विधानसभा चुनाव को लेकर राज्य की सियासत में गर्माहट, अब सवाल यह खड़ा हो रहा है कि एसपीए में असहमति से गठबंधन की ताकत प्रभावित होगी या फिर नहीं..
तमिलनाडू में इसी साल हो रहे विधानसभा चुनाव को लेकर राज्य की सियासत में गर्माहट बढ़ गई है. चुनावी रण में राजनीतिक पार्टियों ने अपनी-अपनी तैयारी भी तेज कर दी है. एक तरफ जहां भारतीय जनता पार्टी सत्ता में आने के लिए राज्य में नए नए दावे पेश कर रही है. वहीं दूसरी ओर सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे को लेकर गतिरोध अभी भी जारी है. डीएमके सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस (एसपीए) गठबंधन के तहत कांग्रेस 234 में से 45 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है, जबकि मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की अगुवाई वाली डीएमके 25 से ज्यादा सीटें देने के पक्ष में नहीं है.
कांग्रेस के तमिलनाडु प्रभारी गिरीश चोडांकर और प्रदेश अध्यक्ष के. सेल्वापेरुंथगई ने डीएमके की संसदीय दल की नेता कनिमोझी करुणानिधि से सीट शेयरिंग को लेकर मुलाकात की. कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट कहा कि पार्टी 45 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है. डीएमके पिछली बार की तरह इस बार भी 25 सीटें देने पर अड़ी हुई है. इससे पहले दिल्ली में डीएमके नेता कनिमोझी और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बीच भी सीट बंटवारे को लेकर चर्चा हो चुकी है.
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पार्टी सूत्रों की मानें तो गठबंधन की जीत की संभावना को बढ़ाने के लिए कांग्रेस 45 सीटों की मांग कर रही है. पिछले चुनाव में कांग्रेस ने 25 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 18 पर जीत दर्ज की थी. कांग्रेस का दावा है कि पिछली बार डीएमके जिन 40 सीटों पर हारी थी, उनमें से कम से कम 20 सीटें ऐसी हैं जहां कांग्रेस मजबूत स्थिति में है और जीत सकती है.
गौरतलब है कि तमिलनाडु में डीएमके सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस (एसपीए) का नेतृत्व कर रही है. इस गठबंधन में कांग्रेस के अलावा देसिया मुरपोक्कु द्रविड़ कड़गम (डीएमडीके), वामपंथी दल और विदुथलाई चिरुथैगल काची भी शामिल हैं. फिलहाल दोनों दलों के बीच बातचीत जारी है, लेकिन सीटों की संख्या को लेकर सहमति बनना अभी बाकी है. अब सवाल यह खड़ा हो रहा है कि क्या इससे गठबंधन की ताकत प्रभावित होगी या फिर नहीं.










