कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के हल्द्वानी दौरे के बाद सामने आए ‘शुद्धिकरण’ विवाद ने देश की राजनीति में जाति और सामाजिक समानता को लेकर नई बहस छेड़ दी है. कांग्रेस ने इस पूरे घटनाक्रम को दलित सम्मान और संविधान की मूल भावना से जोड़ते हुए बीजेपी और आरएसएस पर तीखा हमला बोला है. वहीं, बीजेपी ने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए किसी भी तरह की ऐसी मानसिकता का समर्थन करने से इनकार किया है.
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस मुद्दे को सीधे बीजेपी और आरएसएस की विचारधारा से जोड़ दिया. राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि यह ऐसी मानसिकता का उदाहरण है, जिसमें इंसान की हैसियत उसके जन्म के आधार पर तय की जाती है, जबकि संविधान समानता और इंसानियत की बात करता है.
राहुल गांधी ने कहा कि मामला केवल किसी एक व्यक्ति के अपमान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस संविधान का भी अपमान है जिसने छुआछूत को अपराध घोषित किया है. कांग्रेस ने इसी मुद्दे को लेकर देशभर के जिला मुख्यालयों पर मार्च और सत्याग्रह करने का ऐलान किया है.
हल्द्वानी में ‘शुद्धिकरण’ से शुरू हुआ विवाद
दरअसल, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 8 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में एक बड़ी जनसभा को संबोधित किया था. इसके अगले दिन 9 अगस्त को इसी मैदान में हिंदू संगठनों की ओर से शुद्धि हवन किए जाने की बात सामने आई.
कांग्रेस का आरोप है कि इस कार्यक्रम में बीजेपी और आरएसएस से जुड़े नेता और कार्यकर्ता भी शामिल हुए. पार्टी ने इसे दलित अस्मिता से जोड़ते हुए बीजेपी पर निशाना साधा है. खड़गे ने शुद्धिकरण कराने वालों के खिलाफ छुआछूत से जुड़े कानून के तहत कार्रवाई और गिरफ्तारी की मांग की है.
इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक बहस को एक बार फिर जाति, छुआछूत और सामाजिक समानता के सवालों के केंद्र में ला दिया है. कांग्रेस इसे संविधान और सामाजिक न्याय की लड़ाई के रूप में पेश कर रही है, जबकि बीजेपी इसे राजनीतिक रंग देने से बचने की सलाह दे रही है.
कांग्रेस के दूसरे दलित अध्यक्ष हैं खड़गे
मल्लिकार्जुन खड़गे कांग्रेस के इतिहास में बाबू जगजीवन राम के बाद दूसरे दलित अध्यक्ष हैं. जगजीवन राम ने 1970-71 के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली थी.
खड़गे का राजनीतिक सफर कर्नाटक से शुरू हुआ. वह नौ बार विधायक चुने गए और बाद में लोकसभा पहुंचे. 2009 और 2014 में उन्होंने गुलबर्गा लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व किया. 2014 के बाद वह लोकसभा में कांग्रेस के नेता रहे.
2019 का लोकसभा चुनाव हारने के बाद खड़गे राज्यसभा पहुंचे और वहां नेता प्रतिपक्ष की भूमिका भी निभाई. इसके बाद 2022 में उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष का पद संभाला. ऐसे में हल्द्वानी की घटना को लेकर कांग्रेस का आक्रामक रुख खड़गे की सामाजिक और राजनीतिक पहचान से भी जोड़कर देखा जा रहा है.
जेपी नड्डा बोले- घटना पूरे देश के लिए दुखद
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने खड़गे से जुड़े घटनाक्रम को दुर्भाग्यपूर्ण बताया. उन्होंने कहा कि खड़गे के साथ जो हुआ या जिन भावनाओं को ठेस पहुंची, वह केवल कांग्रेस के लिए नहीं बल्कि पूरे देश के लिए दुखद है.
नड्डा ने स्पष्ट किया कि बीजेपी ऐसी किसी भी गतिविधि का समर्थन नहीं करती और मामले की गहराई से जांच की जाएगी. उन्होंने कहा कि अगर कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए.
हालांकि, नड्डा ने साथ ही कांग्रेस से इस मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं करने की अपील की. यहीं से साफ है कि हल्द्वानी का ‘शुद्धिकरण’ विवाद अब केवल एक स्थानीय घटना नहीं रह गया है, बल्कि आने वाले दिनों में यह सामाजिक न्याय, दलित राजनीति और बीजेपी-कांग्रेस के वैचारिक संघर्ष का बड़ा मुद्दा बन सकता है.
सत्याग्रह के जरिए सियासी संदेश देने की तैयारी
कांग्रेस ने मार्च और सत्याग्रह के जरिए इस मुद्दे को जिला स्तर तक ले जाने का फैसला किया है. पार्टी की कोशिश है कि इसे केवल खड़गे के अपमान के रूप में नहीं, बल्कि संविधान में निहित समानता और छुआछूत के खिलाफ लड़ाई के रूप में जनता के बीच रखा जाए.
वहीं बीजेपी के लिए चुनौती यह है कि वह घटना की निंदा करते हुए राजनीतिक आरोपों से खुद को अलग रखे. ऐसे में हल्द्वानी का विवाद आने वाले दिनों में बीजेपी और कांग्रेस के बीच सामाजिक न्याय और जातीय राजनीति को लेकर नई सियासी जंग का आधार बन सकता है.












