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इरादे गलत थे, पर अफवाह फैलाने वाले सफल नहीं हुए: पचपदरा रिफाइनरी के उद्घाटन पर विपक्ष पर बरसे PM मोदी

04 जुलाई 2026
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इरादे गलत थे, पर अफवाह फैलाने वाले सफल नहीं हुए: पचपदरा रिफाइनरी के उद्घाटन पर विपक्ष पर बरसे PM मोदी

युद्ध के संकट में भी भारत की डिप्लोमेसी और आत्मनिर्भरता की हुई जीत, पचपदरा रिफाइनरी के उद्घाटन कर बोले पीएम मोदी


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आल बालोतरा जिले के पचपदरा पहुंचकर देश की पहली ग्रीनफील्ड रिफाइनरी राष्ट्र को समर्पित किया. बालोतरा के पचपदरा में करीब 79,459 करोड़ रुपए की लागत से तैयार यह परियोजना केवल राजस्थान की पहली रिफाइनरी नहीं है, बल्कि देश की पहली ग्रीनफील्ड रिफाइनरी-सह-पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स भी है. इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने जनसभा को संबोधित करते हुए ईरान युद्ध के चलते देश में पैदा हुए संकट को लेकर भी खुलकर बात की. पीएम मोदी ने कहा कि बड़े-बड़े देश आज ईंधन की किल्लत से जूझ रहे हैं, लेकिन सबसे बड़े संकट पर नए भारत की इच्छाशक्ति और प्रयास भारी पड़े हैं.


पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि राजस्थान की इस धरती से भारत ने आत्मनिर्भर होने की दिशा में बहुत बड़ा कदम उठाया है. ये रिफाइनरी यहां हजारों लोगों के रोजगार का माध्यम बनेगी. आज का दिन साक्षी है कि बीजेपी सरकारें परियोजनाओं को सिर्फ केवल शिलान्यास करके नहीं छोड़ती है. हम उन परियोजनाओं को पूरा करने के लिए दिन-रात एक कर देते हैं. दो महीने पहले यहां जो हादसा हुआ, उसके बाद इतनी तेजी से काम पूरा कर लेना परिश्रम की परिकाष्ठा का उदाहरण है. नया भारत अपने संकल्प से न पीछे हटता है और न ही अपनी रफ्तार कम करता है.


प्रधानमंत्री मोदी ने तेल का संकट का जिक्र करते हुए कहा कि पश्चिमी एशिया में युद्ध की वजह से पूरी दुनिया हाहाकार मचा है. हर देश त्रस्त है, इस युद्ध ने 21वीं सदी के सबसे बड़े ऊर्जा संकट को जन्म दिया. बड़े-बड़े देश आज ईंधन की किल्लत से जूझ रहे हैं, 21वीं सदी के सबसे ऊर्जा संकट पर भारत के प्रयास भारी पड़े हैं. भारत ने हर स्तर पर सही फैसले लिए. संकट का समय रहते सटीक आकलन किया, प्रभावी रणनीति बनाई. भारत के संसाधनों का सही प्रयोग किया, तब जाकर भारत संकट से ऊबर पाया है. जब सार्वजनिक तौर पर कुछ ताकतें अफवाह और आशंका फैलाने में व्यस्त थी तब देश में दिन-रात काम हो रहा था, किस तरह स्थिति को संभाला जा रहा था, वो प्रयास, धैर्य, नीतिगत, कूटनीतिक स्तर पर उठाए गए एक-एक संवेदनशील कदम अभूतपूर्व है.



पीएम मोदी ने कहा कि बहुत अफवाएं फैलाई गई, लोगों को डराया गया, भड़काया गया, राजनीति के खेल खेले गए लेकिन जिनके इरादे गलत थे, वो सफल नहीं हो पाए. दूर-सुदूर इलाकों में भी छोटी मोटी अड़चनों के अलावा ईंधन सप्लाई में कोई बड़ी चुनौती नहीं आई. अप्रैल से जून के बीच ही अकेले डीजल-पेट्रोल में 75 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का घाटा कंपनियों को सहना पड़ा और इस घाटे को पूरा करने की जिम्मेदारी सरकारी खजाने से उठाई गई. हमने प्रति लीटर 10 रुपये की एक्साइज ड्यूटी भी कम की और बहुत ज्यादा बोझ जनता पर नहीं पड़ने दिया. भारत के संसाधनों का संतुलित प्रयोग किया. भारत की डिप्लोमैटिक पावर का सकारात्मक इस्तेमाल किया. तब जाकर भारत इस संकट से उबर पाया. जब सार्वजनिक तौर पर कुछ ताकतें अफवाह और आशंका फैलाने में व्यस्त थीं, तब किस स्केल पर दिन-रात काम हो रहा था, किस तरह स्थिति को संभाला जा रहा था. वह मेहनत, प्रयास और धैर्य इतिहास में लिखी जाएगी. 


प्रधानमंत्री ने कहा कि युद्ध के इस समय में भारत की दूसरे देशों के साथ जो दोस्ती है, वह बहुत काम आई. इस संकट के शुरू होने से पहले भारत 25-26 देशों से ही ईंधन का आयात करता था. लेकिन संकट के समय भारत की डिप्लोमैसी का जलवा दिख गया. दूसरे देशों के साथ हमारे अच्छे संबंध बहुत काम आए. युद्ध के दौरान ही भारत 40 से ज्यादा देशों से ईंधन मंगाने लगा. भारत ने दुनिया को स्पष्ट संदेश दिया कि हमारे लिए राष्ट्र हित और राष्ट्र के नागरिकों का हित सर्वोपरि है. नागरिक देवो भव के मंत्र से हमने काम किया. मुझे बताया गया कि आज राजस्थान में 10 -12 स्थान पर लाखों की तादाद में लोग जुट हैं, मैं स्क्रीन पर भी देख रहा था, लोग नजर आ रहे थे. उन सभी को मैं प्रणाम करता हूं. इस रण के कण कण ने हमें स्वाभिमान को सर्वोपरि रखने की सीख दी है. देश और व्यक्ति का स्वाभिमान तभी ऊपर रह सकता है, जब वह आत्मनिर्भर हो, दूसरों पर कम से कम निर्भर हो. राजस्थान की धरती से विकसित होने और आत्मनिर्भर होने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. 


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