Hanuman Beniwal Big statement: बुधवार को राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के सुप्रीमो और नागौर से सांसद हनुमान (Hanuman Beniwal) ने Lok Sabha में लोकसभा अध्यक्ष (Om Birla) के खिलाफ लाए गए संकल्प पर चर्चा के दौरान जोरदार भाषण दिया. सांसद बेनीवाल ने कहा कि यह मामला किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि देश के लोकतंत्र, संविधान और संसदीय मर्यादाओं की रक्षा से जुड़ा हुआ है. उन्होंने कहा कि भारत का संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं बल्कि न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व जैसे मूल्यों का संकल्प है, जिन पर देश का लोकतंत्र टिका हुआ है. इतने ही नहीं सांसद बेनीवाल ने तंज कसते हुए कहा कि जिस तरह सरकार ने उप – राष्ट्रपति धनखड़ को इसलिए हटाया क्योंकि वो किसान के बेटे थे,उसी तर्ज पर लोक सभा अध्यक्ष का भी त्याग पत्र ले लेते ताकि ऐसी चर्चा की नौबत ही नहीं आती.
सांसद हनुमान बेनीवाल ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष का पद एक तटस्थ और गरिमामय संस्था माना जाता है, जिससे अपेक्षा की जाती है कि वह सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के साथ समान व्यवहार करे. इसके साथ ही बेनीवाल ने आरोप लगाया कि हाल के समय में विपक्ष की आवाज को बार-बार दबाया गया है और कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के अवसर सीमित किए गए हैं, जिससे संसदीय प्रक्रियाओं का संतुलन कमजोर हुआ है और इस पद की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं.
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बीएसी और स्पीकर द्वारा बुलाई जाने वाली सर्वदलीय बैठक में नहीं बुलाने पर व्यक्त की नाराजगी
सांसद हनुमान बेनीवाल ने कहा कि लोक सभा अध्यक्ष बीएसी में सिंगल मेम्बर पार्टी के सदस्य की भूमिका को सम्मिलित नहीं रखते वहीं जो सर्वदलीय बैठक लोक सभा अध्यक्ष बुलाते है उसमें में निर्दलीय और एक या दो सदस्य पार्टी वाले सदस्यों को बुलाते तक नहीं है.
इस दौरान बेनीवाल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह Amit Shah पर व्यंग्यात्मक कटाक्ष करते हुए कहा कि एक या दो सांसदों वाली पार्टियों और निर्दलीय सांसदों की स्थिति ऐसी हो गई है जैसी अंतरराष्ट्रीय तनाव में भारत सरकार की स्थिति Iran, Israel और United States के बीच चल रहे युद्ध में दिखाई देती है.










