बीजेपी और बजरंग दल पर दिए विवादित बयान से पलटे दिग्विजय सिंह, बजरंग दल ने दी चेतावनी

कांग्रेस (Congress) के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह (Digvijay singh) भारतीय जनता पार्टी (BJP) और बजरंग दल (Bajrang dal) को लेकर दिए अपने विवादित बयान से दिग्विजय सिंह चौतरफा आलोचना के बाद पलट गए हैं. अपने बयान पर सफाई देते हुए दिग्विजय सिंह ने ट्वीट किया कि, “कुछ चैनल चला रहे हैं कि मैंने भाजपा पर यह आरोप लगाया है कि वे आईएसआई (ISI) से पैसा ले कर पाकिस्तान के लिए जासूसी करते हैं. बजरंग दल व भाजपा के आईटी सेल के पदाधिकारी द्वारा आईएसआई से पैसे लेकर पाकिस्तान के लिए जासूसी करते हुए मध्य प्रदेश पुलिस ने पकड़ा है, यह पूरी तरह से गलत है.” कुछ चेनल चला रहे हैं … Read more

सिंधिया समर्थकों की इस्तीफे की धमकी के बीच सोनिया से मिले कमलनाथ, पर नहीं बनी बात

मध्यप्रदेश में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को लेकर उठा बवाल थमता नजर नहीं आ रहा है, प्रदेश के दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) की नाराजगी और उनके समर्थन में कार्यकर्ताओं की इस्तीफे की धमकी के बीच मुख्यमंत्री कमलनाथ ने शुक्रवार सुबह कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) से मुलाकात की. कमलनाथ (Kamalnath) और सोनिया गांधी के बीच चली आधे घंटे की मुलाकात के बाद कयास लगाए जा रहे थे कि पीसीसी चीफ का एलान हो जाएगा. लेकिन ऐसा नहीं हुआ, मुलाकात के बाद अब भी मप्र के नए पीसीसी चीफ को लेकर पेंच फंसा हुआ है. सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद सीएम कमलनाथ जब बाहर आए तो … Read more

हरियाणा में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से अशोक तंवर को हटाने की तैयारी

हरियाणा (Haryana) में विधानसभा चुनाव की तैयारी के मद्देनजर कांग्रेस ने पार्टी नेताओं के अंदरूनी मतभेद दूर करने के प्रयास शुरू कर दिए हैं. हरियाणा में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा (Bhupinder Singh Hooda) और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अशोक तंवर (Ashok Tanwar) के बीच भारी मतभेद चल रहे हैं. पांच साल पहले राहुल गांधी ने अशोक तंवर को हरियाणा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाया था. इन दिनों हुड्डा और तंवर के बीच भारी खींचतान चल रही है, जिससे विधानसभा चुनाव में पार्टी की संभावनाओं पर विपरीत असर पड़ सकता है. हुड्डा लंबे समय से अशोक तंवर को प्रदेशाध्यक्ष पद से हटाने की मांग कर रहे हैं.

कांग्रेस महासचिव हरियाणा के प्रभारी गुलाम नबी आजाद (Gulam Nabi Azad) ने हाल ही प्रदेश के प्रमुख नेताओं से बातचीत की है और सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) को भी परिस्थितियों से अवगत कराया है. इसके बाद तंवर को हटाने की संभावना मजबूत हो गई हैं. आजाद ने जिन नेताओं से विचार विमर्श किया है, उनमें हुड्डा और तंवर के अलावा कांग्रेस कार्यकारिणी सदस्य कुमारी शैलजा, विधायक दल की नेता किरण चौधरी, वरिष्ठ नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला (Randeep Singh Surjewala) और अजय यादव शामिल हैं. इन बैठकों को हरियाणा में नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है.

आजाद नए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को लेकर सभी गुटों में सहमति बनाने का प्रयास कर रहे हैं. कुमारी शैलजा के नाम पर सर्वसम्मति नजर आ रही है. कुमारी शैलजा (Kumari Selja) दलित नेता हैं और पार्टी में वरिष्ठ भी हैं. उनको प्रदेशाध्यक्ष बनाने से हरियाणा में पार्टी के अंदरूनी मतभेद दूर हो सकते हैं. शैलजा के अलावा रणदीप सिंह सुरजेवाला और अजय यादव भी प्रदेशाध्यक्ष बनने की दौड़ में शामिल हैं. अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी से जुड़े सूत्रों ने बताया कि फिलहाल कुमारी शैलजा का नाम तय नहीं हुआ है. भूपेन्द्र सिंह हुड्डा या उनके पुत्र दीपेन्द्र हुड्डा (Deependra Hooda) को भी प्रदेशाध्यक्ष बनाने पर विचार किया जा रहा है.

बड़ी खबर: हरियाणा चुनाव के मद्देनजर बीजेपी ने खेला बड़ा दांव

एक कयास यह भी है कि कांग्रेस हाईकमान भूपेन्द्र हुड्डा की पार्टी पर दबाव बनाने की नीति से खुश नहीं है. हाल ही में रोहतक की रैली में हुड्डा ने बगावती तेवर दिखाए थे, जिससे पार्टी हाईकमान सतर्क भी है. एक संभावना यह भी है कि हुड्डा को कांग्रेस विधायक दल का नेता बनाया जा सकता है, भले ही विधानसभा का कार्यकाल कुछ ही दिनों में समाप्त हो रहा हो. कांग्रेस हाईकमान का मानना है कि हुड्डा को महत्व देना जरूरी है, जिससे कि वह विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के प्रचार से पीछे न हटें.

सूत्रों ने बताया कि भूपेन्द्र सिंह हुड्डा को प्रदेशाध्यक्ष बनाए जाने की संभावना नहीं है, लेकिन प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) का पुनर्गठन किया जा सकता है. और प्रमुख नेताओं को सामूहिक जिम्मेदारी के आधार पर चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है. कांग्रेस हाईकमान को पूरा भरोसा है कि बगावती तेवर दिखाने के बावजूद हुड्डा कांग्रेस नहीं छोड़ेंगे.

सिंधिया समर्थकों की चेतावनी अगर 10 दिनों में पीसीसी अध्यक्ष नहीं बनाया तो देंगे इस्तीफा

सिंधिया समर्थकों की चेतावनी पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं मध्य प्रदेश कांग्रेस (Congress) के कद्दावर युवा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) के राजनीतिक भविष्य को लेकर उनके समर्थकों की नाराजगी बढ़ती जा रही है. समर्थकों का दबाव है कि सिंधिया को प्रदेश कांग्रेस संगठन की कमान सौंपी जाए. ज्‍योतिरादित्‍य को मध्‍यप्रदेश कांग्रेस अध्‍यक्ष (MP Congress President) बनाने की मांग करते हुए उनके समर्थकों ने चेतावनी तक दे डाली है कि यदि प्रदेश अध्‍यक्ष नहीं बनाए गए तो इस्‍तीफा दे देंगे.

ज्योतिरादित्य सिंधिया को पीसीसी चीफ (PCC Chief) बनाए जाने की मांग ने एक बार फिर से जोर पकड़ लिया है. मध्यप्रदेश में उनके समर्थक खुलकर समर्थन में उतर गए है और कमान सिंधिया को सौंपने की मांग पर अड़ गए है. दतिया जिला कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष अशोक दांगी बगदा ने इस्तीफा देते हुए हाईकमान को धमकी दी है कि अगर 10 दिन के अंदर ज्योतिरादित्य सिंधिया को प्रदेश अध्यक्ष की कमान नहीं सौंपी तो जिले के 500 सिंधिया समर्थक इस्तीफा देंगे. इस घटनाक्रम के बाद एक बार फिर कांग्रेस में घमासान मच गया है.

वहीं जिला कांग्रेस कमेटी मुरैना के अध्यक्ष राकेश मावई ने एलान किया है कि अगर ज्योतिरादित्य सिंधिया अध्यक्ष नहीं बने तो मुरैना की कार्यकारिणी सहित वे खुद भी इस्तीफा दे देंगे. यह मांग मावई ने सीधे सोनिया गांधी और राहुल गांधी से की है. मंगलवार को जबलपुर में भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सड़क पर उतरकर सिंधिया के पक्ष में प्रदर्शन किया.

कांग्रेस में ज्योतिरादित्य सिंधिया की भूमिका को लेकर अब उनके समर्थक चिंतित और परेशान होने लगे हैं. लोकसभा चुनाव से पहले जब प्रदेश अध्यक्ष का माहौल बना, तब उन्हें मध्य प्रदेश से हटाकर आधे उत्तर प्रदेश का प्रभारी बना दिया गया. उनके समर्थक सिंधिया की आम चुनाव में हुई हार के लिए इसी कारण को जिम्मेदार मानते हैं. समर्थकों का मानना है कि यदि सिंधिया मध्यप्रदेश में ही सक्रिय रहते तो न केवल खुद की, बल्कि आसपास की एक-दो सीटें और निकाल सकते थे.

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गौरतलब है कि लोकसभा में सिंधिया को प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi) के साथ उत्तरप्रदेश का चुनाव प्रभारी नियुक्त किया गया था और हाल ही में ज्योतिरादित्य सिंधिया को महाराष्ट्र में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिये बनी स्क्रीनिंग कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया है. इस पर सिंधिया समर्थकों की गहरी नाराजगी खुलकर सामने आ रही है. समर्थकों का कहना है कि अब जबकि राज्य में नए प्रदेश अध्यक्ष के चयन का वक्त आया तो उन्हें महाराष्ट्र विधानसभा के लिए बनी स्क्रीनिंग कमेटी का अध्यक्ष बनाकर महाराष्ट्र में उलझा दिया है.

सिंधिया समर्थक मंत्री इमरती देवी तो खुलकर मैदान में आ चुकी हैं, उनका कहना है कि सिंधिया को मप्र में ही कोई जिम्मेदारी दी जानी थी, महाराष्ट्र में कौन पूछ रहा है. बता दें, इससे पहले भी सिंधिया समर्थकों ने उनको मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री बनाने की मांग की थी. जबकि कुछ समर्थकों ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने की मांग को लेकर मध्यप्रदेश में पोस्टर भी लगवा दिए थे.

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मायावती एक बार फिर बनीं बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष, उपचुनाव के प्रत्याशियों के नामों पर लगी मुहर

बहुजन समाज पार्टी (Bahujan Samaj Party) की केंद्रीय कार्यकारिणी समिति की बुधवार को आयोजित बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री मायावती (Mayawati) को एक बार फिर पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष (National President) चुन लिया गया है. लखनऊ स्थित बसपा (BSP) कार्यालय में राष्ट्रीय स्तर की बैठक के दौरान देश भर से आये बसपा प्रतिनिधियों ने मायावती को राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना. बसपा सुप्रीमो मायावती अब नए सिरे से राष्ट्रीय कार्यकारिणी बाद में घोषित करेंगी. बैठक में यह तय किया गया कि बसपा विधानसभा उपचुनाव में सभी सीटों पर अपने प्रत्याशी खड़े करेगी.

बसपा की केन्दीय कार्यकारिणी समिति ने बैठक में यह भी तय किया कि बसपा उत्तर प्रदेश की सभी 13 सीटों पर विधानसभा उप चुनाव लड़ेगी. इसी के तहत बैठक उपचुनाव के प्रत्याशियों के नामों पर मुहर भी लगी. इसके साथ ही यह भी तय किया गया कि पार्टी दिल्‍ली, हरियाणा, महाराष्‍ट्र और झारखंड में होने वाले विधानसभा चुनावों में अपने प्रत्याशी उतारेगी.

बैठक में उत्तरप्रदेश (UttarPradesh) में 13 सीटों पर होने वाले विधानसभा उपचुनाव के प्रत्याशियों के नामों पर मुहर लगाते हुए घोषणा की – हमीरपुर-नौशाद अली, जैदपुर (बाराबंकी)-अखिलेश अम्बेडकर, मानिकपुर (चित्रकूट)- राज नारायण निराला, प्रतापगढ़-रणजीत सिंह पटेल, घोषी-कयूम अंसारी, बलहा (बहराइच)- रमेश गौतम, टुंडला-सुनील चित्तौर, रामपुर सदर-जुबेर अहमद, एगलस-अभय कुमार, लखनऊ कैंट -अरुण द्विवेदी, गोविंद नगर (कानपुर)- देवी प्रसाद तिवारी को चुनाव लड़ाया जाएगा वहीं जलालपुर और गंगोह के लिए प्रत्याशियों की घोषणा बाद में होगी.

गौरतलब है कि बसपा सुप्रीमो मायावती ने 28 अगस्त को जोनल व मंडल प्रभारियों की बैठक बुलाई थी. इसमें संगठन विस्तार और भाईचारा कमेटियों के गठन के बारे में चर्चा होनी थी. इसके साथ ही विधानसभा उप चुनाव की तैयारियों के बारे में भी समीक्षा होनी थी. बसपा सुप्रीमो ने उप चुनाव वाले क्षेत्रों में सबसे पहले विधानसभा, सेक्टर गठन के साथ ही भाईचारा कमेटी बनाने का निर्देश दिया है.

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साध्वी प्रज्ञा की Fear Files

अपने विवादित बयानों को लेकर हमेशा सुर्खियों में छाई रहने वाली भोपाल से भाजपा सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने एक और बेतुका बयान देकर विवाद खड़ा कर दिया है. साध्वी प्रज्ञा ने पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री बाबुलाल गौर को दी गई श्रद्धांजलि सभा मे टोने-टोटके जैसी बेतुकी बात की.

मोदी सरकार को मिला मायावती का साथ, सोशल मीडिया पर विपक्ष को बनाया निशाना

बसपा सुप्रीमो मायावती इन दिनों सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव हैं और करीब-करीब प्रत्येक घटनाक्रम पर अपने विचार प्रकट करती हैं. अपने ताजा बयानों में बहुजन समाज पार्टी की मुखिया ने मोदी सरकार के जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाने का समर्थन करते हुए विपक्ष पर निशाना साधा. साथ ही पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और अन्य पार्टी के नेताओं का बिना अनुमति कश्मीर दौर पर जाने को पूरी तरह अनुचित बताया. अपने अन्य ट्वीट में मायावती ने यूपी की बीएसपी को छोड़ सभी अन्य सरकारों पर कानून व्यवस्था को लेकर दुरूपयोग का आरोप लगाया. सोमवार सुबह एक के बाद एक ट्वीट करते हुए मायावती ने कहा कि जम्मू कश्मीर … Read more

सीएम की रैली में युवक का आत्मदाह का प्रयास, ‘जन उत्पीड़न बनी, जन आशीर्वाद यात्रा’- सुरजेवाला

सीएम खट्टर की रैली में युवक ने किया आत्मदाह का प्रयास, 'जन उत्पीड़न बनी, जन आशीर्वाद यात्रा'- सुरजेवाला

जन उत्पीड़न बनी हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की ‘जन आशीर्वाद यात्रा’ में एक युवक ने पेट्रोल छिड़क कर आत्मदाह का प्रयास किया. उस युवक को बचाने के प्रयास में चार लोग और झुलस गए. सभी घायलों को अस्पताल में भर्ती करवाया गया. वहीं, आग लगाने वाले व्यक्ति की हालत गंभीर है, उसे रोहतक के पीजीआई रैफर किया गया है. गौरतलब है कि हरियाणा में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर राज्य की सभी राजनीतिक पार्टियां अपनी- अपनी तैयारियों में जुट गईं हैं. अमित शाह के आहवान के बाद प्रदेश भाजपा भी अबकी बार 75 पार के साथ विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुट गई है. राज्य के सीएम … Read more

ज्योतिरादित्य बनेंगे मुख्यमंत्री! पिता की भूल सुधारेंगे सिंधिया?

ज्योतिरादित्य बनेंगे मुख्यमंत्री चाहे सफर राजाशाही से राजपथ तक का हो या फिर शाही सिंघासन से सियासत तक का, इस राह पर चलना आसान नहीं है. आजादी से लेकर अब तक कई राजवंशो ने राजनीति में आने की कोशिस की लेकिन कुछ को सफलता मिली और कुछ सियासत के दावपेंच में उलझकर रह गए और वापस अपने-अपने महलों की और लौट गए. लेकिन उनमें से एक राजवंश ऐसा भी है जिसकी कई पीढ़ियां आज भी राजनीति में अपना अलग मुकाम रखती हैं. जिनकी रग-रग में राजनीती बसती है. जिनके भाषण से जनता ख़ुशी से झूम उठती है और जिसकी तीन पीडियों ने अपने अपने तरीके से राजनीती को कुछ न कुछ दिया है.

पॉलिटॉक्स न्यूज़ के इस पहलु में हम आज बात कर रहे है सिंधिया परिवार की, ग्वालियर का ऐसा शाही परिवार जिसने आज़ादी के बाद अपने महलों में सिर्फ राजनीति को पनपने दिया. इसकी शुरुआत राजमाता विजयाराजे सिंधिया से हुई. ग्वालियर से लगातार आठ बार सांसद रही विजयाराजे सिंधिया का विवाह ग्वालियर के महाराजा जीवाजी राव सिंधिया से 21 फरवरी 1941 को हुआ था. पति के निधन के बाद वे राजनीति में सक्रिय हुई थी और 1957 से 1991 तक आठ बार ग्वालियर और गुना से सांसद रहीं. 25 जनवरी 2001 में उन्होंने अंतिम सांस लीं. विजयाराजे सिंधिया पहले कांग्रेस में थी लेकिन आपातकाल के बाद जब देशी रियासतों को समाप्त कर उनकी सम्पतियो को सरकारी घोषित कर दिया तब विजयाराजे सिंधिया कांग्रेस छोड़ जनसंघ में शामिल हो गईं.

जीवाजीराव और विजयाराजे सिंधिया की 4 बेटियां और एक पुत्र था. विजयाराजे सिंधिया की दो बड़ी बेटियों का राजनीती से कोई खासा लगाव नहीं था. तीसरे नम्बर के उनके बेटे माधवराव सिंधिया भी राजनीती से जुड़े हुए थे और वे लगातार9 बार सांसद रहे. उनकी चौथी बेटी वसुंधरा राजे भी राजनीती से जुडी हुई हैं और दो बार राजस्थान की मुख्यमंत्री रह चुकी हैं, फिलहाल बीजेपी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और झालावाड़ से विधायक हैं. उनकी 5वीं बेटी यशोधरा राजे भी राजनीती से जुडी हुई हैं, वे मध्यप्रदेश सरकार में मंत्री रह चुकी हैं और फिलहाल शिवपुरी से भाजपा विधायक हैं.

इस तरह राजमाता विजयाराजे के बाद उनके बेटे माधवराव सिंधिया ने भी सियासत में एंट्री की. माधवराव ने 1971 में जनसंघ के टिकट पर गुना से लोकसभा चुनाव लड़ा और कांग्रेस के प्रत्याशी को डेढ़ लाख वोटों के अंतर से पटखनी दी. इसके बाद उन्होंने 1977 के आम चुनाव में ग्वालियर लोकसभा सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ा और ऐतिहासिक जीत दर्ज की. 1979 में मोरारजी देसाई की सरकार गिर गई, जनवरी 1980 में देश में आम चुनाव का एलान हुआ. जनता पार्टी ने इंदिरा गांधी के खिलाफ राजमाता विजयाराजे को रायबरेली से चुनाव लड़वाने का एलान किया.

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दूसरी तरफ उस वक्त युवा सोच के माधवराव सिंधिया के कांग्रेस नेता संजय गांधी के साथ रिश्ते बेहतर हो रहे थे, तो उन्होंने अपनी मां विजयाराजे सिंधिया से इंदिरा गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ने का अपना फैसला बदलने के लिए कहा. लेकिन विजयाराजे नहीं मानी और यहीं से मां बेटे के रिश्ते में दरार आ गई. ये रार इतनी बढ़ी की उसी 1980 के चुनाव में माधवराव ने पूरी तरह से कांग्रेस का दामन थाम लिया और कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़कर उन्होंने बड़ी जीत दर्ज की. लेकिन दूसरी और विजयाराजे सिंधिया रायबरेली में इंदिरा गांधी से चुनाव हार गईं.

ठीक इसी वक्त देश की राजनीति में एक और नया मोड़ आया. 1980 में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का गठन हुआ. विजयाराजे सिंधिया जनसंघ के खंडहर पर खड़ी की गई इस नई-नवेली पार्टी की उपाध्यक्ष बनाई गईं. यहां से मां बेटे के रिश्ते में जो कड़वाहट पैदा हुई वो आजीवन बनी रही. यहां तक कि विजयाराजे सिंधिया अपने इकलौते बेटे माधवराव सिंधिया से इतनी खफा थीं कि उन्होंने 1985 में अपने हाथ से लिखी वसीयत में कह दिया था कि मेरा बेटा माधवराव सिंधिया मेरे अंतिम संस्कार में भी शामिल नहीं होगा. हालांकि 2001 में जब राजमाता का निधन हुआ तो मुखाग्नि माधवराव सिंधिया ने ही दी थी.

आपको बता दें, राजमाता विजयाराजे सिंधिया भी पहले कांग्रेस में ही थीं, लेकिन इंदिरा गांधी ने जब राजघरानों को ही खत्म कर दिया और संपत्तियों को सरकारी घोषित कर दिया तो उनकी इंदिरा गांधी से ठन गई थी. इसके बाद वे जनसंघ में शामिल हो गई थी. जब उनके बेटे माधवराव सिंधिया ने जनसंघ छोड़कर कांग्रेस का दामन थामा तो विजयाराजे अपने बेटे से काफी नाराज हो गई थीं. उस समय विजयाराजे ने कहा था कि इमरजेंसी के दौरान उनके बेटे के सामने पुलिस ने उन्हें लाठियों से पीटा था. उन्होंने अपने बेटे तक पर गिरफ्तार करवाने का आरोप लगाया था. दोनों में राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता बढ़ने लगी थी और पारिवारिक रिश्ते खत्म होने लग गए. इसी के चलते विजयाराजे ने ग्वालियर के जयविलास पैलेस में रहने के लिए लिए अपने ही बेटे माधवराव से किराया भी मांगा था. हालांकि एक रुपए प्रति का यह किराया प्रतिकात्मक रूप से लगाया गया था.

माधवराव सिंधिया लगातार 9 बार संसद रहे और कभी नहीं हारे. उन्होंने अपना पहला चुनाव जनसंघ की तरफ से गुना से लड़ा और जीत दर्ज की. आपातकाल हटने के बाद 1977 में हुए चुनाव में वे निर्दलीय खड़े हुए और जनता पार्टी की लहर होने के बावजूद उन्होंने जीत दर्ज की. 1980 में वे कांग्रेस में शामिल हुए और तीसरी बार जीत दर्ज की. 1984 में माधवराव सिंधिया ने गुना के बजाए ग्वालियर से चुनाव लड़ा. ग्वालियर से उनके सामने बीजेपी के दिग्गज नेता और पूर्व प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी चुनाव में खड़े थे. लेकिन यहाँ भी माधवराव सिंधिया ने भारी मतों से जीत जीत दर्ज की.

1 जनवरी 1971 को माधवराव सिंधिया के घर एक राजकुमार ने जन्म लिया. जिसका नाम ज्योतिरादित्य सिंधिया रखा गया. उन्होंने अपनी प्राथमिक शिक्षा दून स्कूल देहरादून से की और बाकि की पढाई के लिए वे हार्वर्ड यूनिवर्सिटी चले गए. ज्योतिरादित्य के राजनितिक करियर की शुरुआत 2001 में हुई. 30 सितम्बर 2001 को उनके पिता माधवराव सिंधिया की एक हवाई हादसे में मौत हो गयी. उनकी मौत के बाद गुना लोकसभा सीट खाली हो गई. 18 दिसंबर 2001 को ज्योतिरादित्य सिंधिया औपचारिक रूप से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए और अपने पिता के धर्मनिरपेक्ष, उदार और सामाजिक न्याय मूल्यों को बनाए रखने का संकल्प लिया.

19 जनवरी 2002 को 30 साल की उम्र में ज्योतिरादित्य ने कांग्रेस की तरफ से गुना सीट से अपना नामांकन भरा और पहली जीत हासिल की. मई 2004 में उन्हें फिर से चुना गया और उन्होंने गुना से जीत दर्ज की. 2007 में केंद्रीय मंत्रिपरिषद में संचार और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री के रूप में उनका कार्यकाल शानदार रहा. 2009 में लगातार तीसरे कार्यकाल के लिए फिर से ज्योतिरादित्य को चुना गया और चुनाव जीतकर वे केन्द्र सरकार में वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री बने. बाद में वह बिजली राज्य मंत्री भी रहे. 2014 से एक बार फिर ज्योतिरादित्य गुना से लोकसभा पहुंचे लेकिन इस बार केन्द्र में मोदी सरकार थी.

2019 के लोकसभा चुनाव में इतिहास बदल गया और पहली बार सिंधिया परिवार से ज्योतिरादित्य सिंधिया को हार का मुंह देखना पड़ा. इसके बाद सिंधिया के समर्थकों ने उन पर कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की मांग करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया. उनके समर्थक चाहते हैं कि या तो वो मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बनाये जाएं या कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष. अब चूंकि सोनिया गांधी को एक बार फिर से CWC की बैठक में सर्वसम्मति से कांग्रेस का अंतरिम अध्यक्ष चुन लिया गया है तो एक बार फिर से उनके समर्थकों ने उनके एमपी का मुख्यमंत्री बनाने का प्रेशर शुरू कर दिया है.

बड़ी खबर: – गहलोत और पायलट के बीच की खींचतान एक बार फिर उजागर

गौरतलब है कि कर्नाटक और गोवा के बाद भाजपा सुप्रीमो अमित शाह की नजर अब मध्य प्रदेश पर है. उधर शिवराज सिंह चौहान निर्दलीय विधायकों के साथ संपर्क बनाए हुए हैं. कमलनाथ सरकार को बमुश्किल बहुमत मिला हुआ है. ज्योतिरादित्य खेमा उपेक्षा से दुखी है और हाईकमान से लगातार शिकायत कर रहा है. ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक लगातार बैठकें कर रहे हैं. हाल ही में ज्योतिरादित्य ने दिल्ली में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से मुलाकात भी की थी. इसके बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि ज्योतिरादित्य को मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री बनाने के लिए अमित शाह सहयोग कर सकते हैं. वहीं सिंधिया की दूरभाष पर भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से हुई लम्बी वार्ता भी इस बात को हवा दे रही है.

खैर, 2002 से 2019 तक लगातार गुना सीट की नुमाइंदगी लोकसभा में ज्योतिरादित्य सिंधिया करते आए हैं. 2019 में यह पहला मौका है जब ज्योतिरादित्य सिंधिया की हार ने यह तय कर दिया की 1957 के बाद से पहली बार मध्यप्रदेश सिंधिया परिवार से कोई व्यक्ति संसद में नहीं पहुंचा है.

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