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विशेष रिपोर्ट

'हिम्मत है तो खाली कराएं..' राबड़ी देवी ने नहीं खाली किया आवास तो क्या करेगी सरकार?

31 मई 2026
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'हिम्मत है तो खाली कराएं..' राबड़ी देवी ने नहीं खाली किया आवास तो क्या करेगी सरकार?

भवन निर्माण विभाग द्वारा यादव परिवार को दी गयी है अंतिम 15 दिन की मोहलत, 2008 में भी हो चुका है ऐसी ही विवाद, तब उपेंद्र कुशवाहा को रुकना पड़ा था होटल में

पटना के 10 सर्कुलर रोड स्थित राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री राबरी देवी एवं लालू प्रसाद यादव परिवार का यह सरकारी बंगला करीब दो दशकों से बिहार की राजनीति की धुरी रहा है. इस बंगले को खाली करने का अल्टीमेटम मिल चुका है. इस संबंध में भवन निर्माण विभाग द्वारा इस संबंध में अब तक तीन नोटिस जारी किए जा चुके हैं. राबड़ी देवी को आवास खाली करने के लिए 15 दिनों की अंतिम मोहलत दी गई है. इसके बावजूद पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने इस आवास को खाली करने से साफ इनकार कर दिया है. लालू की बेटी रोहिणी आचार्य पारिवारिक मतभेदों के बावजूद परिवार के समर्थन में आ खड़ी हुई है. उन्होंने ताजा बयान में उन्होंने सरकार को ललकारते हुए कहा, 'अगर हिम्मत है तो जबरन बंगला खाली करवाए सरकार.'

रोहिणी आचार्य ने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और राज्य सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा, 'सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए विपक्ष को जानबूझकर निशाना बना रही है. जनहित के ज्वलंत मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए राजनीतिक प्रतिशोध की राह पर है सम्राट चौधरी की सरकार. पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी जी को आवास से बेदखल करने का तुगलकी फरमान और आवास पर पुलिस भेजना लोकतंत्र नहीं, सत्ता के अहंकार एवं बेजा दबंगई की निशानी है.'


2008 में भी हो चुका है ऐसा ही विवाद


बिहार के राजनीतिक इतिहास में सरकारी बंगला खाली कराने को लेकर सबसे बड़ा विवाद 2008 में सामने आया था, जब उपेंद्र कुशवाहा को जबरन बेदखल किया गया था. बिहार में RJD सरकार के कार्यकाल के दौरान 2004 में नीतीश कुमार के करीबी होने के नाते उपेंद्र कुशवाहा को बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाया गया था और उन्हें 30 बेली रोड स्थित सरकारी आवास आवंटित किया गया था.


2005 में हुए चुनाव में कुशवाहा हार गए और 2007 में वैचारिक मतभेदों के कारण उन्हें जदयू से निष्कासित कर दिया गया. इसके बावजूद उन्होंने बंगला खाली करने से इनकार कर दिया. भवन निर्माण विभाग और विधानसभा ने उन्हें आवास खाली करने के लिए कई नोटिस भेजे, लेकिन उन्होंने आवास खाली नहीं किया.


कई बार विरोध के बाद आखिरकार 17 अगस्त 2008 को पटना जिला प्रशासन पूरी तैयारी के साथ उपेंद्र कुशवाहा के आवास पर पहुंचा. इस बार परिवार के सदस्यों के कड़े विरोध के बावजूद मजिस्ट्रेट के आदेश पर घर का एक-एक सामान जबरदस्ती बाहर निकाला गया और ट्रैक्टरों पर लाद दिया गया. उपेंद्र कुशवाहा को उस रात होटल में रुकना पड़ा, जबकि उनके घर का सामान पार्टी कार्यालय में रखना पड़ा.


क्या है पूरा मामला


दरअसल, 2005 तक राबड़ी देवी बिहार की मुख्यमंत्री थीं और उनका पूरा परिवार मुख्यमंत्री के सरकारी आवास 1 अणे मार्ग में रहता था. नवंबर 2005 में जब सरकर बदली और नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने, तो 10 सर्कुलर रोड स्थित यह बंगला पूर्व मुख्यमंत्रियों के लिए आरक्षित कोटे के तहत राबड़ी देवी को आवंटित किया गया. तब से बिहार में कई राजनीतिक बदलाव हुए लेकिन 10 सर्कुलर रोड राजद की राजनीति का केंद्र बना रहा.


जब 2025 में एनडीए की नई सरकार बनी तो सरकारी आवासों के पुनर्वितरण के संबंध में एक नई नीति अपनाई है. इस नीति के तहत भवन निर्माण विभाग ने राबड़ी देवी को विपक्ष के नेता के लिए निर्धारित कोटे के तहत 39 हार्डिंग रोड पर स्थित बंगला आवंटित किया. वही, 10 सर्कुलर रोड स्थित बंगला बिहार सरकार के पशुपालन मंत्री नंद किशोर राम को आवंटित कर दिया गया है.


बंगाल खाली नहीं हुआ तो क्या करेगी सरकार


इस वक्त बिहार की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि इस अवधि के बाद भी राबड़ी देवी ने बंगला खाली नहीं किया, तो सरकार क्या करेगी? क्या बिहार में एक बार फिर उसी तरह सरकारी आवास खाली कराया जाएगा, जैसे साल 2008 में उपेंद्र कुशवाहा से खाली कराया गया था.


प्रशासनिक और कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, अगर 15 दिन की मोहलत खत्म होने के बाद भी राबड़ी देवी बंगला खाली नहीं करती हैं, तो सरकार के पास कई विकल्प मौजूद हैं. भवन निर्माण विभाग अगर चाहे तो राबड़ी देवी को 'अनाधिकृत कब्जेदार' घोषित कर सकता है और बिहार पब्लिक प्रेमिसेस (बेदखली) अधिनियम के तहत उन्हें एक अंतिम कारण बताओ नोटिस जारी कर सकता है. इस नोटिस में उनसे यह स्पष्टीकरण मांगा जाएगा कि उन्हें सरकारी आवास से बेदखल क्यों न किया जाए.


अगर इस नोटिस का जवाब संतोषजनक नहीं पाया जाता है, तो सक्षम प्राधिकारी जिला प्रशासन और मजिस्ट्रेट को उन्हें बलपूर्वक बेदखल करने का लिखित आदेश जारी कर सकता है. इसके अलावा, निर्धारित समय सीमा के बाद राबड़ी देवी जितने भी दिन तक बंगले पर कब्जा जमाए रहेंगी, उन्हें हर दिन के हिसाब से भारी जुर्माना देना पड़ सकता है, जिसकी गणना बाजार दरों के आधार पर की जाएगी.


अब देखना ये होगा कि यदि इस समय सीमा के बाद भी आवास खाली नहीं होता है, तो सरकार क्या कदम उठाएगी? क्या बिहार में एक बार फिर 2008 का घटनाक्रम दोहराया जाता है, या फिर सम्राट सरकार जदयू के आगे झुकती है..देखना मजेदार होगा.

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