पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में हिंदुओं के अल्पसंख्यक बनने के खतरे और भविष्य में संकट का किया जा रहा अहम दावा
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव-2026 से पहले सियासत अपने चरम पर पहुंच गई है. भारतीय जनता पार्टी के नेता सुकांत मजूमदार के बयान ने चुनावी माहौल को और ज्यादा गरमा दिया है. उन्होंने राज्य में जनसांख्यिकीय बदलाव को लेकर बड़ा दावा करते हुए इसे बंगाल की ‘पहचान और अस्तित्व’ से जोड़ दिया है. मजूमदार ने कहा कि अगर मौजूदा रुझान जारी रहे, तो कई जिलों में हिंदू अल्पसंख्यक हो सकते हैं और भविष्य में उनके लिए चुनाव जीतना मुश्किल हो जाएगा. उन्होंने 2026 के चुनाव को ‘आखिरी निर्णायक लड़ाई’ तक करार दे दिया.
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बंगाल को बचाने की सियासत
बीजेपी नेता ने ममता बनर्जी के बयान का हवाला देते हुए कहा कि राज्य में मुस्लिम आबादी 33% से ज्यादा हो सकती है. साथ ही यह भी कहा कि बंगाल को ‘पाकिस्तान या अफगानिस्तान’ बनने से रोकना होगा. यह बीजेपी की ओर से एक ऐसा बयान है जो चुनावी ध्रुवीकरण को और तेज कर सकता है.
मजूमदार ने सत्ताधारी ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस पर हमला बोलते हुए दावा किया कि ममता की पार्टी भविष्य में मुस्लिम वोट बैंक के दबाव में टिकट वितरण बदलेगी. उन्होंने मुस्लिम उप-मुख्यमंत्री की मांग का जिक्र करते हुए कहा कि इससे आगे चलकर मुस्लिम मुख्यमंत्री बनने की आशंका बढ़ जाएगी. बीजेपी नेता के इन बयानों के जरिए BJP ने TMC की राजनीति को घेरने की कोशिश की है.
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मजूमदार ने राज्य की आर्थिक स्थिति पर भी हमला बोला. उनका दावा है कि जहां गुजरात को देश का बड़ा FDI हिस्सा मिलता है, वहीं पश्चिम बंगाल काफी पीछे है. निवेश की कमी एवं शिक्षा व्यवस्था जैसे मुद्दों को BJP चुनाव में प्रमुख हथियार बनाने की तैयारी में है.
राजनीतिक नैरेटिव की जंग
कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल चुनाव इस बार सिर्फ सत्ता की लड़ाई नहीं बल्कि पहचान, विकास और राजनीतिक नैरेटिव की जंग बनता जा रहा है, जहां हर बयान चुनावी समीकरण बदलने की क्षमता रखता है. चूंकि सियासी रुझानों में ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस को बढ़त मिलती दिख रही है, ऐसे में भारतीय जनता पार्टी के लिए यह चुनाव ‘करो या मरो’ की स्थिति बनता जा रहा है. BJP अब आक्रामक रणनीति, ध्रुवीकरण वाले मुद्दों और मजबूत बूथ मैनेजमेंट के सहारे मुकाबला पलटने की कोशिश में है.
ऐसे में 2026 का पश्चिम बंगाल चुनाव न सिर्फ सत्ता का फैसला करेगा, बल्कि यह भी तय करेगा कि राज्य की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ेगी. स्थिरता बनाम बदलाव की इस जंग में हर वोट निर्णायक साबित होने वाला है.










