राष्ट्रीय
बागवानी बोर्ड (एनएचबी) की सब्सिडी योजना को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है.
केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी को उनके व्यावसायिक बागवानी (पॉलीहाउस) प्रोजेक्ट
के लिए 99.60 लाख रुपए की सब्सिडी मिलने के दावे के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार और
भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा है. वहीं, बीजेपी और संबंधित मंत्री ने आरोपों को
खारिज करते हुए कहा है कि पूरी प्रक्रिया निर्धारित नियमों और पात्रता के अनुसार हुई.
इस
मामले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने
केंद्र की मोदी सरकार पर सवाल उठाए. उन्होंने सोशल मीडिया मंच X पर लिखा कि यह मामला
मोदी सरकार में कथित रूप से उभर रहे भ्रष्टाचार के नए मॉडल और ‘हितों के टकराव’
का उदाहरण बताया जा रहा है.
उन्होंने
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी सवाल करते हुए कहा कि ऐसे मामलों पर सरकार की चुप्पी
कई तरह के राजनीतिक सवाल पैदा कर रही है.
गहलोत
ने उठाया कि यदि कृषि राज्य मंत्री के स्तर पर अपने मंत्रालय से संबद्ध योजना के तहत
इतनी बड़ी सब्सिडी स्वीकृत होती है, तो इससे पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल खड़े होते
हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि जहां सामान्य किसान सरकारी प्रक्रियाओं में लंबे समय तक
प्रयास करता है, वहीं प्रभावशाली लोगों को प्राथमिकता मिलने की धारणा बन रही है.
क्या
है पूरा मामला?
दावे
के अनुसार केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी डीडवाना-कुचामन जिले के पीह क्षेत्र
स्थित अपने फार्म पर व्यावसायिक बागवानी परियोजना संचालित कर रहे हैं, जहां पॉलीहाउस
के माध्यम से खीरे की खेती की जा रही है.
रिपोर्टों
के अनुसार यह परियोजना राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड की सब्सिडी योजना के तहत स्वीकृत हुई.
फार्म परिसर में प्रदर्शित सूचना बोर्ड पर परियोजना को कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय
के अधीन राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड की सहायता प्राप्त होना दर्शाया गया है और लाभार्थी
के रूप में भागीरथ चौधरी का नाम दर्ज बताया गया है.
भागीरथ
चौधरी ने क्या कहा?
केंद्रीय
मंत्री भागीरथ चौधरी ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उन्हें सभी निर्धारित गाइडलाइन
और पात्रता शर्तों के अनुरूप सब्सिडी स्वीकृत हुई है. उन्होंने कहा कि वे लंबे समय
से आधुनिक कृषि पद्धतियों पर कार्य कर रहे हैं और आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी
रही.
उन्होंने
यह भी कहा कि परियोजना और सब्सिडी से संबंधित विवरण सार्वजनिक रूप से फार्म पर प्रदर्शित
किए गए हैं और इसमें किसी प्रकार की गोपनीयता नहीं रखी गई है.
बचाव
में उतरी बीजेपी
प्रदेश
बीजेपी अध्यक्ष मदन राठौड़ ने भी विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि सब्सिडी
स्वीकृत करने वाली समिति में संबंधित मंत्री की कोई भूमिका नहीं थी. उन्होंने दावा
किया कि भागीरथ चौधरी ने पूर्व में भी कई बार आवेदन किया था, लेकिन आवश्यक शर्तें पूरी
नहीं होने के कारण आवेदन स्वीकृत नहीं हुए थे. बाद में सभी नियमों और पात्रता मानकों
को पूरा करने के बाद ही उन्हें योजना का लाभ मिला.
राजनीतिक
बहस के केंद्र में 'हितों का टकराव'
इस
पूरे विवाद के केंद्र में हितों के टकराव का प्रश्न सामने आया है. विपक्ष का कहना है
कि मंत्रालय से जुड़े व्यक्ति को उसी व्यवस्था के तहत लाभ मिलने पर सवाल उठना स्वाभाविक
है, जबकि सरकार का पक्ष है कि यदि सभी प्रक्रियाएं नियमों के अनुरूप पूरी हुई हैं तो
केवल पद के आधार पर लाभ को गलत नहीं माना जा सकता.
अब
यह मुद्दा राजनीतिक बहस का विषय बन चुका है और आने वाले दिनों में इस पर विपक्ष और
सरकार के बीच बयानबाजी और तेज होने की संभावना है.











