बसपा विधायकों के कांग्रेस में शामिल होने के बाद अब गहलोत और पायलट में बढ़ेगी रार

राजस्थान (Rajasthan) में बहुजन समाज पार्टी (BSP) के छह विधायकों के कांग्रेस में शामिल होने के बाद उप मुख्यमंत्री एवं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट (Sachin Pilot) ने कहा है कि वे बगैर किसी शर्त, प्रलोभन या लोभ-लालच के कांग्रेस में शामिल हुए हैं तो उनका स्वागत है. इससे किसी को परेशानी नहीं होनी चाहिए. मीडिया से बातचीत में पायलट ने अपनी इस बात को 3 से 4 बार दोहराया. बसपा विधायकों के पार्ट बदलने के बाद से ही जो मंत्रिमंडल विस्तार-फेरबदल और राजनीतिक नियुक्तियों अटकलें शुरू हो गई है, उसके बीच पायलट का यह बयान अतिमहत्वपूर्ण है. राजनीतिक नियुक्तियों के संदर्भ में पायलट ने साफ तौर पर कहा है … Read more

राजस्थान में राजनीतिक नियुक्तियों को था बसपा विधायकों का इंतजार!

राजस्थान (Rajasthan) में बहुजन समाज पार्टी (BSP) के छह विधायक बगैर किसी दबाव या प्रलोभन के कांग्रेस में शामिल हो गए हैं, ऐसा मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) का कहना है. बहरहाल राज्य के सभी BSP विधायकों ने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर ली और अब मंत्रिमंडल के विस्तार और फेरबदल की अटकलें जोर पकड़ रही हैं. समझा जाता है कि पार्टी बदलने वाले विधायकों को इसमें पुरस्कृत किया जाएगा. मंत्रिमंडल विस्तार में सात-आठ नए मंत्री बन सकते हैं. इनमें बसपा विधायकों और निर्दलीयों को जगह मिल सकती है. लगता है पिछले 8-9 महीनों से प्रदेश में इन राजनीतिक नियुक्तियों को भी बसपा के उक्त विधायकों का ही इंतजार था. उक्त सभी पूर्व बसपा विधायकों ने सत्ताधारी सरकार को समर्थन दे रखा था. फेरबदल के तहत दो-तीन मंत्री हटाए जा सकते हैं और कुछ मंत्रियों के विभाग बदले जा सकते हैं.

लगता है दस साल पहले का घटनाक्रम दोहराया जा रहा है. उस समय भी गहलोत सरकार का बहुमत सुनिश्चित करने के लिए बसपा के छह विधायक कांग्रेस में शामिल हो गए थे. उनमें से तीन को मंत्री और तीन को संसदीय सचिव बनाया गया था. इस बार जो विधायक कांग्रेस में शामिल हुए हैं, उनको विभिन्न निगमों, बोर्डों का अध्यक्ष भी बनाया जा सकता है. फिलहाल 12 निर्दलीय विधायक भी गहलोत सरकार को समर्थन दे रहे हैं. इनमें से दो विधायकों को मंत्री बनाए जाने की संभावना है. सूत्रों के मुताबिक मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं.

मौजूदा सरकार में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) सहित 15 कैबिनेट और 10 राज्यमंत्री हैं. सरकार में मंत्री और संसदीय सचिवों की अधिकतम संख्या 30 हो सकती हैं. इसका मतलब यह कि पांच पद खाली हैं. उनको भरा जाएगा. इसके साथ ही दो-तीन मंत्रियों से इस्तीफा लेकर उनकी जगह अन्य विधायकों को मंत्री बनाया जाएगा. इस तरह सात-आठ नए मंत्री बनने की संभावना है. मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल के साथ ही विभिन्न निगम, आयोग और बोर्डों में भी नियुक्तियां शुरू हो जाएंगी. समझा जाता है कि ये नियुक्तियां बसपा विधायकों के कांग्रेस में प्रवेश के इंतजार में रुकी हुई थी.

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मंत्रिमंडल विस्तार-फेरबदल की संभावना के बीच कई वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं की धड़कनें बढ़ गई हैं. वे मंत्री बनने की संभावनाएं देखने लगे हैं. ऐसे नेताओं ने गहलोत और पायलट के पास चक्कर लगाने शुरू कर दिए हैं. कुछ कांग्रेस नेता यह मानते हैं कि बसपा से आए विधायकों को ज्यादा तवज्जो मिलेगी. समर्पित कांग्रेस विधायकों की उपेक्षा करते हुए उन्हें ही मंत्री बनाया जाएगा. जिन दो-तीन मंत्रियों से इस्तीफे लिए जाएंगे, उनमें जयपुर और भरतपुर संभाग के विधायक शामिल हो सकते हैं.

जो बसपा विधायक कांग्रेस में शामिल हुए हैं, वे अपने विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस के उम्मीदवारों को हराकर चुनाव जीते हैं. वे हारे हुए उम्मीदवार क्षेत्र में कांग्रेस की कमान संभाले हुए हैं. ऐसे कांग्रेस नेताओं को मौजूदा घटनाक्रम से निराशा हो रही है. माना जा रहा है कि इन क्षेत्रों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं का उत्साह कम हो जाएगा.

गौरतलब है कि बसपा प्रमुख मायावती (Mayawati) ने अपनी पार्टी के विधायकों के दलबदल के बाद लगातार तीन ट्वीट किए. एक ट्वीट में उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी राजस्थान में कांग्रेस सरकार को पहले ही बिना शर्त दे रही थी. इसके बावजूद कांग्रेस ने बसपा विधायकों को तोड. इस तरह कांग्रेस ने एक बार फिर धोखेबाज पार्टी होने का प्रमाण दिया है. यह बसपा मूवमेंट के साथ विश्वासघात है. दूसरे ट्वीट में मायावती ने लिखा है कि कांग्रेस अपनी कटु विरोधी पार्टी/संगठनों से लड़ने के बजाय हर जगह उन पार्टियों को ही सदा आघात पहुंचाने काम करती है जो उन्हें सहयोग/समर्थन देते हैं. कांग्रेस इस प्रकार एससी, एसटी, ओबीसी विरोधी पार्टी है. तीसरे ट्वीट में उन्होंने लिखा है, कांग्रेस हमेशा ही अंबेडकर विरोधी रही. इसी कारण अंबेडकर को देश के पहले कानून मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था. कांग्रेस ने उन्हें न तो कभी लोकसभा में चुनकर जाने दिया और न ही भारत रत्न से सम्मानित किया. जो अति दुखद एवं शर्मनाक है.

इस पर मायावती के ट्वीट के जवाब में गहलोत ने छह ट्वीट किए. पहले-दूसरे ट्वीट में लिखा, बसपा विधायकों ने स्टेबल गवर्नमेंट की सोच से फैसला किया. मैं स्वागत करता हूं. तीसरा ट्वीट था, मायावतीजी का ऐसा रिएक्शन स्वाभाविक है… परंतु उनको यह भी समझना पड़ेगा कि यह सरकार में बैठे हुए लोगों ने मैनेज नहीं किया है. कोई प्रलोभन नहीं दिया है. गहलोत ने चौथे ट्वीट में लिखा, पहले भी हम लोग सरकार में थे, तब भी बीएसपी 6 लोग साथ आए थे. आज तक हमने कभी किसी को प्रलोभऩ नहीं दिया है. पांचवां ट्वीट था, हमने उन पर दबाव नहीं बनाया, उसके बाद फैसला होना स्वाभाविक फैसला है. छठा ट्वीट था, देश में जब कभी एलायंस हुआ है तो हम उन लोगों में हैं जो सोनिया गांधी, राहुलजी की भावना को समझते हुए हमेशा मायावतीजी के साथ में खड़े मिले हैं….इस बात वे स्वयं मेरे बारे में जानती हैं.

RCA अध्यक्ष पद की दौड़ में अब डूडी आये खुलकर सामने

राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) में अध्यक्ष पद के लिए मचे बवाल के बीच अब रामेश्वर डूडी (Rameshwar Dudi) खुलकर सामने आ गये हैं. डूडी ने कहा है कि, “अगर जिला संघ चाहेंगे तो लड़ूंगा अध्यक्ष का चुनाव, फिर चाहे सामने कोई भी हो”. अपने इस बयान से रामेश्वर डूडी ने सीधे-सीधे मुख्यमंत्री के पुत्र वैभव गहलोत को चुनौती दी है. क्योंकि RCA में अध्यक्ष पद के लिए अभी तक वैभव गहलोत के अलावा किसी ओर का नाम सामने नहीं आया है.

गौरतलब है कि हाल ही में RCA सचिव आरएस नांदू की मदद से नागौर जिला क्रिकेट संघ के अध्यक्ष चुने जाने के बाद पहली बार जब रामेश्वर डूडी जयपुर आरसीए कार्यालय पहुँचे थे तब पत्रकारों से बातचीत में डूडी ने कहा था कि, “अगर वैभव गहलोत (Vaibhav Gehlot) RCA में आते हैं तो निर्विरोध कार्यकारिणी चुनी जाएगी.” साथ ही डूडी ने कहा था कि, “ललित मोदी का राजस्थान में कोई पट्टा नहीं है. जोशीजी सीनियर लीडर हैं, आरसीए उनके नेतृत्व में काम करेगा”. लेकिन रामेश्वर डूडी के आरसीए अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ने के उक्त ताजा बयान के बाद यह बात विचारणीय है कि आखिर कांग्रेस के दिग्गज नेता डूडी की कौनसी बात पर अपनी ही प्रदेश सरकार के आला नेताओं से सहमति नहीं बन पाई है. यहां हमारा इशारा खींवसर विधानसभा सीट के लिए होने उपचुनाव से है.

पूर्व नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी से जब पूछा गया कि आप नागौर जिला क्रिकेट संघ के अध्यक्ष हैं और इस जिले की कार्यकारिणी को बीसीसीआई की शर्त के अनुसार आईपीएल के पूर्व चेयरमैन ललित मोदी के कारण मौजूदा विधानसभा अध्यक्ष और आरसीए अध्यक्ष सीपी जोशी गुट ने सस्पैंड कर रखा है, ऐसे में आप चुनाव कैसे लड़ सकते हैं? इस पर डूडी ने अपने तल्ख अंदाज में कहा कि, “बीसीसीआई या जोशी कब तक ललित मोदी-ललित मोदी गाते रहेंगे, ललित मोदी करीब दो साल पहले ही क्रिकेट से खुद को अलग कर चुके हैं. अब मोदी न तो नागौर जिला क्रिकेट संघ से जुड़े हैं और न ही किसी अन्य क्लब से, इससे संबंधित कागजात आरसीए को उपलब्ध कराए जा चुके हैं.”

यह भी पढ़ें: वैभव को निर्विरोध RCA अध्यक्ष बनाने की मुहिम को झटका, चुनाव तिथि पर सस्पेंस बरकरार

बता दें, मुख्यमंत्री गहलोत की अपने पुत्र वैभव गहलोत को आरसीए का निर्विरोध अध्यक्ष बनवाने की मंशा पर बीते रविवार को ही संकट के बादल मंडरा गए थे. वैभव के राजसमंद जिला क्रिकेट संघ के कोषाध्यक्ष बनने पर सीपी जोशी गुट द्वारा आयोजित लंच पार्टी में 5 जिला संघों के सचिवों सहित कुछ पदाधिकारियों का न पहुंचना इस बात का साफ संकेत था की वैभव के RCA अध्यक्ष बनने की राह उतनी आसान नहीं है जितनी गहलोत और जोशी ने सोची थी. अब इस पर कांग्रेस के ही दिग्गज नेता रामेश्वर डूडी का उक्त बयान मुख्यमंत्री गहलोत के मंसूबो पर पूरी तरह पानी फेरने जैसा है.

मीडिया के सवाल पर रामेश्वर डूडी ने साफ कहा कि जरूरत पड़ी और जिला क्रिकेट संघ ने कहा तो मैं चुनाव जरूर लडूंगा, फिर सामने चाहे कोई भी हो. डूडी ने ये बयान देकर ये तो साफ कर दिया है कि उनके सामने कोई भी हो, वे पीछे हटने वाले नहीं हैं. बता दें, वर्तमान में डूडी नागौर जिला क्रिकेट संघ के अध्यक्ष हैं जिसे आरसीए अध्यक्ष सीपी जोशी ने सस्पैंड कर रखा है.

जैसा कि विदित है कि आरसीए चुनाव की दो-दो तारीखें सामने आ रही हैं. चुनाव अधिकारी टी.एस.कृष्णामूर्ति ने बीसीसीआई की डेडलाइन 28 सितम्बर को ध्यान में रखते हुए एक दिन पहले 27 सितम्बर को आरसीए का चुनाव कराने की घोषणा कर दी है. दूसरी ओर, आरसीए के वर्तमान अध्यक्ष सीपी जोशी ने 4 अक्टूबर को चुनाव कराने की घोषणा की है. ऐसे में एक बार फिर आरसीए में विवाद की स्थिति बन गयी है. हालांकि फाइनल फैसला चुनाव अधिकारी को करना है. ऐसे में 27 सितम्बर को चुनाव होने की संभावना अधिक है, अगर ऐसा होता है तो वैभव गहलोत स्वतः ही अध्यक्ष पद की रेस से बाहर हो जाएंगे.

वहीं सीपी जोशी की तय तारीख 4 अक्टूबर को भी अगर चुनाव होते हैं, तो भी रामेश्वर डूडी को मनाए बिना वैभव गहलोत का आरसीए अध्यक्ष बनना नामुमकिन ही है, और रामेश्वर डूडी को किस तरह मनाया जाएगा यह तस्वीर आने वाले दिनों में साफ होगी.

मायावती के ‘धोखेबाज पार्टी’ वाले ट्वीट पर गहलोत का पलटवार

BSP विधायकों के कांग्रेस में विलय पर मायावती (Mayawati) को जवाब देते हुए राजस्थान (Rajasthan) के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने कहा कि हमने कभी हॉर्स ट्रेडिंग नहीं की. उक्त सभी विधायकों ने राज्य में एक स्थिर सरकार की चाहत रखते हुए राजस्थान कांग्रेस (Rajasthan Congress) में शामिल होने का फैसला किया है. उन्हें कोई प्रलोभन नहीं दिया गया है.

सीएम गहलोत ने कहा कि मैं मायावती जी का रिएक्शन समझ सकता हूं जो स्वाभाविक भी है. लेकिन उनको भी यह समझना पड़ेगा कि यह सरकार में बैठे हुए लोगों ने मैनेज नहीं किया है, कोई प्रलोभन नहीं दिया है. यह हमारे प्रदेश की खूबी है कि हमने कभी हॉर्स ट्रेडिंग नहीं की.

गहलोत ने कहा कि पिछली सरकार में 6 बीएसपी विधायकों ने कांग्रेस ज्वॉइन की थी. आज तक इतिहास में हमने कभी किसी को प्रलोभन नहीं दिया है यह कोई कम बात है क्या? उन्होंने कहा कि अगर ऐसी स्थिति किसी अन्य राज्यों में होती तो बड़े रूप में हॉर्स ट्रेडिंग होती.

उन्होंने कहा कि विधायकों ने राजस्थान की स्थिति और भावनाएं देखते हुए सोच समझकर ये फैसला लिया है. हमने उन पर कोई दबाव नहीं बनाया.

वहीं बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर ट्वीट करते हुए कांग्रेस को गैर भरोसेमंद और धोखेबाज पार्टी बताया. मायावती ने कहा कि कांग्रेस ने दूसरी बार उनके साथ विश्वासघात किया है वो भी उस समय जब बीएसपी कांग्रेस सरकार को बाहर से बिना शर्त समर्थन दे रही थी.

उन्होंने इस मुद्दे को जातिगत मोड़ते हुए कहा कि कांग्रेस दलित विरोधी पार्टी है तथा इन वर्गों के आरक्षण के हक के प्रति कभी गंभीर व ईमानदार नहीं रही है. मायावती ने कांग्रेस पर संविधान निर्माता डॉ.भीमराव अंबेडकर की विचारधारा विरोधी होने का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस ने उन्हें न तो कभी लोकसभा में चुनकर जाने दिया और न ही भारतरत्न से सम्मानित किया. ये अति-दुःखद व शर्मनाक है.

गौरतलब है कि राजस्थान में बसपा के 6 विधायकों ने सोमवार देर रात मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मिलकर कांग्रेस में शामिल होने की इच्छा व्यक्त करते हुए विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी को विलय पत्र पेश किया. इसके बाद राजेन्द्र गुढा (विधायक, उदयपुरवाटी), जोगेंद्र सिंह अवाना (विधायक, नदबई), वाजिब अली (विधायक, नगर), लाखन सिंह मीणा (विधायक, करोली), संदीप यादव (विधायक, तिजारा) और बसपा विधायक दीपचंद खेरिया ने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की. इसके बाद कांग्रेस के पास विधानसभा में स्वयं का पूर्ण बहुमत हो गया है. इससे पहले उनके पास 100 सीटें थीं जो बढ़कर 106 हो गई हैं.

कांग्रेस की पिछली सत्ता में भी कमोबेश यही स्थिति थी जब 2008 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 96 सीटें ही मिलीं थी. बाहरी विधायकों के समर्थन से अशोक गहलोत ने सरकार तो बना ली लेकिन अल्प बहुमत के चलते सरकार पर हमेशा सत्ता परिवर्तन की तलवार लटकी रहती थी. उस समय भी तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अप्रैल, 2009 में बसपा के सभी छह विधायकों को कांग्रेस में शामिल कर पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया और कांग्रेस के सदस्यों की संख्या 102 हो गई.

वीडियो खबर: बसपा विधायकों के कांग्रेस में शामिल होने पर क्या बोले पायलट

राजस्थान (Rajasthan) के डिप्टी सीएम सचिन पायलट (Sachin Pilot) ने BSP के 6 विधायकों के प्रदेश कांग्रेस में शामिल होने पर कहा कि मैं तहे दिल से उनका स्वागत करता हूं. इससे कांग्रेस सरकार (Rajasthan Congress) और मजबूत होगी. उन्होंने कहा कि सभी बसपा विधायक बिना लोभ और लालच के कांग्रेस में शामिल हुए हैं.

वीडियो खबर: अब नहीं होगा राजस्थान में बीजेपी का ऑपरेशन लोट्स

कर्नाटक और गोवा के बाद कयास यही लग रहे थे कि BJP का ‘ऑपरेशन लोट्स’ (Operation lots) का अगला शिकार राजस्थान की कांग्रेस सरकार हो सकती है. लेकिन यहां ‘जादूगर गहलोत’ ने इस संदेह को पूरी तरह से खत्म कर दिया. यहां प्रदेश के बहुजन समाज पार्टी (BSP) के सभी छह विधायक कांग्रेस में शामिल हो गये जिससे न केवल बीजेपी बल्कि बसपा सुप्रीमो मायावती (Mayawati) को बड़ा झटका लगा है.

राजस्थान में बढ़ा गहलोत सरकार का बहुमत, बसपा के सभी छह विधायक हुए कांग्रेस में शामिल

राजस्थान (Rajasthan) में हुए एक बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के बाद अब अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) सरकार का बहुमत ओर अधिक मजबूत हो गया है. प्रदेश के बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के सभी छह विधायक कांग्रेस (Congress) में शामिल हो गये हैं. बसपा (BSP) विधायकों के कांग्रेस में शामिल होने से बसपा सुप्रीमो मायावती (Mayawati) को बड़ा झटका लगा है. राजस्थान विधानसभा (Rajasthan Assembly) में कांग्रेस के सदस्यों की संख्या जहां पहले 100 सदस्यों की थी अब वो 106 हो गई है.

राजस्थान में सोमवार देर रात बहुजन समाज पार्टी के सभी छह विधायक कांग्रेस में शामिल हो गए. सभी बसपा विधायकों ने कांग्रेस की सदस्यता लेने के बाद रात 10:30 बजे विधानसभा पहुंच कर अध्यक्ष सीपी जोशी को विलय पत्र सौंपा. इनमें राजेन्द्र गुढा (विधायक, उदयपुरवाटी), जोगेंद्र सिंह अवाना (विधायक, नदबई), वाजिब अली (विधायक, नगर), लाखन सिंह मीणा (विधायक, करोली), संदीप यादव (विधायक, तिजारा) और बसपा विधायक दीपचंद खेरिया हैं जिन्होंने कांग्रेस की सदस्यता ली.

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अभी तक ये सभी बसपा विधायक कांग्रेस को बाहर से समर्थन दे रहे थे. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि राज्य हित में हमने फैसला किया है कि बहुजन समाज पार्टी के सभी 6 विधायकों को कांग्रेस में शामिल कर लिया जाए. इस विलय के बाद अब कांग्रेस की सरकार बहुमत से छह विधायक ज्यादा हो गई है. जहां पहले कांग्रेस के पास 100 सीटें थीं अब वो बढ़कर 106 हो गई हैं.

राजस्थान विधानसभा चुनाव 2018 में कांग्रेस को बहुमत नहीं मिला था. वह 200 विधानसभा सीटों में से 99 पर आकर रुक गई थी, मगर उपचुनाव में 100 का आंकड़ा छुआ था. अब तक सरकार पर तलवार लटकती रहती थी, मगर अब बहुजन समाज पार्टी के सभी 6 विधायकों को कांग्रेस में शामिल कर अशोक गहलोत ने राजस्थान में अपनी स्थिति मजबूत कर ली है.

गौरतलब है कि 2008 के विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस को 96 सीटें ही मिलीं थी जिससे सरकार पर सत्ता परिवर्तन की तलवार लटकी रहती थी. ऐसे में उस समय भी तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अप्रैल 2009 में बसपा के सभी छह विधायकों को कांग्रेस में शामिल कर पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया था और कांग्रेस के सदस्यों की संख्या 102 हो गई थी.

वैभव को निर्विरोध RCA अध्यक्ष बनाने की मुहिम को झटका, चुनाव तिथि पर सस्पेंस बरकरार

येन-केन प्रकारेण मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) के पुत्र वैभव गहलोत (Vaibhav Gehlot) को निर्विरोध RCA का अध्यक्ष बनाने की सीपी जोशी (CP Joshi) की मुहिम को झटका लगा है. हुआ यूं कि वैभव गहलोत के राजसमन्द जिला क्रिकेट एसोसिएशन का कोषाध्यक्ष बनने पर लंच पार्टी के बहाने समस्त जिला कार्यकारिणी और उनके पदाधिकारियों को रविवार को जयपुर बुलाया गया था, जिससे वैभव गहलोत को निर्विरोध RCA अध्यक्ष बनाने पर सहमति बनाई जा सके. लेकिन जोशी की इस लंच डिप्लोमेसी में पांच जिला कार्यकारिणी के सचिव अनुपस्थित रहे, इसके बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि RCA को नया अध्यक्ष चुनाव के माध्यम से ही मिलेगा. उधर आरसीए के वर्तमान … Read more

वैभव गहलोत को आरसीए अध्यक्ष बनने से रोकने की नाकाम कोशिश!

वैभव गहलोत (Vaibhav Gehlot) के राजसमंद जिला क्रिकेट एसोसिएशन (Rajsamand District Cricket Association) के कोषाध्यक्ष चुने जाने के बाद उन्हें राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) अध्यक्ष बनाने के लिए दावपेच शुरू हो गए हैं. सीपी जोशी लंबे समय से आरसीए अध्यक्ष बने हुए हैं और अब वह पद छोड़ने वाले हैं. उनके हटने के बाद वैभव गहलोत को आरसीए अध्यक्ष (RCA President) बनाने की तैयारियां जोरों पर है. दावपेच शुरू हो गए हैं. आरसीए में दो गुट बने हुए हैं. एक गुट पूर्व आरसीए अध्यक्ष ललित मोदी का समर्थक है और दूसरा गुट सीपी जोशी के साथ है. भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने RCA से 7 सितंबर को प्रतिबंध हटाया … Read more