राजस्थान में बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ के कुचामन दौरे के दौरान हुए विरोध प्रदर्शन और रास्ता रोकने की घटना को लेकर राज्य सरकार ने सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की है. संबंधित क्षेत्र के तहसीलदार के खिलाफ कार्रवाई के बाद अब डीडवाना-कुचामन जिले के पुलिस अधीक्षक ज्ञानचंद यादव को भी पद से हटा दिया गया है. सरकार ने उनकी जगह सीआईडी-सीबी में कार्यरत डॉ. प्यारे लाल शिवराम को जिले का नया पुलिस अधीक्षक नियुक्त किया है.
जारी
आदेशों के अनुसार ज्ञानचंद यादव को सिविल राइट्स पुलिस मुख्यालय भेज दिया गया है. खास
बात यह है कि उन्हें डीडवाना-कुचामन जिले में नियुक्त हुए अभी महज 10 दिन ही हुए थे,
लेकिन इस घटनाक्रम के बाद उन पर कार्रवाई कर दी गई.
विरोध
प्रदर्शन के बाद बढ़ी सियासी हलचल
दरअसल,
कुचामन में आयोजित बीजेपी के प्रशिक्षण शिविर में शामिल होने पहुंचे मदन राठौड़ का
कुछ आरएलपी कार्यकर्ताओं ने काले झंडे दिखाकर विरोध किया था. इस दौरान कार्यकर्ताओं
ने उनका रास्ता भी रोकने का प्रयास किया, जिससे कुछ समय के लिए तनावपूर्ण स्थिति बन
गई.
हालात
बिगड़ते देख पुलिस ने मौके पर हस्तक्षेप किया और प्रदर्शनकारियों को हटाते हुए कई लोगों
को हिरासत में लिया. हालांकि इस घटना ने प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया
और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे.
पहले
तहसीलदार, अब एसपी पर कार्रवाई
घटना
को गंभीरता से लेते हुए सरकार ने सबसे पहले संबंधित क्षेत्र के तहसीलदार के खिलाफ कार्रवाई
की थी. इसके बाद देर रात जारी प्रशासनिक आदेशों में जिले के एसपी ज्ञानचंद यादव को
भी हटा दिया गया. लगातार दो अधिकारियों पर हुई कार्रवाई को सरकार की सख्त प्रशासनिक
नीति के तौर पर देखा जा रहा है.
बीजेपी-आरएलपी
के बीच बढ़ी तल्खी
मदन
राठौड़ के विरोध को लेकर बीजेपी और Rashtriya Loktantrik Party के बीच पहले से जारी
राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है. हाल के दिनों में भैराणा धाम समेत कई मुद्दों को
लेकर दोनों दलों के नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है. ऐसे में कुचामन
की यह घटना राजनीतिक तनाव को और बढ़ाने वाली साबित हुई है.
कार्रवाई
के पीछे क्या वजह?
राजनीतिक
और प्रशासनिक गलियारों में इस कार्रवाई को कानून-व्यवस्था और वीआईपी सुरक्षा व्यवस्था
में कथित चूक से जोड़कर देखा जा रहा है. माना जा रहा है कि प्रदेशाध्यक्ष जैसे संवैधानिक
महत्व के राजनीतिक पदाधिकारी की सुरक्षा में हुई चूक को सरकार ने गंभीरता से लिया है.
हालांकि
सरकार की ओर से जारी आधिकारिक आदेशों में कार्रवाई के कारणों का विस्तृत उल्लेख नहीं
किया गया है. बावजूद इसके, तहसीलदार और एसपी दोनों पर हुई कार्रवाई ने यह स्पष्ट संकेत
दिया है कि सरकार इस मामले में किसी भी तरह की लापरवाही को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए
है.
अब इस पूरे घटनाक्रम के बाद प्रदेश की राजनीति में चर्चा इस बात की है कि क्या यह कार्रवाई केवल प्रशासनिक जवाबदेही तय करने के लिए की गई है या फिर इसके पीछे राजनीतिक संदेश भी छिपा हुआ है.












