वीडियो खबर: रामेश्वर डूडी ने दी वैभव गहलोत को चुनौती

राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) में अध्यक्ष पद के लिए मचे बवाल के बीच अब रामेश्वर डूडी (Rameshwar Dudi) खुलकर सामने आ गये हैं. डूडी ने कहा है कि अगर जिला संघ चाहेंगे तो लड़ूंगा अध्यक्ष का चुनाव, फिर चाहे सामने कोई भी हो. अपने इस बयान से रामेश्वर डूडी ने सीधे-सीधे मुख्यमंत्री के पुत्र वैभव गहलोत (Vaibhav Gehlot) को चुनौती दी है. RCA में अध्यक्ष पद के लिए अभी तक वैभव गहलोत के अलावा किसी ओर का नाम सामने नहीं आया है.

मायावती की बौखलाहट स्वाभाविक, लेकिन बसपा के हालत बिगड़ने के पीछे वह खुद जिम्मेदार

राजस्थान (Rajasthan) में चुनाव जीते सभी छह बसपा विधायकों के कांग्रेस में जाने के बाद मायावती (Mayawati) की बौखलाहट स्वभाविक है. उन्होंने आरोप लगाया है कि कांग्रेस पैसे खर्च करके उनकी पार्टी के विधायकों को तोड़ रही है. यह आरोप लगाने से पहले उन्हें आत्मविश्लेषण की जरूरत है कि जो बहुजन समाज पार्टी कांग्रेस और भाजपा के खिलाफ दलित आंदोलन के रूप में उभरकर उत्तर प्रदेश में सरकार बनाने के साथ ही राष्ट्रीय स्तर की पार्टी बन गई थी, वह सिर्फ मायावती की मनमानी के कारण इस हालत में पहुंच गई है कि उत्तर प्रदेश से बाहर पार्टी के विधायकों पर उनका नियंत्रण नहीं रह गया है. दूसरे शब्दों में कहें तो बसपा का केंद्रीय ढांचा चरमरा गया है.

मायावती को यह आरोप नहीं लगाना चाहिए कि उनके विधायक पैसे लेकर दूसरी पार्टी में जा रहे हैं. हकीकत यह है कि मायावती पर पैसे लेकर टिकट बांटने के आरोप पहले से लगते रहे हैं. राजस्थान में एक बसपा नेता खुलेआम कह चुके हैं उनकी पार्टी प्रमुख पैसे लेकर टिकट देती है और उससे ज्यादा पैसे मिल जाएं तो वह उम्मीदवार भी बदल देती है. मायावती ने इन आरोपों का कभी खंडन नहीं किया है. अपने जन्मदिन पर करोड़ों रुपए के नोटों की माला पहने हुए मायावती की तस्वीरें अभी तक लोगों को याद है.

मौजूदा स्थिति में राजनीति पर भाजपा का वर्चस्व हो चुका है. कांग्रेस प्रमुख विपक्षी पार्टी के रूप में अपना अस्तित्व बनाए हुए है. भाजपा और कांग्रेस, दोनों में ही दलित मतदाताओं पर पकड़ बनाने की होड़ है, जो कि बड़ी संख्या में बसपा से जुड़े हुए हैं. उत्तर प्रदेश से बाहर राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ आदि राज्यों में बसपा टिकट पर चुनाव जीतकर जो विधायक बन गए हैं, उन पर उनकी पार्टी के हाईकमान का नियंत्रण नहीं है. बसपा में मायावती एकमात्र हाईकमान है. उन्होंने पार्टी में अपने अलावा और किसी का कद बढ़ने ही नहीं दिया. इस वजह से कई दलित नेता बसपा से किनारा कर गए हैं.

राजस्थान में जिन छह विधायकों ने बसपा छोड़कर कांग्रेस की सदस्यता ले ली है, उनमें से पांच करोड़पति हैं और एक की संपत्ति एक करोड़ से पांच लाख रुपए कम है. मतलब सभी अच्छे-खासे संपन्न हैं. ज्यादातर विधायक ऐसे हैं, जो कांग्रेस से या भाजपा से टिकट नहीं मिलने के बाद बसपा के टिकट पर चुनाव लड़े हैं. ऐसे विधायकों को अब पार्टी के हित से ज्यादा अपना निजी राजनीतिक भविष्य ज्यादा महत्वपूर्ण लगने लगा है. देश में ऐसे कई नेता हैं, जो किसी विचारधारा से बंधे हुए नहीं हैं और राजनीति उनके लिए व्यवसाय है. वे एक पार्टी से टिकट नहीं मिलने पर दूसरी पार्टी का टिकट लेने का प्रयास करते हैं. बसपा ऐसे लोगों को टिकट दे देती है, जो प्लेटफार्म की तरह बसपा का इस्तेमाल कर लेते हैं. पार्टी को इस स्थिति में पहुंचाने के लिए मायावती के अलावा और कौन जिम्मेदार है?

बहरहाल मायावती का विलाप चलता रहेगा और बसपा के टिकट जीतने वाले संपन्न विधायक मौका परस्त बने रहेंगे. बसपा का चुनाव चिन्ह हाथी है. मायावती समझती होंगी कि हाथी पर काबू करना बहुत मुश्किल है और उनका हाथी पूरे देश में मंथर गति से आगे बढ़ भी रहा था, लेकिन राजस्थान में अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने हाथी पर काबू करने की जादूगरी दिखा दी है. दस साल पहले भी बसपा के छह विधायक गहलोत सरकार के साथ जुड़ गए थे और कांग्रेस में शामिल हो गए थे. इस बार भी बसपा के छह विधायक गहलोत के समर्थन में कांग्रेस में शामिल हो गए हैं. मायावती का विलाप फिजूल है. विधायकों के बसपा छोड़ने के लिए पैसे के लालच के अलावा अन्य कारण भी जिम्मेदार हैं. मायावती को कोई भी आरोप लगाने से पहले अपनी पार्टी का सांगठनिक ढांचा दुरुस्त करना चाहिए.

वीडियो खबर: गहलोत ने पूरा किया अपना होमवर्क

राजस्थान (Rajasthan) में बहुजन समाज पार्टी (BSP) के छह विधायक बगैर किसी दबाव या प्रलोभन के कांग्रेस में शामिल हो गए. ऐसा मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) का कहना है. बहरहाल राज्य के सभी BSP MLAs ने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर ली और अब मंत्रिमंडल के विस्तार और फेरबदल की अटकलें जोर पकड़ रही हैं. ऐसे में गहलोत ने न सिर्फ राज्य में सरकार का बहुमत पहले से मजबूत किया है, साथ ही राजनीति में अपनी दूरदर्शिता का उम्दा परिचय भी दिया है.

गहलोत के राजनीतिक कौशल के पीछे सरकार के इस मंत्री की भूमिका

राजस्थान (Rajasthan) में बसपा (BSP) के छह विधायकों को कांग्रेस (Congress) में लाने के पीछे सुभाष गर्ग (Subhash Garg) की महत्वपूर्ण भूमिका बताई जा रही है, जो कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खास हैं और राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) के विधायक के रूप में गहलोत सरकार को समर्थन देते हुए मंत्री भी बने हुए हैं. इन खबरों के बीच कई कांग्रेस नेता सवाल उठाने लगे हैं कि सुभाष गर्ग अगर दूसरी पार्टी के विधायकों को कांग्रेस में ला सकते हैं तो खुद कांग्रेस में शामिल क्यों नहीं हो जाते? विधानसभा चुनावों से पहले सुभाष गर्ग भरतपुर सीट से चुनाव लड़ना चाहते थे. यह ब्राह्मण बहुल क्षेत्र है, इसलिए पार्टी में … Read more

पायलट निवास पर बढ़ी हलचल, वरिष्ठ कांग्रेस नेता और विधायकों का जमावडा

बसपा (BSP) के सभी 6 विधायकों के कांग्रेस (Congress) में विलय के बाद राजस्थान (Rajasthan) में एक बार फिर से राजनीतिक हलचल तेज हो गयी है. बुधवार को पूरे दिन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष (Rajasthan Congress) और उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट (Sachin Pilot) के निवास पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं व विधायकों कि हलचल देखी गई. पार्टी के कई वरिष्ठ नेता, विधायक और कार्यकर्ता पायलट से मिलने उनके निवास पहुंचे, जहां कई नेताओं के साथ तो पायलट की काफी लंबी मंत्रणा चली.

पायलट के निवास पहुंचने वालों में वरिष्ठ नेता रघुवीर मीना, मांगीलाल गरसिया, डाॅ. चयनिका उनियाल, भगवाना राम, रिछपाल मिर्धा, करण सिंह राठौड, गोपाल सिंह शेखावत, नागराज मीना, नाना लाल नीनामा, भानुप्रताप सिंह, चुन्नीलाल राजपुरोहित, विधायक संयम लोढा, वीरेंद्र सिंह, गजेंद्र सिंह शक्तावत, महेंद्र मालवीय, दीपेंद्र सिंह शेखावत, गणेश घोगरा, रामलाल मीना, गोविंद राम मेंघवाल, पं. भॅवर लाल शर्मा, इंद्र राज गुर्जर, वेद प्रकाश सोलंकी सहित कई अन्य नेता और कार्यकर्ता शामिल थे.

यह भी पढ़ें:- बसपा विधायकों के कांग्रेस में शामिल होने के बाद अब गहलोत और पायलट में बढ़ेगी रार

माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) के स्तर पर बिना किसी प्रलोभन और लालच के स्वेच्छा से बसपा छोड़ कांग्रेस में आये सभी विधायकों को सम्मान स्वरूप ईनाम देने की तैयारियां जोरों पर है. इसके लिए आने वाले दिनों में प्रदेश में बहुप्रतीक्षित राजनीतिक नियुक्तियों के साथ ही मन्त्रिमण्डल विस्तार-फेरबदल देखने को मिलेगा. ऐसे में वर्षों से पार्टी की सेवा कर रहे कांग्रेसी नेताओं और कार्यकर्ताओं के माथे पर चिंता की लकीरें उभर आई हैं. उनका डर ये है कि बसपा से आये विधायकों को एडजस्ट करने में उनका नम्बर कट सकता है दूसरी और उनके कैम्प को भी देखा जायेगा, मतलब की अमुख नेता-विधायक गहलोत कैम्प से आता है या पायलट कैम्प से.

गौरतलब है कि राजस्थान में जब एक व्यक्ति एक पद की मांग ने जोर नहीं पकड़ा और सोनिया गांधी ने भी संगठन में किसी तरह के बदलाव की सहमति नहीं दी तो पायलट का उत्साह बढ़ गया था. लेकिन इसके एक हफ्ते बाद ही गहलोत ने राजस्थान में बहुजन समाज पार्टी के सभी छह विधायकों को कांग्रेस में शामिल करवाने की जादूगरी दिखा पार्टी में अपना रुतबा बढ़ा लिया है. इस कारण पायलट कैम्प के नेता-विधायकों को चिंता सताने लगी है, की पालयट और गहलोत की आपसी खींचतान का खामियाजा उन्हें नहीं उठाना पड़ जाये.

वहीं राजनीतिक नियुक्तियों के संदर्भ में सचिन पायलट ने साफ तौर पर कहा है कि खून-पसीना बहाकर राजस्थान में कांग्रेस की सरकार लाने वाले कार्यकर्ताओं को पूरा सम्मान मिलना चाहिए. राजनीतिक नियुक्तियों में पार्टी के सच्चे और मेहनती कार्यकर्ताओं को ही आगे लाया जाएगा. पार्टी की अंतरिम कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) भी कह चुकी हैं कि सत्ता और संगठन में बेहतर तालमेल होना चाहिए. इसका मतलब यह भी निकलता है कि कांग्रेस सरकार में पार्टी बदलने वाले बसपा विधायकों (BSP MLAs) को राजनीतिक नियुक्तियों की उम्मीद नहीं करनी चाहिए.

वीडियो खबर: कानून व्यवस्था पर क्या बोल गए रामेश्वर डूडी

कांग्रेस (Congress) के कद्दावर नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी (Rameshwar Dudi) ने अपनी ही सरकार पर प्रदेश की कानून व्यवस्था को लेकर निशाना साधा है. उन्होंने अपनी जान को खतरा बता सुरक्षा बढ़ाने की मांग की थी लेकिन उनका कहना है कि पुलिस इस ओर ध्यान नहीं दे रही. पूर्व में उनकी हत्या की साजिश रचने के आरोप में दो आरोपी सिरसा पुलिस के हथ्थे चढ़ चुके हैं.

RCA अध्यक्ष पद की दौड़ में अब डूडी आये खुलकर सामने

राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) में अध्यक्ष पद के लिए मचे बवाल के बीच अब रामेश्वर डूडी (Rameshwar Dudi) खुलकर सामने आ गये हैं. डूडी ने कहा है कि, “अगर जिला संघ चाहेंगे तो लड़ूंगा अध्यक्ष का चुनाव, फिर चाहे सामने कोई भी हो”. अपने इस बयान से रामेश्वर डूडी ने सीधे-सीधे मुख्यमंत्री के पुत्र वैभव गहलोत को चुनौती दी है. क्योंकि RCA में अध्यक्ष पद के लिए अभी तक वैभव गहलोत के अलावा किसी ओर का नाम सामने नहीं आया है.

गौरतलब है कि हाल ही में RCA सचिव आरएस नांदू की मदद से नागौर जिला क्रिकेट संघ के अध्यक्ष चुने जाने के बाद पहली बार जब रामेश्वर डूडी जयपुर आरसीए कार्यालय पहुँचे थे तब पत्रकारों से बातचीत में डूडी ने कहा था कि, “अगर वैभव गहलोत (Vaibhav Gehlot) RCA में आते हैं तो निर्विरोध कार्यकारिणी चुनी जाएगी.” साथ ही डूडी ने कहा था कि, “ललित मोदी का राजस्थान में कोई पट्टा नहीं है. जोशीजी सीनियर लीडर हैं, आरसीए उनके नेतृत्व में काम करेगा”. लेकिन रामेश्वर डूडी के आरसीए अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ने के उक्त ताजा बयान के बाद यह बात विचारणीय है कि आखिर कांग्रेस के दिग्गज नेता डूडी की कौनसी बात पर अपनी ही प्रदेश सरकार के आला नेताओं से सहमति नहीं बन पाई है. यहां हमारा इशारा खींवसर विधानसभा सीट के लिए होने उपचुनाव से है.

पूर्व नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी से जब पूछा गया कि आप नागौर जिला क्रिकेट संघ के अध्यक्ष हैं और इस जिले की कार्यकारिणी को बीसीसीआई की शर्त के अनुसार आईपीएल के पूर्व चेयरमैन ललित मोदी के कारण मौजूदा विधानसभा अध्यक्ष और आरसीए अध्यक्ष सीपी जोशी गुट ने सस्पैंड कर रखा है, ऐसे में आप चुनाव कैसे लड़ सकते हैं? इस पर डूडी ने अपने तल्ख अंदाज में कहा कि, “बीसीसीआई या जोशी कब तक ललित मोदी-ललित मोदी गाते रहेंगे, ललित मोदी करीब दो साल पहले ही क्रिकेट से खुद को अलग कर चुके हैं. अब मोदी न तो नागौर जिला क्रिकेट संघ से जुड़े हैं और न ही किसी अन्य क्लब से, इससे संबंधित कागजात आरसीए को उपलब्ध कराए जा चुके हैं.”

यह भी पढ़ें: वैभव को निर्विरोध RCA अध्यक्ष बनाने की मुहिम को झटका, चुनाव तिथि पर सस्पेंस बरकरार

बता दें, मुख्यमंत्री गहलोत की अपने पुत्र वैभव गहलोत को आरसीए का निर्विरोध अध्यक्ष बनवाने की मंशा पर बीते रविवार को ही संकट के बादल मंडरा गए थे. वैभव के राजसमंद जिला क्रिकेट संघ के कोषाध्यक्ष बनने पर सीपी जोशी गुट द्वारा आयोजित लंच पार्टी में 5 जिला संघों के सचिवों सहित कुछ पदाधिकारियों का न पहुंचना इस बात का साफ संकेत था की वैभव के RCA अध्यक्ष बनने की राह उतनी आसान नहीं है जितनी गहलोत और जोशी ने सोची थी. अब इस पर कांग्रेस के ही दिग्गज नेता रामेश्वर डूडी का उक्त बयान मुख्यमंत्री गहलोत के मंसूबो पर पूरी तरह पानी फेरने जैसा है.

मीडिया के सवाल पर रामेश्वर डूडी ने साफ कहा कि जरूरत पड़ी और जिला क्रिकेट संघ ने कहा तो मैं चुनाव जरूर लडूंगा, फिर सामने चाहे कोई भी हो. डूडी ने ये बयान देकर ये तो साफ कर दिया है कि उनके सामने कोई भी हो, वे पीछे हटने वाले नहीं हैं. बता दें, वर्तमान में डूडी नागौर जिला क्रिकेट संघ के अध्यक्ष हैं जिसे आरसीए अध्यक्ष सीपी जोशी ने सस्पैंड कर रखा है.

जैसा कि विदित है कि आरसीए चुनाव की दो-दो तारीखें सामने आ रही हैं. चुनाव अधिकारी टी.एस.कृष्णामूर्ति ने बीसीसीआई की डेडलाइन 28 सितम्बर को ध्यान में रखते हुए एक दिन पहले 27 सितम्बर को आरसीए का चुनाव कराने की घोषणा कर दी है. दूसरी ओर, आरसीए के वर्तमान अध्यक्ष सीपी जोशी ने 4 अक्टूबर को चुनाव कराने की घोषणा की है. ऐसे में एक बार फिर आरसीए में विवाद की स्थिति बन गयी है. हालांकि फाइनल फैसला चुनाव अधिकारी को करना है. ऐसे में 27 सितम्बर को चुनाव होने की संभावना अधिक है, अगर ऐसा होता है तो वैभव गहलोत स्वतः ही अध्यक्ष पद की रेस से बाहर हो जाएंगे.

वहीं सीपी जोशी की तय तारीख 4 अक्टूबर को भी अगर चुनाव होते हैं, तो भी रामेश्वर डूडी को मनाए बिना वैभव गहलोत का आरसीए अध्यक्ष बनना नामुमकिन ही है, और रामेश्वर डूडी को किस तरह मनाया जाएगा यह तस्वीर आने वाले दिनों में साफ होगी.

वैभव को निर्विरोध RCA अध्यक्ष बनाने की मुहिम को झटका, चुनाव तिथि पर सस्पेंस बरकरार

येन-केन प्रकारेण मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) के पुत्र वैभव गहलोत (Vaibhav Gehlot) को निर्विरोध RCA का अध्यक्ष बनाने की सीपी जोशी (CP Joshi) की मुहिम को झटका लगा है. हुआ यूं कि वैभव गहलोत के राजसमन्द जिला क्रिकेट एसोसिएशन का कोषाध्यक्ष बनने पर लंच पार्टी के बहाने समस्त जिला कार्यकारिणी और उनके पदाधिकारियों को रविवार को जयपुर बुलाया गया था, जिससे वैभव गहलोत को निर्विरोध RCA अध्यक्ष बनाने पर सहमति बनाई जा सके. लेकिन जोशी की इस लंच डिप्लोमेसी में पांच जिला कार्यकारिणी के सचिव अनुपस्थित रहे, इसके बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि RCA को नया अध्यक्ष चुनाव के माध्यम से ही मिलेगा. उधर आरसीए के वर्तमान … Read more

रामेश्वर डूडी को जान का खतरा! अब जल्द उपलब्ध होगी ‘Y’ श्रेणी सुरक्षा

कांग्रेस के कद्दावर नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी (Rameshwar Dudi) अपनी जान को खतरा बता सुरक्षा बढ़ाने की मांग कर रहे हैं. पूर्व में उनकी हत्या की साजिश रचने के आरोप में दो आरोपी सिरसा पुलिस के हथ्थे चढ़ चुके हैं. इस बात को ध्यान में रखते हुए उन्हें जल्द ही ‘Y’ श्रेणी सुरक्षा मुहैया कराई जाएगी. इस संबंध में डूडी पूर्व में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (CM Ashok Gehlot) से मिल चुके हैं.

वहीं दूसरी ओर, डूडी ने पुलिस और प्रदेश सरकार पर अपनी सुरक्षा को लेकर ढिलापन का आरोप लगाया. रामेश्वर डूडी ने अपनी ही सरकार पर कानून व्यवस्था को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि उन्होंने 8 दिन पहले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (CM Ashok Gehlot) और डीजीपी भूपेंद्र सिंह को अपनी सुरक्षा के मद्देनजर खत लिखा था. गंभीर मामला होने के बाद भी पुलिस अपनी स्वेच्छाचारिता दिखा रही है. इस बारे में न तो सरकार और न ही पुलिस कोई कदम उठा रही है.

ये बयान देकर डूडी ने न केवल प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाया, साथ ही गहलोत सरकार पर भी इशारों इशारों में निशाना साध दिया. अपने दिए बयान में पूर्व नेता प्रतिपक्ष ने ये भी कहा कि प्रदेश की कानून व्यवस्था के बारे में तो सभी जानते ही हैं. यहां लोगों को सुरक्षित महसूस करना चाहिए जो हो नहीं रहा है.

रामेश्वर डूडी के इस आरोपों का खंडन करते हुए जयपुर के पुलिस महानिदेशक भूपेंद्र सिंह ने कहा कि डूडी की सुरक्षा को लेकर कार्रवाई कर रहे हैं. उनकी सुरक्षा बढ़ा दी गई है और उनकी हत्या की सुपारी लेने वाले मामले की जांच एसओजी को सौंप दी गई है. उन्होंने ‘Y’ केटेगिरी की सुरक्षा जल्दी मुहैया कराने की बात कही.

गौरतलब है कि पिछले दिनों हरियाणा की सिरसा पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर डूडी की हत्या की साजिश का खुलासा किया है. दोनों में से एक आरोपी बीकानेर का रहने वाला है. रंजीश के चलते ये हत्या की साजिश बनाई जा रही थी. बीकानेर के पूर्व कांग्रेस सांसद रामेश्वर डूडी ने इसे पॉलिटिकल रंजिश का रंग देते हुए हत्या की साजिश रचने की बात कही थी. साथ ही मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (CM Ashok Gehlot) के आवास पर पहुंच कर खुद की सुरक्षा बढ़ाने की मांग की.

इनका कहना है…

अभी तक सुरक्षा नहीं दी गई है. लोग मेरी हत्या के पीछे पड़े हैं. मैंने 8 दिन पहले ही डीजीपी और सीएम को पत्र लिखा था कि मेरी जान की जिम्मेदारी सरकार की है लेकिन पुलिस स्वेच्छाचारिता दिखा रही है. प्रदेश की कानून व्यवस्था के बारे में तो आप जानते ही हैं. लोगों को सुरक्षित महसूस करना चाहिए जो नहीं हो रहा है.
– रामेश्वर डूडी, पूर्व नेता प्रतिपक्ष, कांग्रेस

रामेश्वर डूडी को गत दिनों धमकी मिली थी. इसके लिए उनकी सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है. मामले की जांच एसओजी को सौंपी है. राज्य सरकार ने डूडी की सुरक्षा में एक पीएसओ लगा दिया. अब दो पीएसओ और लगाए गए हैं. वाई कैटेगिरी की सुरक्षा जल्द उपलब्ध कराई जाएगी.
– भूपेंद्र सिंह, डीजीपी जयपुर