‘क्या यूपी के हाथी इतने बेअक्ल होते है?’

जयपुर में बसपा के प्रदेश पार्टी मुख्यालय पर मंगलवार को हुआ घटनाक्रम आज सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है. सभी सोशल मीडिया पर ये घटनाक्रम ही चर्चा का विषय बना रहा. हुआ कुछ यूं कि प्रदेश की गहलोत सरकार में 6 बसपा विधायकों के शामिल हो जाने का दंश मायावती अब तक नहीं भूल पाई है. बीते दिनों बसपा कार्यालय में बसपा नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच लात घूंसे चलते के बाद उन्होंने प्रदेश कार्यकारिणी भंग कर दी. इसी संबंध में आज फिर प्रदेश कार्यालय में पार्टी के नेशनल कोऑर्डिनेटर रामजी गौतम और राज्य इकाई के प्रभारी सीताराम के साथ दो पदाधिकारी भी पहुंचे. उनके यहां पहुंचते ही … Read more

बसपा नेताओं को गधे पर बैठाया, पहनाई जूतों की माला

BSP Leaders

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. जयपुर में बहुजन समाज पार्टी मुख्यालय पर मंगलवार सुबह पार्टी के कार्यकर्ताओं ने टिकट वितरण में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए पार्टी के नेशनल कोऑर्डिनेटर रामजी गौतम और राज्य इकाई के प्रभारी सीताराम के चेहरे पर काली स्याही पोत उन्हें जूतों की माला पहना दी. कार्यकर्ताओं का आक्रोश यहीं नहीं थमा. उन्होंने दोनों नेताओं को गधे पर जबरन बैठाकर गलियों में घुमाया. उत्तरप्रदेश से जयपुर पहुंचे दो अन्य पार्टी पदाधिकारियों के खिलाफ भी कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी की. राजस्थान में अपनी पार्टी के नेताओं साथ हुए इस घटनाक्रम का जब बसपा सुप्रीमो मायावती को पता चला तो उन्होंने इस पूरे मामले में कांग्रेस पर जमकर भड़ास निकाली. बसपा … Read more

‘इडियट’ का एक मतलब ये भी है कि जो आदमी वोट न दे: जावेद अख्तर

Javed Akhtar

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव (Maharashtra Election Poll) के लिए मुम्बई में अपने मत का प्रयोग करने के बाद मीडिया से बात करते हुए मशहूर संगीतकार जावेद अख्तर (Javed Akhtar) ने कहा कि ”इडियट’ का एक मतलब ये भी है कि जो आदमी वोट न दे’. बता दें, हरियाणा-महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव सहित अन्य 17 राज्यों की 64 सीटों पर उप चुनाव के लिए कुछ ही समय का मतदान बाकी है. शाम 6 बजे तक पोलिंग बूथ पर पहुंचने वाले वोटर का वोट डाला जायेगा. परिणाम 24 को आएगा. मुंबई में मतदान के दौरान कई सेलेब्स और जानी मानी हस्तियां वोट डालने वोटिंग बूथ पर पहुंची. यहां उन्होंने मीडिया … Read more

यूपी: थमा चुनावी शोर, 24 को होगा एलान, कौन बनेगा गोविन्द नगर का शेर और कौन होंगे ढेर?

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. महाराष्ट्र और हरियाणा में विधानसभा चुनाव के साथ 17 राज्यों में होने वाले 64 सीटों पर उप चुनाव का चुनावी शोर शनिवार शाम 5 बजे से पूरी तरह थम गया है, इसमें बिहार की एक लोकसभा सीट भी शामिल है. उत्तरप्रदेश की 11 सीटों पर उपचुनाव होने हैं, ऐसे में कौन बनेगा गोविन्द नगर का शेर, कौन होंगे ढेर?, चुनाव प्रचार का शोर थमते ही, सोमवार को गोविन्द नगर विधानसभा के होने वाले उप चुनाव से पहले, यही सवाल हर किसी के मन में चल रहा है. उत्तरप्रदेश के गोविन्द नगर की जनता के उपचुनाव के भारी उत्साह और प्रत्याशियों के धुआंधार प्रचार ने यहां के चुनावी मौसम … Read more

नारायण राणे की वजह से महाराष्ट्र में भाजपा-शिवसेना हुई आमने-सामने

Maharashtra

महाराष्ट्र (Maharashtra) में भाजपा-शिवसेना गठबंधन के तहत देवेंद्र फडनवीस के नेतृत्व में विधानसभा चुनाव लड़ रही हैं. भाजपा 150 तो शिवसेना 124 सीटों पर चुनावी दंगल में है. लेकिन प्रदेश के दो जिले ऐसे भी हैं जहां ये दोनों ही दल ताल ठोकते दिख रहे हैं. लेकिन ऐसा क्या हुआ कि दो सहयोगी आपस में परस्पर विरोधी हो गए, इसकी वजह है नारायण राणे. महाराष्ट्र (Maharashtra) के कोंकण के दो सागरतटीय जिलों सिंधुदुर्ग और रत्नागिरि में भाजपा की कमान नारायण राणे के हाथों में है जो शिवसेना को फूटी आंखों नहीं सुहाते. कभी शिवसेना की तरफ से मुख्यमंत्री रहे नारायण राणे 2005 में बेहतर भविष्य की तलाश में शिवसेना छोड़कर … Read more

महाराष्ट्र में कारगर होगी भाजपा के निशान पर सहयोगी पार्टियों को लड़ाने की रणनीति?

Partner Parties Maharashtra BJP

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव (Maharashtra) में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने सहयोगी पार्टियों (Partner Parties) के साथ तालमेल बनाने का एक नया फार्मूला बनाया है. इस फार्मूले के तहत सहयोगी पार्टियां भाजपा के निशान पर चुनाव मैदान में उतरेंगी. ऐसा ही कुछ भाजपा ने दिल्ली में खाली हुई राजौरी सीट पर सहयोगी अकाली दल के साथ किया. यहां अकाली दल के नेता मनजिंदर सिंह सिरसा गठबंधन में तो थे लेकिन लड़े भाजपा के कमल के निशान पर और ​जीतने के बाद भाजपा विधायक बन गए. ऐसा ही कुछ भाजपा महाराष्ट्र में 21 अक्टूबर को होने वाले विधानसभा चुनाव में करने जा रही है.

महाराष्ट्र (Maharashtra) में बीजेपी 150 सीटों पर चुनाव लड़ रही है. 124 सीटों पर शिवसेना और अन्य 14 सीटें अन्य तीन छोटी सहयोगी पार्टियों (Partner Parties) के लिए छोड़ी है. अब भाजपा (BJP) के नए फार्मूले के अनुसार ये सभी 14 उम्मीदवार अपनी पार्टी के नहीं बल्कि मोदी लहर का फायदा उठाने के लिए बीजेपी के निशान पर चुनाव लड़ रहे हैं. हालांकि ये सभी नेता अपनी पार्टियों के लिए हैं लेकिन इनमें से जो भी जीतकर विधानसभा पहुंचेगा, विधायक भाजपा का ही कहलाएगा.

यह भी पढ़ें:- भाजपा के चाणक्य और वरिष्ठ रणनीतिकार अमित शाह का एक और पराक्रम

अब देखा जाए तो महाराष्ट्र (Maharashtra) में भाजपा 150 पर नहीं बल्कि 164 सीटों पर चुनाव लड़ रही है क्योंकि निशान तो ‘कमल’ ही है. इस फार्मूले से भाजपा को फायदा ये होगा कि अगर बीजेपी के 164 में से अधिकतर विधायक जीतकर सदन में पहुंचते हैं तो अकेले सरकार बनाने के पार्टी के प्रयासों को बल मिलेगा.

दूसरी ओर, सहयोगी पार्टी (Partner Parties) के वे नेता जो समर्पित तो अपनी पार्टी के लिए हैं लेकिन चुनाव भाजपा के लिए लड़ रहे हैं, जीतने के बाद उनकी पार्टी से अलग होना मुश्किल होगा. वो इसलिए कि समय पड़ने पर अगर कोई भी टकराव की स्थिति आती है तो उनके पास भाजपा में जाने या फिर विधानसभा से इस्तीफा देने के अलावा कोई अन्य विकल्प न होगा. अगर वे भाजपा में शामिल होते हैं तो ठीक. अगर इस्तीफा देते हैं तो उस सीट पर फिर से चुनाव होगा और फिर से चुनावी रण में उतरना कितना मुश्किल होगा, इसका उन्हें भली भांति अंदाजा होगा.

भाजपा का ये नया फार्मूला न केवल एकदलीय सरकार बनाने की दिशा में एक नया कदम है, बल्कि छोटे छोटे सहयोगी दलों को खत्म करने जैसा भी है. कर्नाटक में कुछ ऐसा देखने को मिला जहां 16 विधायकों ने विधानसभा से इस्तीफा दिया और बीजेपी को वहां एक दलीय सरकार बनाने का मौका मिला. गोवा में भी ऐसा ही हुआ जहां कांग्रेस के 10 विधायक प्रदेश भाजपा (BJP) में शामिल हो गए और वहां भी एक दलीय सरकार बन गई. राजस्थान भी इससे अछूता नहीं है. यहां गहलोत सरकार ने बसपा के 6 विधायकों को अपनी पार्टी में शामिल कर एक दलीय सरकार बनाने में सफलता हासिल की. हालांकि ये जोड़ तोड़ वाली राजनीति कही जाएगी लेकिन बीजेपी का नया फार्मूला कहीं न कहीं इसी रणनीति से प्रेरित है.

यह भी पढ़ें:- किसानों की कर्जमाफी पर सरकार को घेर रहा विपक्ष, वहीं कर्जमाफी को ही गलत बता रहा RBI

अगर मान लें कि महाराष्ट्र (Maharashtra) में भाजपा (BJP) की सहयोगी पार्टियों (Partner Parties) के सभी 14 प्रत्याशी जीतकर विधानसभा पहुंचते हैं तो भाजपा के चुनाव चिन्ह पर लड़ने की वजह से वे भाजपा के विधायक के तौर पर जाने जाएंगे. अगर वे सभी के सभी किसी मतभेद के चलते सदन की सदस्यता से इस्तीफा देते हैं तो ये स्थिति भाजपा के लिए बहुत फायदा देने वाली साबित होगी. ऐसे में बहुमत के लिए 14 नंबर कम रह जाएंगे यानि बहुमत 145 विधायकों पर मिलेगा. अगर भाजपा के पास इतने विधायक हैं तो वो अकेले अपने दम पर सरकार बनाने में कामयाब हो जाएगी. अगर कुछ विधायक कम रह भी जाएंगे तो भाजपा के चाणक्य अमित शाह इतना तो करने में सफल हो ही जाएंगे कि शिवसेना के कुछ नेताओं को अपनी ओर मिला सकें.

अगर महाराष्ट्र (Maharashtra) में भाजपा (BJP) का ये (Partner Parties) नया फार्मूला एकदम सटीक काम करेगा तो शिवसेना का इतने सालों का वर्चस्व लुप्तप्राय होने की कगार पर आ जाएगा. अगर सच में ऐसी फिल्म बनती है जैसी सोची है तो निश्चित तौर पर भाजपा का सभी 29 राज्यों में सरकार बनाने का सपना बीजेपी के लिए और करीब आ जाएगा.

महाराष्ट्र में इतनी उठा-पटक के बाद भी BJP के लिए जीत नहीं आसान

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव (Maharashtra Assembly Election-2019) से पहले इस समय चुनाव प्रचार चरम पर है. भाजपा-शिवसेना की सरकार है. पिछले विधानसभा चुनाव में शिवसेना से गंठबंधन तोड़ने के बाद भाजपा ने अकेले अपने दम पर चुनाव लड़ा था और शिवसेना से ज्यादा सीटें जीतने के बाद चुनाव बाद हुए गठबंधन में उसे शिवसेना के सहयोग से महाराष्ट्र पहली बार अपना मुख्यमंत्री बनाने का अवसर मिला था. तब नागपुर के युवा नेता देवेन्द्र फड़नवीस मुख्यमंत्री बने थे. उसके बाद पांच साल गुजर चुके हैं और महाराष्ट्र की जनता के सामने देवेन्द्र फड़नवीस के कार्यों का आकलन करने का मौका है.

महाराष्ट्र (Maharashtra) की स्थिति को देखें तो पहले उसकी राजधानी मुंबई देश की आर्थिक राजधानी हुआ करती थी, जिससे महाराष्ट्र आर्थिक विकास के मामले में शीर्ष स्थान पर बना हुआ था. देवेन्द्र फड़नवीस के कार्यकाल में महाराष्ट्र ने आर्थिक विकास के क्षेत्र में शीर्ष स्थान से काफी पिछड़ गया है. महाराष्ट्र के लोगों को यह बात अखर रही है, जिसका विधानसभा चुनाव में भाजपा की संभावनाएं पर विपरीत असर पड़ता दिखाई दे रहा है. इसके मद्देनजर भाजपा महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद सत्ता में लौटने के भरसक प्रयास कर रही है. जनभावनाओं को भांपते हुए राकांपा प्रमुख शरद पवार और कांग्रेस भी चुनाव जीतने के लिए पूरी ताकत लगा रही है. इस सिलसिले में रविवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी भी अपनी-अपनी पार्टियों के कार्यकर्ताओं में जोश फूंकने के लिए महाराष्ट्र पहुंचे.

प्रधानमंत्री मोदी (PM Narendra Modi) ने जलगांव में चुनावी आमसभा को संबोधित किया. उन्होंने राष्ट्रीय स्तर के मुद्दे उठाते हुए विपक्ष को चुनौती दी. जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने और मुस्लिमों की तीन तलाक प्रथा के खिलाफ कानून बनाने के मुद्दे को उन्होंने अपनी सरकार का कीर्तिमान बताया और विपक्षी नेताओं को चुनौती दी कि अगर उनमें साहस है तो वे इन मुद्दों का विरोध करके दिखाए और इन मुद्दों को अपने चुनाव घोषणा पत्र में शामिल करे. उन्होंने महाराष्ट्र की जनता से देवेन्द्र फड़नवीस को फिर से मुख्यमंत्री बनाने के लिए भाजपा को वोट देने की अपील की. यह मौजूदा विधानसभा चुनाव के सिलसिले में महाराष्ट्र में मोदी की पहली रैली थी. उन्होंने कहा कि विपक्ष इन मुद्दों पर राजनीति करने और मगरमच्छ के आंसू बहा रहा है. उन्होंने कांग्रेस और राकांपा का नाम लिए बगैर कहा कि इन मुद्दों विपक्ष के नेताओं के बयान देखें तो वे पड़ोसी देश की जबान बोलते हुए मालूम पड़ते हैं.

यह भी पढ़ें: महाराष्ट्र में एक अभिनेत्री, एक पूर्व अभिनेता और दो टीवी स्टार चुनाव मैदान में

राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने महाराष्ट्र में अपनी पहली आमसभा लातूर जिले में की. लातूर जिले के ओसा में उन्होंने कांग्रेस की रैली को संबोधित करते हुए कहा कि मोदी की पार्टी और उनकी सरकार, दोनों असली मुद्दों से लोगों का ध्यान भटका रहे हैं. उन्होंने सवाल किया कि चांद तो ठीक है, लेकिन असली मुद्दों का क्या हुआ? चीन के राष्ट्रपति की यात्रा के दौरान मोदी की उनसे मुलाकात की खबरों पर तंज कसते हुए उन्होंने पूछा कि क्या उन्होंने चीन के राष्ट्रपति से डोकलाम के बारे में बात की? उन्होंने मीडिया पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और मीडिया मुख्य मुद्दों से लोगों का ध्यान भटका रहे हैं. उन्होंने कहा कि सरकार से रोजगार के बारे में बात करें तो वह चांद की बात करने लगती है. गौरतलब है कि 2017 में डोकलाम में भारतीय क्षेत्र में चीनी सैनिकों ने चीनी सैनिकों ने घुसपैठ की थी और कई दिनों तक दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने डटी हुई थी.

भाजपा अध्यक्ष और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने कोल्हापुर जिले में भाजपा की रैली में ओजस्वी भाषण दिया. उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों ने जम्मू-कश्मीर को भारत की मुख्य धारा से जोड़ने में 56 इंच के सीने वाले व्यक्ति जैसा साहस कभी नहीं दिखाया. उन्होंने धारा 370 को निरस्त करने संबंधी सरकार के कदम पर सवाल उठाने के लिए कांग्रेस नेता राहुल गांधी और राकांपा नेता शरद पवार की आलोचना की. उन्होंने सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक को लेकर भी मोदी सरकार की जमकर तारीफ की. इसके साथ ही तीन तलाक के मुद्दे पर भी सवाल उठाने वालों को निशाने पर लिया. शाह का पूरा भाषण धारा 370 और तीन तलाक के मुद्दों पर केंद्रित रहा. इसके साथ ही उन्होंने अगस्त में कोल्हापुर और सांगली में आई बाढ़ का जिक्र करते हुए उन्होंने जनता को आश्वस्त किया कि केंद्र और राज्य, दोनों सरकारें दोनों जिलों की कायापलट कर देंगी, उन्हें और बेहतर तथा सुंदर बनाएगी.

राकांपा नेता शरद पवार (Sharad Pawar) ने चालीसगांव में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए अपने तरीके से भाजपा को घेरने का प्रयास किया. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के युवा सत्तारूढ़ दल को हराने के लिए तैयार हैं. उन्होंने पूछा कि अगर भाजपा को लगता है कि प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव में विपक्ष के साथ कोई मुकाबला नहीं है तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़नवीस इतनी बड़ी संख्या में रैलियों का आयोजन क्यों करवा रहे हैं? उन्होंने जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने पर केंद्री की मोदी सरकार को बधाई दी और सवाल किया कि क्या उनके पास अनुच्छेद 371 निरस्त करने का साहस है?

जामनेर में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए पवार ने सवाल किया कि अगर उन्हें लगता है कि महाराष्ट्र में लड़ाई नहीं है तो प्रधानमंत्री मोदी महाराष्ट्र में नौ रैलियां क्यों कर रहे हैं? केंद्रीय गृहमंत्री बीस और मुख्यमंत्री 50 रैलियां क्यों कर रहे हैं? उनकी नींद उड़ गई है क्योंकि महाराष्ट्र के युवा उन लोगों को हराने के लिए तैयार हैं. इसलिए वे महाराष्ट्र में घूम रहे हैं. अमित शाह के इस बयान पर कि उन्होंने (पवार ने) महाराष्ट्र के लिए क्या किया है, पवार ने कहा कि उन्होंने सभी क्षेत्रों में राज्य को नंबर वन बनाने का काम किया है. उन्होंने उद्योगों के विकास के लिए और उसके बाद रोजगार के लिए कदम उठाए हैं. उन्होंने कहा, जब मैं मुख्यमंत्री था, तब महाराष्ट्र में 1978 में रोजगार गारंटी योजना लागू की गई थी. जब उन्होंने राज्य का नेतृत्व किया, तब स्थानीय निकाय में महिलाओं को आरक्षण दिया गया. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक घोटाले के सिलसिले में प्रवर्तन निदेशालय ने धन शोधन मामले में उनका नाम जोड़ा है, जबकि वह बैंक के सदस्य भी नहीं हैं.

इस तरह महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव का माहौल गर्मा गया है. एक तरफ मोदी और शाह भाजपा को जिताने के लिए पूरी ताकत लगा रहे हैं, देवेन्द्र फड़नवीस भी रात-दिन एक किए हुए हैं. इन नेताओं से अब तक शरद पवार अकेले लोहा ले रहे थे. अब राहुल गांधी ने भी महाराष्ट्र पहुंचकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जोश भरने का प्रयास किया है. फड़नवीस का कहना है कि मुकाबले में विपक्ष कहीं नहीं है, भाजपा को महाराष्ट्र की जनता का भरपूर समर्थन मिल रहा है. इस पर शरद पवार का कहना है कि जब विपक्ष इतना ही कमजोर है तो प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और मुख्यमंत्री को इतनी सारी रैलियां महाराष्ट्र में करने की जरूरत क्यों पड़ रही है? उनका दावा है कि इस बार फड़नवीस सरकार जाने वाली है.

बड़ी खबर: ‘फड़नवीस इवेंट मैनेजमेंट के मास्टर, सिर्फ मोदी के नाम पर चला रहे सरकारः’

बहरहाल महाराष्ट्र का विधानसभा चुनाव घोषणा और नामांकन का सिलसिला शुरू होने से पहले चले दलबदल और उखाड़-पछाड़ का दौर थमने के बाद अब रोचक मोड़ पर पहुंच गया है. शरद पवार ने विपक्ष को फिर से मुकाबले में लाकर खड़ा कर दिया है. इसलिए महाराष्ट्र में चुनाव जीतकर फिर से सरकार बनाने का भाजपा का सपना आसानी से पूरा होने की संभावना नहीं रह गई है. विपक्ष अब पूरी ताकत से भाजपा का मुकाबला करने में जुट गया है. अब ये तो 24 अक्टूबर की सुबह ही पता चलेगा कि ऊंट किस करवट बैठता है.

वीडियो खबर: अमित शाह ने लगाई घुसपैठियों को ललकार

महाराष्ट्र (Maharashtra) विधानसभा चुनाव (Assembly Election 2019) के तहत BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह (Amit Shah) के चुनावी रैलियों में ताबड़तोड़ हमले जारी हैं. प्रदेश की एक चुनावी सभा में अमित शाह (Amit Shah) ने ​कहा कि देश के एक भी घुसपैठी को बक्शा नहीं जाएगा और एक-एक घुसपैठिए को चुन चुन कर देश के बाहर निकालेंगे.