पीके शेखर बाबू की जीवनी (PK Sekar Babu Biography in Hindi)
PK Sekar Babu Latest News - पीके शेखर बाबू तमिलनाडु के एक बड़े चेहरे वाले नेता है, जो चार बार जीतकर विधायक बन चुके है. 2021 की जीत के बाद उन्हें राज्य के कैबिनेट में स्थान मिला था और उन्हें हिंदू धार्मिक एवं धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग का मंत्री बनाया गया था. 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में एक बार फिर से वे डीएमके के टिकट पर हार्बर सीट से चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की. 2021 में उन्होंने उत्तर भारतीयों को लेकर एक विवादित बयान दिया था और अपने बयान में कहा था कि उन्हें उत्तर भारतीय वोट नहीं देते है फिर भी वे उनके लिए काम करेंगे. दरअसल तमिलनाडु में विशेषकर उनके विधानसभा क्षेत्र में राजस्थान सहित उत्तर भारतीयों की एक बड़ी आबादी है. इस लेख में हम आपको पीके शेखर बाबू के जीवन परिचय (PK Sekar Babu Biography in Hindi) के बारें में जानकारी देने वाले है.
पीके शेखर बाबू जन्म और परिवार (PK Sekar Babu Birth & Family)
पीके शेखर बाबू का जन्म तमिलनाडु में हुआ था. उनके पिता का नाम कृष्णासामी. पी था. वे विवाहित है और उनकी पत्नी का नाम एस. शांति हैं, जो रियल एस्टेट से जुड़ी है. उनके तीन बच्चे है, उनके नाम पीएस विग्नेश, पीएस जया कल्याणी और पीएस जयसिम्हन है. पीके शेखर बाबू धर्म से हिन्दू है. उनपर 25 आपराधिक मामलें दर्ज है.
पीके शेखर बाबू शिक्षा (PK Sekar Babu Education)
पीके शेखर बाबू 10वीं उत्तीर्ण हैं, उन्होंने वर्ष 1979 में कोट्टी मु. अप्पुचेत्तियार हाई स्कूल, चेन्नई से 10वीं की थी.
पीके शेखर बाबू राजनीतिक करियर (PK Sekar Babu Political Career)
पीके शेखर बाबू की राजनीतिक यात्रा नब्बे के दशक से आरंभ हुई. इन्ही वर्षो में वे एआईएडीएमके (द्रविड़ मुन्नेत्र कज़गम) में शामिल हो गए. 2001 में वे एआईएडीएमके के टिकट पर राज्य के 'राधाकृष्णन नगर विधानसभा क्षेत्र' से उम्मीदवार बनाये गए. इस चुनाव में पहली बार उनकी जीत हुई और इसके साथ ही उन्होंने राज्य विधानसभा में अपनी उपस्थित दर्ज की. इस चुनाव में उनका मुख्य मुकाबला द्रविड़ मुन्नेत्र कज़गम यानि डीएमके के एसपी सरगुना पांडियन से था. चुनाव में उन्हें कुल 74,888 आये जबकि उनकी विरोधी पार्टी द्रमुक को 47,556 मत आये. अपने पहले ही चुनाव में पीके शेखर बाबू ने अच्छी बढ़त से जीत दर्ज की थी, इसलिए यह स्पष्ट हो गया था कि क्षेत्र में उनकी पकड़ है. दक्षिण की राजनीति उत्तर भारत से अलग रही है और उसपर से भी तमिलनाडु जैसे राज्य में तो आज भी ज्यादा बदलाव देखने को नहीं मिल रहा है. देश की सबसे बड़ी पार्टी भाजपा अभी भी यहाँ अपनी उपस्थिति के लिए संघर्ष कर रही है.
शेखर बाबू 2006 में भी इसी सीट से एक बार फिर से विजयी हुए, पर इस बार राजनीतिक हवा कुछ अलग थी. अब राज्य में विशेषकर इस विधानसभा में कांग्रेस सक्रिय हो गई थी. परिणाम यह हुआ कि इस बार उनका सीधा मुकाबला कांग्रेस से था और पिछले चुनाव के मुकाबले इस बार उन्हें कम बहुमत से जीत हासिल हुई.
राज्य में होने वाले अगले विधानसभा चुनाव से ठीक कुछ दिन पहले वे जनवरी 2011 में अन्ना द्रविड़ मुन्नेत्र कज़गम से डीएमके में शामिल हो गए. लेकिन पार्टी बदलना उन्हें रास नहीं आयी और अप्रैल 2011 में हुए राज्य विधानसभा चुनाव वे भारी मत से हार गए. ध्यान देने बात यह है कि राज्य की 'राधाकृष्णन नगर विधानसभा सीट' से 2015 के उपचुनाव में जे. जयललिता भी उम्मीदवार थी, जिनकी यहाँ से जीत हुई थी.
2016 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में शेखर बाबू डीएमके के टिकट पर राज्य के हार्बर निर्वाचन क्षेत्र चुनाव से लड़ा और जीत हासिल की. उन्होंने 42,071 वोट प्राप्त किए और अपने प्रतिद्वंद्वी एआईएडीएमके उम्मीदवार केएस श्रीनिवासन को 4,836 वोटों के अंतर से हराया. फिर 2021 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में भी वे हार्बर निर्वाचन क्षेत्र से खड़े हुए और 59,317 वोट प्राप्त किए, इस चुनाव में उनके जीत का अंतर 27,274 वोट रहा. अब वही 2026 में एक बार फिर से वह इसी सीट से चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की..इनको कुल 45 हज़ार वोट मिले इसी के साथ 11 हज़ार 750 वोट के अंतर से जीत हासिल की.
शेखर बाबू तमिलनाडु सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रह चुके है. 7 मई 2021 को उन्हें 'हिंदू धार्मिक एवं धर्मार्थ बंदोबस्ती मंत्री' बनाया गया था.
पीके शेखर बाबू का विवाद (PK Sekar Babu Controversy)
शेखर बाबू ने मई 2021 में बड़ा विवादित बयान दिया था. उन्होंने कहा था कि सत्तारूढ़ डीएमके राज्य में उत्तर भारतीय निवासियों के लिए काम करेगी, भले ही उन्होंने वर्षों से पार्टी को वोट न दिया हो. उन्होंने दावा किया कि भले ही उत्तर भारतीय सत्तारूढ़ द्रविड़ पार्टियों के कारण समृद्ध हुए हों, फिर भी उन्होंने भाजपा को ही वोट दिया. उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पार्टी उत्तर भारतीयों को तमिलनाडु के लोगों के रूप में देखती है और उन्हें अपने में से एक मानती है.
शेखर बाबू ने तमिलनाडु में कब्ज़े वाली मंदिर भूमि को वापस लेने के लिए राज्य भर में दौरा किया. उन्होंने जुलाई 2020 में हिंदू महासभा के एक नेता द्वारा कब्जा की गई भूमि को वापस ले लिया. मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन द्वारा एचआरसीई द्वारा प्रबंधित मंदिरों में गैर-ब्राह्मण पुजारियों की नियुक्ति की गई. शेखर बाबू ने कहा कि यह पेरियार का सपना था कि सभी जातियों के लो मंदिरों में पुजारी बनें, और यह पूर्व मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि थे जिन्होंने इसे साकार किया.
पीके शेखर बाबू संपत्ति (PK Sekar Babu Property)
2021 में विधानसभा चुनाव में दाखिल किये गए घोषणापत्र के अनुसार पीके शेखर बाबू की कुल संपत्ति 2.10 करोड़ रूपये हैं, जबकि उनपर 20 लाख का कर्ज हैं.
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