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मनरेगा पर भड़के टीकाराम जूली! बोले- BJP शासित राज्य विरोध में, फिर राजस्थान में नई योजना क्यों?

02 जुलाई 2026
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मनरेगा पर भड़के टीकाराम जूली! बोले- BJP शासित राज्य विरोध में, फिर राजस्थान में नई योजना क्यों?

मनरेगा पर मचा घमासान! टीकाराम जूली ने भजनलाल सरकार से पूछा- BJP शासित राज्य ही नहीं मान रहे, तो राजस्थान क्यों?

Rajasthan Politics: राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने राज्य की भाजपा सरकार द्वारा मनरेगा की जगह प्रस्तावित वीबी-जी राम जी योजना को लेकर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर बड़ा हमला बोला है. कांग्रेस नेता जूली ने कहा कि जब इस नई योजना के फंडिंग पैटर्न पर खुद भाजपा शासित राज्यों ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, तब राजस्थान सरकार आखिर प्रदेश की जनता को किस आधार पर इस योजना के सपने दिखा रही है. उन्होंने मुख्यमंत्री से पूछा कि क्या वह इस योजना के कारण राज्य पर पड़ने वाले अतिरिक्त आर्थिक बोझ का समर्थन करते हैं.

कांग्रेस नेता टीकाराम जूली ने कहा कि मीडिया रिपोर्टों के अनुसार भाजपा शासित बिहार और मध्य प्रदेश समेत अन्य राज्यों ने भी इस योजना के वित्तीय ढांचे पर आपत्ति जताई है. राज्यों का कहना है कि योजना में राज्यों पर डाले गए 40 प्रतिशत हिस्से के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में 125 दिनों का रोजगार उपलब्ध कराना व्यावहारिक रूप से बेहद कठिन होगा. उन्होंने सवाल उठाया कि जब भाजपा की अपनी सरकारें ही इस मॉडल को लेकर आशंकित हैं, तो राजस्थान सरकार इस मुद्दे पर अपना स्पष्ट रुख क्यों नहीं बता रही है.

नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने मनरेगा के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि कांग्रेस की यूपीए सरकार ने महात्मा गांधी के 'सर्वोदय' के सिद्धांत से प्रेरित होकर इस कानून को लागू किया था, जिसने ग्रामीण भारत को सामाजिक सुरक्षा का मजबूत आधार दिया. उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान जब शहरों में रोजगार के अवसर खत्म हो गए थे, तब मनरेगा ने करोड़ों ग्रामीण परिवारों को आर्थिक संबल दिया और उनकी आजीविका बचाई. ऐसे सफल मॉडल को केवल नाम बदलने और राजनीतिक कारणों से खत्म करने की कोशिश ग्रामीण गरीबों के हितों के खिलाफ है.

टीकाराम जूली ने यह भी याद दिलाया कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने वर्ष 2022-23 के बजट में बिना किसी प्रचार के मनरेगा के तहत रोजगार के दिनों को 100 से बढ़ाकर 125 दिन कर दिया था. उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान भाजपा सरकार केंद्र की अधूरी और अव्यावहारिक योजनाओं का अंधानुकरण कर रही है, जिसका खामियाजा राजस्थान के ग्रामीण मजदूरों और राज्य के खजाने को भुगतना पड़ेगा. उन्होंने मांग की कि सरकार पहले अपनी ही पार्टी के राज्यों द्वारा उठाए गए वित्तीय और तकनीकी सवालों का जवाब प्रदेश की जनता को दे, उसके बाद नई योजना को लागू करने की बात करे.

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