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हमारे यहां गर्मी से लड़ने का तरीका भी रसोई में मिलता है - पीएम मोदी

31 मई 2026
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हमारे यहां गर्मी से लड़ने का तरीका भी रसोई में मिलता है - पीएम मोदी

मन की बात के 134वें एपिसोड में बोले पीएम मोदी, 100 मी.रेसर गुरिंदरवीर एवं अनिमेष कुजूर का जिक्र किया, चोला काल की प्राचीन ताम्र पट्टिकाओं को बताया देश का गौरव

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को मन की बात के 134वें एपिसोड में गर्मी को लेकर बात की. पीएम ने कहा कि हमारे यहां गर्मी से लड़ने का तरीका कई बार रसोई में भी मिलता है. आपने भी देखा होगा जैसे-जैसे गर्मी बढ़ती है, वैसे-वैसे घर की रसोई का स्वाद बदल जाता है. पीएम ने मन की बात कार्यक्रम में दो चर्चित एथलीट गुरिंदरवीर सिंह और अनिमेष कुजूर का भी जिक्र किया. प्रधानमंत्री ने कहा कि महज दो दिनों के भीतर मेंस 100 मीटर रेस में नेशनल रिकॉर्ड तीन बार टूटा. गुरिंदरवीर सिंह ने 23 मई को रांची के बिरसा मुंडा स्टेडियम में आयोजित फेडरेशन कप सीनियर नेशनल एथलेटिक्स टूर्नामेंट की पुरुषों की 100 मीटर रेस 10.09 सेकेंड में पूरी की और देश के सबसे तेज धावक बने. पहले यह रिकॉर्ड अनिमेष के नाम था.

 

मन की बात कार्यक्रम में पीएम की बड़ी बातें

 

उन्होंने कहा कि देशी पेय से आप भी परिचित हैं, अगर आप उत्तर भारत में जाएंगे तो काफी जगह आपको मिलेगा आम पन्ना, कच्चे आम का स्वाद और गर्मी से राहत भी. पंजाब-हरियाणा जाइए तो लस्सी मिल जाएगी. राजस्थान और गुजरात में छाछ, जैसे हर खाने की साथी बन जाती है.

 

1. बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश में सत्तू का शरबत, उसकी तो बात ही क्या है - पेट भी भरे, ताकत भी दे. कोंकण और गोवा में कोकम शरबत, सोल कढ़ी. दक्षिण भारत में पानकम, नीर मोर, सम्बारम और ओडिशा में बेल पना, वो सिर्फ पेय नहीं, भारत के अलग-अलग क्षेत्रों की परंपरा का हिस्सा है. उन्होंने कहा कि इन सभी पेय पदार्थों की कोई ब्रांडिंग नहीं है, लेकिन पीढ़ियों का अनुभव समाया हुआ है. उन्होंने गर्मी के दौरान इनका जमकर सेवन करने की राय दी.

 

2. गर्मी में आम खुशबू हर घर में: गर्मी आते ही एक और चर्चा हर घर में शुरु हो जाती है और वो है आम. हर इलाके का अपना आम, अपना स्वाद, अपनी खुशबू होती है. महाराष्ट्र और कोंकण का हापुस, अल्फांसो, गुजरात का केसर यह तो आमरस की जान है. उत्तर प्रदेश का दशहरी और मेरी काशी का लंगड़ा.

 

दक्षिण भारत जाइए, तो बंगनपल्ली, तोतापुरी, नीलम, मलगोवा, बंगाल का हिमसागर, ओडिशा और आंध्र प्रदेश का सुवर्णरखा. यानी जगह बदलती है, आम का रूप-रंग और उसका स्वाद भी बदल जाता है. साथियों आम की ये यात्रा, अब गांव से ग्लोबल मार्केट तक भी पहुंच रही है. मैं आम की पैदावार से जुड़े अपने किसान भाई-बहनों की प्रशंसा करूंगा. आप देश की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए आम किसान नहीं बहुत विशेष हैं.

 

महाराष्ट्र और कोंकण का हापुस, अल्फांसो, गुजरात का केसर यह तो आमरस की जान है. दक्षिण भारत जाइए, तो बंगनपल्ली, तोतापुरी, नीलम, मलगोवा, बंगाल का हिमसागर, ओडिशा और आंध्र प्रदेश का सुवर्णरखा.

 

3. पीएम ने बताया कि बीते दिनों मुझे नीदरलैंड जाने का अवसर मिला. वहां एक विशेष समारोह में चोला काल की प्राचीन ताम्र पट्टिकाएं भारत को वापस सौंपी गईं. ये मुख्य रूप से राजा राजेंद्र चोल-प्रथम द्वारा अपने पिता राजा राजराजा चोल के एक वचन को पूरा करने से जुड़ी हैं. इनमें आनइमंगलम् गांव को एक बौद्ध विहार को दान देने का उल्लेख है. इन ताम्र पट्टिकाओं में चोल वंश की उपलब्धियों का भी वर्णन मिलता है. विशेषज्ञ मानते हैं कि ये इन्क्रिप्शन 1000 साल से ज्यादा पुराने हैं. ये ताम्र पट्टिकाएं प्राचीन ब्राह्मी लिपि और पाली भाषा में लिखी गई हैं. इनसे उस समय की शासन-व्यवस्था, धर्म और संस्कृति के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है.

 

4. पीएम ने तमिलनाडु की शिक्षिका गिरिजा अम्मा का जिक्र करते हुए बताया कि उन्होंने 'मन की बात' से प्रेरणा लेकर देश के अनेक सैनिकों के लिए योगदान का संकल्प लिया. इसके लिए उन्होंने अपने सभी स्कूलों के स्टूडेंट्स को प्रेरित किया. उन्होंने बच्चों से कहा कि वे वीर जवानों के लिए हर दिन एक रुपया योगदान दें. यानी एक साल में हर स्टूडेंट की ओर से 365 रुपये जमा हुए. इस छोटे-छोटे योगदान से करीब 40 लाख रुपये इकट्ठा हुए. उनकी देशभक्ति की भावना हर भारतवासी को प्रेरित करने वाली है.

 

5. पीएम ने कहा कि देशभर में एस्ट्रोनॉमी क्लब तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं. नेविगेशन हो, पंचांग हो, या हमारे पर्व-त्योहार इन सबका संबंध आकाश और तारों से रहा है. युवाओं में भी इसको लेकर काफी इंट्रेस्ट है. बेंगलुरु एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी द्वारा ऑब्जर्वेशनल सेशन आयोजित किए जाते हैं. 'खगोल मण्डल' नाम की एक टीम ने 30 घंटे का एक बहुत इनोवेटिव कोर्स शुरू किया है. ऐसे ही केरलम और गुजरात में भी एस्ट्रोनॉमी इवेंट आयोजित किए जाते हैं.

 

प्रधानमंत्री मोदी का मन की बात कार्यक्रम 22 भारतीय भाषाओं, 29 बोलियों एवं 11 विदेशी भाषाओं में प्रसारित किया जाता है. इस कार्यक्रम की शुरुआत 3 अक्टूबर 2014 से हुई थी. अब तक इसके 134 एपिसोड ब्रॉडकास्ट हो चुके हैं.

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