हरियाणा और महाराष्ट्र के चुनाव परिणाम भाजपा और मोदी जी को आइना दिखाने वाले: अशोक गहलोत

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने महाराष्ट्र एवं हरियाणा विधानसभा सहित कई राज्यों में हुए विधानसभा उपचुनावों के परिणामों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि कांग्रेस मुक्त भारत की बात करने वालों के लिए ये चुनाव परिणाम बहुत बड़ा झटका हैं. हरियाणा में जनता ने सत्तारूढ़ भाजपा के खिलाफ जनादेश दिया है और भाजपा के ‘अबकी बार 75 पार’ के नारे को नकार दिया है. वहीं महाराष्ट्र में भी भाजपा और उनके सहयोगी दलों की सीटें कम होना और कांग्रेस के प्रति विश्वास बढ़ने और पार्टी के लिए सकारात्मक संकेत है. मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि महाराष्ट्र और हरियाणा के चुनाव परिणाम भारतीय जनता पार्टी और … Read more

बेनिवाल ने राजे और युनुस खान पर लगाए गम्भीर आरोप, निकाय-पंचायत चुनाव में कांग्रेस का सूपड़ा साफ होने की कही बात

(RLP)

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. राजस्थान में खींवसर विधानसभा उपचुनाव के नतीजे आने के बाद राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के संयोजक हनुमान बेनीवाल ने पूर्व मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे और राजे सरकार में सड़क एवं परिवहन मंत्री रहे युनुस खान पर उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी की मदद करने के गम्भीर आरोप लगाते हुए भाजपा हाईकमान से कार्रवाई की मांग की है. बता दें, राजस्थान में 2 सीटों पर हुए उपचुनाव में मंडावा में कांग्रेस प्रत्याशी रीटा चौधरी ने भारी मतों से जीत दर्ज की है तो वहीं खींवसर में RLP के नारायण बेनिवाल ने कांटे की टक्कर में कांग्रेस प्रत्याशी हरेन्द्र मिर्धा को 4630 मतों से हराया है. आदरणीय @AmitShah जी @JPNadda जी @SatishPooniaBJP … Read more

स्वीकार है हार, खींवसर में RLP ने अपने दम पर की जीत दर्ज, मंडावा में हुआ विश्वासघात: पूनिया

Satish Poonia

राजस्थान की मंडावा और खींवसर सीट पर हुए विधानसभा उपचुनाव के गुरुवार को नतीजे आ गए. मंडावा में कांग्रेस की रीटा चौधरी ने पिछले विधानसभा चुनाव में पहली बार खिले ‘कमल’ को हटाते हुए जबरदस्त जीत हासिल की. वहीं खींवसर में भाजपा समर्थित राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के नारायण बेनीवाल ने अपने पहले ही चुनाव में हरेंद्र मिर्धा के सियासी वर्चस्व को परास्त कर जीत दर्ज की. उपचुनाव के परिणाम आने के बाद भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया (Satish Poonia) ने कहा कि 2 सीटों पर उपचुनाव में से भाजपा ने एक सीट गठबंधन के तहत RLP को दी थी. खींवसर में RLP पार्टी का अपना एक आधार था और भाजपा के … Read more

राजस्थान: उपचुनाव में दोनों सीटों पर BJP बुरी तरह से हारी, मंडावा में कांग्रेस तो खींवसर में RLP की हुई जीत

Narayan Beniwal Rita Choudhary

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. देश-प्रदेश में होने वाले चुनाव और अन्य राजनीति की खबरों पर सटीक नतीजे देने के बाद पॉलिटॉक्स की खबर पर एक बार फिर से मुहर लग गई है. राजस्थान विधानसभा उपचुनाव में मंडावा विधानसभा सीट पर कांग्रेस की रीटा चौधरी तो खींवसर में आरएलपी संयोजक हनुमान बेनीवाल के भाई नारायण बेनीवाल (Narayan Beniwal) ने जीत दर्ज कर ली है. वहीं दोनों सीटों पर भारतीय जनता पार्टी की बुरी तरह से हार हुई है. पॉलिटॉक्स ने अपनी पिछली खबरों में पहले ही इस बात का जिक्र कर दिया था कि मंडावा से रीटा चौधरी (Rita Choudhary) तो खींवसर से रालोपा के नारायण बेनिवाल को मिलेगी जीत. इससे पहले लगातार दो चुनाव हार चुकीं रीटा चौधरी के लिए मंडावा उपचुनाव करो या मरो की स्थिति जैसा था. लेकिन यहां रीटा ने भाजपा की सुशीला सींगड़ा को 33704 मतों से पटखनी देते हुए एक बार फिर से मंडावा में कांग्रेस को खड़ा कर दिया है. (Narayan Beniwal) (Rita Choudhary)

बड़ी खबर: स्वीकार है हार, खींवसर में RLP ने अपने दम पर की जीत दर्ज, मंडावा में हुआ विश्वासघात- पूनिया

वहीं खींवसर विधानसभा क्षेत्र के लिए हमने शुरू से बताया कि यह क्षेत्र हनुमान बेनीवाल का गढ़ माना जाता है. यहां से खींवसर हनुमान के भाई नारायण बेनीवाल (Narayan Beniwal) ने आरएलपी-भाजपा गठबंधन की लाज रखते हुए कांग्रेस के दिग्गज हरेंद्र मिर्धा को 4370 वोटों से हराया. एक समय सातवें राउण्ड तक की वोटिंग में हरेंद्र मिर्धा बेनीवाल से आगे चल रहे थे. उस समय ऐसा लगने लगा था कि दोनों सीटें कांग्रेस के पक्ष में आ जाएंगी. भाजपा के खेमे में उस समय सन्नाटा पसरा हुआ था लेकिन उसके बाद बेनीवाल ने बढ़त बनाना शुरू किया और लगातार बढ़त बनाते हुए हरेंद्र मिर्धा को पीछे छोड़ दिया.

हालांकि सत्ताधारी कांग्रेस के हाथ से दो में से एक सीट निकल गई लेकिन गुटों में बंटी कांग्रेस को इस जीत से हौंसला जरूर मिलेगा और आगामी निकाय चुनावों में कांग्रेस को इससे भारी फायदा होगा.

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बात करें मंडावा विधानसभा उपचुनाव की तो जैसा पॉलिटॉक्स ने शुरू से अपने दर्शकों को बताया कि मंडावा में सुशीला सींगड़ा को पार्टी की आंतरिक गुटबाजी का नुकसान उठाना पड़ेगा. इस सीट से विधायक रहे नरेंद्र खींचड़ के झुंझुनूं से सांसद बनने के बाद मंडावा सीट खाली हुई थी. नरेंद्र खींचड़ यहां से अपने सुपुत्र अतुल खींचड को लड़ाना चाहते थे, अधिकांश कार्यकर्ता इससे सहमत भी थे. राजेश बाबल व गिरधारीलाल के नाम भी पैनल में रखे गए थे लेकिन इसी बीच नामांकन के एक दिन पूर्व चंद घंटों पहले कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हुई सुशील सींगड़ा को उम्मीदवार बना दिया गया. पायलट प्रत्याशी को मैदान में उतारे जाने पर स्थानीय नेता अच्छे खासे नाराज थे. वहीं विधायक से सांसद बने नरेन्द कुमार यह कभी चाहेंगे कि भविष्य में मंडावा सीट पर खुद उनके या उनके परिवार की जगह किसी ओर का वर्चस्व कायम हो. बीजेपी कि इस आंतरिक कलह का बड़ा नुकसान सिंगड़ा को हुआ वहीं रीटा चौधरी ने यहां से भारी मतों से एक तरफा जीत हासिल की.

वहीं खींवसर में नारायण बेनीवाल (Narayan Beniwal) क्षेत्र में हनुमान बेनीवाल की पकड़ और आरएलपी के युवा मतदाताओं के दम पर अपनी लाज बचा पाए हैं. नारायण को हरेंद्र मिर्धा पर मिली सिर्फ 4370 वोट की लीड कांग्रेस के उम्दा प्रदर्शन की झलक दिखाती है. हरेंद्र मिर्धा ने इस क्षेत्र में विरोधी हवा के बीच जाकर हनुमान किले में फतेह करना कबूल किया लेकिन कुछ वोटों से पीछे रह गए. कुल मिलाकर कहा जाए तो वे किनारे पर आकर हार गए लेकिन टक्कर कांटे की रही.

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ऐसे में यह कहा जाना बिलकुल गलत नहीं होगा कि लोकसभा चुनाव में मिले भारी बहुमत और उसके बाद देश में बीजेपी द्वारा राष्ट्रीय मुद्दों पर लिए गए बड़े-बड़े निर्णयों के बाद भी राजस्थान विधानसभा उपचुनाव में खींवसर और मंडावा दोनों सीटों पर बीजेपी बुरी तरह चुनाव हार गई है. वहीं खींवसर में हनुमान बेनीवाल (RLP) और मंडावा में रीटा चौधरी ने जीत दर्ज की है.

राजस्थान: खींवसर-मंडावा सीटों पर उपचुनाव संपन्न, खींवसर में बेनीवाल तो मंडावा में रिटा चौधरी की जीत तय!

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. राजस्थान (Rajasthan) की मंडावा व खींवसर विधानसभा सीट पर उपचुनाव संपन्न हो चुके हैं. चुनावी परिणाम 24 अक्टूबर को आएंगे. सोमवार को हुए मतदान के दौरान मंडावा में 69.62 प्रतिशत और खींवसर में 62.61 प्रतिशत वोटिंग हुई. मंडावा में कांग्रेस की रीटा चौधरी (Rita Choudhary) और भाजपा की सुशीला सीगड़ा (Sushila Sirga) में कांटे की टक्कर है. खींवसर में हनुमान बेनीवाल के गढ़ में कांग्रेस के हरेंद्र मिर्धा (Harendra Mirdha) RLP के नारायण बेनीवाल (Narayan Beniwal) को चुनौती दे रहे हैं. हनुमान बेनीवाल के नागौर से और नरेंद्र खींचड़ के झुंझूनूं से सांसद बनने की वजह से क्रमश: खींवसर और मंडावा विधानसभा सीटें खाली हुई हैं. चारों प्रत्याशी अपनी अपनी जीत का दावा ठोक रहे हैं.

मंडावा विधानसभा सीट

मंडावा (Mandawa) में आजादी के बाद से अब तक हुए चुनावों में भाजपा सिर्फ एक बार 2018 में ही विधानसभा चुनाव जीती है. कांग्रेस की ओर से इस सीट पर विकास सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा है, लेकिन भाजपा द्वारा सत्ता का दुरूपयोग एवं कर्मचारियों के तबादलों जैसे मुददे पर सरकार को चुनाव प्रचार के दौरान घेरा गया. मंडावा में कुल 2 लाख 27 हजार 414 मतदाता है जिनमें पुरुष मतदाताओं की संख्या 1 लाख 17 हजार 742 है तो वहीं महिला मतदात 1 लाख 9 हजार 672 है. मंडावा इस उपचुनाव के लिए 259 मतदान केंद्रो पर मतदान किया गया.

मंडावा से भाजपा प्रत्याशी सुशीला सिंगडा तीन बार से प्रधान है, क्षेत्र में उनकी अच्छी पकड है वहीं पार्टी नेताओं व स्थानीय कार्यकर्ताओं में उनके लिए आक्रामक प्रचार किया है. वहीं सुशीला सिंगडा के सामने भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा भितरघात का खतरा भी है. पार्टी कार्यकर्ताओं में सिंगडा की इमेज पैराशूटर की भी है क्योंकि सिंगडा पहले कांग्रेस में थी और टिकट मिलने से महज डेड घंटे पहले ही वो भाजपा में शामिल हुई थी.

वहीं मंडावा से कांग्रेस प्रत्याशी रीटा चौधरी को प्रदेश में कांग्रेस की सरकार होने का फायदा मिल सकता है. साथ ही टिकट मिलते ही रीटा ने घर घर जाकर मतदाताओं से संपर्क बनाने में भी कामयाब रहीं है. रीटा ने पिछले तीन विधानसभा चुनाव मंडावा से लडे है इनमें 2008 का चुनाव रीटा ने जीता था तो वो वहीं 2013 के चुनाव में निर्दलीय के रूप में तो 2018 के चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर रीटा को हार का सामना करना पडा था. मंडावा विधानसभा क्षेत्र के मतदाताओं की सहानुभूति भी इस चुनाव में रीटा के साथ दिखाई दी तो वहीं भितरघात का संकट रीटा के साथ भी है. विधायक बृजेंद्र ओला व राजकुमार से उनकी अदावत किसी से छिपी नहीं है.

खींवसर विधानसभा सीट

खींवसर (Khivnsar) चुनाव में इस बार बेनीवाल व मिर्धा परिवार एक बार फिर से आमने सामने है. इससे पहले मूंडवा विधानसभा क्षेत्र से 1980 में बेनीवाल के पिता रामदेव को हरेंद्र मिर्धा ने हराया था. लेकिन 1985 में हुए अगले ​ही चुनाव में बेनीवाल के पिता रामदेव ने हरेंद्र मिर्धा को हराकर अपनी हार का ​बदला पूरा कर लिया था. 2008 में हुए परीसीमन में मूंडवा व नागौर से ही खींवसर सीट बनी ​थी. जिस पर 2008, 2013 व 2018 के चुनाव में हनुमान बेनीवाल ने जीत दर्ज की.

भाजपा समर्थित रालोपा के टिकट पर खींवसर से चुनाव लड रहे नारायण बेनीवाल प्रत्याशी के रूप में पहली बार चुनावी मैदान में थे. लेकिन चुनाव मैनेजमेंट का उनके पास अच्छा खासा अनुभव है. अपने बडे भाई व नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल के सभी चुनावों में मैनेजमेंट का सारा काम नारायण ने ही संभाला है इसलिए क्षेत्र के लोगों में उनकी अच्छी खासी पकड है. वहीं उनकी इमेज अपने बडे भाई के उलट एक साधारण व्यक्तित्व की है. वहीं परिवारवाद के ठप्पे का नुकसान नारायण को यहां झेलना पड सकता है तो भाजपा के मूल कार्यकर्ताओं की नाराजगी का नुकसान भी यहां नारायण को भारी पड सकता है.

वहीं कांग्रेस प्रत्याशी हरेंद्र मिर्धा को प्रदेश में कांग्रेस की सरकार होने का फायदा मिल सकता है तो उम्र का तगाजा होने के कारण व उनका आखिरी चुनाव होने के कारण उन्हे क्षेत्र के लोगों की सहानुभूति भी मिलती दिखाई दी तो चुनाव प्रचार के दौरान ज्यादा भागदौड नहीं करने का नुकसान भी यहां हरेंद्र मिर्धा को उठाना पड सकता है.

किसके पक्ष में परिणाम

बहरहाल मंडावा व खींवसर दोनों ही विधानसभा सीटों पर सभी उम्मीदवारों की किस्मत इवीएम में कैद हो गयी है. आने वाली 24 तारीख को ही पता चलेगा की ​मंडावा में कांग्रेस की परंपरागत उम्मीदवार रीटा चौधरी को या कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुई सुशीला सिंगडा में से किसको मंडावा की जनता ताज पहनाती है तो वहीं खींवसर में 34 साल पुरानी बेनीवाल के पिता रामदेव से मिली हार का बदला लेने में हरेंद्र मिर्धा कामयाब हों पायेंगे की नहीं जानना दिलचस्प होगा.

विधानसभा चुनाव-2019: महाराष्ट्र में सबसे अधिक और सबसे कम हुआ मतदान, उपचुनाव में अरूणाचल रहा अव्वल

Maharastra Election 2019

महाराष्ट्र (Maharastra) और हरियाणा में विधानसभा चुनाव और साथ में 17 राज्यों की 63 सीटों पर उपचुनाव सोमवार को संपन्न हो गए. नतीजों में केवल दो दिन का इंतजार है. भारतीय निर्वा​चन आयोग के आंकड़ों के अनुसार, महाराष्ट्र में सबसे अधिक वोटिंग प्रतिशत हुआ है और सबसे कम भी यहीं है. महाराष्ट्र (Maharastra) की करवीर विधानसभा सीट पर सबसे अधिक 79.19 फीसदी मतदान हुआ है. भौकर 78.11 फीसदी वोटिंग के साथ दूसरे और नेवासा 78 फीसदी मतदान के साथ तीसरे नंबर पर रहा. वहीं महाराष्ट्र (Maharashtra) के ही उल्लास नगर विधानसभा में सबसे कम वोटिंग हुई. यहां केवल 31.72 लोगों ने मतदान किया. सबसे कम मतदान वाले इलाकों में कल्याण … Read more

हरियाणा-महाराष्ट्र के विधानसभा सहित उपचुनाव के 63 प्रत्याशियों की तकदीर ईवीएम में हुई कैद

Haryana Election 2019

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. हरियाणा (Haryana Election 2019) की 90 और महाराष्ट्र की 288 विधानसभा सीटों के लिए मतदान की प्रक्रिया पूरी हो गई है. इस बार महाराष्ट्र में 55.33 फीसदी और हरियाणा में 61.62 फीसदी मतदान हुआ जो कि पिछले चुनाव के मुकाबले काफी कम है. 2014 के विधानसभा चुनाव में हरियाणा (Haryana) में 76 फीसदी तो महाराष्ट्र में 63.28 फीसदी वोटिंग हुई थी. वर्तमान में दोनों ही राज्यों में भाजपा सरकार काबिज है. 17 अन्य राज्यों की 64 सीटों पर उपचुनाव के लिए भी आज वोट पड़े. सभी प्रत्याशियों का भविष्य अब ईवीएम में कैद हो गया है जो कि 24 को घोषित किया जाएगा. हरियाणा विधानसभा (Haryana Election 2019) … Read more

‘इडियट’ का एक मतलब ये भी है कि जो आदमी वोट न दे: जावेद अख्तर

Javed Akhtar

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव (Maharashtra Election Poll) के लिए मुम्बई में अपने मत का प्रयोग करने के बाद मीडिया से बात करते हुए मशहूर संगीतकार जावेद अख्तर (Javed Akhtar) ने कहा कि ”इडियट’ का एक मतलब ये भी है कि जो आदमी वोट न दे’. बता दें, हरियाणा-महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव सहित अन्य 17 राज्यों की 64 सीटों पर उप चुनाव के लिए कुछ ही समय का मतदान बाकी है. शाम 6 बजे तक पोलिंग बूथ पर पहुंचने वाले वोटर का वोट डाला जायेगा. परिणाम 24 को आएगा. मुंबई में मतदान के दौरान कई सेलेब्स और जानी मानी हस्तियां वोट डालने वोटिंग बूथ पर पहुंची. यहां उन्होंने मीडिया … Read more

थमा चुनाव प्रचार का शोर, दो राज्यों में विधानसभा चुनाव सहित 17 राज्यों में होने हैं उपचुनाव

Haryana

महाराष्ट्र और हरियाणा (Haryana) में विधानसभा चुनाव के साथ 17 राज्यों में 64 सीटों पर उप चुनाव का चुनावी शोर आज शाम 5 बजे पूरी तरह थम गया. इसमें बिहार की एक लोकसभा सीट भी शामिल है. चुनाव आयोग के निर्देशों के अनुसार मतदान से 48 घंटे पहले ही सार्वजनिक स्थानों पर चुनाव प्रचार पर रोक लगा दी जाती है. ऐसे में चुनाव प्रचार के आखिरी दिन भाजपा व कांग्रेस सहित अन्य राजनीतिक दलों ने चुनावी प्रचार के दौरान पूरी ताकत झोंक दी. वोट 21 अक्टूबर को डाले जाएंगे. परिणाम 24 अक्टूबर को आएंगे. यह भी पढ़ें: नारायण राणे की वजह से महाराष्ट्र में भाजपा-शिवसेना हुई आमने-सामने महाराष्ट्र (Maharashtra) में … Read more

नारायण राणे की वजह से महाराष्ट्र में भाजपा-शिवसेना हुई आमने-सामने

Maharashtra

महाराष्ट्र (Maharashtra) में भाजपा-शिवसेना गठबंधन के तहत देवेंद्र फडनवीस के नेतृत्व में विधानसभा चुनाव लड़ रही हैं. भाजपा 150 तो शिवसेना 124 सीटों पर चुनावी दंगल में है. लेकिन प्रदेश के दो जिले ऐसे भी हैं जहां ये दोनों ही दल ताल ठोकते दिख रहे हैं. लेकिन ऐसा क्या हुआ कि दो सहयोगी आपस में परस्पर विरोधी हो गए, इसकी वजह है नारायण राणे. महाराष्ट्र (Maharashtra) के कोंकण के दो सागरतटीय जिलों सिंधुदुर्ग और रत्नागिरि में भाजपा की कमान नारायण राणे के हाथों में है जो शिवसेना को फूटी आंखों नहीं सुहाते. कभी शिवसेना की तरफ से मुख्यमंत्री रहे नारायण राणे 2005 में बेहतर भविष्य की तलाश में शिवसेना छोड़कर … Read more