कंगना का ये बदला रुप संबित पात्रा या फिर राखी सावंत से इंस्पायर्ड तो नहीं है!

एक पार्टी प्रवक्ता के जैसे धारदार जुबानी वार हो रहे हैं कंगना की तरफ से, बिना किसी सपोर्ट के इतना सब कहने पर नहीं हो रहा विश्वास, जैसे ही कंगना का रूख उद्धव और शिवसेना की ओर घूमा, नेतागण भी आए समर्थन में, करणी सेना को भी आई बहन की याद

Kangana
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Politalks.News/Maharashtra. इस दिनों देश की राजनीति हो या मीडिया चैनल्स, सभी टीवी स्क्रीन्स पर केवल एक ही चेहरा और एक ही नाम छाया हुआ है. वो है कंगना रनौत. महाराष्ट्र सरकार से सीधे सीधे अकेले टक्कर लेने वाली इस अभिनेत्री की बेबाकी और हिम्मत की दात देने का मन तो करता है, और देनी भी चाहिए लेकिन पता नहीं क्यों, बार बार मन में एक छिपा हुआ ख्याल है जो दिमाग को बार बार डायवर्ट कर देता है कि बीते कुछ दिनों में कंगना के मुंह से जो भी फूल झड़े हैं, उनमें बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा और अभिनेत्री राखी सावंत की खुशबू आ रही है. किसी भी मुश्किल से मुश्किल बात को 360 डिग्री एंगल में बीजेपी की ओर घुमाने में माहिर है संबित पात्रा.

ये उनका खास हुनर है जिसकी बदौलत उन्होंने हर किसी विपक्ष के प्रवक्ता को चुप्पी साधने पर मजबूर कर रखा है. कुछ ऐसा ही इन दिनों कंगना के साथ हो रहा है जो सुशांत सिंह राजपूत की मौत के किस्से को पहले नेपोटिज्म, फिर बॉलीवुड माफिया, उसके बाद अपने आत्मसम्मान की लड़ाई और अब बदले की लड़ाई तक खींच लाई है. अपने ताजा बयान में कंगना ने उद्धव ठाकरे को वंशवाद का नमुना तक कह दिया, साथ ही बालासाहेब की विचारधारा को सत्ता के लिए बेच शिवसेना को सोनिया सेना बनाने की बात भी कही. मतलब साफ है कि कंगना ने शिवसेना के साथ कांग्रेस पर भी सीधा और स्पष्ट वार किया है.

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दूसरा उदाहरण राखी सावंत हैं जो क्या बोल रही हैं, उन्हें खुद भी पता नहीं होता. कंगना का हाल भी कुछ ऐसा ही हो चला है. राखी सावंत के पद चिन्हों पर चलते हुए कंगना बेपैर की बातें भी कर रही हैं. कंगना ने जारी एक वीडियो में कहा कि वे देश की जनता से वादा करती हैं कि वो अयोध्या के साथ कश्मीरी पंडितों पर भी फिल्म बनाएंगी. अब ये तो सभी जानते हैं कि दोनों मामलों का महाराष्ट्र से दूर दूर तक कोई वास्ता नहीं. वहीं कश्मीरी पंडितों ने खुद अपना दर्द सांझा करते हुए कहा कि वक्त आने पर लोग उनका इस्तेमाल करते हैं लेकिन मर्म पर दवा नहीं लगाते. ऐसे में उन्हें इस राजनीति से दूर रखा जाए.

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पहले मुंबई को पीओके और तालिबान बताने के बाद आत्मसम्मान की लड़ाई में महाराष्ट्र को मराठा प्रदेश बताना, उसके बाद अपनी फिल्म मर्णिकर्णिका का जिक्र करते हुए खुद को मराठा बताना और बाद में सरकार, पुलिस और सरकारी संस्थाओं को शिवसेना के गुंडे बताने तक का ये सफर अभिनेत्री कंगना को एक पार्टी प्रवक्ता जैसा ही तो फील करा रहा है. पहले उनके सोशल मीडिया अकाउंट का नाम कंगना रनौत टीम से कंगना रनौत करना, उसके तुरंत बाद उद्धव ठाकरे और सीधे सरकार पर अटैक जिस तरह से लगातार हो रहे हैं, उससे तो यही लग रहा है.

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यहां तक की सोशल मीडिया पर ‘महाराष्ट्र का सीएम नपुंसक है’ जैसे हैशटैग से लाखों की संख्या में ट्वीट हो रहे हैं, उसके पीछे राजनीतिक पार्टी काम न कर रही है, ऐसा समझना तो आंख बंद कर लेने जैसा है.

एक बारगी मान भी लिया जाए कि कंगना की प्रोपर्टी को जो नुकसान हुआ है, उससे कंगना व्यथित हैं जो स्वभाविक है. पहली बात- 4 नोटिस जाने के बाद कंगना के वकील ने खुद भी हाईकोर्ट में अर्जी लगाई है जिसमें से एक खारिज हो चुकी है और दूसरे की सुनवाई होनी है. नोटिस एक सप्ताह पहले का है लेकिन कंगना हिमाचल से लौटी नहीं. वो इसलिए क्योंकि उन्होंने पहले से संजय राउत को चुनौती दी थी कि वे 9 सितम्बर को मुंबई लौटेंगी और जिसे जो उखाड़ना है, उखाड़ ले. अपनी बात पर कायम रहते हुए वें बुधवार को ही लौटी हैं.

दूसरा- उन्होंने उद्धव सरकार को आतंक, बॉलीवुड को माफिया और बीएमसी को शिवसेना का गुंडा बता दिया. उद्धव ठाकरे से तो कंगना के सुर इस तरह से हैं जैसा वे किसी सड़क छाप गुंडे से बात कर रही हो. पद्मावत और मर्णिकर्णिका जैसी फिल्मों के खिलाफ प्रदर्शन कर चुकी करणी सेना अचानक से कंगना के समर्थन में आकर खड़ी हो गई. करणी सेना को अब जाकर अपनी बहन की याद आ गई और कंगना को देश की बेटी बता दिया. महाराष्ट्र के पूर्व सीएम देवेंद्र फडणवीस खुलकर उन्हें समर्थन दे रहे हैं. यहां तक की केंद्र ने उन्हें आनन फानन में वाई सिक्योरिटी मिली गई. कुल मिलाकर मुंबई पुलिस चाहकर भी कंगना के आसपास भी नहीं भटक सकती.

इधर, अब कंगना और संजय राउत की जुबानी जंग बदलकर कंगना और उद्धव ठाकरे की ‘बदलापुर’ बन चुकी है. जैसा कि बताया जा रहा है कि सरकार ने बदले के लिए ये कार्रवाई की है. वैसे देखा जाए तो संजय राउत के बयानों से ज्यादा तो कंगना के ट्वीटर हैंडल पर जुबानी तीर आराम से मिल जाएंगे कि ये क्या था और कहां तक इसे ले जाया गया.

विपक्ष ने बीएमसी की कार्रवाई पर भी सवाल उठाते हुए पूछा है कि इतनी जल्दी कार्रवाई कैसे हुई. जबकि पिछले कुछ सालों की खबरों पर गौर किया जाए तो अकेली कंगना ही नहीं हैं जिनकी प्रोपर्टी पर बीएमसी ने कार्रवाई की है. ताजा मामले में फैशन डिजाइनर मनीष मल्हौत्रा को भी बीएमसी का नोटिस पहुंचा है. वहीं बॉलीवुड किंग शाहरूख खान के मन्नत बंगले पर भी बीएमसी का बुलडोजर चढ़ चुका है.

2015 में शाहरुख खान के पड़ोसियों ने अभिनेता पर सार्वजनिक स्थान पर अतिक्रमण करने का आरोप लगाया था. ये आरोप मन्नत वाले बंगले को लेकर था. अभिनेता ने कथित तौर पर अपनी वैनिटी वैन को पार्क करने के लिए रैंप का इस्तेमाल किया. भारी पुलिस सुरक्षा के बीच 14 फरवरी को बीएमसी अधिकारियों ने रैंप को तोड़ दिया. यहीं नहीं, उनके करीब दो लाख रुपये का हर्जाना भी वसूला.

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बीएमसी ने 19 जून, 2017 को वर्सोवा में फिल्म अभिनेता अरशद वारसी के बंगले पर कार्रवाई की थी. बीएमसी ने अवैध रूप से बने एक अतिरिक्त मंजिल को ध्वस्त कर दिया था. अवैध निर्माण को हटाने के लिए 24 घंटे का समय दिया गया था. अभिनेता की ओर से कोई जवाब नहीं मिलने पर बीएमसी ने 19 जून को अवैध निर्माण को ध्वस्त कर दिया. इसी प्रकार बीएमसी ने 4 अगस्त, 2016 को वर्सोवा स्थित कपिल शर्मा के बंगले के बगल में अवैध निर्माण को उखाड़ फेंका था. ये कार्रवाई तब हुई थी जब कपिल शर्मा की ओर से जुलाई में जारी नोटिस का कोई जवाब नहीं मिला था. पिछले साल अर्जुन कपूर के अपार्टमेंट की छत पर बनाई गई जिम को भी बीएमसी ने तोड़ा था.

ये तो हुई बीएमसी की बात. अब बात करें कंगना की कुछ निजी बातों की. फिल्मों में आने से पहले अभिनेता आदित्य पंचोली के साथ कंगना के संबंधों से सभी वाकिफ हैं. आदित्य पंचोली की सीढ़ी ने कंगना को मॉडलिंग कॉन्ट्रेक्ट तक तो पहुंचा दिया. इसके बाद आए अध्ययन सुमन जिनके साथ 2016 में हुआ बवाल काफी वायरल हुआ था. अध्ययन सुमन ने कंगना पर ड्रग्स लेने और खुद को भी जबरन ड्रग्स देने का आरोप भरी मीडिया के सामने लगाया. जांच शुरु हुई लेकिन उस समय महाराष्ट्र में फडणवीस और शिवसेना की मिली एनडीए सरकार थी तो मामला ज्यादा नहीं बढ़ा. अब शिवसेना ने उसी बयान को आधार बनाकर जांच फिर से शुरू की है जिसके बाद अध्ययन सुमन ने खुद को इन मामलों से अलग रखने की बात कही है.

ऋतिक रोशन से कंगना के संबंधों का जिक्र न किया जाए तो बेमानी होगी. दोनों के बीच के रिलेशन की वजह से ऋतिक और सुजैन की शादी करीब करीब टूटने के कगार पर थी लेकिन बाद में ऋतिक के पीछे हटने से कंगना ने अपनी अलग राह पकड़ ली लेकिन तब तक उनकी बॉलीवुड में एक जगह सेट हो चुकी थी. कंगना के अभिनय की काबिलियत से किसी को कोई एतराज नहीं लेकिन अन्य अभिनेत्रियों से उनकी आए दिन झड़प सीधे तौर पर इशारा करती है कि कंगना को केवल खुद से मतलब है किसी और से नहीं. उनका दायक फिक्स है.

इन सभी घटनाक्रमों के बीच एक बात से सभी का ध्यान पूरी तरह से हट गया जो सुशांत को न्याय दिलाने को लेकर था. कंगना का ये रूप भी सुशांत की मौत के बाद ही सामने आया जब उन्होंने बॉलीवुड को सुशांत की मौत का जिम्मेदार ठहराया, जबकि वे खुद भी उसी का हिस्सा हैं. ये बात भी किसी से छिपी नहीं कि बॉलीवुड में सभी स्टार्स ने अपना एक फिक्स दायरा बना रखा है और उन्हीं लोगों के साथ काम करते हैं, फिर वो शाहरूख खान हो, आमिर खान, अक्षय कुमार हो या फिर करण जौहर. अब ये इनकी मर्जी है कि कौन इनके साथ काम करेगा या नहीं करेगा. कंगना ने इसे नेपोटिज्म बताया है जबकि कंगना की खुद की टीम भी यही सब कर रही है.

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कंगना के समर्थन में जो भी साथ खड़े हैं, उनके से काफी कम लोग सुशांत मामले में उनके साथ खड़े हुए थे. अब एक पार्टी विशेष तो पर्दे के पीछे से ही नहीं, लेकिन पूरी तरह कंगना को महाराष्ट्र मामले में एक शस्त्र की तरह इस्तेमाल कर रही है. जब कंगना ने संजय राउत के साथ जुबानी जंग के बाद महाराष्ट्र को पीओके और तालिबान जैसा बताया, तब भी माननीय फडणवीस साहब ने चुप्पी साधी रखी लेकिन जैसे ही निशाना संजय राउत से हटकर उद्धव ठाकरे और शिवसेना पर आया, देवेंद्र फडणवीस के साथ कुछ केंद्रीय मंत्री भी खुलकर सामने आ गए. कंगना के सोशल मीडिया पर हालिया में उद्धव ठाकरे और शिवसेना को लेकर दिए गए बयानों को गौर से देखें तो किसी को भी आसानी से समझ आ जाएगा कि उनमें और किसी पार्टी प्रवक्ता में ज्यादा फर्क नहीं है.

इधर, सुशांत सिंह की मौत को बीजेपी तो बिहार में भी एक शस्त्र की तरह इस्तेमाल कर रही है. ‘ना भूल हैं ना भूलने देने’ स्लोगन के साथ बीजेपी चुनावी मैदान में है. कुल मिलाकर इस मुद्दे को जमकर भुनाने की कोशिश की जा रही है. सीबीआई जांच का समर्थन कर नीतीश कुमार तो पहले ही वाहवाही लूट चुके हैं. खैर जो भी हो लेकिन हमारा तो यही कहना है कि सस्ती पॉपुलर्टी के चक्कर में कंगना का ये कदम अब उनपर ही भारी पड़ रहा है. वहीं ‘जस्टिस फॉर सुशांत‘ मुहिम चलाने वाले लोग अब खुद ही अपने रास्ते पर भटक से गए हैं कि वो सुशांत के लिए लड़ रहे थे या अब कंगना और महाराष्ट्र सरकार के बीच पिस रहे हैं.

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