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बाढ़ के बीच पीएम मोदी के जन्मदिन पर ‘आशीर्वाद का दीया’, बिहार में क्यों गरमाई सियासत?

17 सितंबर 2026
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बाढ़ के बीच पीएम मोदी के जन्मदिन पर ‘आशीर्वाद का दीया’, बिहार में क्यों गरमाई सियासत?

सरकारी संस्थानों में दीप जलाने के निर्देश पर RJD का सवाल, तेजस्वी यादव ने 100 करोड़ रुपये खर्च होने का लगाया आरोप, जवाब में सरकार ने अभियान को बताया प्रधानमंत्री की 25 वर्षों की जनसेवा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर बिहार में शुरू होने जा रहा ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम राजनीतिक विवाद में घिर गया है. 17 सितंबर से शुरू होने वाले महीनेभर के ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत राज्य के विभिन्न सार्वजनिक स्थानों, सरकारी संस्थानों और स्कूलों में दीप प्रज्वलन सहित कई कार्यक्रम आयोजित किए जाने हैं. बिहार सरकार के अनुसार यह अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन और जनसेवा के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित किया जा रहा है.

वहीं, विपक्षी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने सरकारी मशीनरी और स्कूलों को इस आयोजन से जोड़ने पर सवाल खड़े किए हैं. खास तौर पर ऐसे समय में जब बिहार के कई हिस्से बाढ़ की स्थिति से प्रभावित हैं, कार्यक्रम की प्राथमिकताओं और कथित खर्च को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है.

सरकारी संस्थानों में दीये जलाने के निर्देश से विवाद

विवाद की मुख्य वजह सरकारी विभागों और संस्थानों को दिए गए कार्यक्रम संबंधी निर्देश हैं. सामने आए आदेशों के मुताबिक स्कूलों और विभिन्न सरकारी परिसरों में निर्धारित समय पर दीप प्रज्वलन कराने की जिम्मेदारी अधिकारियों को दी गई है.

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, समस्तीपुर सहित कुछ जिलों में स्कूलों, पंचायत भवनों, अमृत सरोवरों, जीविका केंद्रों, आंगनवाड़ी केंद्रों, स्वास्थ्य केंद्रों और ब्लॉक कार्यालयों में कार्यक्रम आयोजित करने की जिम्मेदारियां अलग-अलग अधिकारियों को दी गई हैं. लाभार्थियों को भी अपने घरों और दुकानों पर दीप जलाने के लिए प्रोत्साहित करने की बात सामने आई है.

बिहार सरकार के व्यापक कार्यक्रम में 17 सितंबर को राज्य के जिलों, अनुमंडलों, प्रखंडों, पंचायतों और बूथ स्तर तक दीपोत्सव आयोजित करने तथा अधिक से अधिक जनभागीदारी सुनिश्चित करने की योजना बताई गई है.

RJD ने पूछा—सरकारी कर्मचारियों को क्यों जोड़ा जा रहा?

इसी व्यवस्था को लेकर RJD ने बिहार सरकार और BJP पर निशाना साधा है. पार्टी ने सरकारी आदेशों को सोशल मीडिया पर साझा करते हुए सवाल उठाया कि सरकारी विभागों और कर्मचारियों को प्रधानमंत्री के जन्मदिन से जुड़े कार्यक्रम में किस हद तक शामिल किया जाना चाहिए.

RJD का तर्क है कि सरकारी कर्मचारियों की प्राथमिक जिम्मेदारी प्रशासनिक और जनसेवा से जुड़े कार्यों को पूरा करना है. पार्टी ने यह भी सवाल उठाया कि क्या सरकारी संस्थानों का इस्तेमाल किसी राजनीतिक व्यक्तित्व के जन्मदिन से जुड़े आयोजन के लिए किया जाना उचित है. यह आरोप राजनीतिक दल की प्रतिक्रिया के रूप में सामने आया है; सरकार की ओर से अभियान को किसी एक पार्टी के कार्यक्रम के बजाय प्रधानमंत्री के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने से जुड़ा राज्यव्यापी अभियान बताया गया है.


बाढ़ के मुद्दे को लेकर तेजस्वी यादव का हमला

बिहार में बाढ़ की स्थिति ने इस राजनीतिक विवाद को और धार दे दी है. विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि राज्य में लाखों लोग बाढ़ से प्रभावित हैं और ऐसे समय में सरकार को राहत एवं बचाव कार्यों पर प्राथमिकता देनी चाहिए. तेजस्वी यादव ने दावा किया कि कार्यक्रम पर करीब 100 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं. उन्होंने इसे बाढ़ प्रभावित लोगों की जरूरतों के संदर्भ में सरकार की प्राथमिकताओं से जोड़ते हुए निशाना साधा. उनके बयान को लाइव हिन्दुस्तान ने भी रिपोर्ट किया है.

हालांकि, 100 करोड़ रुपये के खर्च का आंकड़ा तेजस्वी यादव का आरोप है. उपलब्ध सरकारी जानकारी में इस राशि को कार्यक्रम के आधिकारिक खर्च के रूप में पुष्ट नहीं किया गया है. इसलिए इस आंकड़े को तथ्य के बजाय आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए.

सरकार का पक्ष — 25 साल की जनसेवा का अभियान

दूसरी ओर, सरकार की ओर से ‘सेवा संकल्प अभियान’ को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन और जनसेवा के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर से जोड़ा गया है. बिहार सरकार के मुताबिक अभियान 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलेगा और इसमें 13 प्रमुख कार्यक्रम शामिल होंगे. ‘आशीर्वाद का दीया’ के अलावा स्कूलों में चित्रकला और भाषण प्रतियोगिताएं, ‘सेवा स्मरण’ के तहत योजनाओं एवं विकास कार्यों की जानकारी और अन्य जनभागीदारी वाले कार्यक्रम आयोजित किए जाने हैं.

सरकार का कहना है कि कार्यक्रमों का उद्देश्य बड़े स्तर पर जनभागीदारी सुनिश्चित करना और प्रधानमंत्री के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्षों में किए गए कार्यों एवं योजनाओं की जानकारी लोगों तक पहुंचाना है.

सरकारी कार्यक्रम या राजनीतिक आयोजन?

‘आशीर्वाद का दीया’ को लेकर मूल विवाद केवल दीप जलाने को लेकर नहीं है. असली सवाल सरकारी तंत्र की भूमिका और राजनीतिक कार्यक्रमों के बीच सीमा को लेकर उठ रहा है. एक तरफ सरकार इसे सेवा, जनभागीदारी और प्रधानमंत्री के 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन से जुड़ा अभियान बता रही है. दूसरी तरफ विपक्ष का कहना है कि सरकारी स्कूलों, कार्यालयों और कर्मचारियों को प्रधानमंत्री के जन्मदिन से जुड़े कार्यक्रमों में शामिल करना सरकारी संसाधनों और प्रशासनिक मशीनरी के इस्तेमाल का सवाल खड़ा करता है.

बाढ़ की स्थिति ने इस बहस को और संवेदनशील बना दिया है. ऐसे में आने वाले दिनों में राजनीतिक दलों के बीच यह मुद्दा राहत कार्य बनाम उत्सव, सरकारी तंत्र की भूमिका और सार्वजनिक धन के इस्तेमाल जैसे सवालों के इर्द-गिर्द और तेज हो सकता है.

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