स्टेट हाइवे पर निजी वाहनों पर टोल शुरू, सरकार के फैसले के बाद गर्माई प्रदेश की सियासत, शुरू हुई राजनीतिक बयानबाजी

(Toll Tax on State Highway)

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. देशभर में इन दिनों आर्थिक मंदी का आलम है और राजस्थान भी इससे अछूता नहीं है. ऐसे में राजस्थान सरकार ने निजी वाहन मालिकों को पिछले 18 महिनों से स्टेट हाइवे पर मिल रही राहत को खत्म करते हुए आर्थिक बोझ बढ़ा दिया है. सरकार ने एक बडा निर्णय लेते हुए 1 नवंबर की रात से निजी वाहनों पर भी स्टेट हाईवे पर टोल (Toll Tax on State Highway) देना फिर से अनिवार्य कर दिया है. पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने पिछले साल 1 अप्रेल 2018 से प्रदेश में निजी वाहनों के लिए स्टेट हाइवे पर टोल फ्री किया था. सरकार के इस निर्णय के बाद प्रदेश की राजनीति गर्मा गई है. भाजपा इस मुददे पर सरकार को घेरने के लिए शुक्रवार को प्रदेश के सभी जिला मुख्यालय पर धरना प्रदर्शन कर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपेगी.

गहलोत सरकार के इस निर्णय के बाद प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी का दौर शुरू हो गया. गुरुवार सुबह भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने गहलोत सरकार के इस फैसले (Toll Tax on State Highway) को सरकार की तरफ से प्रदेश की जनता को दिवाली का तोहफा बताया तो इस पर दिल्ली में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक प्रेस वार्ता में जवाब देते हुए कहा की भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया अभी नये-नये मुल्ला है और नया-नया मुल्ला जोर से बांग देता है. सीएम गहलोत के इस बयान पर पूनिया ने पलटवार करते हुए कहा कि मैं मुल्ला नहीं हूं बल्कि मुझे लगता है कि यह गहलोत और कांग्रेस की प्रदेश में आखिरी पारी है.

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गहलोत सरकार द्वारा लिए गए टोल वापसी (Toll Tax on State Highway) के निर्णय के बाद भाजपा ने सरकार पर हल्ला बोल शुरू कर दिया है. प्रदेश भाजपा मुख्यालय पर गुरूवार शाम आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को सम्बोधित करते हुए प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने कहा कि प्रदेश के छोटे निजी वाहन मालिकों पर वित्तिय भार पडता था इसलिए पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने 1 अप्रेल 2018 को टोल माफी की थी. भाजपा सरकार के समय में भी प्रदेश में ऐतिहासिक सड़कें बनी थीं. प्रदेश की गहलोत सरकार यह तय नहीं कर पा रही है यह निर्णय किसके कहने पर हुआ. मुख्य सचेतक महेश जोशी कहते हैं कि इस मामले पर सचिन पायलट बयान दे सकते हैं. सरकार के भीतर इस मामले पर दो राय दिख रही है. गहलोत सरकार का यह दूसरा जनविरोधी निर्णय है. साथ ही पूनिया ने बताया कि टोल वापसी के विरोध में शुक्रवार को प्रदेश भर के जिला मुख्यालयों पर भाजपा धरना प्रदर्शन कर जिला कलेक्टर को ज्ञापन देगी.

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इससे पहले गुरुवार को प्रदेश सरकार के टोल वापसी के निर्णय पर जब उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट से पूछा गया तो वो इस सवाल को बार-बार टालते नजर आए. वहीं मुख्यमंत्री गहलोत ने दिल्ली में इस निर्णय पर कहा वसुंधरा राजे का टोल हटाने का फैसला एक चुनावी हथकंडा था, ये मैरिट के आधार पर लिया गया फैसला नहीं था. प्राइवेट कार चालकों का टोल माफ करने का क्या कारण था, सतीश पूनिया को यह समझने में वक्त लगेगा. टोल माफी मामले को वे समझ नहीं पा रहे हैं. पूनिया जी को मोदी जी और अमित शाह ने राजस्थान के मुख्यमंत्री के खिलाफ टारगेट देकर भेजा गया है.

वहीं पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने कहा कि जनता की मांग पर भाजपा सरकार ने स्टेट हाईवे पर निजी वाहनों को टोल फ्री किया था. अब कांग्रेस सरकार उस फैसले को बदलकर वापस टोल वसूली शुरू करने जा रही है. ये ही अंतर है कांग्रेस व भाजपा में, हम जनता को राहत देने का काम करते हैं, वो आहत करने का काम करते हैं.

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राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के मुखिया हनुमान बेनीवाल ने इस मामले पर सोशल मीडिया पर लिखा कि गहलोत सरकार का राजस्थान में राज्य राजमार्गो पर निजी वाहनों को पुनः टोल टैक्स (Toll Tax on State Highway) के दायरे में लाने का निर्णय जन विरोधी है. राजस्थान सरकार इस प्रकार के निर्णय से जनता की भावनाओं के साथ खेल रही है, जिसे बर्दाश्त नही किया जाएगा. किसान हुंकार रैलियों में राज्य को सम्पूर्ण टोल मुक्त करना हमारा प्रमुख एजेंडा था जिसमें तत्कालीन भाजपा सरकार ने स्टेट हाइवे पर प्राइवेट वाहनों को टोल मुक्त करके कुछ राहत दी थी. बेनीवाल ने चेतावनी देते हुए कहा कि वर्तमान राज्य सरकार अगर इस जन विरोधी निर्णय को वापिस नही लेती है तो इस मामले में बड़ा आंदोलन किया जाएगा. साथ ही बेनीवाल ने यह भी कहा कि वाहन चालक जब वाहन टैक्स देते है तो फिर टोल टैक्स क्यो ?

प्रदेश की गहलोत सरकार में सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना ने कहा कि एक बार छूट देने के बाद वापस लगाने पर विरोध तो होता ही है, मैंने भी फैसले पर साइन किए हैं, सीएम गहलोत से इस मामले पर बात करेंगे आज सीएम गहलोत बाहर है. वहीं स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा ने कहा कि भाजपा ने चुनावी स्टंट के रूप में किया था टोल माफ, अगर माफ करना होता तो शुरुआत में ही करते, 2018 में चुनाव से ठीक पहले क्यों किया टोल माफ?

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परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा कि प्रदेश में सड़कों के हालात सुधारने के लिए ज़रूरी है टोल, इस फैसले से प्रदेश के राजकोष को भी मिलेगी मज़बूती. वहीं भाजपा को चुनौती देते हुए खाचरियावास ने कहा कि ‘टोल वसूली का विरोध कर रही बीजेपी केंद्र में सत्ता में है, नेशनल हाईवे पर केंद्र टोल खत्म करें फिर हमसे पूछे सवाल, हम तो टोल लेकर प्रदेश के जर्जर सड़क तंत्र को करेंगे ठीक’

वहीं सरकार के टोल वापसी के इस निर्णय पर मुख्य सचेतक महेश जोशी ने कहा कि ‘डिप्टी सीएम पायलट पीडब्ल्यूडी महकमे के मंत्री है. कई कार्यकर्ताओं ने पायलट के पास अपनी बात पहुंचा दी है, वे जनभावना का ध्यान रखते हुए उचित फैसला करेंगे. केन्द्रीय राज्य मंत्री अर्जुन मेघवाल ने कहा कि राज्य सरकार का यह फैसला एक जन विरोधी कदम है.

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स्टेट हाइवे पर फिर से टोल वसूली के सम्बन्ध में गुरूवार को सचिवालय में मुख्य सचिव डीबी गुप्ता की अध्यक्षता में एक बैठक आयोजित हुई. इस बैठक में एसीएस वीनू गुप्ता, पीडब्ल्यूडी अतिरिक्त सचिव और सीई अनूप कुलश्रेष्ठ, अतिरिक्त सीई बीओटी टीसी गुप्ता सहित अन्य मौजूद रहे. बैठक के बाद मुख्य सचिव डीबी गुप्ता ने इस पूरे मामले पर कहा मुख्य तौर पर प्रदेश में सडकों के पीपीपी प्रोजेक्ट चल रहे है. ऐसे में सरकार को इंटरेस्ट राशि चुकाने में दिक्कत आ रही थी. स्टेट हाइवे पर टोल नहीं होने से राशि नहीं जुट पा रही थी. टोल लागू (Toll Tax on State Highway) करना जरूरी हो गया था. सडकों की मरम्मत व रखरखाव के लिए टोल लागू करना जरूरी हो गया था. गुप्ता ने यह भी कहा कि नेशनल हाईवे पर भी लगता है टोल इसलिए लगाना पड रहा है. टोल से मिलने वाली राशि सडकों के रखरखाव में खर्च होगी.

सतीश पूनिया को सीएम गहलोत ने कहा नया-नया मुल्ला हैं इसीलिए वे जोर-जोर से बांग दे रहे

CM Gehlot on Pooniya

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (CM Ashok Gehlot) ने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया पर जोरदार तंज कसते हुए उनको नया-नया मुल्ला कहा है. गुरुवार को मुख्यमंत्री गहलोत ने दिल्ली में एक प्रेस वार्ता को सम्बोधित करते हुए कहा कि, “पूनियां जी को बातें समझने में वक्त लगेगा, वे नए-नए मुल्ला हैं, जो नया मुल्ला होता है वो जोर-जोर से बांग देता है, उनकी अभी वही स्थिती बनी हुई है.

सीएम गहलोत (CM Ashok Gehlot) यहीं नहीं रुके, उन्होंने कहा, “सतीश पूनिया को मोदी और अमित शाह ने राजस्थान के मुख्यमंत्री को टारगेट करने को कहा है. पूनिया को अमित शाह और नरेन्द्र मोदी की तरफ से इशारा है कि हमारे आरएसएस पर, भाजपा पर, अमित शाह पर और खुद मोदी जी पर राजस्थान के मुख्यमंत्री द्वारा लगातार अटैक किया जा रहा है. इसलिए राजस्थान के मुख्यमंत्री को टारगेट बना कर ही आपको राजनीति करनी है, ये विषेश रूप से उन्हे काम सौंपा गया है.”

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बता दें, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत बुधवार से दिल्ली प्रवास पर है. गहलोत ने गुरुवार को जोधपुर हाऊस में पत्रकारों को सम्बोधित किया. इस दौरान प्रदेश में स्टेट हाइवे पर निजी वाहनों पर दुबारा से लागू किये गए टोल टैक्स पर बीजेपी द्वारा विरोध किये जाने की बात पर मुख्यमंत्री गहलोत (CM Ashok Gehlot) ने भाजपा प्रदेशाध्यक्ष पूनिया पर ये जोरदार तंज कसे. इसके साथ गहलोत ने निजी वाहनों पर टोल टैक्स लगाने के अपने फैसले को सही बताते हुए पिछली वसुंधरा राजे सरकार द्वारा लिए गए फैसले पर कहा कि जो प्राइवेट कार है उनका टोल टैक्स माफ करने का तुक क्या था?

स्टेट हाइवे को निजी वाहनों के लिए पूर्ववर्त्ती राजे सरकार द्वारा अप्रैल, 2018 में टोल फ्री किये जाने के फैसले पर मुख्यमंत्री गहलोत (CM Ashok Gehlot) ने वसुंधरा राजे पर आरोप लगाते हुए कहा कि, “राजे सरकार का ये फैसला सिर्फ चुनाव जीतने के हथकंडे के रूप में था. अगर सिर्फ सरकारी खजाने का सवाल होता तो भी मैं उसे लगे रहने देता,परंतु सभी सड़कों को टोल टैक्स ठेके पर दी गई हैं, 15 से 25 साल के लिए. ऐसे में सरकार पर बहुत भार आएगा, हमें जो लीगल राय मिली है उसके आधार पर हमने जनहित में ये फैसला लिया है.

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वहीं मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अलवर के बहुचर्चित पहलू खां मॉब लिंचिंग मामले पर आए हाईकोर्ट के फैसले पर कहा कि पहलू खां केस में हमने एसआईटी बनाई, जिसके बाद हम लोगों ने एसआईटी की रिपोर्ट पर हाइकोर्ट में दस दिन पहले अपील की. मुझे (CM Ashok Gehlot) उम्मीद है कि पहलू खां को न्याय मिलेगा. पहलू खां मॉब लिंचिंग को लेकर पूरे देश में प्रतीक बन गया है. जब-जब भी देश में मॉब लिंचिंग होगी तब-तब पहलू खां का जिक्र जरूर आएगा. न्यायपालिका, ब्यूरोक्रेसी, पुलिस और आम लोगों में भी पहलू खां प्रतीक बन गया है. राजस्थान सरकार की ड्यूटी है कि पहलू खां के परिवार को न्याय मिले और मुल्जिमों को सजा मिले, ये हम सुनिश्चित करना चाहेंगे.

जल्द शुरू होगी पत्रकार पेंशन सम्मान योजना, मेरा गांव-मेरा गौरव दिवस के रूप में मनेगी नेहरू जयंती

(Gehlot) (Pilot)

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बुधवार को जनसम्पर्क विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान पत्रकार पेंशन सम्मान योजना को जल्द शुरू करने के निर्देश देते हुए कहा कि हमारी सरकार ने पिछले कार्यकाल में वरिष्ठ अधिस्वीकृत पत्रकार पेंशन योजना शुरू की थी, जिसे बाद में बंद कर दिया गया था. सीएम गहलोत ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बजट घोषणा के अनुरूप इस योजना को नए रूप में शीघ्र शुरू किया जाए. बैठक में सूचना एवं जनसम्पर्क मंत्री डॉ. रघु शर्मा भी मौजूद रहे. बैठक में सीएम गहलोत ने अधिस्वीकृत पत्रकारों को आर्थिक सहायता, मेडिक्लेम पॉलिसी, मेडिकल डायरी, राजस्थान रोडवेज की बसों में निःशुल्क यात्रा जैसी सुविधाओं … Read more

पार्टी के स्थापना दिवस के दिन ही बीजेपी ने आरएलपी से गठबंधन तोड़ दिया तोहफा

राजस्थान: स्टेट हाइवे पर निजी वाहनों को फिर से देना होगा टोल, राजे सरकार ने किया था फ्री

Gehlot-Vasundhara on State Highway

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. प्रदेश में होने वाले निकाय चुनाव से ठीक पहले गहलोत सरकार ने निजी चौपहिया वाहन मालिकों को बड़ा झटका देते हुए स्टेट हाईवे (State Highway) पर फिर से टोल देना अनिवार्य कर दिया है. पूर्ववर्ती वसुंधरा राजे सरकार ने अपने अंतिम बजट के बाद वित्त विधेयक पेश करते समय अप्रैल 2018 से स्टेट हाईवे को निजी वाहनों के लिए टोल फ्री कर दिया था, लेकिन काॅमर्शियल वाहनों पर टोल जारी था. गहलाेत सरकार ने वसुंधरा सरकार का यह जनहितकारी फैसला पलटते हुए प्रदेश के 15,543 किमी स्टेट हाईवे पर निजी वाहनों पर फिर से टोल लगाने का फैसला किया है. इस फैसले के बाद सरकार के खजाने में सालाना 300 करोड़ रुपये का राजस्व आयेगा.

गहलोत सरकार ने बुधवार को सार्वजनिक निर्माण विभाग के प्रस्ताव पर 18 महीने पहले राजे सरकार में मिली इस छूट को कैबिनेट सर्कुलेशन के जरिए समाप्त कर दिया, गुरुवार को इसका नोटिफिकेशन जारी किया जायेगा और 1 नवंबर से प्रदेश में यह लागू हो जाएगा. इस फैसले (State Highway) से करीब ढाई लाख निजी वाहनों को सम्भावित हर 50 किलोमीटर के बाद स्टेट टोल नाके पर 40 से 60 रुपए तक देने पड़ सकते हैं.

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गहलोत सरकार ने स्टेट हाइवे के टोल फ्री होने से राजस्व का घाटा हाेने का हवाला देते हुए यह फैसला लिया है. सरकार का कहना है कि इस बार हुई भारी बरसात में प्रदेश की 30-35% सड़कें क्षतिग्रस्त हो गईं, इनकी रिपेयरिंग के लिए भी सरकार के पास पर्याप्त पैसा नहीं है. ऐसे में सरकार स्टेट हाईवे पर टोल लगाकर यह रकम वसूल करना चाहती है. प्रदेश में संचालित 143 स्टेट हाइवे (State Highway) पर टोल वसूली का यह प्रस्ताव पीडब्ल्यूडी व RSRDC विभाग द्वारा दिया गया है.

पिछली वसुंधरा राजे सरकार के समय हुए जनांदोलन के बाद वसुंधरा राजे ने जनता को यह सौगात दी थी. ऐसे में अब दुबारा से स्टेट हाईवे (State Highway) को टाेल फ्री करने के लिए प्रदेश में बड़ा जन-अांदाेलन का खड़ा हो सकता है. साथ ही प्रदेश में होने वाले निकाय चुनावों में भी गहलोत सरकार को इससे नुकसान उठाना पड़ सकता है. पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने गहलोत सरकार के इस फैसले को जनविरोधी बताते हुए कहा है कि, “हमारी सरकार ने जनता के हित में यह फैसला किया था, स्थानीय लोगों को जगह-जगह टोल की वजह से आने-जाने में दिक्कत होती थी. सरकार का यह फैसला जनविरोधी है, सरकार इसे तुरंत वापस ले“.

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गहलोत सरकार ने अपने इस फैसले के पीछे तर्क यह है कि हुए इससे सरकार को 300 करोड़ का राजस्व मिलेगा. साथ ही सरकार व ठेकेदार के बीच चल रहा विवाद खत्म हाेगा, क्याेंकि एमअाेयू निजी वाहनाें से टाेल वसूली के हुए थे. इसके अलावा इस टोल वसूली के बाद राेड डवलपमेंट काे रफ्तार मिलेगी.

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अब कमर-तोड़ महंगाई के इस दौर में गहलोत सरकार के इस फैसले (State Highway) को जनता कितना स्वीकार करती है ये तो आने वाला समय या होने वाले निकाय चुनावों के परिणामों से ही चल पायेगा.

वीडियो खबर: बेनीवाल को भारी पड़ी पूर्व सीएम वसुंधरा राजे पर बयानबाजी

पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे (Vasundhara Raje) और पूर्व मंत्री युनूस खान के खिलाफ राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के संयोजक हनुमान बेनीवाल (Hanuman Beniwal) द्वारा दिया गया बयान अब बेनीवाल को भारी पड़ गया. इस बयानबाजी के चलते ही प्रदेश भाजपा ने आगामी निकाय चुनाव में हनुमान बेनीवाल (Beniwal Hanuman) की पार्टी RLP के साथ गठबंधन के तहत चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया. भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनियां ने ये जानकारी दी.

अशोक गहलोत अच्छे आदमी लेकिन गलती करेंगे तो भाजपा करेगी विरोध: पूनिया

Satish Poonia BJP

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. भाजपा की राजस्थान इकाई के अध्यक्ष सतीश पूनिया (Satish Poonia) ने प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) की तारीफ करते हुए कहा कि एक व्यक्ति के नाते अशोक गहलोत अच्छे आदमी है लेकिन मुख्यमंत्री के नाते अगर वे कोई गलती करेंगे तो भाजपा उसका विरोध करेगी. दरअसल पूनिया बुधवार को गहलोत से मिलने उनके आवास पहुंचे. पूनिया की सीएम गहलोत से यह मुलाकात दीपावली के मौके पर शिष्टाचार मुलाकात थी. मुख्यमंत्री निवास पर हुई इस मुलाकात के दौरान पूनिया ने गहलोत को दत्तोपंत ढेगड़ी द्वारा लिखित पुस्तक ‘डॉ. अम्बेडकर एवं सामाजिक क्रान्ति’ तथा ‘दीनदयालजी को जानो’ पुस्तकें भेंट की. मीडिया से मुखातिब होते हुए भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतीश … Read more

पार्टी स्थापना दिवस पर हनुमान बेनीवाल को भाजपा का ‘नायाब तोहफा’

Hanuman Beniwal

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल (Hanuman Beniwal) की राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी को अस्तित्व में आए मंगलवार को एक साल पूरा हुआ. जहां इस दिन को बेनीवाल सहित रालोपा के तमाम कार्यकर्ता यादगार बनाने में लगे हुए थे. वहीं इस खास मौके पर प्रदेश भाजपा ने बेनीवाल को एक खास तोहफा दिया, ये नायाब तोहफा था – गठबंधन तोड़ने का फैसला. जब RLP के मुखिया हनुमान बेनीवाल सोशल मीडिया पर रालोपा के कार्यकर्ताओं को सेवा कार्य करने की अपील के साथ पार्टी स्थापना का एक वर्ष पूरा होने की शुभकामनाएं दे रहे थे, उसी समय आगामी 49 निकाय चुनावों को लेकर प्रदेश भाजपा मुख्यालय में एक महत्वपूर्ण बैठक चल रहीं … Read more

राजस्थान बीजेपी ने निकाय चुनाव के लिए कसी कमर, सरकारी तंत्र के दुरुपयोग के लगाए आरोप

Meeting on Municipal Elections

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. राजस्थान प्रदेश भाजपा मुख्यालय में मंगलवार को आगामी निकाय चुनाव (Municipal Elections) को लेकर एक अहम बैठक आयोजित हुई. प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सतीश पूनिया के नेतृत्व में हुई इस बैठक में निकाय चुनाव की रणनीति पर चर्चा हुई. इस बैठक में केद्रींय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, अर्जुन मेघवाल, नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया, उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड, संगठन महामंत्री चन्द्रशेखर, पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी व अरूण चतुर्वेदी मौजूद रहे.

तीन प्रदेश स्तरीय समितियों का किया गठन

निकाय चुनावों की तैयारियों को लेकर आयोजित हुई इस बैठक के बाद प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सतीश पूनिया ने पत्रकार वार्ता में बताया कि चुनावों के संचालन व प्रबन्धन एवं चयन हेतु तीन प्रदेश स्तरीय समितियों का गठन किया गया है. जिसके तहत पहली समिति में 11 सदस्यों की एक प्रदेश स्तरीय समिति का गठन किया गया है. यह समिति आगामी 16 नवंबर को प्रदेश की 49 निकायों पर होने वाले चुनाव (Municipal Elections) पर नजर रखेगी. इस 11 सदस्यीय समिति में प्रदेश के वरिष्ठ भाजपा नेताओं को शामिल किया गया है.

इस प्रदेश स्तरीय समिति में प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनियां, प्रदेश संगठन महामंत्री चन्द्रशेखर, नेता प्रतिपक्ष गुलाबचन्द कटारिया, उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़, केन्द्रीय मंत्री अर्जुन मेघवाल, गजेन्द्र सिंह शेखावत, सांसद जसकौर मीणा, पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी, अरूण चतुर्वेदी मौजूद होगें. वहीं चुनाव के समन्वयक पूर्व सांसद एवं वरिष्ठ नेता ओंकार सिंह लखावत व प्रदेश महामंत्री वीरमदेव सिंह होगें.

दूसरी समिति जिला समन्वयक समिति होगी जिसमें प्रदेश पदाधिकारी जो कि उस जिले में रहते हों, जिलाध्यक्ष, जिला संगठन प्रभारी, सांसद, निवर्तमान जिलाध्यक्ष, महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष, एस.सी. व एस.टी. मोर्चें का एक प्रतिनिधि शामिल होंगे.

तीसरी समिति में जिस निकाय में चुनाव होने है वहां के निकाय प्रभारी, वर्तमान व पूर्व निकाय अध्यक्ष, क्षेत्र के पूर्व व वर्तमान विधायक, महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष, एस.सी. व एस.टी. मोर्चा के प्रतिनिधि निकाय की चुनाव प्रबन्धन एवं संचालन की व्यवस्था देखेंगे.

प्रत्याशियों के आवेदन की प्रक्रिया प्रारंभ

पूनियां ने बताया कि निकाय चुनावों (Municipal Elections) के प्रभारियों की नियुक्ति पूर्व में हो चुकी है. सभी प्रभारियों ने अपने अपने निकाय क्षेत्रों में वार्ड स्तर पर रायशुमारी का कार्य प्रारम्भ कर दिया है. प्रभारियों ने प्रत्याशियों के आवेदन लेने की प्रक्रिया भी प्रारम्भ कर दी है. 31 अक्टूबर को जिलाध्यक्ष, जिला संगठन प्रभारी और जिला निकाय प्रभारी की एक बैठक आयोजित होगी. जिसमें ये प्रत्याशियों के पैनल को चुनाव संचालन व प्रबंधन समिति के समक्ष प्रस्तुत करेंगे. सभी 49 निकायों के लगभग 2100 वार्डों के प्रत्याशियों की चयन प्रक्रिया को 1 नवंबर तक पूर्ण कर लिया जायेगा.

प्रत्याशियों के लिए गाईड लाइन हुई तय

इस बैठक में वार्ड पार्षद का चुनाव लडने वाले प्रत्याशियों के लिए गाइड भी तय की गई है इसके तहत जिस वार्ड से प्रत्याशी चुनाव लडना चाहता है वह उस वार्ड का स्थाई निवासी होना चाहिए. इसके साथ ही अनुभवी व नये लोगो को भी पार्टी चुनाव लडने का अवसर देगी.

कांग्रेस ने शहरी विकास को किया ठप्प

पूनियां ने गहलोत सरकार पर आरोप लगाते हुये कहा कि पिछले 10 महिनों में शहरी विकास को बड़ा धक्का लगा है. भाजपा शासन में निकायों की व्यवस्थित रूप से विकास की दिशा में अवरोध पैदा करने का काम किया है. वहीं बहुत बड़े सारे ठेकेदारों का भुगतान बकाया चल रहा है जिससे विकास के काम नहीं हुए हैं. पूनिया ने आगे कहा कि भाजपा कांग्रेस के खिलाफ एक चार्जशीट बनायेगी. साथ ही एक विजन डाॅक्यूमेंट भी भाजपा द्वारा बनाया जायेगा. जिसमें केन्द्र सरकार की शहरी विकास से सम्बन्धित योजनाऐं स्मार्ट सिटी, अमृत योजना के तहत जो विकास हुआ है उसकी विस्तृत जानकारी दी जायेगी. इसके साथ ही स्थानीय घोषणा पत्र भी बनाया जायेगा जो कि निकाय की स्थानीय समिति तैयार करेंगी.

सरकारी तंत्र का दुरूपयोग कांग्रेस की परंपरा

पूनिया ने कांग्रेस पर सरकारी तंत्र का दुरूपयोग करने के भी आरोप लगाये. इस दौरान पूनिया ने कहा कि कांग्रेस इन निकाय चुनावों (Municipal Elections) में तिगडम बैठाने में लगी हुई है. चुनाव परिणाम आने के 7 दिन बाद अध्यक्ष पद का चुनाव होगा इससे जाहिर है कि सरकार इस दौरान अपने सरकारी तंत्र का दुरूपयोग करके तिगडम बैठाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी.

भाजपा रालोपा की गठबंधन टूटा

निकाय चुनाव में हनुमान बेनीवाल की राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के साथ चुनाव लडने के सवाल पर पूनिया ने कहा कि शहरी निकायों में भाजपा का अपना वजूद है इसलिए रालोपा के साथ गठबंधन नहीं होगा और भाजपा अकेले ही आगामी निकाय चुनाव लडेगी. वहीं बेनीवाल के पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे व पूर्व मंत्री युनूस खान द्वारा खींवसर चुनाव में कांग्रेस की मदद करने के आरोप वाले ट्वीट के सवाल पर पूनिया ने कहा कि खींवसर उपचुनाव रालोपा अकेले नहीं जीत सकती थी. खींवसर में भाजपा के कार्यकर्ताओं ने अपना खून-पसीना बहाया है पूरी मेहनत की है. भाजपा के वरिष्ठ नेता, प्रभारी व दोनों केंद्रीय मंत्री चुनाव के दौरान वहां मौजूद रहे. बेनीवाल पार्टी के नेताओं पर गलत बयान बाजी नहीं दें.

बता दें कि आगामी 16 नवंबर को प्रदेश की 49 निकायों के लिए चुनाव (Municipal Elections) होंगे. जिसमें 3 नगर निगम, 18 नगर परिषद एवं 28 नगरपालिका शामिल हैं. इन चुनावों के परिणाम 19 नवंबर को घोषित होंगे वहीं अध्यक्ष पद का चुनाव 26 को तो उपाध्यक्ष का चुनाव 27 नवंबर को होगा. प्रदेश के 49 निकायों के करीब 2100 वार्डो के लिए यह चुनाव होगा जिसमें करीब 34 लाख मतदाता अपना पार्षद चुनने के लिए मताधिकार का प्रयोग करेंगे.

बीजेपी ने किया बेनीवाल की पार्टी आरएलपी से किनारा, शीर्ष नेताओं पर टिप्पणी के बाद लिया फैसला

Beniwal Hanuman

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. राजस्थान में होने वाले स्थानीय निकाय चुनावों में भाजपा अब आरलपी से गठबंधन नहीं करेगी. भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनियां ने बताया कि प्रदेश में भाजपा का अपना वजूद और अपना जनाधार है, उसे राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के सहयोग की आवश्यकता नहीं है. बता दें कि, बीते लोकसभा चुनाव में नागौर और विधानसभा उपचुनाव में खींवसर सीट के लिए बीजेपी और आरलपी ने गठबंधन किया था. ऐसा माना जा रहा है कि बीते दिनों सांसद हनुमान बेनीवाल (Hanuman Beniwal) द्वारा पूर्व सीएम राजे और मंत्री यूनुस खान के खिलाफ की गई बयानबाजी के बाद बीजेपी आलाकमान ने यह निर्णय लिया है. जानकारों की मानें तो पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे … Read more