बंगाल की हार और कोरोना की मार के बाद फीका पड़ा मोदी-शाह का जादू, संघ की शरण में पहुंची भाजपा

उत्तर प्रदेश में योगी मंत्रिमंडल विस्तार पर भाजपा हाईकमान अभी तक क्यों नहीं ले पा रहा है कोई फैसला?, टीएमसी छोड़कर भाजपा में आए नेताओं की घर वापसी ने बढ़ाई पीएम मोदी की चिंताएं, बड़ी से बड़ी मुश्किलों को अपने 'शह-मात' के खेल से सुलझाने वाले गृहमंत्री अमित शाह आए 'मौन' की मुद्रा में, ऐसे में भाजपा हाईकमान भी संघ की शरण में है (संघम शरणम गच्छामि), मोहन भागवत ने संभाली कमान

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भाजपा हाईकमान संघ की शरण में (संघम शरणम गच्छामि)
भाजपा हाईकमान संघ की शरण में (संघम शरणम गच्छामि)
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Politalks.News/UP-Bharat. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को लग रहा है कि भारतीय जनता पार्टी में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर योगी मंत्रिमंडल विस्तार पर भाजपा हाईकमान अभी तक क्यों फैसला नहीं ले पा रहा है? इसके साथ बंगाल में चुनाव से पहले टीएमसी छोड़कर भाजपा में आए नेताओं की घर वापसी को लेकर पीएम मोदी की चिंताएं बढ़ा दी हैं. केंद्रीय नेतृत्व को भी अब लग रहा है कि भाजपा का जादू ‘फीका‘ होता जा रहा है. इसी को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नेता दिल्ली से लेकर लखनऊ तक ‘मोर्चा‘ संभाले हुए हैं. संघ के शीर्ष नेता लगातार बैठक कर भाजपा के ‘भविष्य‘ के लिए रणनीति बनाने में जुटे हुए हैं. यानी कह सकते हैं कि ‘भाजपा हाईकमान भी संघ की शरण में है (संघम शरणम गच्छामि)‘. इसी को लेकर आज राजधानी दिल्ली में मोहन भागवत के नेतृत्व में तीन दिनी ‘महामंथन‘ शुरू हो गया है.

बता दें कि पश्चिम बंगाल में चुनाव नतीजे और कोरोना महामारी के बाद ‘भाजपा का ग्राफ लगातार गिरता जा रहा है‘. भाजपा की उम्मीदों और रणनीति पर पश्चिम बंगाल के चुनाव नतीजों ने पूरी तरह ‘पानी फेर दिया‘. इसका सीधा असर पीएम मोदी और पार्टी के ‘चाणक्य‘ माने जाने वाले अमित शाह पर पड़ा है. भाजपा की बड़ी से बड़ी मुश्किलों को अपने ‘शह-मात‘ के खेल से सुलझाने वाले गृहमंत्री अमित शाह ‘मौन‘ की मुद्रा में आ गए हैं. बंगाल हार के सदमे बाहर नहीं निकल आए रहे अमित शाह ने पिछले एक महीने से शाह ने कोई बड़ा राजनीतिक बयान भी नहीं दिया है.

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दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कोरोना महामारी के दौरान बिगड़े सिस्टम को लेकर विपक्ष के निशाने पर हैं. इसके अलावा बंगाल चुनाव में टीएमसी की बड़ी जीत के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी लगातार प्रधानमंत्री मोदी को घेरने में जुटी हुई हैं. बंगाल के जख्मों का असर सीधे ही उत्तर प्रदेश पर भी पड़ा है, क्योंकि यहां भी अगले आठ महीने के भीतर होने वाले विधानसभा चुनाव की दस्तक शुरू हो चुकी है. योगी सरकार में भी कई दिनों से उथल-पुथल मची हुई है लेकिन पीएम मोदी, अमित शाह और पार्टी के अध्यक्ष जेपी नड्डा अभी तक न यूपी गए हैं और न यह समझ पा रहे हैं कि आगामी विधानसभा चुनाव तक योगी सरकार को जनता के सामने किस रूप में ‘प्रकट‘ किया जाए.

उत्तर प्रदेश में भी ‘महामारी के दौरान खराब हेल्थ सिस्टम मुख्यमंत्री योगी पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे लोगों की योगी सरकार के प्रति भारी नाराजगी व्याप्त है’. 2014 के बाद भाजपा हाईकमान के साथ रणनीतिकार पहली बार किसी राज्य (उत्तरप्रदेश) को लेकर मैराथन बैठकों में लगे हुए हैं. लेकिन फिर भी अपने फैसले पर नहीं पहुंच पा रहे हैं. भाजपा और योगी सरकार के लिए सब कुछ ‘दुरुस्त‘ करने के लिए पिछले दिनों से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और पार्टी के संगठन के नेताओं ने ‘कमान‘ अपने हाथों में ले ली है. पहले संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय हसबोले उसके बाद भाजपा के महासचिव संगठन बीएल संतोष ने मुख्यमंत्री योगी और उनके मंत्रियों को ‘खंगाल‘ डाला है. उसके बाद इन संघ के नेताओं ने योगी सरकार की जो ‘रिपोर्ट‘ तैयार की है वह ‘संतोषजनक‘ नहीं कही जा सकती है.

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संघ के शीर्ष नेता जुटे भाजपा हाईकमान के लिए फार्मूला तैयार करने में
पिछले दिनों लखनऊ में संघ के नेताओं की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनके मंत्रियों के साथ हुई लंबी मंत्रणा का फीडबैक आज से दिल्ली में शुरू हुए तीन दिवसीय (3 से 5 जून) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के महामंथन में रखा गया. यहां हम आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश विधानसभा 2022 में होने वाले चुनाव से पहले बीजेपी के महामंत्री बीएल संतोष ने सरकार और संगठन के पदाधिकरियों से मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उप मुख्यमंत्रियों केशव प्रसाद मौर्य और दिनेश शर्मा और डेढ़ दर्जन मंत्रियों से अलग-अलग मिलकर फीडबैक लिया गया है. तीन दिनों तक चले मैराथन बैठकों के दौर के बाद बीएल संतोष अब दिल्ली में हैं.

अब सियासी गलियारों में चर्चा शुरू हो गई है कि थोड़ा बहुत ही सही विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए बीजेपी नेतृत्व यूपी में अच्छा खासा बदलाव चाहता है. राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ के गुरुवार से दिल्‍ली में शुरू हुए तीन दिवसीय महामंथन में आगामी यूपी चुनाव से लेकर बंगाल मेंं हिंसा पर चर्चा होनी है. बैठक में सरसंघचालक मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले, पांच सहसरकार्यवाह कृष्ण गोपाल, मनमोहन वैद्य, मुकुंद, अरुण कुमार और रामदत्त चक्रधर मौजूद हैं, उनके अलावा इसमें सुरेश सोनी, भैय्याजी जोशी और भागैया भी भाग ले रहे हैं. भले ही संघ के नेता इसे रुटीन बैठक बता रहे हैं लेकिन असल मुद्दा इसमें बंगाल से लेकर यूपी की सियासत का छाया हुआ है.

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इसके साथ ही इस महामंथन में देश की राजनीतिक परिस्थितियों पर भी चर्चा होनी है. संघ के इस महामंथन में सिर्फ संघ के शीर्ष नेता ही मौजूद रहेंगे. बीजेपी या अन्य किसी संगठन के नेता शामिल नहीं होंगे. सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले उत्तर प्रदेश के हालात पर फीडबैक देंगे. पिछले दिनों दत्तात्रेय यूपी को लेकर सक्रिय हैं, उसे देखते हुए कहा जा सकता है, संघ की इस बैठक में योगी सरकार, राजनीतिक और सामाजिक हालात पर चर्चा अहम मुद्दा होगी. गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश को लेकर पिछले दिनों आरएसएस और बीजेपी के बीच दिल्ली में बड़ी बैठक हो चुकी है. उसके बाद दत्तात्रेय होसबले ने लखनऊ का दौरा भी किया और वहां के हालात का फीडबैक लिया था. पिछले तीन दिनों से बीजेपी के संगठन महामंत्री बीएल संतोष भी लखनऊ में कई बैठक कर चुके हैं. फीडबैक का परिणाम क्या होगा, इसके लिए निगाहें दिल्ली में हो रही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के महामंथन पर टिकी हुई है.

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