पश्चिम
बंगाल के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आने वाला है. दरअसल पार्टी
विघटन का सामना कर चुकी उद्धव ठाकरे की पार्टी में एक बार फिर टूट हो रही है. शिवसेना
UBT के सांसदों ने बगावती तेवर दिखाते हुए पार्टी से अलग जाने का फैसला किया है. 9
में से 6 सांसदों ने शिंदे गुट की शिवसेना में विलय के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला
को चिट्ठी भेजी है. वहीं पार्टी ने प्रत्येक सांसद को 15-15 करोड़ रुपए का प्रलोभन
देने की बात कही. अन्य सांसद अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाउ वाजे अभी भी पार्टी
के साथ बने हुए हैं. महाराष्ट्र की राजनीति में मौजूदा घटनाक्रम को 'ऑपरेशन टाइगर'
नाम दिया गया है.
इधर,
शिवसेना (UBT) के राज्यसभा सांसद एवं पार्टी प्रवक्ता संजय राउत ने दिल्ली में प्रेस
कॉन्फ्रेंस के दौरान बागी सांसदों पर कहा, 'ये बेईमान लोग हैं. बेईमानी उनके खून में
हैं.' राउत ने दावा किया कि बागी सांसदों को 50-50 करोड़ रुपए ऑफर हुए हैं. उन्होंने
कहा कि मेरे पास जानकारी है कि सांसदों को 15-15 करोड़ रुपए पहुंचाए गए हैं और उन्हें
3 चार्टर्ड विमानों से दिल्ली लाया गया है. इस मसले को लेकर संजय राउत ने स्पीकर बिरला
से मुलाकात भी की है.
उद्धव
और अन्य पार्टी नेता अपने सांसदों से लगातार संपर्क करने और उन्हें मनाने की कोशिश
कर रहे हैं, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है. पार्टी ने गुरुवार को दिल्ली में
संसदीय समिति की बैठक बुलाई है.
इधर,
शिवसेना (UBT) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने बीजेपी एवं शिंदे गुट पर निशाना साधते हुए
कहा कि अब पार्टी को कमजोर करने की एक और कोशिश की जा रही है. उन्होंने कहा कि जनता
ने सांसदों को नहीं, बल्कि उद्धव ठाकरे पर भरोसा करके वोट दिया था, इसलिए अगर किसी
सांसद का पार्टी पर से विश्वास उठ गया है तो उसे पहले इस्तीफा देना चाहिए.
इससे
पूर्व ऑपरेशन टाइगर की संभावना को भांपते हुए पार्टी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने 14 जून
को लोकसभा सांसदों की बैठक बुलाई थी. इसमें 9 में से 4 सांसद व्यक्तिगत और 4 ऑनलाइन
शामिल हुए थे. सांसद संजय देशमुख पारिवारिक कारणों का हवाला देकर बैठक में शामिल नहीं
हुए थे. सभी ने उद्धव के साथ खड़े होने की शपथ खाई थी. केवल दो दिन के भीतर पार्टी
में 'खेला' हो गया.
पश्चिम
बंगाल में भी इसी तरह की राजनीति चल रही है. वहां विधानसभा चुनाव के तुरंत बाद ममता
बनर्जी के 28 में से 20 सांसद और 80 में से 60 विधायकों ने पार्टी छोड़कर टीएमसी के
नाम एवं चुनाव चिन्ह पर दावा ठोका है. इससे पहले आम आदमी पार्टी के भी 10 में से 7
राज्यसभा सांसद पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल हो चुके हैं. अब देखना ये होगा कि विपक्ष
के राजनीतिक दल इन दल बदल घटनाक्रमों पर लगाम लगा पाते हैं या नहीं.













