बिहार की राजनीति में विधान परिषद चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है. प्रमुख राजनीतिक दल अपने-अपने उम्मीदवारों के नाम घोषित कर रहे हैं. इसी क्रम में जन सुराज पार्टी ने भी पांच प्रत्याशियों के नाम का ऐलान किया है. इनमें पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से डॉ. दिव्या ज्योति की उम्मीदवारी ने खासा ध्यान खींचा है.
डॉ. दिव्या ज्योति पेशे से वकील होने के साथ-साथ शिक्षाविद् और सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर भी सक्रिय रही हैं. उनकी उम्मीदवारी ऐसे समय में सामने आई है, जब पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में लंबे समय से राजनीतिक मुकाबला मुख्य रूप से बीजेपी और अन्य प्रमुख दलों के बीच देखा जाता रहा है.
कौन हैं डॉ. दिव्या ज्योति?
डॉ. दिव्या ज्योति मूल रूप से पटना के बाढ़ अनुमंडल की रहने वाली हैं, जबकि उनकी ससुराल पटना जिले के अमहारा में बताई जाती है. वह कानून के क्षेत्र से जुड़ी होने के साथ शिक्षा और सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय हैं. वह चाणक्य कॉलेज ऑफ हायर स्टडीज में असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर कार्यरत हैं और चाणक्य फाउंडेशन की मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) भी हैं. उनकी सार्वजनिक सक्रियता का एक बड़ा हिस्सा शिक्षा और सामाजिक सरोकारों से जुड़ा रहा है.
डॉ. दिव्या ज्योति लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने, शिक्षकों के सम्मान एवं अधिकारों तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के विद्यार्थियों से जुड़े मुद्दों पर काम करने का दावा करती हैं. यही पृष्ठभूमि अब उनके चुनावी अभियान का भी प्रमुख आधार बन रही है.
निर्दलीय चुनाव लड़ने की थी तैयारी
डॉ. दिव्या ज्योति की राजनीतिक यात्रा इस चुनाव से ठीक पहले एक महत्वपूर्ण मोड़ से गुजरी. उन्होंने शुरुआत में पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने की तैयारी की थी और शिक्षक मतदाताओं के बीच जनसंपर्क अभियान भी शुरू कर दिया था.
हालांकि बाद में उन्होंने जन सुराज पार्टी की विचारधारा से जुड़ने का फैसला किया और पार्टी में शामिल हो गईं. इसके बाद जन सुराज ने उनकी शैक्षणिक और सामाजिक पृष्ठभूमि को देखते हुए उन्हें पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया.
तीन जिलों के शिक्षक मतदाताओं पर नजर
पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के तहत पटना, नालंदा और नवादा जिले आते हैं. ऐसे में डॉ. दिव्या ज्योति के सामने इन तीनों जिलों के शिक्षक मतदाताओं तक अपनी पहुंच मजबूत करने की चुनौती है. उनके अभियान में शिक्षकों के वेतन, सेवा शर्तों, अधिकारों और सम्मान जैसे मुद्दे प्रमुखता से सामने आ रहे हैं. शिक्षा क्षेत्र से जुड़े अनुभव को वह चुनावी मैदान में अपनी प्रमुख पहचान के तौर पर पेश कर रही हैं.
पटना शिक्षक सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला
डॉ. दिव्या ज्योति की एंट्री के बाद पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का मुकाबला तीन प्रमुख उम्मीदवारों के बीच दिखाई दे रहा है. बीजेपी ने यहां अपने वरिष्ठ नेता प्रो. नवल किशोर यादव पर फिर भरोसा जताया है. वह इस सीट से लगातार पांच बार विधान परिषद सदस्य चुने जा चुके हैं और छठी बार चुनाव मैदान में हैं. ऐसे में बीजेपी के लिए यह सीट लंबे समय से महत्वपूर्ण रही है.
वहीं, RJD ने पूर्व मंत्री आरएन सिंह के बेटे डॉ. संजीव कुमार सिंह को उम्मीदवार बनाया है. डॉ. संजीव कुमार सिंह पहले JDU से जुड़े रहे हैं और परबत्ता विधानसभा क्षेत्र से विधायक भी रह चुके हैं. अब जन सुराज की ओर से डॉ. दिव्या ज्योति के मैदान में उतरने से चुनावी मुकाबले में एक नया आयाम जुड़ गया है.
शिक्षक मुद्दों पर टिका चुनावी फोकस
इस चुनाव में डॉ. दिव्या ज्योति शिक्षकों से जुड़े मुद्दों को अपनी प्राथमिकता के तौर पर सामने रख रही हैं. शिक्षकों के वेतन, सेवा शर्तों, अधिकारों और सामाजिक सम्मान जैसे विषय उनके अभियान के केंद्र में हैं. उनकी उम्मीदवारी का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह सीट शिक्षक मतदाताओं के बीच लंबे समय से मजबूत राजनीतिक पकड़ वाले उम्मीदवारों के बीच मुकाबले का मैदान रही है. ऐसे में एक शिक्षाविद् और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में डॉ. दिव्या ज्योति की राजनीतिक एंट्री पर सबकी नजर है.
अब देखना यह होगा कि शिक्षक मतदाताओं के बीच उनकी सामाजिक और शैक्षणिक पहचान किस तरह चुनावी समर्थन में बदलती है. फिलहाल इतना जरूर है कि जन सुराज के इस फैसले ने पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के मुकाबले को बिहार की चर्चित चुनावी सीटों में शामिल कर दिया है.












