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'सड़क से सदन तक गूंजेगी हक की आवाज'- नीट और कोटा त्रासदी पर जूली का सरकार को अल्टीमेटम

11 मई 2026
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'सड़क से सदन तक गूंजेगी हक की आवाज'- नीट और कोटा त्रासदी पर जूली का सरकार को अल्टीमेटम

पेपर लीक पर राजनीति कर सत्ता में आई भाजपा के राज में युवा असुरक्षित": नेता प्रतिपक्ष का तीखा प्रहार

Rajasthan Politics: राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने नीट (NEET) परीक्षा के पेपर लीक होने की खबरों और कोटा में प्रसूताओं की दुखद मृत्यु को लेकर राज्य व केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. जूली ने नीट प्रकरण को देश और प्रदेश के लाखों होनहार बच्चों के भविष्य के साथ क्रूर खिलवाड़ करार देते हुए कहा कि इस पूरे मामले में राजस्थान के सीकर जैसे शिक्षा केंद्रों का नाम आना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. उन्होंने मांग की है कि इस मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कर पर्दे के पीछे छिपे असली दोषियों को बेनकाब किया जाए, ताकि मानसिक तनाव झेल रहे परीक्षार्थियों और उनके अभिभावकों को न्याय मिल सके.

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार करते हुए कांग्रेस नेता टीकाराम जूली ने कहा कि चुनावी जनसभाओं में पेपर लीक न होने के बड़े-बड़े दावे करने वाली सरकार की पोल अब खुल चुकी है. इसके साथ ही जूली ने सवाल उठाया कि पूर्व में ओएमआर शीट में हुई गड़बड़ियों पर सरकार ने अब तक चुप्पी क्यों साधी हुई है? जूली ने आरोप लगाया कि केवल मंचों से भाषण देने और धरातल पर पारदर्शी व्यवस्था लागू करने में जमीन-आसमान का अंतर होता है और भाजपा सरकार की इसी प्रशासनिक विफलता का खामियाजा आज प्रदेश का युवा भुगत रहा है.

नेता प्रतिपक्षटीकाराम जूली  ने भाजपा पर युवाओं को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि जिस दल ने पेपर लीक के नाम पर राजनीति कर सत्ता हासिल की, आज उन्हीं के राज में प्रतिष्ठित परीक्षाएं सुरक्षित नहीं हैं. उन्होंने कांग्रेस शासन की याद दिलाते हुए कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार ने पेपर लीक रोकने के लिए देश का सबसे कठोर कानून बनाया था, लेकिन वर्तमान सरकार की शिथिलता के कारण भर्ती माफिया फिर से सक्रिय हो गए हैं. जूली ने स्पष्ट किया कि यह किसी राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि देश के भविष्य का सवाल है और इस पर राजनीति करना बंद होना चाहिए.

वही कोटा में प्रसूताओं की मृत्यु पर गहरा दुःख व्यक्त करते हुए कांग्रेस नेता जूली ने इसे सरकारी तंत्र की संवेदनहीनता और चिकित्सा विफलता बताया. उन्होंने इस दुखांतिका की न्यायिक जांच की मांग करते हुए कहा कि एक माँ का दुनिया से जाना पूरे परिवार को अंधकार में धकेल देता है। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि इन मौतों के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है और प्रशासन अपनी बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था को सुधारने के बजाय चुप्पी क्यों साधे हुए है?

वहीं, केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री की नीतियों पर निशाना साधते हुए टीकाराम जूली ने कहा कि जब देश तेल और गैस के संकट से जूझ रहा था, तब प्रधानमंत्री और भाजपा नेता चुनावी राज्यों में हेलीकॉप्टर उड़ाने में व्यस्त थे. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि बहुत देर कर दी मेहरबां आते-आते, अब चुनाव खत्म होने के बाद प्रधानमंत्री जनता को बचत की सीख दे रहे हैं और सोना न खरीदने जैसी सलाह दे रहे हैं. उन्होंने इसे सरकार का विरोधाभासी चरित्र बताते हुए कहा कि भाजपा के लिए हमेशा जनहित से ऊपर सत्ता रही है.

वही अंत में, नेता प्रतिपक्ष जूली ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने नीट पेपर लीक और कोटा की चिकित्सा त्रासदी पर त्वरित और पारदर्शी कार्रवाई नहीं की, तो कांग्रेस युवाओं और आम जनता के हितों की रक्षा के लिए सड़क से सदन तक संघर्ष करेगी. उन्होंने सरकार को नसीहत दी कि वह चुनावी दौरों और भाषणों से बाहर निकलकर प्रदेश की गंभीर समस्याओं के समाधान पर ध्यान केंद्रित करे.


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