भारत के विदेश मंत्रालय द्वारा पासपोर्ट को नागरिकता का प्रमाण न मानने को लेकर देशभर में एक बहस छिड़ गयी है. हाल में विदेश मंत्रालय ने पासपोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने आधार कार्ड को नागरिकता का प्रमाण पत्र मानने से इनकार कर दिया था. अब तक पासपोर्ट को देश का सबसे पुख्ता सरकारी दस्तावेज माना जाता रहा है. इस मुद्दे पर कांग्रेस के बाद अब सांसद शशि थरूर ने मोदी सरकार को घेरना शुरू कर दिया है. उनका कहना है कि अगर पासपोर्ट से देश के भीतर नागरिकता साबित नहीं होती, तो फिर किस दस्तावेज से होगी.
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा, ‘केंद्र सरकार का ये कहना की पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है, एक बेतुका कानूनी विरोधाभास है. सरकार का फैसला भ्रम पैदा कर रहा है. इसने एक राजनीतिक बहस शुरू कर दी है.'
थरूर ने दिए तीन सुझाव :
1. पासपोर्ट और आधार कार्ड दोनों को नागरिकता का अंतिम प्रमाण माना जाना चाहिए, जब तक कि सरकार उन्हें रद्द या वापस न ले.
2. भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) गैर-भारतीय निवासियों के लिए अलग पहचान वाला आधार कार्ड जारी करे. इससे सामान्य भारतीय आधार कार्ड और वैध भारतीय पासपोर्ट को नागरिकता के पर्याप्त प्रमाण के रूप में स्वीकार किया सकेगा.
3. SIR की जगह NRC (या SRI - आपके मूल संदर्भ के अनुसार) में होने वाले विवाद कम होंगे, प्रशासनिक कामकाज आसान होगा और नागरिकों को अपनी पहचान और नागरिकता को लेकर कानूनी स्पष्टता मिलेगी.
कांग्रेस भी साध चुकी है निशाना :
इससे पहले कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत और वरिष्ठ वकील और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल भी इसी मुद्दे पर सरकार की घेराबंदी कर चुके हैं. गीतकार और स्क्रिप्ट राइटर जावेद अख्तर ने पूछा कि जब पासपोर्ट को नागरिकता का 100% अकेला और अंतिम सबूत नहीं माना जाता, तो ऐसा कानून क्यों लाया जा रहा है.
क्या है असल मसला :
दरअसल, 14वीं पासपोर्ट सेवा दिवस पर केंद्र सरकारी की ओर से विदेश मंत्रालय ने कहा कि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं, ये सिर्फ एक यात्रा दस्तावेज है. पासपोर्ट केवल अंतरराष्ट्रीय यात्रा की सुविधा के लिए जारी किया जाता है. इससे पहले SIR से जुड़ी सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट भी कह चुका है कि आधार कार्ड पहचान का दस्तावेज है, नागरिकता का नहीं. 'राष्ट्रीयता' आपकी पहचान होती है जबकि 'नागरिकता' आपके अधिकार और जिम्मेदारियां तय करती है.
विदेश मंत्रालय ने साफ किया कि पासपोर्ट मुख्य रूप से एक यात्रा दस्तावेज है, जो विदेश में धारक की राष्ट्रीयता को दर्शाता है. कानूनी रूप से नागरिकता 'नागरिकता कानून' के तहत तय होती है, जबकि पासपोर्ट 'पासपोर्ट कानून' के तहत जारी होता है और यह हर परिस्थिति में अपने आप में नागरिकता का अंतिम सबूत नहीं होता है.
सरकार के मुताबिक, पासपोर्ट केंद्र सरकार द्वारा जारी किया गया एक अंतरराष्ट्रीय पहचान पत्र है, जिसका मुख्य इस्तेमाल भारत से बाहर किसी भी देश में यात्रा करने के लिए होता है. आसान शब्दों में कहें तो विदेश में कानूनी एंट्री करने और वहां किसी भी मुसीबत में फंसने पर भारत सरकार से मदद पाने के लिए पासपोर्ट ही सबसे जरूरी दस्तावेज है. हालांकि सरकार ने यह स्पष्ट नहीं किया कि फिर कौन सा दस्तावेज नागरिकता का सबूत है.
नागरिकता साबित करने वाला कोई दस्तावेज नहीं
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर किस दस्तावेज से 'भारतीय नागरिकता' को साबित किया जा सकता है? इसका जवाब है कि किसी भी पहचान पत्र से अपने आपको भारतीय नागरिक साबित नहीं कर सकते. आधार, वोटर आईडी और ड्राइविंग लाइसेंस जैसे दस्तावेज खास कामों के लिए जारी किए जाते हैं: यथा पहचान की जांच, चुनाव में रजिस्ट्रेशन या गाड़ी चलाने की अनुमति. इन्हें नागरिकता तय करने के लिए नहीं बनाया गया है, इसलिए इन्हें अपने आप में नागरिकता का पक्का सबूत नहीं माना जाता है. अब इस सवाल के जवाब में राजनीति तेज होते दिख रही है.













