चुनावी प्रक्रिया के दौरान जिलों में आईपीएस कैडर के नियमित पुलिस अधीक्षक (एसपी) तैनात करने के मामले में राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ ने कड़ा रुख अपनाया है. राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) द्वारा दायर जनहित याचिका की अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने राजस्थान निर्वाचन आयोग सहित संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जवाब तलब किया है.
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी की ओर से अधिवक्ता मोती सिंह ने पक्ष रखा, जबकि राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता बी.एल. भाटी ने नोटिस स्वीकार किया. अदालत ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य निर्वाचन आयोग को निर्देशित किया है कि वह दो सप्ताह की तय समय-सीमा के भीतर अपना स्पष्टीकरण और जवाब प्रस्तुत करे.
गौरतलब है कि इस कानूनी कदम की मुख्य वजह नागौर जिले में नियमित एसपी की तैनाती न होना है.आरएलपी नेता अनिल बारूपाल ने हाईकोर्ट के पूर्व निर्देशों के अनुरूप निर्वाचन आयोग के समक्ष नियमित आईपीएस अधिकारी लगाने का औपचारिक अभ्यावेदन दिया था. इसके बावजूद सरकार द्वारा नागौर में नियमित एसपी की नियुक्ति नहीं किए जाने पर पार्टी को उच्च न्यायालय की शरण लेकर यह अवमानना याचिका दाखिल करनी पड़ी.
वही इस न्यायिक घटनाक्रम पर राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने कहा कि लोकतांत्रिक और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए पार्टी हर संवैधानिक व कानूनी मंच पर मजबूती से लड़ाई लड़ेगी. उन्होंने जोर देकर कहा कि आरएलपी मतदाताओं के अधिकारों, पारदर्शी प्रशासनिक व्यवस्था और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए इस मामले में आगे भी प्रभावी कानूनी पैरवी जारी रखेगी.














