राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने पचपदरा रिफाइनरी के उद्घाटन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने सरकारी कार्यक्रम की गरिमा बनाए रखने के बजाय उसे राजनीतिक मंच बना दिया. कांग्रेस नेता जूली ने कहा कि प्रधानमंत्री के पास यह अवसर था कि वे दलगत राजनीति से ऊपर उठकर रिफाइनरी परियोजना के विजन और इसके निर्माण में कांग्रेस सरकार के योगदान को स्वीकार करते, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया. उन्होंने कहा कि पचपदरा रिफाइनरी का शिलान्यास वर्ष 2013 में यूपीए सरकार के दौरान हुआ था और तत्कालीन यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी तथा पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व में ही यह परियोजना राजस्थान को मिली.
टीकाराम जूली ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने इस परियोजना को आगे बढ़ाने में अभूतपूर्व मेहनत की थी और इसे धरातल पर उतारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उनका आरोप था कि प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में इस योगदान का उल्लेख तक नहीं किया और पूरा श्रेय लेने की कोशिश की, जो ऐतिहासिक तथ्यों की अनदेखी है.
नेता प्रतिपक्ष ने महंगाई के मुद्दे पर भी प्रधानमंत्री को घेरते हुए कहा कि देशभर में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की बढ़ती कीमतों को लेकर जनता में भारी आक्रोश है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री अपने संबोधन में इन मुद्दों पर उपलब्धियां गिनाने के बजाय अपनी सरकार की नाकामियों पर सफाई देते नजर आए. जूली ने तंज कसते हुए कहा कि जब नरेंद्र मोदी स्वयं मुख्यमंत्री थे, तब वे तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह पर महंगाई और ईंधन की कीमतों को लेकर लगातार तीखे हमले करते थे, लेकिन आज खुद उन्हीं सवालों से बचने की कोशिश कर रहे हैं.
टीकाराम जूली ने राजस्थान में पेट्रोल-डीजल पर वैट कम करने के मुद्दे पर भी प्रधानमंत्री को घेरा. उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता को उम्मीद थी कि प्रधानमंत्री मंच से राज्य की भाजपा सरकार को वैट कम करने के निर्देश देंगे, क्योंकि विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने इसे प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाया था. लेकिन प्रधानमंत्री ने इस विषय पर कोई घोषणा नहीं की, जिससे राजस्थान की जनता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है.
प्रदेश की कानून-व्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी नेता प्रतिपक्ष ने राज्य सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि राजस्थान में स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हो चुकी हैं, अस्पतालों में लगातार गंभीर घटनाएं सामने आ रही हैं, जबकि कानून-व्यवस्था भी चरमराई हुई है. इसके अलावा बिजली-पानी की समस्या से आम जनता परेशान है और जोधपुर में लोगों को अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन तक नहीं करने दिया जा रहा। जूली ने कहा कि जनता को उम्मीद थी कि प्रधानमंत्री इन बुनियादी मुद्दों पर राज्य सरकार से जवाबदेही तय करेंगे, लेकिन उन्होंने केवल राजनीतिक बयानबाजी को प्राथमिकता दी, जिससे प्रदेशवासियों को निराशा हाथ लगी.













