दिल्ली की राजनीति में अक्सर बड़े मुद्दे विधानसभा, संसद या नगर निगम की बैठकों से निकलकर सड़कों तक पहुंचते हैं. लेकिन इस बार कहानी की शुरुआत सत्ता के गलियारों से नहीं, बल्कि त्रिलोकपुरी के एक सफाईकर्मी के घर से हुई है. एक MCD कर्मचारी की आत्महत्या और उसके बाद सामने आए आरोपों ने अब दिल्ली की राजनीति को आमने-सामने ला दिया है.
मामले के केंद्र में हैं आम आदमी पार्टी के त्रिलोकपुरी से पार्षद विजय कुमार. उनके खिलाफ सफाईकर्मी दीपक की पत्नी की शिकायत पर पुलिस ने आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में FIR दर्ज की है. इसके बाद बीजेपी ने इस मामले को लेकर AAP के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है.
एक FIR और फिर शुरू हुई सियासी लड़ाई
दीपक MCD में सफाईकर्मी थे और त्रिलोकपुरी इलाके में तैनात थे. रिपोर्टों के मुताबिक, 1 सितंबर को उन्होंने आत्महत्या कर ली. उनकी पत्नी संगीता की शिकायत के आधार पर 14 सितंबर को कल्याणपुरी थाने में AAP पार्षद विजय कुमार के खिलाफ BNS की धारा 108 के तहत मामला दर्ज किया गया. पुलिस मामले की जांच कर रही है.
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि दीपक मकान खरीदने के लिए करीब 15 लाख रुपये के लोन की व्यवस्था में पार्षद के संपर्क में आए थे. पत्नी का आरोप है कि लोन की रकम पार्षद से जुड़े खाते में चली गई और दीपक को उसका लाभ नहीं मिला. इसके अलावा कई महीनों से वेतन नहीं मिलने और आर्थिक दबाव के भी आरोप लगाए गए हैं. यहीं से मामला केवल पैसों के लेनदेन का नहीं रहा. परिवार ने आरोप लगाया कि लगातार आर्थिक और मानसिक दबाव के बीच दीपक परेशान थे. हालांकि इन आरोपों की पुष्टि अभी जांच के जरिए होनी बाकी है.
15 लाख का लोन बना विवाद का केंद्र
इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा 15 लाख रुपये के कथित लोन की है. दीपक की पत्नी की शिकायत के अनुसार, मकान खरीदने के लिए लिए गए लोन की रकम कथित तौर पर विजय कुमार के खाते में चली गई. शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि दीपक की चेकबुक और अन्य दस्तावेज उनके पास थे.
बीजेपी ने इन आरोपों को आधार बनाकर AAP पार्षद पर गंभीर सवाल उठाए हैं. पार्टी नेताओं का आरोप है कि दीपक के वेतन से जुड़ी रकम भी कथित तौर पर निकाली जाती रही. वहीं पुलिस बैंक खातों और अन्य संबंधित दस्तावेजों की जांच कर रही है.
लेकिन इस कहानी का दूसरा पक्ष भी है. विजय कुमार ने आरोपों से इनकार किया है. उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने कहा कि उन्होंने दीपक के लिए कोई लोन नहीं कराया और उन्हें गलत तरीके से मामले में फंसाया जा रहा है. यानी फिलहाल मामला आरोप और जांच के बीच खड़ा है.
जब स्थानीय मामला बना राजनीतिक मुद्दा
FIR दर्ज होने के बाद बीजेपी ने इसे केवल कानूनी मामला मानकर छोड़ने के बजाय राजनीतिक मुद्दा बना दिया. 18 सितंबर को शाहदरा दक्षिणी जोन की वार्ड समिति की बैठक में विजय कुमार के खिलाफ कार्रवाई से जुड़ा प्रस्ताव पारित हुआ. इसके बाद बीजेपी ने उनके इस्तीफे की मांग तेज कर दी. 19 सितंबर को बीजेपी कार्यकर्ताओं ने त्रिलोकपुरी में उनके कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया.
इसके बाद 20 सितंबर को बीजेपी कार्यकर्ताओं ने AAP कार्यालय के बाहर भी प्रदर्शन किया और पार्षद को पार्टी से निष्कासित करने तथा मामले में कार्रवाई की मांग उठाई. प्रदर्शन में बीजेपी सांसद योगेंद्र चंदोलिया समेत पार्टी के नेता शामिल हुए. यानी एक तरफ पुलिस की जांच आगे बढ़ रही है और दूसरी तरफ राजनीतिक दबाव बढ़ता जा रहा है.
BJP के निशाने पर केजरीवाल भी
बीजेपी का सवाल सिर्फ पार्षद विजय कुमार तक सीमित नहीं है. पार्टी ने AAP नेतृत्व से भी जवाब मांगा है कि FIR दर्ज होने के बाद संगठन की ओर से क्या कार्रवाई की गई. बीजेपी नेताओं ने AAP नेतृत्व से पार्षद के खिलाफ कार्रवाई और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग की है. पार्टी का कहना है कि जब तक पार्षद के खिलाफ संगठनात्मक कार्रवाई नहीं होती और मामले में निष्पक्ष जांच नहीं होती, तब तक विरोध जारी रहेगा.
यहां राजनीति का एक और पहलू सामने आता है. बीजेपी इस मामले को गरीब और निगम कर्मचारियों के अधिकारों से जोड़कर उठा रही है, जबकि अंतिम रूप से आरोपों की सच्चाई पुलिस जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया से ही स्पष्ट होगी.
फिलहाल इतना जरूर है कि त्रिलोकपुरी के एक सफाईकर्मी की मौत ने दिल्ली की राजनीति में एक ऐसा मुद्दा खड़ा कर दिया है, जहां सड़क पर विरोध, पार्टी की कार्रवाई और पुलिस की जांच: तीनों एक साथ आगे बढ़ रहे हैं. अब निगाह इस बात पर है कि जांच किस दिशा में जाती है और राजनीतिक दबाव के बीच AAP नेतृत्व का अगला कदम क्या होता है.











