सत्ता और विपक्ष के राजनीतिक खेल से अछूती नहीं है छात्र संगठनों की तकरार

मौका छात्रसंघ कार्यालय उदघाटन का हो और मुख्य अतिथि प्रमुख विपक्षी को बनाया जाए व कॉलेज प्रशासन सत्ता पक्ष की भूमिका में आ जाए तो यह जानना दिलचस्प हो जाता है कि सत्ता के हाथ से जाने का स्वाद कैसा होता है

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पाॅलिटाॅक्स ब्यूरो. सदन में सत्ता और विपक्ष की भूमिका निभाने वाली कांग्रेस और भाजपा की लडाई से अब काॅलेज के परिसर भी सुरक्षित नहीं रहे हैं. बीजेपी-कांग्रेस की राजनीति में रंगे छात्रसंघों की पैंतरेबाजी एक दूसरे को नीचा दिखाने के लिए किसी भी स्तर तक जा सकटी है. खासतौर से तब, जब मौका छात्रसंघ कार्यालयों में उदघाटन का हो और कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रमुख विपक्षी यानी भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनियां हों और उनके सामने कॉलेज प्रशासन किसी कांग्रेस कार्यकर्ता की भूमिका में हो, तो यह जानना दिलचस्प हो जाता है कि सत्ता के हाथ से जाने का स्वाद कैसा होता है. राजस्थान में भाजपा राज गया और कांग्रेस राज आया तो सारी तस्वीर ही बदल गई. बदली हुई इस तस्वीर का नजारा अजमेर और पुष्कर में हुए दो काॅलेजों के छात्रसंघ कार्यालयों के उदघाटन कार्यक्रमों में नजर आया.

पहला कार्यक्रम पुष्कर काॅलेज का था, यहां ABVP ने छात्र संघ अध्यक्ष पद पर जीत दर्ज की है. छात्रसंघ कार्यालय के उदघाटन की तारीख तय की गई और मुख्य अतिथि के तौर पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनियां को बुलाया गया. लेकिन सतीश पूनियां के पहुंचने के एक दिन पहले ही बिना किसी ठोस कारण के काॅलेज प्रशासन ने कार्यक्रम रदद कर दिया. अचानक कार्यक्रम रदद हुआ तो शोर शराबा तो होना भी लाजमी था, सो पुलिस भी बुला ली गई. एबीवीपी ने काॅलेज के बाहर अपना तामझाम जमा दिया.

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इसके बाद निर्धारित समय पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनियां विधायक सुरेश रावत और पालिका चेयरमैन कमल पाठक के साथ काॅलेज के बाहर पहुंच गए. काॅलेज के बाहर चल रही गहमा गहमी के बीच तीनों सीधे काॅलेज में गए. वहां काॅलेज प्राचार्य के कक्ष पर आनन-फानन में लगाए गए फीते को काटा और हो गया छात्रसंघ कार्यालय का उदघाटन. काॅलेज प्राचार्य के कक्ष में ही एक कुर्सी लगाकर छात्रसंघ अध्यक्ष को बिठाकर उसे माला पहना दी गई. बड़ी बात यह कि इस दौरान पूरा काॅलेज प्रशासन गायब रहा.

इस अजीबो-गरीब उदघाटन के बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनियां पहुंचे अजमेर के जीसीए काॅलेज कबछात्रसंघ कार्यालय के उदघाटन के लिए. इस बार उनके साथ सांसद भागीरथ चौधरी, पूर्वमंत्री एवं विधायक वासुदेव देवनानी और अनिता भदेल भी थीं. खास बात यह रही कि उनके काॅलेज पहुंचने से पहले ही एनएसयूआई के पदाधिकारियों ने कार्यालय का फीता काटकर उसका उदघाटन कर दिया और उदघाटन की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल भी कर दी गई. इसके बाद पहुंचे सतीश पूनिया ने एबीवीपी की ओर से आयोजित कार्यक्रम में भाग लिया. वो मंच पर गए तो उनके साथ सांसद और अजमेर के दोनों विधायक भी थे.

लेकिन कार्यक्रम में NSUI कार्यकर्ताओं ने हंगामा शुरू कर दिया. NSUI ने साांसद और विधायकों को मंच से नीचे उतारने की मांग यह कहते हुए शुरू कर दी कि वो बिन बुलाए मेहमान हैं. इस दौरान एनएसयूआई के कुछ कार्यकर्ताओं ने सांसद के साथ धक्का मुक्की भी की. शारे-शराबे और हंगामें के बीच भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनियां ने गहलोत सरकार और कांग्रेस को जमकर कोसा. यहां भी खास बात यही रही कि पूरे घटनाक्रम के दौरान कॉलेज प्रशासन मूक दर्शक की भांति ही देखता रहा. इस काॅलेज में भी पूरे कार्यक्रम के दौरान पुलिस बल तैनात रहा.

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यह दोनों घटनाएं बताती है कि किस तरह राजनीति विद्यार्थियों का इस्तेमाल अपने राजनीतिक एजेंडे के लिए करती है. इसके साथ ही सरकार बदलने का प्रशासनिक अधिकारियों पर किस हद तक का असर पडता है यह भी उक्त दोनों घटनाओं में कॉलेज प्रशासन की हालत से समझ आता है. ऐसा सिर्फ सतीश पूनियां के साथ ही नहीं हुआ है बल्कि जब-जब राज्य की सत्ता और कॉलेज या विश्वविधालय की सत्ता एक दूसरे के विपरित वाली होती है तब-तब हमेशा से कमोबेश ऐसा ही होता आया है. इसीलिए तो कहते हैं असली राजनीति की पहली पाठशाला छात्रसंघ राजनीति है.

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