देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पूरा देश राष्ट्रभक्ति के रंग में रंगा हुआ है, लेकिन इसी बीच नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में ‘वंदे मातरम’ के गायन को लेकर सियासी विवाद खड़ा हो गया है. सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो के आधार पर दावा किया जा रहा है कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने ‘वंदे मातरम’ के पूरे गायन पर आपत्ति जताई और इसे बीच में रोकने का संकेत दिया. हालांकि, कांग्रेस ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए घटनाक्रम को गलत तरीके से पेश करने का आरोप लगाया है.
क्या है पूरा मामला?
कांग्रेस मुख्यालय में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान
‘वंदे मातरम’ का गायन चल रहा था. इसी दौरान सोनिया गांधी और राहुल गांधी
के एक कथित इशारे को लेकर विवाद खड़ा हो गया. दावा है कि दोनों ने गायन को बीच में
रोकने का संकेत दिया. इसके बाद लालजी देसाई ने उनसे बातचीत की और ‘वंदे मातरम’ का पूरा गायन जारी
रहा.
इसी घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद
बीजेपी ने कांग्रेस पर निशाना साधना शुरू कर दिया. बीजेपी नेताओं ने सवाल उठाया कि
जिस गीत को देश के स्वतंत्रता आंदोलन से गहरा जुड़ाव रहा है, उसके गायन को लेकर कांग्रेस
नेताओं का ऐसा रवैया क्यों सामने आया?
बीजेपी का कांग्रेस पर तीखा हमला
बीजेपी प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने पूरे घटनाक्रम को दुर्भाग्यपूर्ण
बताते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के शासनकाल में
भी ‘वंदे मातरम’ को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं.
हुसैन ने इस मुद्दे को राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन
खरगे की स्वतंत्रता दिवस समारोह में अनुपस्थिति से भी जोड़ते हुए कांग्रेस की राष्ट्रभक्ति
और राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति उसके रुख पर सवाल खड़े किए.
कांग्रेस ने बताया ‘भ्रामक प्रचार’
बीजेपी के आरोपों के बाद कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने मोर्चा
संभाला और पूरे विवाद पर सफाई दी. उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम’ को लेकर कोई विवाद
नहीं हुआ था. उनके मुताबिक, सोनिया गांधी कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को बैठने
के लिए कह रही थीं, क्योंकि वह काफी देर से खड़े थे.
कांग्रेस का कहना है कि वीडियो के एक हिस्से को आधार बनाकर
पूरे घटनाक्रम को अलग अर्थ दिया जा रहा है. पार्टी ने बीजेपी पर मामले को तोड़-मरोड़कर
पेश करने और राजनीतिक विवाद खड़ा करने का आरोप लगाया.
‘वंदे मातरम’ बना सियासत का नया मुद्दा
स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर ‘वंदे मातरम’ को लेकर शुरू हुआ
यह विवाद अब महज एक वीडियो तक सीमित नहीं रहा. बीजेपी इसे कांग्रेस की राष्ट्रवादी
सोच पर सवाल उठाने के लिए इस्तेमाल कर रही है, जबकि कांग्रेस इसे राजनीतिक दुष्प्रचार
बता रही है.
ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि वायरल वीडियो में दिखा घटनाक्रम
वास्तव में क्या था- क्या ‘वंदे मातरम’ को रोकने का प्रयास हुआ या फिर एक सामान्य बातचीत को राजनीतिक
रंग दे दिया गया? फिलहाल, दोनों दलों के आमने-सामने आने से यह मुद्दा स्वतंत्रता दिवस
की सियासत में नया विवाद बन गया है.











