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आईएएस तुकाराम मुंडे की जीवनी | IAS Tukaram Mundhe Biography in Hindi

08 अगस्त 2026
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आईएएस तुकाराम मुंडे की जीवनी | IAS Tukaram Mundhe Biography in Hindi

IAS Tukaram Mundhe Biography in Hindi - इस लेख में हम आपको FDA कमिश्नर तुकाराम मुंडे की जीवनी, शिक्षा, परिवार, बच्चों और राजनीतिक करियर के बारे में बताएंगे.


आईएएस तुकाराम मुंडे की जीवनी | IAS Tukaram Mundhe Biography in Hindi

IAS Tukaram Mundhe Latest News – महाराष्ट्र में इन दिनों एक बार फिर एक ऐसे आईएएस अधिकारी का नाम सुर्ख़ियों में हैं, जिनकी कार्यशैली जितनी सख्त हैं, उतनी ही बेबाक भी. खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के आयुक्त के रूप में तुकाराम मुंडे ने महाराष्ट्र में खाद्य पदार्थो में मिलावट और नियमों की अनदेखी के विरुद्ध व्यापक करवाई शुरू की हैं. उनके नेतृत्व में राज्यभर में निरीक्षण, छापेमारी और नियमों का उलंघन करने वालों पर करवाई तेज हुई है. 21 वर्षो की प्रशासनिक सेवा में 25 तबादलों के बावजूद उनके तेवर और कार्यशैली में कोई बदलाव नहीं आया. ईमानदारी, अनुशासन और नियमों के कठोर पालन के लिए पहचाने जाने वाले तुकाराम मुंडे उन अधिकारियों में गिने जाते हैं, जो पद से अधिक अपने काम को महत्व देते हैं. यही कारण रहा कि उनका प्रशासनिक सफर आज भी देशभर में चर्चा का बिषय बना हुआ हैं. इस लेख में हम आपको 2005 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंडे की जीवनी (IAS Tukaram Mundhe Biography in Hindi) के बारें में जानकारी देने वाले है.

आईएएस तुकाराम मुंडे का जन्म, परिवार (IAS Tukaram Mundhe Birth, Family)

तुकाराम मुंडे का जन्म 3 जून 1975 को महाराष्ट्र के बीड जिले के छोटे से गाँव ताडसोना में हुआ था. उनके पिता का नाम हरिभाऊ मुंडे है. उनके पिता एक किसान थे और वे साहूकार के कर्ज के तले दबे थे. तुकाराम मुंडे के पांच-बहन हैं.  वे विवाहित हैं. तुकाराम मुंडे के दो संतान हैं. उन्हें एक बेटा और एक बेटी हैं.

तुकाराम मुंडे की शिक्षा (IAS Tukaram Mundhe Education)

तुकाराम मुंडे ने वर्ष 1996 में बीआर अंबेडकर  मराठवाड़ा विश्वविद्यालय, के गवर्नमेंट आर्ट्स एंड साइंस कॉलेज, औरंगाबाद, महाराष्ट्र से स्नातक (बीए) किया. बाद में, वे 1998 में यही से राजनीति विज्ञान में एमए किया.  मुंडे ने वर्ष 2001 में राज्य सेवा परीक्षा उत्तीर्ण की. मई 2005 में पता चला कि उन्होंने पुणे में प्रशिक्षण के दौरान केंद्रीय सेवा परीक्षा उत्तीर्ण की थी। उन्होंने देश में 20वीं रैंक हासिल की थी. 

तुकाराम मुंडे  का आईएएस करियर (Tukaram Mundhe IAS Career)

तुकाराम मुंडे ने 2001 में राज्य सेवा परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद वित्त विभाग में द्वितीय श्रेणी से नौकरी प्राप्त की. वही चयन प्रक्रिया पूरी होने तक उन्होंने जलगांव में दो महीने तक लेक्चरर के रूप में भी काम किया था.

तुकाराम मुंडे 20वीं रैंक के साथ 2005 बैच के महाराष्ट्र कैडर के भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी हैं. इसी वर्ष 25 मई को उन्होंने महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) आयुक्त के रूप में कार्यभार संभाला हैं. उनके कार्यभार सँभालते ही खाद्य पदार्थों में मिलावट और सुरक्षा उल्लंघनों के खिलाफ राज्य भर में थोक विक्रेताओं, निर्माताओं, खुदरा विक्रेताओं और भोजनालयों पर छापेमारी में बहुत तेजी आयी हैं. इसके अंतर्गत राज्य भर में निरीक्षण किए जा रहे हैं, जिसमें अधिकारियों द्वारा लाइसेंस निलंबित करना, खाद्य नमूनों को जब्त करना और जहां भी गंभीर उल्लंघन पाए गए हैं, वहां कार्रवाई करना शामिल है.

तुकाराम मुंडे की पहचान एक ईमानदार अधिकारी की रही हैं. आईएएस में सिलेक्शन के बाद उनकी पहली पोस्टिंग उनके गृह राज्य महाराष्ट्र के सोलापुर जिले में हुई. बाद में, उनका तबादला परियोजना अधिकारी के रूप में आदिवासी क्षेत्र धरानी में कर दिया गया. वहां से उनका तबादला सहायक जिला कलेक्टर के रूप में नांदेड़ में कर दिया गया. वर्ष 2008 में जब वे नागपुर जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी चुने गए, उसी दिन उन्होंने कुछ विद्यालयों का दौरा किया, जहां उन्होंने कई शिक्षको को अनुपस्थित पाया और फिर उसी के अगले दिन उन्होंने उन सभी शिक्षकों को निलंबित कर दिया. तब से शिक्षकों की अनुपस्थिति दर, जो 10-12 प्रतिशत थी, घटकर 1-2 प्रतिशत हो गई है.

महाराष्ट्र में सूखा पड़ना एक बड़ी आपदा रही हैं और उन्होंने इस दिशा में बहुत काम किया. वर्ष 2009 में मुंडे का तबादला नागपुर से नासिक में 'अतिरिक्त जनजातीय आयुक्त' के पद पर हुआ. बाद में, मई 2010 में, उनका तबादला मुंबई में खादी और ग्राम उद्योग आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में हुआ. इसके बाद, उन्होंने जालना के जिला मजिस्ट्रेट (DM) के रूप में कार्य किया. ज़मीनी स्तर पर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में मुंडे की कार्यशैली की काफी प्रशंसा होती रही हैं. वे जहाँ भी गए, अपने काम से एक नया आयाम स्थापित करते रहे हैं. जयकवाड़ी से जालना तक पानी लाने का काम, जो छह वर्षों से रुका हुआ था, उन्होंने तीन महीनों में पूरा कर लिया.

बाद में, वर्ष 2011 में उन्हें सोलापुर जिले के जिला कलेक्टर के तौर पर पोस्टिंग मिली. सोलापुर के डीएम रहते हुए उनके काम की काफी सराहना हुई और उनके कार्यो के कारण उन्हें महाराष्ट्र सरकार द्वारा 'सर्वश्रेष्ठ जिला कलेक्टर' पुरस्कार से सम्मानित किया गया. सितंबर 2012 में उनका तबादला मुंबई में बिक्री एवं कर विभाग के संयुक्त आयुक्त के रूप में हुआ. उनके कार्यकाल के दौरान राजस्व 143 करोड़ रुपये से बढ़कर 500 करोड़ रुपये हो गया. मुंडे जब नवी मुंबई नगर निगम के आयुक्त थे, तब उनका 'वॉक विद कमिश्नर' कार्यक्रम बहुत ही लोकप्रिय हुआ था. अपने सख्त तेवर के कारण उन्होंने यहाँ अधिकारी रहते कई दोषी कर्मचारियों को बर्खास्त किया था. बाद में, वे पुणे नगर निगम की पीएमपीएमएल के प्रबंध निदेशक बनाये गए.

तुकाराम मुंडे एक अनुशासनप्रिय अधिकारी हैं. इतना ही वे अपनी ईमानदारी के लिए राज्य भर में विख्यात हैं. अब यही कारण रहा कि अपने 21 साल के करियर में उनका 25 बार तबादला हो चुका है, जिससे वह महाराष्ट्र के सबसे अधिक बार तबादला होने वाले अधिकारियों में से एक बन गए हैं.  

इस लेख में हमने आपको FDA कमिश्नर तुकाराम मुंडे की जीवनी (IAS Tukaram Mundhe Biography in Hindi) के बारे में जानकारी दी है. अगर आपका कोई सुझाव है तो हमें कमेंट करके जरूर बताएं.


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