बेचाराम मन्ना की जीवनी (Becharam Manna Biography in Hindi)
Becharam Manna Latest News - बेचाराम मन्ना तृणमूल कांग्रेस के उन मंझे हुए जमीनी नेताओ में से एक है, जिन्होंने फर्श से लेकर अर्श तक का जीवन देखा है. नब्बे के दशक में ग्राम पंचायत के सदस्य बनने से लेकर राज्य में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनने तक का उनका यह सफर बहुत ही उतार-चढ़ाव और संघर्षपूर्ण रहा. बंगाल में आज भी उनकी पहचान जमीनी नेता की है. वे राज्य के हरिपाल विधानसभा क्षेत्र से लगातार दो बार, जबकि राज्य की चर्चित विधानसभा सीट सिंगुर से एक बार विधायक रह चुके है. 2026 के विधानसभा चुनाव में भी वे तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर सिंगुर से चुनाव लड़ रहे है. इस लेख में हम आपको बेचाराम मन्ना के जीवन परिचय (Becharam Manna Biography in Hindi) के बारें में जानकारी देने वाले है.
बेचाराम मन्ना जन्म और परिवार (Becharam Manna Birth & Family)
बेचाराम मन्ना (Becharam Manna) पश्चिम बंगाल के रतनपुर के रहने वाले है. उनके पिता का नाम स्वर्गीय दुलल मन्ना (Late Dulal Manna) है. वे शादी-शुदा है. उनकी पत्नी का नाम कराबी मन्ना (Karabi Manna) हैं. उनकी पत्नी उन्ही की तरह टीएमसी में सक्रिय है और राज्य में विधायक रह चुकी है. बेचाराम मन्ना धर्म से हिन्दू है, जबकि जाति से वे महिष्य बटाईदार है. उनपर 1 आपराधिक मामलें दर्ज है.
बेचाराम मन्ना शिक्षा (Becharam Manna Education)
बेचाराम मन्ना ने 1986 में पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (डब्ल्यूबीबीएसई) से 10वीं उत्तीर्ण किया है. इसके बाद 1992 में ITI बंदेल से फिटर में डिप्लोमा किया.
बेचाराम मन्ना का शुरुआती जीवन (Becharam Manna Early Life)
बेचाराम मन्ना गरीब घर से है. उनके पास कृषि योग्य कुछ भूमि थे जिनपर शरुआती दिनों में उन्होंने खेती की. अपने शुरुआती दिनों में उन्होंने लगभग 23 वर्षों तक एक जूट मिल में काम किया. उनकी पत्नी कराबी मन्ना होम्योपैथी डॉक्टर हैं. उनकी पत्नी, जो पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के सिंगुर की रहने वाली है, ने 1999 में नेताई चरण चक्रवर्ती होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज और अस्पताल से होम्योपैथिक चिकित्सा और सर्जरी में डिप्लोमा किया. हालांकि 2021 में उन्होंने हरिपाल विधानसभा क्षेत्र से टीएमसी के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत गई. इस बार भी वह इसी स्थान से टीएमसी के टिकट पर चुनाव लड़ रही है.
बेचाराम मन्ना राजनीतिक करियर (Becharam Manna Political Career)
बंगाल की राजनीति में एक दौर में सिंगुर की बड़ी चर्चा रही है. 2006-08 के बीच इसका नाम देश भर में चर्चा का बिषय बना था, कारण था टाटा समूह के द्वारा सिंगूर में नैनो संयंत्र के निर्माण की योजना. उस समय राज्य में वाम पार्टी की सरकार थी. इसी दौरान यहां के लोगो ने टाटा समूह के द्वारा उपजाऊ जमीन के अधिग्रहण का विरोध करना शुरू कर दिया. विरोध भी ऐसा की टाटा को यहां प्रस्तावित फैक्ट्री को स्थगित करनी पड़ गई. वैसे तो इस आंदोलन को लीड करने का श्रेय आज की टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी को जाता है, पर जमीनी स्तर पर सच्चाई कुछ अलग है. दरअसल इस आंदोलन का पहला विरोध जिस व्यक्ति ने किया उस व्यक्ति का नाम है, बेचाराम मन्ना. बेचाराम मन्ना ही पहले व्यक्ति थे, जिन्होंने जमीन अधिग्रहण को चुनौती दी. इसी आंदोलन में इन्हे ममता बनर्जी का साथ मिल गया, जिन्हे तत्कालीन वाम पार्टी के विरुद्ध कोई भी ठोस मुद्दा की तलाश थी और बेचाराम मन्ना के माध्यम से ममता को यह मुद्दा मिल गया. जिसके बाद ममता बनर्जी राज्य में वामपंथी पार्टी की मजबूत विकल्प के तौर पर उभरी.
बेचाराम मन्ना बाद के वर्षो में कृषि छोड़कर सक्रिय राजनीति में कूद पड़े. हालांकि ऐसा नहीं है कि मन्ना पहली बार राजनीति में कूदा हो. वह इससे पहले भी ग्राम पंचायत का चुनाव लड़ चुके थे और जीत भी चुके थे पर अब वे राज्य स्तर की राजनीति में कूद पड़े. इसी के बाद उन्होंने राज्य में हुए 2011 के विधानसभा चुनाव में टीएमसी के टिकट पर हरिपाल सीट से चुनाव लड़ा. चूँकि उस समय हर ओर सत्ता के विरोध की हवा थी, परिणाम यह हुआ कि बेचाराम मन्ना अपने पहले ही चुनाव में 22,000 वोटों के अंतर से जीत हासिल करने में कामयाब रहे. उन दिनों बेचाराम मन्ना ममता बनर्जी का दाए हाथ की तरह काम कर रहे थे. पार्टी को जिताने और वाम पार्टी की नींव खोदने में इन्होने बड़ी भूमिका निभाई. लोग इन्हे अपने बीच का नेता ठीक ऐसे ही मानने लग गए थे जैसे दिल्ली की लोगो ने अरविंद केजरीवाल को माना था.
बेचाराम मन्ना 2011 के बाद 2016 के विधानसभा चुनाव में भी तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर हरिपाल विधानसभा क्षेत्र से जीतने में सफल रहे. पर 2021 में वे यहां से खड़े नहीं हुए बल्कि उन्होंने अपनी पत्नी कराबी मन्ना को यहां से खड़ा कर दिया, जिनकी यहां से जीत हुई. 2026 के विधानसभा चुनाव में भी यहां से टीएमसी के टिकट पर कराबी मन्ना ही चुनाव लड़ रही है. वही 2021 में मन्ना ने टीएमसी के टिकट पर सिंगुर से चुनाव लड़ा और जीत गए और 2026 के विधानसभा चुनाव में एक बार फिर से वे यही से टीएमसी के उम्मीदवार है.
बेचाराम मन्ना संपत्ति (Becharam Manna Property)
2026 में विधानसभा चुनाव में दाखिल किये गए घोषणापत्र के अनुसार बेचाराम मन्ना की कुल संपत्ति 12 करोड़ रूपये हैं, जबकि उनपर 3 करोड़ रूपये का कर्ज भी हैं.
इस लेख में हमने आपको बेचाराम मन्ना जीवनी (Becharam Manna Biography in Hindi) के बारे में जानकारी दी है. अगर आपका कोई सुझाव है तो हमें कमेंट करके जरूर बताएं.













