कांग्रेस नेता पवन खेडा की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला रखा सुरक्षित, खेड़ा ने यह याचिका असम पुलिस द्वारा दर्ज FIR के सिलसिले में अग्रिम जमानत की मांग करते हुए की थी दायर, यह FIR मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा की शिकायत पर की गई थी दर्ज, जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की बेंच में आज हुई सुनवाई, इस सुनवाई कि दौरान दोनों पक्षों के वकीलों के बीच हुई तीखी बहस, पवन खेडा की अग्रिम जमानत याचिका को लेकर उनके वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत में दलील देकर इस मामले को पूरी तरह राजनीतिक प्रतिशोध बताया, सिंघवी ने तर्क दिया कि खेड़ा के खिलाफ हो सकता है मानहानि का मामला, लेकिन गिरफ्तारी के लिए असम पुलिस के 60 पुलिसकर्मियों का उनके घर पहुंचना है अनुचित, खेडा को गिरफ्तार करके जलील करने की नहीं है जरूरत, वहीं असम सरकार और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने खेडा की जमानत का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि यह मामला केवल मानहानि का ही नहीं बल्कि है धोखाधड़ी और जालसाजी का, खेड़ा ने चुनावी फायदे के लिए फर्जी दस्तावेजों का उपयोग कर मुख्यमंत्री की पत्नी की छवि खराब करने की रची साजिश, असम पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप और विदेशी हाथ के एंगल की जांच के लिए भी खेड़ा की हिरासत में पूछताछ को बताया जरूरी, बता दें पवन खेडा ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा के पास तीन देशों के पासपोर्ट और विदेशों में बेनामी संपत्ति होने का लगाया था आरोप, इसके बाद उनके खिलाफ दर्ज करवाई गई थी एफआईआर, गुवाहाटी हाईकोर्ट ने पहले ही उनकी जमानत याचिका यह कहते हुए कर दी थी खारिज कि दस्तावेजों के स्रोत का पता लगाने के लिए हिरासत में पूछताछ है आवश्यक
खेड़ा को बेल या जेल? अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित

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