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गिरल माइंस आंदोलन के 7वें दिन उमड़ा जनसैलाब, रविंद्र सिंह भाटी ने कहा- अंतिम सांस तक लड़ेंगे हक की लड़ाई

11 मई 2026
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गिरल माइंस आंदोलन के 7वें दिन उमड़ा जनसैलाब, रविंद्र सिंह भाटी ने कहा- अंतिम सांस तक लड़ेंगे हक की लड़ाई

'मजदूरों के सम्मान में, भाटी मैदान में: 7वें दिन उमड़ा जनसैलाब, कंपनी की तानाशाही के खिलाफ आर-पार की जंग'

बाड़मेर: बाड़मेर जिले की गिरल लिग्नाइट माइंस में अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे श्रमिकों और ग्रामीणों का आंदोलन सातवें दिन एक विशाल जनआंदोलन में तब्दील हो गया. पिछले एक महीने से जारी इस गतिरोध ने उस समय नई करवट ली, जब धरनास्थल पर समर्थन देने के लिए बुजुर्गों, महिलाओं और हजारों ग्रामीणों का हुजूम उमड़ पड़ा. इस जनसैलाब ने न केवल आंदोलन को सामाजिक मजबूती दी, बल्कि कंपनी प्रबंधन और प्रशासन की नींद भी उड़ा दी है. क्षेत्र के संसाधनों पर स्थानीय लोगों के अधिकार की गूंज अब पूरे बाड़मेर में सुनाई दे रही है.


शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी पिछले सात दिनों से लगातार धरनास्थल पर डटे हुए हैं और मजदूरों के कंधे से कंधा मिलाकर संघर्ष का नेतृत्व कर रहे हैं. आंदोलनकारियों को संबोधित करते हुए विधायक भाटी ने बेहद तल्ख लहजे में कहा कि यह लड़ाई केवल रोजगार की नहीं, बल्कि इस माटी के सम्मान और युवाओं के भविष्य की है. उन्होंने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी कि जब तक हर एक मजदूर को न्याय नहीं मिल जाता और स्थानीय युवाओं का शोषण बंद नहीं होता, तब तक यह संघर्ष रुकने वाला नहीं है. भाटी का वहां लगातार डटे रहना आंदोलनकारियों के मनोबल को सातवें आसमान पर ले गया है.


बता दें आंदोलन के सातवें दिन की सबसे खास तस्वीर महिलाओं और बुजुर्गों की भागीदारी रही. ग्रामीण महिलाओं ने भारी संख्या में पहुंचकर यह संदेश दिया कि यह केवल श्रमिकों की रोजी-रोटी का मसला नहीं, बल्कि उनके परिवारों के वजूद की लड़ाई है. धरनास्थल पर मौजूद बुजुर्गों ने कंपनी की कार्यप्रणाली पर गहरी नाराजगी जताते हुए कहा कि स्थानीय संसाधनों का दोहन कर रही कंपनियों को यहां के युवाओं और मजदूरों की अनदेखी करने का कोई हक नहीं है. समाज के हर वर्ग के जुड़ने से यह विरोध प्रदर्शन अब एक भावनात्मक मोड़ ले चुका है.


श्रमिकों की मांगें अभी भी जस की तस बनी हुई हैं, जिससे आंदोलनकारियों में भारी रोष है. प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगों में कंपनी से निकाले गए 100 से अधिक ड्राइवरों और श्रमिकों की तुरंत पुनर्बहाली, कार्य के घंटे 8 निश्चित करना, स्थानीय युवाओं को भर्ती में प्राथमिकता देना और नियमानुसार वेतन-बोनस का भुगतान शामिल है. मजदूरों का आरोप है कि कंपनी लंबे समय से भेदभावपूर्ण नीति अपना रही है और उनकी जायज मांगों को अनसुना किया जा रहा है, जिसके कारण वे सड़क पर उतरने को मजबूर हुए हैं.


विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने कंपनी प्रबंधन को कड़े शब्दों में आगाह करते हुए कहा कि इस शांतिपूर्ण आंदोलन को प्रशासन की कमजोरी समझने की भूल न की जाए. उन्होंने कहा कि यह आंदोलन दबने वाला नहीं है, अगर जल्द ही लिखित में मांगों पर ठोस सहमति नहीं बनी, तो इस आंदोलन को और भी उग्र और व्यापक स्तर पर ले जाया जाएगा. भाटी ने स्पष्ट किया कि मजदूरों के अधिकारों और आत्मसम्मान से कोई भी समझौता स्वीकार्य नहीं होगा और न्याय मिलने तक वे धरना स्थल से नहीं हटेंगे.


बात दें वर्तमान में गिरल लिग्नाइट माइंस के बाहर का नजारा किसी महाकुंभ जैसा नजर आ रहा है, जहाँ लगातार नारेबाजी और जनसभाओं का दौर जारी है. पूरे बाड़मेर क्षेत्र की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन और कंपनी प्रबंधन इस बढ़ते दबाव के आगे कब झुकते हैं. लेकिन फिलहाल, आंदोलनकारियों के संकल्प और रविंद्र सिंह भाटी के नेतृत्व ने यह साफ कर दिया है कि स्थानीय लोगों की आवाज को अब दबाना नामुमकिन है. जब तक जीत हासिल नहीं होती, बाड़मेर की यह धरा संघर्ष की गवाह बनी रहेगी.

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