाथ (Kamalnath) के बीच राहुल गांधी ने ही सुलह कराई थी. लेकिन इस बार वे बीच में आए ही नहीं.

संसद का सत्र भी इस बार काफी लंबा चला लेकिन उसमें भी राहुल गांधी की भागीदारी कम रही. संसद में कांग्रेसी खेमा उनके अनुच्छेद 370 पर बोलने का इंतजार करता रहा लेकिन उन्होंने चुप्पी साधे रखी. यहां तक की नेता प्रतिपक्ष की सीट भी अधीर रंजन चौधरी (Adhir Ranjan Choudhary) को संभाला दी गई है.

अब हरियाणा (Haryana) और महाराष्ट्र (Maharastra) में विधानसभा चुनाव सहित अन्य 17 राज्यों की 64 सीटों पर उपचुनाव का बिगुल बज गया है. तारीखें तय हो चुकी हैं और आचार संहिता लागू हो गई है. नेताओं की दावेदारी भी शुरू हो गई है. चुनाव होने में अब सिर्फ कुछ दिन बचे हैं लेकिन यहां भी राहुल गांधी की कोई सक्रियता नहीं दिख रही. अगले कुछ महीनों में झारखंड और दिल्ली में भी विधानसभा चुनाव होने हैं. आम तौर पर चुनाव से पहले ही राज्यों में नेताओं के दौरे शुरू हो जाते हैं. मोदी-शाह झारखंड और महाराष्ट्र में चुनावी रैलियां भी कर चुके हैं लेकिन पार्टी के स्टार प्रचारक होने के बावजूद राहुल गांधी अभी तक चुनावी माहौल से दूर हैं. यहां तक की राहुल गांधी सोशल मीडिया पर भी पहले की तरह एक्टिव नहीं हैं.

इस बात से भी सभी वाकिफ हैं कि खराब स्वास्थ्य की वजह से सोनिया गांधी प्रचार कार्यों में नहीं उतरेंगी. वहीं पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी ने अपने आपको उत्तर प्रदेश तक ही सीमित किया हुआ है. ऐसे में हरियाणा-महाराष्ट्र सहित अन्य दोनों राज्यों और उपचुनावों में प्रचार का मोर्चा राहुल गांधी को ही संभालना है. इसके बावजूद राहुल गांधी का कहीं कोई पता नहीं है. उनके न किसी राजनीतिक कार्यक्रम में शामिल होने खबर आ रही है, न ही किसी राज्य पर दौरे की और न ही विदेश दौरों की कोई खबर आ रही है.

कांग्रेस के प्रमुख नेताओं की इस मृतप्राय: सोच का फायदा सत्ताधारी पक्ष पूरी तरह से कैश कराने की जुगाड़ में लगा हुआ है. इन सभी बातों से बेखबर विपक्ष के नेताओं के साथ राहुल गांधी जम्मू कश्मीर दौरे से क्या लौटे, राजनीति के ‘मिस्टर इंडिया’ बन गए. हालांकि उन्हें जम्मू हवाई अडडे से ही वापिस लौटा दिया गया था. उड़ती-उड़ती खबर आ रही है कि महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर सोनिया-राहुल-प्रियंका पदयात्रा करने वाले हैं लेकिन इसकी अधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है.

अब हमारा प्रश्न फिर से वहीं आकर खड़ा हो गया है कि आखिर राहुल गांधी इन दिनों कर क्या रहे हैं? कांग्रेस के कई सीनियर नेताओं से संपर्क साधने का प्रयास हुआ लेकिन वहां से भी कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला. अब हमारे साथ-साथ कांग्रेस को भी इंतजार है कि आखिर कब टीम के कप्तान आकर मैदान पर खड़े होते हैं और अपनी फिल्डिंग सजाते हैं.

सिंधिया ने लिखा पीएम मोदी को पत्र, राहत पैकेज जल्द से जल्द मुहैया कराने की मांग

मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के प्रिय नेता और कांग्रेस के दिग्गज़ ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) ने हाल में प्रदेश के मालवा के नीमच-मंदसौर जिलों सहित चंबल के ग्वालियर, भिड़ और मुरैना में बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों का दौरा किया. यहां उन्होंने स्थानीय किसानों से वादा किया, ‘मैं सुख में आपके साथ रहूं या ना रहूं, दुःख में हमेशा साथ रहूंगा, किसान भाइयों चिंता मत करो आपकी लड़ाई लड़ रहा हूँ, मुआवजा दिलवाकर ही रहूंगा’.

भारी बारिश और बाढ़ के कारण मध्यप्रदेश में हुई भारी तबाही का मौका मुआयना करने के बाद कांग्रेस महासचिव और पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) का पत्र लिखकर राहत राशि स्वीकृत करने की मांग की है. सिंधिया ने लिखा है कि मेरे द्वारा बीते दिनों दस से ज्यादा बाढ़ प्रभावित जिलों में दौरा किया गया है, जहां भारी नुकसान हुआ है. लगातार हुई भारी बारिश से फसलें पुरी तरह से तबाह हो गई है, सड़कें बह गई है और भयंकर जन-धन हानि हुई है, कई स्कूलों, शासकीय भवनों-कार्यालयों, बिजली के खंभों, आंगनबाड़ी केन्द्रों को भी नुकसान पहुंचा है.

गौरतलब है कि सिंधिया ने पिछले दिनों मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के 10 बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया था. राज्य में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लेने के बाद कांग्रेस के दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने गुरुवार को प्रधानमंत्री मोदी को पत्र के जरिए प्रदेश के हालातों से अवगत कराया और केन्द्र से दी जाने सहायता राशि जल्द से जल्द मुहैया करवाने की अपील की है.

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पीएम मोदी (PM Modi) को लिखा है कि राज्य में इस तबाही से 596 और 1761 पशुओं की मौत हुई है, 67033 मकान क्षतिग्रस्त हो गए, 1361773 किसान बुरी तरह से प्रभावित हुए और करीब 14 लाख एकड़ की फसल बर्बाद हो गई. अनुमान लगाया जाए तो प्रदेश में 10 से 15 हजार करोड़ का नुकसान हुआ है. बीते दिनों केन्द्रीय सरकार का दल भी सर्वे के लिए पहुंचा था और जानकारी ली थी. वहीं प्रदेश की कमलनाथ सरकार ने भी सर्वे कर दस करोड़ की राहत राशि का प्रस्ताव केन्द्र सरकार के पास भेजा था.लेकिन अबतक राशि नहीं भेजी गई है, मेरी मांग है कि जल्द से जल्द केन्द्र राज्य सरकार को राहत राशि भेजे ताकि किसानों की मदद हो सके और उन्हें इस दुख की घड़ी से बाहर निकाला जा सके.

बड़ी खबर: इंदौर में क्या बोल गए ज्योतिरादित्य सिंधिया

बता दें, कांग्रेस के दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया पिछले कई दिनों से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के दौरे पर हैं. सिंधिया मंगलवार को मालवा के नीमच-मंदसौर जिले में बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों का दौर करने पहुंचे थे, इसके बाद बुधवार को उन्होंने चंबल के ग्वालियर, भिड़ और मुरैना का दौरा किया. सर्वे के दौरान उन्होंने केन्द्र और प्रदेश सरकार के प्रति नाराजगी भी जताई थी और सरकार से जल्द से जल्द मुआजवा देने की मांग की थी. हालांकि सरकार ने किसानों को आश्वासन दिया है कि वह अक्टूबर के मध्य तक सभी प्रभावितों को मुआवजा दे देगी.

जन्मदिन विशेष: एक ऐसे इंसान की कहानी जिसने विश्व आर्थिक मंदी में देश को संकट से उबारा

आमतौर पर चुप रहने वाले एक सिख प्रधानमंत्री ने देश को उस समय अपने दिमाग और अनुभव का परिचय दिया जब पूरी दुनिया आर्थिक मंदी की चपेट में थी. करोड़ों लोगों के अरबों रुपये डूब चुके थे. बड़े-बड़े अरबपति-खरबपति सड़कों पर आ गए थे. विश्व बैंक तक कंगाल हो गई थी. उस समय भारत जैसे बड़े देश में इस कंगाली का असर नाम मात्र का रहा. ऐसी दूरदर्शी सोच रखने वाले इंसान का नाम है डॉ.मनमोहन सिंह (Dr. Manmohan Singh) जो दो बार यूपीए सरकार में देश के प्रधानमंत्री बने. उनके बाद नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने भारतीय जनता पार्टी की तरफ से प्रधानमंत्री पद संभाला और 2019 में लगातार … Read more

चुनाव आयुक्त अशोक लवासा का परिवार आयकर विभाग के राडार पर

चुनाव आयुक्त अशोक लवासा (Ashok Lavasa) के परिवार के तीन सदस्यों के खिलाफ आयकर विभाग (Income tax department) ने जांच शुरू कर दी है. गौरतलब है कि अशोक लवासा तीन मुख्य चुनाव आयुक्तों में से एक हैं और पिछले लोकसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग की बैठकों में अपने मतभेद जाहिर करते रहे हैं. जब चुनाव आयोग ने नरेन्द्र मोदी (Narendra Modi) और अमित शाह (Amit Shah) को आचार संहिता उल्लंघन (Income tax act) के मामले में क्लीन चिट दी थी, उस समय लवासा ने विरोध किया था. जिन लोगों के खिलाफ जांच हो रही है, उनमें अशोक लवासा की पत्नी नोवेल सिंघल लवासा (Novel Singhal Lavasa) और उनकी बहन … Read more