झारखंड में झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का आंदोलन लगातार 22वें दिन भी जारी है. आंदोलन के बीच रविवार को एक छात्र ने सिर मुंडवाकर सरकार के कथित उदासीन रवैये के खिलाफ विरोध जताया. वहीं, 13 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठी उम्मे हबीबा की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें रांची के सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है. छात्रों के आंदोलन ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है और BJP ने कांग्रेस तथा राहुल गांधी को सीधे निशाने पर लिया है.
‘दिल्ली में आंदोलन, झारखंड में चुप्पी क्यों?’
BJP के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने राहुल गांधी पर हमला
बोलते हुए सवाल किया कि जब दिल्ली में छात्रों के मुद्दे पर कांग्रेस आक्रामक नजर आती
है, तो झारखंड में छात्रों के आंदोलन पर पार्टी चुप क्यों है. उन्होंने आरोप लगाया
कि राहुल गांधी दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास के बाहर छात्रों के मुद्दे को लेकर धरना
और प्रदर्शन करते हैं, लेकिन झारखंड में कांग्रेस समर्थित सरकार के खिलाफ आंदोलन कर
रहे छात्रों की आवाज सुनने के लिए सामने नहीं आ रहे.
आदित्य साहू ने राहुल गांधी से अपील की कि वे टेलीफोन के
जरिए आंदोलन को प्रभावित करने के बजाय खुद रांची पहुंचें और प्रदर्शन कर रहे छात्रों
से मुलाकात करें. उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता होने के नाते राहुल गांधी को छात्रों
के साथ खड़ा होकर उनकी मांगों को उठाना चाहिए.
कांग्रेस को समर्थन वापस लेने की चुनौती
BJP प्रदेश अध्यक्ष ने कांग्रेस को झारखंड सरकार से समर्थन
वापस लेने की चुनौती भी दी. उन्होंने कहा कि अगर राज्य सरकार छात्रों की मांग के मुताबिक
भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की CBI जांच कराने के लिए तैयार नहीं है, तो
कांग्रेस को सत्ता में बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं है.
आदित्य साहू ने कहा कि कांग्रेस को सरकार में भागीदार बने
रहने के बजाय आंदोलन स्थल पर पहुंचकर युवाओं के साथ खड़ा होना चाहिए. उन्होंने आरोप
लगाया कि कांग्रेस सरकार के कथित भ्रष्टाचार की जिम्मेदारी से खुद को अलग नहीं कर सकती.
‘अगर कुछ छिपाना नहीं है तो CBI जांच से डर क्यों?’
BJP नेता ने हेमंत सोरेन सरकार पर भी गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने
दावा किया कि राज्य में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवा लंबे समय से अपनी
मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं
दे रही है.
उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले सात वर्षों में राज्य के युवाओं
के हक की नौकरियों के साथ खिलवाड़ हुआ है. BJP का कहना है कि छात्र केवल पूरे मामले
की निष्पक्ष CBI जांच की मांग कर रहे हैं. ऐसे में सरकार यदि किसी तरह की अनियमितता
से इनकार करती है, तो उसे जांच से पीछे नहीं हटना चाहिए.
आंदोलन से बढ़ सकता है सियासी दबाव
छात्र आंदोलन के 22वें दिन तक पहुंचने और भूख हड़ताल कर रही छात्रा की तबीयत बिगड़ने के बाद मामला और गंभीर हो गया है. अब BJP ने कांग्रेस की भूमिका पर सवाल उठाकर राजनीतिक दबाव बढ़ा दिया है. आने वाले दिनों में यदि सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच कोई समाधान नहीं निकलता है, तो यह मुद्दा झारखंड की सियासत में बड़ा चुनावी और युवा मुद्दा बन सकता है.
फिलहाल छात्रों की मांग, सरकार का रुख और विपक्ष के आरोप - तीनों के बीच टकराव लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है.












