कांग्रेस शासित कर्नाटक की सियासत में एक बड़ा उलटफेर होने जा रहा है. राज्य के उप-मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री की कुर्सी सौंपी जा रही है, जबकि वर्तमान सीएम सिद्धारमैया इसी हफ्ते इस्तीफा देकर राज्यसभा जाने की तैयारी कर रहे हैं. सिद्धारमैया को दिल्ली में बड़ी राष्ट्रीय भूमिका निभाने को कहा है. सिद्धारमैया ने इस बात के लिए हामी भी भरी है.
कर्नाटक कांग्रेस में बीते एक साल से 'मुख्यमंत्री' पद पर खींचतान चल रही थी.
डीके समर्थकों का दावा है कि 2023 में केंद्रीय नेतृत्व ने ढाई-ढाई साल की सत्ता का
फॉर्मूला दिया था, जबकि सिद्धारमैया समर्थक
इस बात के लिए मना कर रहे थे. अब सभी स्थितियां स्पष्ट हो चुकी हैं. इसके साथ ही
'पॉलिटॉक्स न्यूज' की उस खबर पर भी पुष्टि की मुहर लग चुकी है, जिसमें दावा किया गया
था कि 'डीके ही कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री होंगे.'
पत्रकारिता
में 'विश्वस्त' खबरों के सूत्र 'पॉलिटॉक्स न्यूज' ने पिछले साल 25 नवंबर, 2025 को
'सिद्दारमैया की जाएगी कुर्सी? डीके शिवकुमार बनेंगे मुख्यमंत्री? कर्नाटक कांग्रेस
में महाभारत हुई तेज!' शीर्षक से पहले ही दावा किया था कि डीके ही कर्नाटक के अगले
सीएम बनेंगे. आज यह दावा पूरी तरह से सच साबित हो रहा है. सिद्धारमैया के कुर्सी छोड़ते
ही कांग्रेस के इकलौते 'ओबीसी मुख्यमंत्री' की विदाई हो रही है. हालांकि सिद्धारमैया
के करीबी एवं समर्थित नेता 'नेतृत्व परिवर्तन' के फैसले से खुश नहीं हैं.
दिल्ली
आलाकमान के फैसले का सम्मान
बता
दें कि सिद्दारमैया और डीके की मंगलवार को दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन
खड़गे और सांसद राहुल गांधी के साथ 6 घंटे तक बैठक हुई. बैठक में राहुल गांधी ने सिद्धारमैया
से सीएम पद से इस्तीफा देने का कहा और उन्हें राज्यसभा भेजने का ऑफर दिया. कुछ समर्थकों
से चर्चा के बाद सिद्धारमैया ने कहा कि वे हाईकमान का फैसला मानेंगे. उन्होंने गुरुवार
सुबह मंत्रियों को ब्रेकफास्ट मीटिंग के लिए बुलाया है. इसी दिन सिद्धारमैया इस्तीफा
दे सकते हैं.
सिद्धारमैया
के बेटे को मंत्री पद का ऑफर
माना
जा रहा है कि कांग्रेस 2028 के चुनाव के हिसाब से नए सिरे से तैयार करना चाहती है.
नेतृत्व जानता है कि अधिकतर विधायक सिद्धारमैया के साथ हैं. वे कांग्रेस के एकमात्र
ओबीसी सीएम भी हैं. ऐसे में पार्टी ये बदलाव बेहद सावधानी से करना चाहती है, ताकि सिद्धारमैया
का सम्मान बना रहे और बगावत की स्थिति न बने. भरपायी के लिए सिद्धारमैया के बेटे को
मंत्री पद का ऑफर दिया गया है.
क्या
है आगामी रणनीति
कर्नाटक
में 2028 में विधानसभा चुनाव होने हैं. सिद्धारमैया तब 80 साल के हो जाएंगे. फिलहाल
वे 78 वर्ष के हैं. अब शीर्ष नेतृत्व के साथ स्थानीय युवा नेता भी नेतृत्व परिवर्तन
का समर्थन कर रहे थे. प्रियंका गांधी भी इसी के पक्ष में थी. चेहरा बदलकर पार्टी सत्ता-विरोधी
भावना भी थामना चाहेगी. वहीं इस मुद्दों को सुलझाकर कांग्रेस ने पार्टी के भीतर पनप
रहे अलगाव को भी नियंत्रित करने की कोशिश की है.
हालांकि
सिद्धारमैया के समर्थकों की नाराजगी को देखते हुए आलाकमान पूरी तरह से सतर्क है. कर्नाटक
के स्थानीय नेता स्थिति पर नजर रखे हुए हैं. अब देखना ये है कि आपसी सहमति से 'कर्नाटक
में नेतृत्व परिवर्तन' ठीक ठाक तरीके से संभव हो जाता है या फिर पंजाब जैसी संभावित
सियासी परिस्थितियां डीके के मंसूबों पर भारी फेर देंगी!













