UPI MDR (Merchant Discount Rate) को लेकर केंद्र सरकार के नए फैसले पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है. सरकार ने 15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा Person-to-Merchant (P2M) UPI लेनदेन पर 0.4% MDR लागू करने का फैसला किया है. इसकी अधिकतम सीमा ₹300 प्रति लेनदेन तय की गई है. सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य UPI के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम की दीर्घकालिक स्थिरता और विस्तार को बनाए रखना है. वहीं विपक्ष ने इस फैसले को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं.
राहुल गांधी ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
UPI MDR के मुद्दे पर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार की आलोचना की है. उन्होंने सरकार के फैसले को अमेरिका से जोड़ते हुए आरोप लगाया कि यह कदम अमेरिकी दबाव के सामने झुकने जैसा है. राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में सरकार से इस फैसले को वापस लेने की मांग की.
राहुल गांधी के इन आरोपों के जवाब में सरकार का पक्ष इससे अलग है. वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि UPI के नए नियम किसी विदेशी दबाव के कारण नहीं, बल्कि देश की डिजिटल भुगतान व्यवस्था की जरूरतों और उसके दीर्घकालिक संचालन को ध्यान में रखते हुए तैयार किए गए हैं.
विपक्ष ने भी उठाए सवाल
कांग्रेस के अलावा अन्य विपक्षी नेताओं ने भी MDR को लेकर सरकार की नीति पर सवाल उठाए हैं. विपक्ष की मुख्य चिंता यह है कि MDR भले ही सीधे ग्राहक से न लिया जाए, लेकिन व्यापारियों की लागत बढ़ने की स्थिति में इसका अप्रत्यक्ष असर कीमतों या डिजिटल भुगतान के इस्तेमाल पर पड़ सकता है.
दूसरी ओर सरकार का तर्क है कि छोटे व्यापारियों और आम यूजर्स को अतिरिक्त बोझ से बचाने के लिए कई श्रेणियों को इस व्यवस्था से बाहर रखा गया है. ₹2,000 तक के मर्चेंट भुगतान और Person-to-Person लेनदेन पहले की तरह शुल्क-मुक्त रहेंगे.
UPI का नया MDR नियम
नए ढांचे के तहत ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान पर 0.4% MDR लागू होगा. ₹75,000 या उससे अधिक के लेनदेन पर यह शुल्क अधिकतम ₹300 तक सीमित रहेगा. वहीं Person-to-Person यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को किए जाने वाले UPI भुगतान पर कोई MDR नहीं लगाया जाएगा. सरकार के अनुसार करीब 96% P2M लेनदेन भी इस बदलाव से प्रभावित नहीं होंगे.
महत्वपूर्ण बात यह है कि MDR को सरकार द्वारा वसूला जाने वाला टैक्स नहीं बताया गया है. वित्त मंत्रालय के अनुसार यह भुगतान व्यवस्था से जुड़े बैंकों और पेमेंट ऐप प्रदाताओं समेत इकोसिस्टम के प्रतिभागियों के बीच वितरित किया जाएगा, ताकि UPI के संचालन और विस्तार को समर्थन मिल सके.
UPI के भविष्य को लेकर क्यों अहम है यह फैसला?
UPI पिछले वर्षों में भारत के डिजिटल भुगतान ढांचे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है. ऐसे में MDR लागू करने का फैसला केवल शुल्क का मुद्दा नहीं, बल्कि UPI के संचालन की लागत, पेमेंट कंपनियों और बैंकों की भूमिका तथा डिजिटल भुगतान के भविष्य के मॉडल से भी जुड़ा है. एक तरफ केंद्र सरकार इसे UPI के दीर्घकालिक और टिकाऊ विकास की दिशा में उठाया गया कदम बता रही है, जबकि विपक्ष इसके संभावित आर्थिक प्रभाव और नीति के पीछे के कारणों पर सवाल उठा रहा है.
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इसका मर्चेंट्स, पेमेंट कंपनियों और डिजिटल भुगतान के व्यवहार पर क्या प्रभाव पड़ता है. फिलहाल UPI MDR का मुद्दा आर्थिक फैसले से आगे बढ़कर सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस का नया केंद्र बन गया है.
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