Ashok Gehlot's big attack on CM Bhajanlal: राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने प्रदेश की भजनलाल सरकार पर तीखा हमला बोला है. अशोक गहलोत ने आरोप लगाया कि नगरीय निकायों में अपने बोर्ड बनाने के लिए भाजपा सरकार ने “बेईमानी और बेशर्मी की सारी हदें” पार कर दीं और सरकारी मशीनरी, पुलिस तथा प्रशासन के जरिए लोकतंत्र को प्रभावित करने का प्रयास किया गया. उन्होंने कहा कि राजस्थान में कभी ऐसा होगा, इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी और पूरा प्रदेश इन घटनाओं से स्तब्ध है.
अशोक गहलोत ने दावा किया कि राजस्थान में एक-एक पार्षद के लिए 2-2 करोड़ रुपये तक की बोली लगाई गई. कांग्रेस पार्षदों को कभी उनके घर को अवैध बताकर नोटिस भेजा गया, कभी उनके प्रतिष्ठानों को सील किया गया, नए-नए मुकदमे दायर कर पुलिस के सामने पेश होने के नोटिस थमाए गए, बाड़ेबंदी में रुके पार्षदों के कैंप में पुलिस भेजकर उन्हें जबरन उठाया गया. भाजपा सरकार के इन कुकर्मों के कारण कल रात 12 बजे तक राजस्थान हाईकोर्ट को सुनवाई कर चुनाव से जुड़ी याचिकाओं का निस्तारण करना पड़ा, जिसमें भाजपा सरकार को अदालत से करारा तमाचा लगा.
अशोक गहलोत ने हमला जारी रखते हुए आगे कहा कि यह सिर्फ राजस्थान तक सीमित नहीं रहा, उत्तर प्रदेश और हरियाणा की पुलिस के जरिए भी यहाँ के निर्वाचित पार्षदों को भाजपा के पक्ष में ले जाने का काम किया गया. अब तक जिस तरह की हॉर्स ट्रेडिंग और एजेंसियों के दुरुपयोग की तस्वीरें हम पश्चिम बंगाल में देख रहे थे, वही घिनौना खेल अब राजस्थान के अपने निकाय चुनावों में खुलकर सामने आ गया है. पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने आगे कहा कि आज नगरीय निकाय चुनाव के दिन भी मथानिया, पावटा, तिजारा, कुचेरा, हनुमानगढ़, गंगानगर, अलवर, निम्बाहेड़ा समेत पूरे राजस्थान से जो दृश्य सामने आए, वे चीख-चीखकर लोकतंत्र की हत्या की गवाही दे रहे हैं. जब नगरीय निकाय चुनावों में यह हाल है, तो साफ है कि आने वाले पंचायत चुनावों में भाजपा सरकार इससे भी आगे जाकर सरकारी तंत्र का दुरुपयोग कर सकती है.
अशोक गहलोत ने हमला जारी रखते हुए आगे कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा आपसे प्रदेश को ऐसे कृत्यों की उम्मीद नहीं थी. अब आपका और आपकी सरकार का नाम राजस्थान के इतिहास में लोकतंत्र की हत्या करने वाले मुख्यमंत्री और सरकार के रूप में दर्ज हो चुका है. सबसे दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि राजनीतिक मामलों में काफी हद तक निष्पक्ष माने जाने वाले राजस्थान के नौकरशाह और पुलिस के कई अधिकारी भी पहली बार भाजपा सरकार के साथ मिलकर इस पाप में शामिल हो गए. संविधान की शपथ लेने वाले अधिकारियों को विचार करना चाहिए कि क्या ऐसे कुकृत्यों में शामिल होने के लिए वे राजकीय सेवा में आए थे? समय आने पर हर एक की जवाबदेही तय होगी, ताकि भविष्य में ऐसी शर्मनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके.
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