‘राहुल गांधी नक्सल सोच वाले’ बीजेपी के बयान से गरमाई सियासत, कांग्रेस ने PM मोदी पर साधा निशाना
लाल किले पर आयोजित 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में राहुल
गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे लगातार दूसरे वर्ष शामिल नहीं हुए. दोनों
को रक्षा मंत्रालय की ओर से समारोह का औपचारिक निमंत्रण भेजा गया था, लेकिन उनके कार्यक्रम
में नहीं पहुंचने पर एक बार फिर सियासी विवाद खड़ा हो गया.
बीजेपी ने राहुल गांधी के समारोह से दूरी बनाने को लेकर कांग्रेस
पर निशाना साधा.
बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी लाल किले
पर आयोजित राष्ट्रीय समारोह में मौजूद रहने से बचते हैं. उन्होंने राहुल गांधी की सोच
को ‘दिमागी नक्सल’ करार देते हुए सवाल उठाया कि क्या कोई देशभक्त नेता प्रतिपक्ष या
सार्वजनिक पद पर बैठा व्यक्ति ऐसे राष्ट्रीय कार्यक्रम से जानबूझकर दूरी बना सकता है.
उन्होंने इसे वंदे मातरम के प्रति राहुल गांधी की कथित नफरत से भी जोड़ दिया.
बीजेपी ने यह भी कहा कि राहुल गांधी नेता प्रतिपक्ष के पद
की गरिमा के अनुरूप व्यवहार नहीं कर रहे हैं. दूसरी ओर, कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र
मोदी के लाल किले से दिए गए भाषण पर पलटवार किया. कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने कहा
कि जिन्होंने आजादी की लड़ाई में हिस्सा नहीं लिया, उन्हें हर चीज में अपमान नजर आता
है.
‘अर्बन नक्सल’ से ‘दिमागी नक्सल’ तक, कांग्रेस का पलटवार
कांग्रेस ने बीजेपी के ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान को पुराने
राजनीतिक विवाद से जोड़ते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा. पार्टी ने
कहा कि करीब तीन साल पहले प्रधानमंत्री ने अपने राजनीतिक विरोधियों के लिए ‘अर्बन नक्सल’
शब्द का इस्तेमाल किया था. उस समय संसद में जब ‘अर्बन नक्सल’ की परिभाषा पूछी गई थी,
तो केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा था कि ‘अर्बन नक्सल’ जैसी कोई चीज नहीं है.
कांग्रेस का आरोप है कि अब लाल किले जैसे राष्ट्रीय मंच से
राजनीतिक विरोधियों के लिए ‘दिमागी नक्सल’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जा रहा है.
इससे स्वतंत्रता दिवस समारोह से जुड़ा विवाद सीधे राजनीतिक बयानबाजी में बदल गया है.
2024 में बैठने की व्यवस्था को लेकर शुरू हुआ था विवाद
राहुल गांधी के स्वतंत्रता दिवस समारोह से दूर रहने के पीछे
2024 का विवाद भी अहम माना जा रहा है. 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने 99 सीटें
जीती थीं और इसके बाद राहुल गांधी लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष बने. स्वतंत्रता दिवस
समारोह में उन्हें पांचवीं पंक्ति में बैठाया गया था, जिस पर कांग्रेस ने आपत्ति जताई
थी.
कांग्रेस का आरोप था कि नेता प्रतिपक्ष को पीछे बैठाकर उनके
संवैधानिक पद का अपमान किया गया. हालांकि, रक्षा मंत्रालय ने सफाई देते हुए कहा था
कि समारोह में पहुंचे ओलंपिक खिलाड़ियों को विशेष सम्मान देने और उन्हें आगे बैठाने
के कारण बैठने की व्यवस्था में बदलाव किया गया था.
राष्ट्रपति सचिवालय के प्रोटोकॉल के अनुसार लोकसभा में नेता
प्रतिपक्ष का दर्जा केंद्रीय कैबिनेट मंत्री के समकक्ष माना जाता है. वहीं, रक्षा मंत्रालय
के अनुसार स्वतंत्रता दिवस समारोह में बैठने की व्यवस्था ‘टेबल ऑफ प्रेसिडेंस’ यानी
ToP के नियमों के आधार पर तय की जाती है.
2024 की इस नाराजगी के बाद राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे
ने 2025 में भी स्वतंत्रता दिवस समारोह में हिस्सा नहीं लिया था. अब लगातार दूसरे साल
उनकी गैरमौजूदगी ने इस पुराने विवाद को फिर से राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया
है.
एक तरफ बीजेपी इसे राष्ट्रीय समारोह से दूरी और देशभक्ति
के सवाल से जोड़ रही है, तो दूसरी ओर कांग्रेस इसे सरकार की राजनीतिक बयानबाजी और संवैधानिक
पदों के सम्मान से जोड़कर पलटवार कर रही है. ऐसे में स्वतंत्रता दिवस का राष्ट्रीय
समारोह एक बार फिर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सियासी टकराव का मंच बन गया है.












