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राहुल गांधी ने कहीं राजनीति से संन्यास तो नहीं ले लिया?

27 सितंबर 2019
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राहुल गांधी ने कहीं राजनीति से संन्यास तो नहीं ले लिया?

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) इन लंबे समय से सियासी पटल पर नजर नहीं आ रहे हैं. लोकसभा चुनाव में हार के बाद वे ऐसे गायब हुए जैसे ओस की बूंद रोशनी पड़ते ही गायब हो जाती है. लोकसभा में भी वे ज्यादा नहीं दिखे. हां, वे दो बार अपने संसदीय क्षेत्र वायनाड जरूर गए थे और उसके बाद उनका नाम जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक (Satyapal Malik) से तीखी नोक-झोंक के चलते काफी उछला था. अब लंबे समय से वे कहीं भी नहीं दिख रहे. यहां तक की वे कांग्रेस पदाधिकारियों की बैठक तक में शामिल नहीं हुए. ऐसे में सत्ताधारी पक्ष तो छोडिए खुद … Read more

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) इन लंबे समय से सियासी पटल पर नजर नहीं आ रहे हैं. लोकसभा चुनाव में हार के बाद वे ऐसे गायब हुए जैसे ओस की बूंद रोशनी पड़ते ही गायब हो जाती है. लोकसभा में भी वे ज्यादा नहीं दिखे. हां, वे दो बार अपने संसदीय क्षेत्र वायनाड जरूर गए थे और उसके बाद उनका नाम जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक (Satyapal Malik) से तीखी नोक-झोंक के चलते काफी उछला था. अब लंबे समय से वे कहीं भी नहीं दिख रहे. यहां तक की वे कांग्रेस पदाधिकारियों की बैठक तक में शामिल नहीं हुए. ऐसे में सत्ताधारी पक्ष तो छोडिए खुद की पार्टी तक में ये चर्चाएं गर्म है कि आखिर राहुल गांधी इन दिनों क्या कर रहे हैं? कहीं वे राजनीति की मोह माया से दूर होकर अखंड ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए सत्य का ज्ञान करने तो नहीं पहुंच गए.

प्रश्न बड़ा सरल सा है लेकिन जवाब उतना ही कठिन. पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के बाद उन्हें कांग्रेस कार्य समिति में बतौर सदस्य शामिल किया गया लेकिन कांग्रेस की अंतरिम राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) की बुलाई बैठक से भी राहुल गांधी नदारद रहे. यहां तक कि राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और डिप्टी सीएम सचिन पायलट के बीच सत्ता को लेकर चल रहे संकट में भी प्रियंका (Priyanka Gandhi) और सोनिया ने दोनों नेताओं से बात की जबकि इससे पहले राजस्थान (Rajasthan) और मध्यप्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) व कमलनाथ (Kamalnath) के बीच राहुल गांधी ने ही सुलह कराई थी. लेकिन इस बार वे बीच में आए ही नहीं.

संसद का सत्र भी इस बार काफी लंबा चला लेकिन उसमें भी राहुल गांधी की भागीदारी कम रही. संसद में कांग्रेसी खेमा उनके अनुच्छेद 370 पर बोलने का इंतजार करता रहा लेकिन उन्होंने चुप्पी साधे रखी. यहां तक की नेता प्रतिपक्ष की सीट भी अधीर रंजन चौधरी (Adhir Ranjan Choudhary) को संभाला दी गई है.

अब हरियाणा (Haryana) और महाराष्ट्र (Maharastra) में विधानसभा चुनाव सहित अन्य 17 राज्यों की 64 सीटों पर उपचुनाव का बिगुल बज गया है. तारीखें तय हो चुकी हैं और आचार संहिता लागू हो गई है. नेताओं की दावेदारी भी शुरू हो गई है. चुनाव होने में अब सिर्फ कुछ दिन बचे हैं लेकिन यहां भी राहुल गांधी की कोई सक्रियता नहीं दिख रही. अगले कुछ महीनों में झारखंड और दिल्ली में भी विधानसभा चुनाव होने हैं. आम तौर पर चुनाव से पहले ही राज्यों में नेताओं के दौरे शुरू हो जाते हैं. मोदी-शाह झारखंड और महाराष्ट्र में चुनावी रैलियां भी कर चुके हैं लेकिन पार्टी के स्टार प्रचारक होने के बावजूद राहुल गांधी अभी तक चुनावी माहौल से दूर हैं. यहां तक की राहुल गांधी सोशल मीडिया पर भी पहले की तरह एक्टिव नहीं हैं.

इस बात से भी सभी वाकिफ हैं कि खराब स्वास्थ्य की वजह से सोनिया गांधी प्रचार कार्यों में नहीं उतरेंगी. वहीं पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी ने अपने आपको उत्तर प्रदेश तक ही सीमित किया हुआ है. ऐसे में हरियाणा-महाराष्ट्र सहित अन्य दोनों राज्यों और उपचुनावों में प्रचार का मोर्चा राहुल गांधी को ही संभालना है. इसके बावजूद राहुल गांधी का कहीं कोई पता नहीं है. उनके न किसी राजनीतिक कार्यक्रम में शामिल होने खबर आ रही है, न ही किसी राज्य पर दौरे की और न ही विदेश दौरों की कोई खबर आ रही है.

कांग्रेस के प्रमुख नेताओं की इस मृतप्राय: सोच का फायदा सत्ताधारी पक्ष पूरी तरह से कैश कराने की जुगाड़ में लगा हुआ है. इन सभी बातों से बेखबर विपक्ष के नेताओं के साथ राहुल गांधी जम्मू कश्मीर दौरे से क्या लौटे, राजनीति के ‘मिस्टर इंडिया’ बन गए. हालांकि उन्हें जम्मू हवाई अडडे से ही वापिस लौटा दिया गया था. उड़ती-उड़ती खबर आ रही है कि महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर सोनिया-राहुल-प्रियंका पदयात्रा करने वाले हैं लेकिन इसकी अधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है.

अब हमारा प्रश्न फिर से वहीं आकर खड़ा हो गया है कि आखिर राहुल गांधी इन दिनों कर क्या रहे हैं? कांग्रेस के कई सीनियर नेताओं से संपर्क साधने का प्रयास हुआ लेकिन वहां से भी कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला. अब हमारे साथ-साथ कांग्रेस को भी इंतजार है कि आखिर कब टीम के कप्तान आकर मैदान पर खड़े होते हैं और अपनी फिल्डिंग सजाते हैं.

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