पटवारी का सिंधिया पर जबरदस्त हमला- ‘जनता के लिए सड़क पर उतरने वाले घर में छिपकर बैठे हैं’

Jitu Patwari Vs Jyotiraditya Scinda

PoliTalks.news/MP. बीजेपी के राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) पर कांग्रेस नेताओं की भड़ास अभी तक पूरी तरह से निकली नहीं है. यही वजह है कि रह रहकर एमपी कांग्रेस के नेता सिंधिया के खिलाफ अपने मन के गुबार निकालते रहते हैं. कमलनाथ सरकार में मंत्री रहे जीतू पटवारी (Jitu Patwari) ने एक बार फिर ज्योतिरादित्य सिंधिया पर जबरदस्त हमला बोलते हुए उन्हें आड़े हाथ लिया, साथ ही कहा कि जनता के लिए सड़क पर उतरने वाले अब घर पर छिपकर क्यों बैठे हैं. पटवारी ने सिंधिया के साथ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह पर भी निशाना साधा. एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए जीतू पटवारी ने सिंधिया पर तीखा वार … Read more

नागपंचमी पर ज्योतिरादित्य सिंधिया को बताया ‘नाग’, पूर्व पीसीसी चीफ ने शेयर की तस्वीर

नागपंचमी और ज्योतिरादित्य सिंधिया

PoliTalks.news/MP. आज नागपंचमी (Naag Panchami) है लेकिन मध्यप्रदेश के पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष अरुण सुभाषचंद्र यादव का मत सबसे अलग है. उन्होंने तो पूर्व कांग्रेसी नेता और वर्तमान बीजेपी सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया को ही ‘नाग’ बता दिया. बाकायदा फोटो पोस्ट करते हुए अरुण यादव ने ट्वीटर पर लिखा, ‘नागपंचमी की की शुभकामनाएं’. ये पोस्ट करते हुए अरुण यादव ने सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) के कांग्रेस छोड़कर जाने पर अपना पूरा गुबार निकाला है. सिंधिया मार्च में कांग्रेस छोड़ बीजेपी में शामिल हो गए थे. अपने साथ साथ सिंधिया कांग्रेस के 22 विधायकों को भी बीजेपी में ले गए और सत्ता की चाबी भी बीजेपी को संभलवा दी. 🐍#NaagPanchami pic.twitter.com/2G1tnHJ5Ji — Arun Subhashchandra … Read more

क्या हुआ जब राज्यसभा में आमने-सामने आए ‘राजा’ और ‘महाराजा’

Scindia And Digvijay Singh

PoliTalks.news. कभी लंबे समय तक एक दूसरे के सहयोगी रहे ‘राजा’ और ‘महाराजा’ आज एक दूसरे के विरोधी बनकर एक दूसरे के सामने खड़े थे. आंखों में एक दूसरे के लिए द्वेश लेकिन फिर भी सिर एक दूसरे के सम्मान में झुके हुए और हाथ नमस्कार की मुद्रा में जुडे हुए. कुछ ऐसा नजारा देखने को ​मिला आज राज्यसभा में, जहां ‘राजा’ यानि दिग्विजय सिंह और ‘महाराजा’ यानि ज्योतिरादित्य सिंधिया एक दूसरे के सामने अभिवादन की मुद्रा में खड़े थे. दोनों के पास कांग्रेस सांसद गुलाब नबी आजाद भी खड़े थे जो मानो दोनों के बीच पेंचअप कराने की कोशिश कर रहे हों. दरअसल दिग्गी राजा और ज्योतिरादित्य सिंधिया ने … Read more

महामंथन का पूरा ‘अमृत’ मिल गया सिंधिया को, शिवराज ही नहीं पूरी भाजपा को पीना पड़ सकता है ‘विष’

शिवराज सिंह चौहान के मंत्रीमंडल का विस्तार

Politalks.News/मध्यप्रदेश. मंथन पर मंथन और फिर महामंथन के बाद आखिरकार शिवराज सिंह चौहान के मंत्रीमंडल का विस्तार हो ही गया. तालियों की गड़गड़ाहट के बीच कांग्रेस से बीजेपी में आए ज्योतिरादित्य सिंधिया के 12 पूर्व विधायक मंत्री बने. इनमें से तीन कांग्रेस की पूर्ववर्ती कमलनाथ सरकार में भी मंत्री थे. बीजेपी के 16 विधायक मंत्री बने. मंत्रीमंडल की पूरी गणित देखें तो कांग्रेस से आए 22 में से 14 यानि आधे से भी अधिक बाजी मार ले गए. वहीं भाजपा के 107 विधायकों में से केवल 19 ही मंत्री बन पाए. अगर प्रतिशत की दृष्टि से देखें तो कांग्रेस से आए 60 प्रतिशत विधायक मंत्री बने. वहीं बीजेपी के 18 … Read more

एमपी में सिंधिया का कम होता प्रभाव बना बीजेपी की चिंता, कमलनाथ ने चुनाव के लिए कसी कमर

सिंधिया

पाॅलिटाॅक्स न्यूज/एमपी. साल 2020 मध्य प्रदेश की सियासत का बहुत रोचक साल रहने वाला है. बहुमत के साथ सत्ता में काबिज हुई कमलनाथ की सरकार बीजेपी के सियासी खेल के चलते 2020 की शुरूआती महीनों में ही धाराशाही हो गई. 15 साल बाद मध्य प्रदेश की सत्ता में लौटी कांग्रेस का गढ़ खुद कांग्रेसियों ने ही ढहा दिया. ग्वालियर खानदान के युवराज बीजेपी के साथ क्या गए कमलनाथ की सरकार ही चली गई. भाजपा के लिए तो सोने पर सुहागा वाली बात हो गई. सत्ता से दूर हुए शिवराज के सिर फिर से मुख्यमंत्री का ताज सज गया. भले ही यह जनादेश जनता का नहीं था लेकिन ज्योतिरादित्य सिंधिया की नाराजगी कांग्रेस और कमलनाथ दोनों को महंगी पड़ गई.

ज्योतिरादित्य सहित 22 विधायकों का विद्रोह कांग्रेस के लिए काला अध्याय बन गया. बीजेपी को बैठे बैठाए दिग्गज कांग्रेस नेता और कार्यकर्ताओं की फौज तो मिली ही, मुख्यमंत्री और सरकार पर भी भाजपा की सील लग गई. एमपी में सियासी ड्रामेबाजी के बीच कोरोना की भी एंट्री हो गई. सोशल डिस्टेंसिंग के साथ शिवराज सिंह ने चंद लोगों के बीच मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. शायद भाजपा में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा था, इसलिए मुख्यमंत्री बनने के बाद भी शिवराज सिंह के माथे पर चिंता की लकीरे साफ नजर आई जो अभी भी साफ नहीं हुई है.

जल्दी प्रदेश की 24 सीटों पर उपचुनाव के सर्वे रिपोर्ट शिवराज सिंह की नींद उड़ाने के लिए काफी है. इन सर्वे रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि जनता का मूड भाजपा के साथ नहीं है. जनता इस बात को महसूस कर रही है कि कमलनाथ और कांग्रेस के साथ अच्छा नहीं हुआ. इन सर्वे रिपोर्ट में ग्वालियर-चंबल इलाके की 16 सीटों पर दबदबा रखने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया का प्रभाव भी कम होता बताया जा रहा है. यानि की पहले कांग्रेस के लिए जनता से वोट मांगे. फिर कांग्रेस से किनारा कर भाजपा की सरकार बनाई गई. जनता इसे अपने साथ किए गए छल के रूप में देख और महसूस कर रही है.

ज्योतिरादित्य सिंधिया सहित 22 विधायकों के विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबला रोचक होना बताया जा रहा है. हालांकि चुनाव अगस्त या उसके बाद होने हैं लेकिन मध्य प्रदेश में सियासी पारा चढ़ हुआ है. कमलनाथ पूरी तरह आश्वस्त नजर आ रहे हैं और वो कहने से नहीं चूके कि जनता के साथ छल और कांग्रेस के साथ हुए विश्वासघात का जवाब उपचुनावों में जनता खुद देगी. इन सभी 22 सीटों के अलावा दो और सीटों पर चुनाव होने हैं. इसी के चलते भाजपा और कांग्रेस दोनों अपने राजनीतिक समीकरणों पर काम कर रही हैं.

उपचुनाव में कोरोना का प्रभाव पड़ना स्वभाविक

चुनाव पर कोरोना का प्रभाव भी पड़ने वाला है. कांग्रेस और दूसरे विपक्षी दल शिवराज सरकार को कोरोना की लड़ाई में पूरी तरह नाकाम बता रहे हैं. कांग्रेस का आरोप है कि शिवराजसिंह की सरकार ने जनता को उसके हाल पर छोड़ दिया है. संकट के इस समय में केंद्र और राज्य की सरकार ने लोगों को वो मदद नहीं पहुंचाई, जिसकी जनता का जरूरत है. उपचुनाव वाले क्षेत्रों में इस बात का जोर शोर से प्रचार किया जा रहा है.

पार्टी बदली तो ज्योतिरादित्य सिंधिया भी बदल गए

कांग्रेस में रहकर जितनी आजादी से ज्योतिरादित्य सिंधिया राजनीति कर रहे थे, अब भाजपा में आकर उन्हें कई नियमों और अनुशासन का पालन करना पड़ रहा है. कांग्रेस कार्यालयों सहित सड़कों पर ‘एमपी का मुख्यमंत्री कैसा हो, ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसा हो’ के नारों से पटे होर्डिंग बैनर अब नजर नहीं आते. ना ही कोई सिंधिया समर्थक उनको मुख्यमंत्री बनाने की मांग करता नजर आ रहा है. यह बदलाव साफ दिखाता है कि ज्योतिरादित्य कांग्रेस में जितने मुखर होकर राजनीति कर रहे थे, उतने मुखर वो अब नहीं रहे. राजनीतिक विशेषज्ञों का आंकलन है कि ज्योतिरादित्य भाजपा पर लगातार दबाव बनाने की राजनीति नहीं कर सकते.

बसपा लड़ी तो कांग्रेस को नुकसान

यूं तो बहुजन समाज पार्टी का मध्य प्रदेश में बहुत बड़ा प्रभाव नहीं है लेकिन ग्वालियर-चंबल की 16 सीटों के एससी एसटी वर्ग में बीएसपी की अच्छी पकड़ है. 2018 के चुनाव में बसपा ने इन क्षेत्रों में अपने प्रत्याशी नहीं उतारे थे, जिसका सीधा फायदा कांग्रेस के प्रत्याशियों को हुआ था. बाद में कमलनाथ सरकार को भी बीएसपी ने समर्थन दिया. लेकिन अब परिस्थितियां करवट ले चुकी है. बसपा ने सभी 24 सीटों पर चुनाव लड़ने का एलान कर दिया है. बसपा इन विधानसभा सीटों के लिए प्रत्याशियों के चयन में जुट गई है. भले ही बसपा के प्रत्याशियों को चुनाव में सीधी जीत न मिले लेकिन कांग्रेस को इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है. यानि की बसपा का 24 सीटों पर चुनाव लड़ने का निर्णय भाजपा का फायदा पहुंचाने वाला होगा.

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कमलनाथ ने संभाला उपचुनाव का मोर्चा

मध्य प्रदेश में विधानसभा उपचुनावों की तैयारियां शुरु हो चुकी है जिसके लिए पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कमर कस ली है. 24 सीटों पर होने वाले उपचुनावों के लिए उन्होंने एक कोर टीम का गठन किया है. ये टीम उप चुनाव को किस तरह से लड़ा जाए, इसके लिए रणनीति बनाएगी. कमलनाथ की कोर टीम शिवराज सरकार की नाकामियों को जनता के बीच लेकर जाएगी. कांग्रेस ने कोरोना के बढ़ते संक्रमण और बढ़ते अपराध को भी मुद्दा बनाने का फैसला किया है.

ग्वालियर-चंबल इलाके की 16 सीटें ही तय करेंगी प्रदेश में बीजेपी-कांग्रेस का क्या होगा सियासी भविष्य?

कमलनाथ-सिंधिया-शिवराज

पॉलिटॉक्स न्यूज़/एमपी. मध्यप्रदेश में 24 विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव में कांग्रेस से बागी होकर बीजेपी में गए ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रभुत्व वाली ग्वालियर चंबल इलाके की 16 सीटें ही तय करेंगी कि प्रदेश में बीजेपी और कांग्रेस का सियासी भविष्य क्या होगा? क्या शिवराज सिंह का ताज बचा रहेगा या जैसा कि कांग्रेस ने दावा किया हुआ है कि इस बार 15 अगस्त को झंडा तो कमलनाथ ही फहराएंगे? मध्यप्रदेश के राजनीतिक समीकरण में ग्वालियर-चंबल इलाके में जीत दर्ज करने वाले को सत्ता की चाभी मिलना तय माना जाता है. यही वजह है कि ग्वालियर-चंबल की 16 विधानसभा सीटें बीजेपी और कांग्रेस के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन … Read more

सिंधिया ने बोला केंद्र सरकार पर धावा, कहा- अच्छे दिन अब हो गए कच्चे

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. मध्यप्रदेश कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) ने ​मोदीजी के अच्छे दिन अब कच्चे हो गए हैं. सिंधिया भारत बचाओ में बोल रहे थे. उन्होंने एक शेर सुनाते हुए अपनी भावनाओं का इजहार करते हुए कहा, ‘तुम्हारी फाइलों में गांव का मौसम गुलाबी है, मगर ये आंकड़े झूठे हैं दावा किताबी है, देश का अन्नदाता पेड़ों से लटककर सो रहा है, अच्छे दिन के सपने देख बस राह देख रहा है’.

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भारत बचाओ रैली में जमकर दहाड़े राहुल गांधी

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित भारत बचाओ रैली में राहुल गांधी (Rahul Gandhi Delhi) जमकर दहाड़े. उन्होंने सत्ताधारी पक्ष पर हमला करते हुए कहा कि देश को दबाया जा रहा है लेकिन कांग्रेस कभी नहीं डरती है. कांग्रेस का कार्यकर्ता किसी से नहीं डरता और एक इंच पीछे नहीं हटता है और देश के लिए जान देने के लिए तैयार रहता है क्योंकि हर कांग्रेसी बब्बर शेर होता है. उन्होंने (Rahul Gandhi Delhi) सरकारी कर्मचारियों और मीडिया से कहा-आप डरें नहीं, कांग्रेस आपके साथ है.

भारत बचाओ रैली में मोदी सरकार पर बरसे दिग्गज़, कहा – देश को राहुल गांधी और उनके नेतृत्व की जरूरत

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी के आव्हान पर शनिवार को दिल्ली के रामलीला मैदान में भारत बचाओ रैली (Bharat Bachao Rally) का आयोजन हुआ. दो घंटे चली इस जनरैली में कांग्रेस के दिग्गजों ने केंद्र की मोदी सरकार की जनविरोधी नीतियों पर जमकर हमला बोला. इस रैली में सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी सहित देश के कई दिग्गज़ कांग्रेसी नेताओं ने मंच को संबोधित किया. कई नेताओं ने इशारों इशारों में राहुल गांधी की ताजपोशी करने की बात भी जाहिर की. रणदीप सिंह सुरजेवाला ने मंच का संचालन किया. यह भी पढ़ें: रैली में बोलीं प्रियंका आज जो नहीं लड़ेगा वो इतिहास में कायर कहलायेगा, सिंधिया … Read more

भारत बचाओ रैली पर बीजेपी का पलटवार, पूनिया ने बताया ‘कांग्रेस बचाओ रैली’ तो राठौड़ बोले कांग्रेस का फ्लॉप शो

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. केन्द्र सरकार के खिलाफ कांग्रेस की दिल्ली में आयोजित ‘भारत बचाओ’ रैली पर कटाक्ष करते हुए राजस्थान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने कहा कि कांग्रेस की भारत बचाओ रैली भारत बचाओ नहीं, कांग्रेस बचाओ रैली है (Congress flop show). कांग्रेस ने 55 साल तक देश पर शासन किया, अब कांग्रेस का वजूद उन्हें खतरे में नजर आ रहा है, इसलिए अपने आपको बचाने का कांग्रेस प्रयास कर रही है. यह गांधी बचाओ रैली है, क्योंकि कांग्रेस गांधी परिवार के पीछे जीवित है और उन्हीं के नाम से वोट मांगती रही है. वहीं विधानसभा में उप नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर सरकारी मशीनरी … Read more