थमा चुनाव प्रचार का शोर, दो राज्यों में विधानसभा चुनाव सहित 17 राज्यों में होने हैं उपचुनाव

Haryana

महाराष्ट्र और हरियाणा (Haryana) में विधानसभा चुनाव के साथ 17 राज्यों में 64 सीटों पर उप चुनाव का चुनावी शोर आज शाम 5 बजे पूरी तरह थम गया. इसमें बिहार की एक लोकसभा सीट भी शामिल है. चुनाव आयोग के निर्देशों के अनुसार मतदान से 48 घंटे पहले ही सार्वजनिक स्थानों पर चुनाव प्रचार पर रोक लगा दी जाती है. ऐसे में चुनाव प्रचार के आखिरी दिन भाजपा व कांग्रेस सहित अन्य राजनीतिक दलों ने चुनावी प्रचार के दौरान पूरी ताकत झोंक दी. वोट 21 अक्टूबर को डाले जाएंगे. परिणाम 24 अक्टूबर को आएंगे. यह भी पढ़ें: नारायण राणे की वजह से महाराष्ट्र में भाजपा-शिवसेना हुई आमने-सामने महाराष्ट्र (Maharashtra) में … Read more

नारायण राणे की वजह से महाराष्ट्र में भाजपा-शिवसेना हुई आमने-सामने

Maharashtra

महाराष्ट्र (Maharashtra) में भाजपा-शिवसेना गठबंधन के तहत देवेंद्र फडनवीस के नेतृत्व में विधानसभा चुनाव लड़ रही हैं. भाजपा 150 तो शिवसेना 124 सीटों पर चुनावी दंगल में है. लेकिन प्रदेश के दो जिले ऐसे भी हैं जहां ये दोनों ही दल ताल ठोकते दिख रहे हैं. लेकिन ऐसा क्या हुआ कि दो सहयोगी आपस में परस्पर विरोधी हो गए, इसकी वजह है नारायण राणे. महाराष्ट्र (Maharashtra) के कोंकण के दो सागरतटीय जिलों सिंधुदुर्ग और रत्नागिरि में भाजपा की कमान नारायण राणे के हाथों में है जो शिवसेना को फूटी आंखों नहीं सुहाते. कभी शिवसेना की तरफ से मुख्यमंत्री रहे नारायण राणे 2005 में बेहतर भविष्य की तलाश में शिवसेना छोड़कर … Read more

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में अंतिम चरण का प्रचार प्रसार चरम पर

Maharashtra

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. महाराष्ट्र (Maharashtra) में विधानसभा चुनाव का माहौल चरम पर पहुंचा हुआ है. आसमान में विमानों की आवाजाही एकदम बढ़ गई है. कहीं चार्टर्ड विमान उड़ रहे हैं तो कहीं किराये के हेलीकॉप्टर. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सहित अनेक बड़े नेता सारे जरूरी काम छोड़ कर पूरी ताकत से अपनी पार्टी को चुनाव जिताने में जुटे हुए हैं. चुनावी बंदूकें पूरी क्षमता से गरज रही हैं. महाराष्ट्र और हरियाणा में भाजपा पूरी तरह आश्वस्त है कि उसका जीतना तय है, फिर भी उसके नेता पार्टी को जिताने में कोई भी कसर बाकी नहीं छोड़ना चाहते. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भाजपा कार्यकर्ताओं में लगातार जोश फूंकने में लगे हुए हैं. PM मोदी … Read more

महाराष्ट्र में कारगर होगी भाजपा के निशान पर सहयोगी पार्टियों को लड़ाने की रणनीति?

Partner Parties Maharashtra BJP

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव (Maharashtra) में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने सहयोगी पार्टियों (Partner Parties) के साथ तालमेल बनाने का एक नया फार्मूला बनाया है. इस फार्मूले के तहत सहयोगी पार्टियां भाजपा के निशान पर चुनाव मैदान में उतरेंगी. ऐसा ही कुछ भाजपा ने दिल्ली में खाली हुई राजौरी सीट पर सहयोगी अकाली दल के साथ किया. यहां अकाली दल के नेता मनजिंदर सिंह सिरसा गठबंधन में तो थे लेकिन लड़े भाजपा के कमल के निशान पर और ​जीतने के बाद भाजपा विधायक बन गए. ऐसा ही कुछ भाजपा महाराष्ट्र में 21 अक्टूबर को होने वाले विधानसभा चुनाव में करने जा रही है.

महाराष्ट्र (Maharashtra) में बीजेपी 150 सीटों पर चुनाव लड़ रही है. 124 सीटों पर शिवसेना और अन्य 14 सीटें अन्य तीन छोटी सहयोगी पार्टियों (Partner Parties) के लिए छोड़ी है. अब भाजपा (BJP) के नए फार्मूले के अनुसार ये सभी 14 उम्मीदवार अपनी पार्टी के नहीं बल्कि मोदी लहर का फायदा उठाने के लिए बीजेपी के निशान पर चुनाव लड़ रहे हैं. हालांकि ये सभी नेता अपनी पार्टियों के लिए हैं लेकिन इनमें से जो भी जीतकर विधानसभा पहुंचेगा, विधायक भाजपा का ही कहलाएगा.

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अब देखा जाए तो महाराष्ट्र (Maharashtra) में भाजपा 150 पर नहीं बल्कि 164 सीटों पर चुनाव लड़ रही है क्योंकि निशान तो ‘कमल’ ही है. इस फार्मूले से भाजपा को फायदा ये होगा कि अगर बीजेपी के 164 में से अधिकतर विधायक जीतकर सदन में पहुंचते हैं तो अकेले सरकार बनाने के पार्टी के प्रयासों को बल मिलेगा.

दूसरी ओर, सहयोगी पार्टी (Partner Parties) के वे नेता जो समर्पित तो अपनी पार्टी के लिए हैं लेकिन चुनाव भाजपा के लिए लड़ रहे हैं, जीतने के बाद उनकी पार्टी से अलग होना मुश्किल होगा. वो इसलिए कि समय पड़ने पर अगर कोई भी टकराव की स्थिति आती है तो उनके पास भाजपा में जाने या फिर विधानसभा से इस्तीफा देने के अलावा कोई अन्य विकल्प न होगा. अगर वे भाजपा में शामिल होते हैं तो ठीक. अगर इस्तीफा देते हैं तो उस सीट पर फिर से चुनाव होगा और फिर से चुनावी रण में उतरना कितना मुश्किल होगा, इसका उन्हें भली भांति अंदाजा होगा.

भाजपा का ये नया फार्मूला न केवल एकदलीय सरकार बनाने की दिशा में एक नया कदम है, बल्कि छोटे छोटे सहयोगी दलों को खत्म करने जैसा भी है. कर्नाटक में कुछ ऐसा देखने को मिला जहां 16 विधायकों ने विधानसभा से इस्तीफा दिया और बीजेपी को वहां एक दलीय सरकार बनाने का मौका मिला. गोवा में भी ऐसा ही हुआ जहां कांग्रेस के 10 विधायक प्रदेश भाजपा (BJP) में शामिल हो गए और वहां भी एक दलीय सरकार बन गई. राजस्थान भी इससे अछूता नहीं है. यहां गहलोत सरकार ने बसपा के 6 विधायकों को अपनी पार्टी में शामिल कर एक दलीय सरकार बनाने में सफलता हासिल की. हालांकि ये जोड़ तोड़ वाली राजनीति कही जाएगी लेकिन बीजेपी का नया फार्मूला कहीं न कहीं इसी रणनीति से प्रेरित है.

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अगर मान लें कि महाराष्ट्र (Maharashtra) में भाजपा (BJP) की सहयोगी पार्टियों (Partner Parties) के सभी 14 प्रत्याशी जीतकर विधानसभा पहुंचते हैं तो भाजपा के चुनाव चिन्ह पर लड़ने की वजह से वे भाजपा के विधायक के तौर पर जाने जाएंगे. अगर वे सभी के सभी किसी मतभेद के चलते सदन की सदस्यता से इस्तीफा देते हैं तो ये स्थिति भाजपा के लिए बहुत फायदा देने वाली साबित होगी. ऐसे में बहुमत के लिए 14 नंबर कम रह जाएंगे यानि बहुमत 145 विधायकों पर मिलेगा. अगर भाजपा के पास इतने विधायक हैं तो वो अकेले अपने दम पर सरकार बनाने में कामयाब हो जाएगी. अगर कुछ विधायक कम रह भी जाएंगे तो भाजपा के चाणक्य अमित शाह इतना तो करने में सफल हो ही जाएंगे कि शिवसेना के कुछ नेताओं को अपनी ओर मिला सकें.

अगर महाराष्ट्र (Maharashtra) में भाजपा (BJP) का ये (Partner Parties) नया फार्मूला एकदम सटीक काम करेगा तो शिवसेना का इतने सालों का वर्चस्व लुप्तप्राय होने की कगार पर आ जाएगा. अगर सच में ऐसी फिल्म बनती है जैसी सोची है तो निश्चित तौर पर भाजपा का सभी 29 राज्यों में सरकार बनाने का सपना बीजेपी के लिए और करीब आ जाएगा.

महाराष्ट्र में इतनी उठा-पटक के बाद भी BJP के लिए जीत नहीं आसान

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव (Maharashtra Assembly Election-2019) से पहले इस समय चुनाव प्रचार चरम पर है. भाजपा-शिवसेना की सरकार है. पिछले विधानसभा चुनाव में शिवसेना से गंठबंधन तोड़ने के बाद भाजपा ने अकेले अपने दम पर चुनाव लड़ा था और शिवसेना से ज्यादा सीटें जीतने के बाद चुनाव बाद हुए गठबंधन में उसे शिवसेना के सहयोग से महाराष्ट्र पहली बार अपना मुख्यमंत्री बनाने का अवसर मिला था. तब नागपुर के युवा नेता देवेन्द्र फड़नवीस मुख्यमंत्री बने थे. उसके बाद पांच साल गुजर चुके हैं और महाराष्ट्र की जनता के सामने देवेन्द्र फड़नवीस के कार्यों का आकलन करने का मौका है.

महाराष्ट्र (Maharashtra) की स्थिति को देखें तो पहले उसकी राजधानी मुंबई देश की आर्थिक राजधानी हुआ करती थी, जिससे महाराष्ट्र आर्थिक विकास के मामले में शीर्ष स्थान पर बना हुआ था. देवेन्द्र फड़नवीस के कार्यकाल में महाराष्ट्र ने आर्थिक विकास के क्षेत्र में शीर्ष स्थान से काफी पिछड़ गया है. महाराष्ट्र के लोगों को यह बात अखर रही है, जिसका विधानसभा चुनाव में भाजपा की संभावनाएं पर विपरीत असर पड़ता दिखाई दे रहा है. इसके मद्देनजर भाजपा महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद सत्ता में लौटने के भरसक प्रयास कर रही है. जनभावनाओं को भांपते हुए राकांपा प्रमुख शरद पवार और कांग्रेस भी चुनाव जीतने के लिए पूरी ताकत लगा रही है. इस सिलसिले में रविवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी भी अपनी-अपनी पार्टियों के कार्यकर्ताओं में जोश फूंकने के लिए महाराष्ट्र पहुंचे.

प्रधानमंत्री मोदी (PM Narendra Modi) ने जलगांव में चुनावी आमसभा को संबोधित किया. उन्होंने राष्ट्रीय स्तर के मुद्दे उठाते हुए विपक्ष को चुनौती दी. जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने और मुस्लिमों की तीन तलाक प्रथा के खिलाफ कानून बनाने के मुद्दे को उन्होंने अपनी सरकार का कीर्तिमान बताया और विपक्षी नेताओं को चुनौती दी कि अगर उनमें साहस है तो वे इन मुद्दों का विरोध करके दिखाए और इन मुद्दों को अपने चुनाव घोषणा पत्र में शामिल करे. उन्होंने महाराष्ट्र की जनता से देवेन्द्र फड़नवीस को फिर से मुख्यमंत्री बनाने के लिए भाजपा को वोट देने की अपील की. यह मौजूदा विधानसभा चुनाव के सिलसिले में महाराष्ट्र में मोदी की पहली रैली थी. उन्होंने कहा कि विपक्ष इन मुद्दों पर राजनीति करने और मगरमच्छ के आंसू बहा रहा है. उन्होंने कांग्रेस और राकांपा का नाम लिए बगैर कहा कि इन मुद्दों विपक्ष के नेताओं के बयान देखें तो वे पड़ोसी देश की जबान बोलते हुए मालूम पड़ते हैं.

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राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने महाराष्ट्र में अपनी पहली आमसभा लातूर जिले में की. लातूर जिले के ओसा में उन्होंने कांग्रेस की रैली को संबोधित करते हुए कहा कि मोदी की पार्टी और उनकी सरकार, दोनों असली मुद्दों से लोगों का ध्यान भटका रहे हैं. उन्होंने सवाल किया कि चांद तो ठीक है, लेकिन असली मुद्दों का क्या हुआ? चीन के राष्ट्रपति की यात्रा के दौरान मोदी की उनसे मुलाकात की खबरों पर तंज कसते हुए उन्होंने पूछा कि क्या उन्होंने चीन के राष्ट्रपति से डोकलाम के बारे में बात की? उन्होंने मीडिया पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और मीडिया मुख्य मुद्दों से लोगों का ध्यान भटका रहे हैं. उन्होंने कहा कि सरकार से रोजगार के बारे में बात करें तो वह चांद की बात करने लगती है. गौरतलब है कि 2017 में डोकलाम में भारतीय क्षेत्र में चीनी सैनिकों ने चीनी सैनिकों ने घुसपैठ की थी और कई दिनों तक दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने डटी हुई थी.

भाजपा अध्यक्ष और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने कोल्हापुर जिले में भाजपा की रैली में ओजस्वी भाषण दिया. उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों ने जम्मू-कश्मीर को भारत की मुख्य धारा से जोड़ने में 56 इंच के सीने वाले व्यक्ति जैसा साहस कभी नहीं दिखाया. उन्होंने धारा 370 को निरस्त करने संबंधी सरकार के कदम पर सवाल उठाने के लिए कांग्रेस नेता राहुल गांधी और राकांपा नेता शरद पवार की आलोचना की. उन्होंने सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक को लेकर भी मोदी सरकार की जमकर तारीफ की. इसके साथ ही तीन तलाक के मुद्दे पर भी सवाल उठाने वालों को निशाने पर लिया. शाह का पूरा भाषण धारा 370 और तीन तलाक के मुद्दों पर केंद्रित रहा. इसके साथ ही उन्होंने अगस्त में कोल्हापुर और सांगली में आई बाढ़ का जिक्र करते हुए उन्होंने जनता को आश्वस्त किया कि केंद्र और राज्य, दोनों सरकारें दोनों जिलों की कायापलट कर देंगी, उन्हें और बेहतर तथा सुंदर बनाएगी.

राकांपा नेता शरद पवार (Sharad Pawar) ने चालीसगांव में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए अपने तरीके से भाजपा को घेरने का प्रयास किया. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के युवा सत्तारूढ़ दल को हराने के लिए तैयार हैं. उन्होंने पूछा कि अगर भाजपा को लगता है कि प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव में विपक्ष के साथ कोई मुकाबला नहीं है तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़नवीस इतनी बड़ी संख्या में रैलियों का आयोजन क्यों करवा रहे हैं? उन्होंने जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने पर केंद्री की मोदी सरकार को बधाई दी और सवाल किया कि क्या उनके पास अनुच्छेद 371 निरस्त करने का साहस है?

जामनेर में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए पवार ने सवाल किया कि अगर उन्हें लगता है कि महाराष्ट्र में लड़ाई नहीं है तो प्रधानमंत्री मोदी महाराष्ट्र में नौ रैलियां क्यों कर रहे हैं? केंद्रीय गृहमंत्री बीस और मुख्यमंत्री 50 रैलियां क्यों कर रहे हैं? उनकी नींद उड़ गई है क्योंकि महाराष्ट्र के युवा उन लोगों को हराने के लिए तैयार हैं. इसलिए वे महाराष्ट्र में घूम रहे हैं. अमित शाह के इस बयान पर कि उन्होंने (पवार ने) महाराष्ट्र के लिए क्या किया है, पवार ने कहा कि उन्होंने सभी क्षेत्रों में राज्य को नंबर वन बनाने का काम किया है. उन्होंने उद्योगों के विकास के लिए और उसके बाद रोजगार के लिए कदम उठाए हैं. उन्होंने कहा, जब मैं मुख्यमंत्री था, तब महाराष्ट्र में 1978 में रोजगार गारंटी योजना लागू की गई थी. जब उन्होंने राज्य का नेतृत्व किया, तब स्थानीय निकाय में महिलाओं को आरक्षण दिया गया. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक घोटाले के सिलसिले में प्रवर्तन निदेशालय ने धन शोधन मामले में उनका नाम जोड़ा है, जबकि वह बैंक के सदस्य भी नहीं हैं.

इस तरह महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव का माहौल गर्मा गया है. एक तरफ मोदी और शाह भाजपा को जिताने के लिए पूरी ताकत लगा रहे हैं, देवेन्द्र फड़नवीस भी रात-दिन एक किए हुए हैं. इन नेताओं से अब तक शरद पवार अकेले लोहा ले रहे थे. अब राहुल गांधी ने भी महाराष्ट्र पहुंचकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जोश भरने का प्रयास किया है. फड़नवीस का कहना है कि मुकाबले में विपक्ष कहीं नहीं है, भाजपा को महाराष्ट्र की जनता का भरपूर समर्थन मिल रहा है. इस पर शरद पवार का कहना है कि जब विपक्ष इतना ही कमजोर है तो प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और मुख्यमंत्री को इतनी सारी रैलियां महाराष्ट्र में करने की जरूरत क्यों पड़ रही है? उनका दावा है कि इस बार फड़नवीस सरकार जाने वाली है.

बड़ी खबर: ‘फड़नवीस इवेंट मैनेजमेंट के मास्टर, सिर्फ मोदी के नाम पर चला रहे सरकारः’

बहरहाल महाराष्ट्र का विधानसभा चुनाव घोषणा और नामांकन का सिलसिला शुरू होने से पहले चले दलबदल और उखाड़-पछाड़ का दौर थमने के बाद अब रोचक मोड़ पर पहुंच गया है. शरद पवार ने विपक्ष को फिर से मुकाबले में लाकर खड़ा कर दिया है. इसलिए महाराष्ट्र में चुनाव जीतकर फिर से सरकार बनाने का भाजपा का सपना आसानी से पूरा होने की संभावना नहीं रह गई है. विपक्ष अब पूरी ताकत से भाजपा का मुकाबला करने में जुट गया है. अब ये तो 24 अक्टूबर की सुबह ही पता चलेगा कि ऊंट किस करवट बैठता है.

वीडियो खबर: अमित शाह ने लगाई घुसपैठियों को ललकार

महाराष्ट्र (Maharashtra) विधानसभा चुनाव (Assembly Election 2019) के तहत BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह (Amit Shah) के चुनावी रैलियों में ताबड़तोड़ हमले जारी हैं. प्रदेश की एक चुनावी सभा में अमित शाह (Amit Shah) ने ​कहा कि देश के एक भी घुसपैठी को बक्शा नहीं जाएगा और एक-एक घुसपैठिए को चुन चुन कर देश के बाहर निकालेंगे.

फड़नवीस इवेंट मैनेजमेंट के मास्टर, सिर्फ मोदी के नाम पर चला रहे सरकारः सुप्रिया सुले

Supriya Sule

महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव का प्रचार इन दिनों चरम पर है औऱ राकांपा प्रमुख शरद पवार की बेटी, बारामती सांसद सुप्रिया सुले (Supriya Sule) प्रचार में व्यस्त हैं. वह ऐसे समय में पार्टी का प्रचार कर रही हैं, जब राकांपा के कई वरिष्ठ नेता शरद पवार को अकेला छोड़कर चले गए हैं. इस समय शरद पवार अकेले शक्तिशाली भाजपा को चुनौती दे रहे हैं. सुप्रिया सुले ने भाजपा नेतृत्व को इस बात के लिए धन्यवाद दिया है कि वह लगातार उनके परिवार को लगातार निशाना बना रहे हैं. शरद पवार इस समय महाराष्ट्र के सबसे कद्दावर नेता हैं और हमेशा से महाराष्ट्र की जनता के साथ हैं. सुप्रिया सुले (Supriya … Read more

महाराष्ट्र में अमित शाह ने तेज किया जुबानी हमला, कहा- भ्रष्टाचार कांग्रेस और एनसीपी का संस्कार है

Amit Shah हरियाणा

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. महाराष्ट्र (Maharashtra) विधानसभा चुनाव के मद्देनजर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है. बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने कांग्रेस और एनसीपी पर अपने जुबानी वार तेज हुए करते हुए कहा कि एनसीपी और कांग्रेस ने राज्य में 15 साल तक लूट मचाई है, भ्रष्टाचार कांग्रेस और एनसीपी का संस्कार है. कांग्रेस और एनसीपी अपने बेटों के विकास के लिए काम कर रही है, इन पार्टियों के नेताओं की संताने इस बार चुनावी मैदान में हैं. कांग्रेस ने विदर्भ के साथ अन्याय किया है जबकि भाजपा ने न्‍याय के साथ उसका विकास भी किया है. कांग्रेसी कह रहे हैं कि अनुच्‍छेद 370 हटाने से महाराष्ट्र वालों को क्या मतलब जबकि सिर्फ महाराष्ट्र ही नहीं देश की समग्र जनता चाहती है कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग बना रहे.

महाराष्ट्र में बुलढाणा जिला के चिखली में चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि हम राजनीति से ज्यादा भारत के भविष्य की चिंता करते हैं. महाराष्ट्र (Maharashtra) को सुरक्षित रखने और विकसित बनाने के लिए नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व वाली भाजपा-शिवसेना की सरकार बनाना जरूरी है. 70 वर्षो से आतंक के साये में जी रहे कश्मीर में हजारों लोगों की मौत हो चुकी है, कांग्रेस और एनसीपी ने हमेशा 370 हटाने का विरोध किया, लेकिन भाजपा ने इसे हटाकर दिखा दिया. कांग्रेस के नेता गुलाम नबी आजाद कहते थे कि 370 हटाने से कश्मीर में खून की नदियां बहेगी लेकिन वहां खून का एक कतरा भी नहीं बहा.

चिखली में रैली को सम्बोधित करत हुए अमित शाह (Amit Shah) ने आगे कहा कि कांग्रेस-एनसीपी देश को सुरक्षित नहीं रख सकते और न ही महाराष्ट्र को. देश को और महाराष्ट्र को सुरक्षित रखने और विकसित बनाने के लिए महाराष्ट्र में नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व वाली भाजपा-शिवसेना गठबंधन की सरकार बनाना जरूरी है. विकास कार्यों के मामले में भाजपा सरकार ने कांग्रेस-एनसीपी के मुकाबले कहीं ज्यादा काम किया है. मगर ये चुनाव अनुच्छेद 370 हटने के बाद पहला चुनाव है, इस चुनाव में दुनिया में ये संदेश जाना चाहिए कि पूरा भारत 370 हटाने के पक्ष में एकजुट है.

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अमित शाह ने जुबानी हमला जारी रखते हुए कहा भ्रष्टाचार कांग्रेस और एनसीपी का संस्कार है. मैं दावे के साथ आप सभी को कहता हूं कि नरेन्द्र मोदी जी और देवेन्द्र फडणवीस जी पर हमारे विरोधी भी भ्रष्टाचार का एक भी आरोप नहीं लगा सकते, ऐसी पारदर्शी सरकारें देने का काम भाजपा ने किया है. (Amit Shah) महाराष्ट्र (Maharashtra) में एनसीपी-कांग्रेस सरकार ने राज्य में 15 साल तक लूट मचाई है. कांग्रेस और एनसीपी अपने बेटों के विकास के लिए काम कर रही है. शरद पवार, सुप्रिया सुले, अजीत पवार और उनके बेटे, सभी इस बार चुनावी मैदान में हैं, क्यों भाई और किसी के पास टेलेंट नहीं है क्या? ये परिवारवादी पार्टियां महाराष्ट्र का विकास नहीं कर सकती हैं.

महाराष्ट्र में विकास के मुद्दे पर बोलते हुए अमित शाह ने कहा पहले कहा जाता था कि विदर्भ में बिजली बनती है मगर यहां बिजली पहुंचती नहीं है, देवेन्द्र फडणवीस सरकार ने समग्र विदर्भ में बिजली पहुंचाई है और 5 साल के अंदर उद्योगों के 2 रुपये प्रति यूनिट बिजली में छूट देकर उद्योगों को बढ़ावा देने की शुरुआत की है. कांग्रेस की जितनी भी सरकारें रहीं, सभी ने विदर्भ के साथ अन्याय किया. जबकि भाजपा ने विदर्भ को न्याय दिलाने के साथ-साथ उसे विकास के रास्ते पर आगे ले जाने का कार्य भी किया है. हमने समग्र महाराष्ट्र का विकास किया है, यही भाजपा की संस्कृति है.

बीजेपी की बड़ी कामयाबी माने जाने वाला कश्मीर से 370 हटाने के मुद्दे पर बोलते हुए शाह (Amit Shah) ने कहा कि पहले कांग्रेसी कह रहे हैं कि अनुच्‍छेद 370 हटाने से महाराष्ट्र वालों को क्या मतलब, मैं यहां की जनता को पूछना चाहता हूं कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग हो ये आप चाहते हैं या नहीं? सिर्फ महाराष्ट्र ही नहीं देश की समग्र जनता चाहती है कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग बना रहे. 70 साल से आतंकवाद झेल रहे कश्मीर में 40 हजार से ज्यादा लोग मारे गए. इसके बावजूद भी कांग्रेस और एनसीपी अपनी वोट बैंक की राजनीति के लिए 370 को हटाने का विरोध करती रही. मगर भाजपा के लिए देश की सुरक्षा, हमारी सरकारों से ज्यादा महत्वपूर्ण है, इसलिए हमने 370 हटाई.

शाह ने कहा जब अनुच्छेद 370 पर बहस हो रही थी तब कांग्रेस के नेता गुलाम नबी आजाद कहते थे कि 370 हटाने से कश्मीर में खून की नदियां बहेगी, मैं आज कांग्रेस नेताओं को बताना चाहता हूं कि कश्मीर में 370 हटने के बाद खून की नदियां क्या, खून का एक कतरा भी नहीं बहा है.

केंद्रीय मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने अपने संबोधन में कहा महाराष्ट्र में आगामी 21 तारीख को चुनाव होना है. दोनों खेमे चुनावी मैदान में खड़े हैं, एक ओर नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भाजपा और शिवसेना है, दूसरी ओर एनसीपी और कांग्रेस है. महाराष्ट्र ने पिछले पांच वर्षों में दोहरे इंजन वाले सरकार का लाभ उठाया है, केंद्र में पीएम मोदी, और महाराष्ट्र (Maharashtra) में सीएम फडऩवीस जी.

महाराष्ट्र में एक अभिनेत्री, एक पूर्व अभिनेता और दो टीवी स्टार चुनाव मैदान में

Maharashtra

इस बार महाराष्ट्र (Maharashtra) विधानसभा चुनाव (Assembly Election) के मौके पर एक मराठी फिल्म अभिनेत्री, एक अभिनेता से कांग्रेस नेता बने उम्मीदवार और दो टीवी स्टार चुनावी माहौल को गर्माए हुए हैं. ये हैं दीपाली सैयद (Deepali Syed), बलदेव खोसा (Baldev Khosa), एजाज खान (Ejaz Khan) और अभिजीत बिचुकले (Abhijeet Bichukale). मराठी फिल्म अभिनेत्री दीपाली सैयद मुंब्रा-कलवा से शिवसेना उम्मीदवार हैं और राकांपा उम्मीदवार जितेन्द्र अव्हाड़ को चुनौती दे रही हैं. मुंब्रा-कलवा विधानसभा क्षेत्र राकांपा का गढ़ माना जाता है. दीपाली ने पिछले सप्ताह शिवसेना की सदस्यता ग्रहण की है. इससे पहले दीपाली आम आदमी पार्टी की उम्मीदवार के रूप में 2014 का लोकसभा चुनाव लड़कर हार चुकी हैं. Maharashtra … Read more