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यमुना जल समझौते पर गहलोत का भजनलाल सरकार पर बड़ा हमला, कहा- गुप्त रखा गया नया MOA तुरंत सार्वजनिक हो

29 जून 2026
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यमुना जल समझौते पर गहलोत का भजनलाल सरकार पर बड़ा हमला, कहा- गुप्त रखा गया नया MOA तुरंत सार्वजनिक हो

यमुना जल समझौते पर गहलोत सख्त, कहा- 'बंद कमरों में नहीं तय होंगे राजस्थान के जल अधिकार'


Ashok Gehlot big Statement: राजस्थान और हरियाणा के बीच यमुना जल समझौते को लेकर हाल ही में हस्ताक्षरित हुए नए एमओए (MOA) को लेकर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है. राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए इस समझौते को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. गहलोत ने सरकार पर आरोप लगाया है कि उसने हरियाणा के साथ किए गए इस नए समझौते को आश्चर्यजनक रूप से गुप्त रखा है. पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने इस रवैये पर आपत्ति जताते हुए मांग की है कि इस समझौते की प्रति तत्काल प्रभाव से सार्वजनिक की जाए.

कांग्रेस नेता और पूर्व सीएम गहलोत ने कहा कि राजस्थान की जनता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि उनके हितों से जुड़े इस महत्वपूर्ण जल समझौते में आखिर किन शर्तों पर सहमति बनी है. उन्होंने सरकार की कार्यप्रणाली और मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि जनता से ऐसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील दस्तावेज़ को छिपाना सीधे तौर पर लोकतांत्रिक पारदर्शिता के विरुद्ध है. गहलोत ने स्पष्ट किया कि राजस्थान के हित सर्वोपरि हैं और प्रदेश के जल अधिकारों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता या अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी. 

अशोक गहलोत ने अपने बयान में करीब ढाई वर्ष पूर्व (17 फरवरी 2024) किए गए एमओयू (MoU) का भी प्रमुखता से जिक्र किया. उन्होंने सरकार को घेरते हुए कहा कि उस पुराने एमओयू को भी लोकसभा चुनावों तक जनता से जानबूझकर छिपाकर रखा गया था. गहलोत के अनुसार, जब वह समझौता सामने आया तो उसमें यह हैरान करने वाली शर्त थी कि पहले हरियाणा को 24,000 क्यूसेक पानी दिया जाएगा और उसके बाद बचा हुआ शेष पानी ही राजस्थान के हिस्से में आएगा, जो कि राजस्थान के हितों पर कुठाराघात था.

अपने बयान में अशोक गहलोत ने कड़ी आशंका जताई है कि यदि नए एमओए (MOA) में भी पुराने समझौते जैसी ही शर्तें रखी गई हैं, तो यह सीधे तौर पर 1994 में हुए मूल समझौते की भावना का खुला उल्लंघन है. उन्होंने याद दिलाया कि 1994 के ऐतिहासिक समझौते में यह स्पष्ट प्रावधान है कि यमुना के जल का वितरण सभी भागीदार राज्यों के बीच 'प्रो राटा बेसिस' (उपलब्ध जल के अनुपात में) के आधार पर ही होगा. इस मूल समझौते के तहत जल बंटवारे में किसी भी एक राज्य को प्राथमिकता या एकतरफा विशेषाधिकार देने का कोई नियम नहीं है. 

इन तमाम आशंकाओं और तथ्यों का हवाला देते हुए पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य सरकार से पुरजोर मांग की है कि हस्ताक्षरित किए गए नए एमओए को बिना किसी देरी के जनता के सामने लाया जाए. उन्होंने कहा कि सरकार को प्रदेश की जनता के सामने जल बंटवारे की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट करनी चाहिए. गहलोत ने अपनी बात का समापन करते हुए कहा कि पानी जैसे जीवनदायी और संवेदनशील मुद्दे पर राज्य के अधिकारों को ताक पर रखकर किया गया कोई भी समझौता राजस्थान की जनता को कतई स्वीकार नहीं होगा.

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