संसद के मानसून सत्र के अब महज तीन दिन शेष रह गए हैं, लेकिन सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. जनहित से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की मांग को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर दबाव बना रहा है, वहीं सत्ता पक्ष का कहना है कि सरकार सदन में जवाब देने के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष को चर्चा से भागना नहीं चाहिए.
विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने दिल्ली
में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर हुए लाठीचार्ज
का मुद्दा उठाया. दूसरी ओर, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और किरेन रिजिजू ने विपक्ष
पर निशाना साधते हुए कहा कि गृह मंत्री सदन में जवाब देने को तैयार हैं, लेकिन विपक्ष
को चर्चा में शामिल होना होगा.
‘आरोप लगाकर भागना लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं’
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष के रवैये पर
सवाल उठाते हुए कहा कि केवल आरोप लगाकर सदन से चले जाना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए
उचित नहीं है. उन्होंने विपक्ष से सदन में चर्चा में शामिल होने की अपील की.
सत्ता पक्ष का तर्क है कि यदि विपक्ष के पास सरकार से सवाल
हैं तो उसे सदन के भीतर चर्चा के दौरान अपनी बात रखनी चाहिए और सरकार के जवाब को सुनना
चाहिए. वहीं विपक्ष का कहना है कि जिन मुद्दों पर वह चर्चा चाहता है, सरकार पहले उन
पर अपनी स्थिति स्पष्ट करे.
कांग्रेस ने रखीं तीन शर्तें
चर्चा को लेकर कांग्रेस ने एक बार फिर सत्ता पक्ष के सामने
अपनी शर्तें रखी हैं. विपक्ष की प्रमुख मांगों में तीन मुद्दे शामिल हैं—
- युवाओं पर हुई कार्रवाई और गोली चलने की जिम्मेदारी
स्पष्ट की जाए.
- प्रधानमंत्री घटना के लिए माफी मांगें.
- राम मंदिर में चढ़ावे/चोरी के आरोपों के मुद्दे पर सदन
में चर्चा हो.
कांग्रेस समेत विपक्षी दल इन मुद्दों पर चर्चा की मांग पर
कायम हैं. वहीं सरकार इन शर्तों को स्वीकार करने के बजाय संसद में सामान्य प्रक्रिया
के तहत चर्चा कराने की बात कह रही है.
लगातार हंगामे की भेंट चढ़ रही कार्यवाही
मानसून सत्र की शुरुआत से ही संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष
के बीच टकराव देखने को मिल रहा है. सोमवार को भी विपक्षी सांसदों ने गृह मंत्री अमित
शाह के बयान की मांग को लेकर संसद परिसर के बाहर प्रदर्शन किया.
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने एक पोस्टर
भी दिखाया, जिसमें लोकसभा में अमित शाह की गैरहाजिरी से जुड़ी तारीखों का उल्लेख था.
वहीं कांग्रेस ने अपने सभी सांसदों को व्हिप जारी कर 10 से 12 अगस्त तक सदन में मौजूद
रहने का निर्देश दिया है.
हंगामे के बीच संसद की कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा.
राम मंदिर चढ़ावे के मुद्दे पर भी टकराव
इससे पहले मानसून सत्र के तीसरे सप्ताह में राम मंदिर में
चढ़ावे की चोरी के आरोपों को लेकर संसद में जोरदार हंगामा हुआ था. राज्यसभा में नेता
विपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के बीच इस मुद्दे पर
तीखी बहस देखने को मिली.
इसी राजनीतिक गतिरोध के बीच लोकसभा ने सुप्रीम कोर्ट के जजों
की संख्या बढ़ाने से संबंधित विधेयक को बिना चर्चा के पारित कर दिया. प्रस्ताव के तहत
मुख्य न्यायाधीश समेत सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या 34 से बढ़ाकर 38 किए जाने का
प्रावधान है.
MSME बिल भी हंगामे के बीच पास
6 अगस्त को दिल्ली में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के मामले
में गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग को लेकर राज्यसभा में भी सत्ता पक्ष और विपक्ष
आमने-सामने रहे. मल्लिकार्जुन खड़गे ने सभापति से गृह मंत्री को सदन में बुलाकर बयान
देने की मांग की.
इसके अगले दिन विपक्ष के हंगामे के बीच लोकसभा में सूक्ष्म,
लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया.
क्या बचे तीन दिनों में टूटेगा गतिरोध?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि मानसून सत्र के आखिरी तीन दिनों
में सरकार और विपक्ष के बीच कोई समझौता हो पाएगा या नहीं. विपक्ष अपनी मांगों पर अड़ा
है, जबकि सरकार चर्चा के लिए तैयार होने का दावा कर रही है.
अगर दोनों पक्ष अपने-अपने रुख से पीछे नहीं हटते हैं तो मानसून
सत्र के बचे हुए दिन भी हंगामे की भेंट चढ़ सकते हैं. ऐसे में संसद में लंबित विधायी
कामकाज के साथ-साथ विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे जनहित के मुद्दों पर व्यापक बहस की संभावना
भी कमजोर होती दिखाई दे रही है.












