वीडियो खबर: कांग्रेस में फूट की बात करने वाले पहले अपना घर संभालें- गहलोत

राजस्थान (Rajasthan) के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने जोधपुर में BJP पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा हमारी पार्टी में फूट की बात करते हैं लेकिन उन्हें पहले अपना घर संभालना चाहिए. भाजपा में फूट से सतीश पूनिया (Satish Poonia) के पदभार ग्रहण समारोह में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे (Vasundhara Raje) ने शिरकत तक नहीं की. उनका समारोह में न आना क्या संकेत करता है? उपचुनाव के बारे में गहलोत ने कहा कि पूरी कांग्रेस एकजूट है और हम उपचुनाव हर हाल में जीतेंगे.

गहलोत केबिनेट का फैसला, अब जनता नहीं पार्षद ही चुनेंगे मेयर

राजस्थान में मीसाबंदी पेंशन योजना बंद, भाजपा ने बताया तानाशाही निर्णय

Misabandi

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. मध्यप्रदेश के बाद अब राजस्थान की गहलोत सरकार (Gehlot Government) ने भी आपातकाल के दौरान जेल में बंद रहे मीसा बंदियों की पेंशन योजना (Misabandi Pension Scheme) सहित अन्य सुविधाएं बंद कर दी हैं. पिछली वसुंधरा राजे (Vasundhara Raje) सरकार ने मीसा व डीआरआई बंदियों को ‘लोकतंत्र रक्षक’ का नाम देते हुए उन्हें पेंशन, निशुल्क चिकित्सा, निशुल्क बस सुविधा सहित कई अन्य तरह की सुविधाएं प्रदान की थी. सोमवार को सचिवालय में मुख्यमंत्री गहलोत (Ashok Gehlot) की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की अहम बैठक में रोक लगा दी. प्रदेश सरकार के इस कदम को बीजेपी ने औछी मानसिकता का उदाहरण बताते हुए तानाशाही निर्णय बताया. मीसा बंदियों की … Read more

गहलोत केबिनेट का फैसला- पार्षद ही चुनेंगे महापौर, बीजेपी ने बताया- थूंककर चाटने वाला कदम

Gehlot Cabinet

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. राजस्थान में गहलोत सरकार ने निकाय चुनाव से पहले एक महत्वपूर्ण फैसले पर यू-टर्न लेते हुए नया फैसला लिया कि अब पार्षद ही करेंगे महापौर और निकाय प्रमुख का चुनाव. सोमवार को हुई गहलोत केबिनेट (Gehlot Cabinet) की एक अहम बैठक में ये फैसला लिया गया. सीएम गहलोत के पिछले कार्यकाल में बने महापौर के प्रत्यक्ष चुनाव के कानून को पिछ्ली वसुंधरा राजे सरकार ने सत्ता में आने के बाद खत्म कर दिया था मगर राज्य में एक बार फिर से मुख्यमंत्री बनने के बाद गहलोत सरकार दोबारा विधानसभा में यह कानून ले आई थी. इसी साल यह कानून बनाया गया था जिसके तहत मेयर का चुनाव सीधे जनता द्वारा किया जाएगा. वहीं बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने गहलोत सरकार के इस फैसले पर कहा कि निकाय चुनाव में हार के डर से सरकार ने यू-टर्न लिया है. पूर्व मंत्री और मालवीय नगर विधायक कालीचरण सर्राफ ने बताया थूंककर चाटने वाला कदम.

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गहलोत मंत्रिमंडल की बैठक (Gehlot Cabinet) में पिछली सरकार के निकाय चुनावों में अप्रत्यक्ष प्रणाली को जारी रखते हुए बैठक में अप्रत्यक्ष प्रणाली से निकाय चुनाव (Nikay Chunav) कराने पर सहमति बनी है. इससे पहले 2009 में राजस्थान की गहलोत सरकार ने प्रत्यक्ष निकाय चुनाव आयोजित कराए थे जिसे वसुंधरा सरकार ने बदल दिया था. मगर राज्य में एक बार फिर से मुख्यमंत्री बनने के बाद गहलोत सरकार दोबारा विधानसभा में यह कानून ले आई थी. प्रदेश के नगरीय विकास मंत्री धारीवाल ने बताया कि अप्रत्यक्ष प्रणाली से चुनाव इसलिए भी जारी रखा गया है ताकि अगर किसी वार्ड में साम्प्रदायिक माहौल बिगड़े तो वो केवल एक ही इलाके में बिगड़े, उससे आगे न बढ़े. इसी प्रकार किसी एक वार्ड में कोई समस्या होती है तो वो अन्य वार्डो में न फैले. धारीवाल ने इसे लोकतांत्रिक पद्धति बताया.

यूडीएच मिनिस्टर शांति धारीवाल (Shanti Dhariwal) ने मीडिया से रूबरू होते हुए कहा कि पार्षद और पूर्व पार्षदों से चर्चा कर नवंबर में होने वाले नगर पालिका, नगर परिषद और नगर निगम के चुनावों को अप्रत्यक्ष प्रणाली से कराए जाने का फैसला मंत्रीमंडल की बैठक में लिया गया. धारीवाल ने बताया कि मौजूदा समय में विपक्ष द्वारा जनता के बीच भय, आक्रोश, असहिष्णुता और साम्प्रदायिक माहौल पैदा किया जा रहा है, उन परिस्थितियों में प्रत्यक्ष चुनाव कराना कतैई सही नहीं है.

उन्होंने कहा कि हमने वर्तमान और पूर्व पाषदों के साथ उन संभावित लोगों से भी बात की जो पार्षद का चुनाव लड़ने वाले हैं, उन सभी ने एक स्वर में निकाय चुनावों में अप्रत्यक्ष प्रणाली का समर्थन किया. उक्त का कहना है कि प्रत्यक्ष प्रणाली द्वारा जीतकर आने वाले व्यक्ति के सामने पार्षद अपने आपको कमजोर महसूस करते हैं. दोनों के बीच तालमेल की कमी भी रहती है. ऐसे में अगर बहुमत ज्यादा हो लेकिन जीतकर आया प्रमुख व्यक्ति दूसरी पार्टी का हो तो विकास का मुद्दा गौण हो जाता है.

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सरकार के इस फैसले पर भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने पलटवार करते हुए कहा कि सरकार केवल डर और तबादलों की आड में निकाय चुनावों में जीत का ख्वाब देख रही है जो मुंगेरीलाल के हसीन सपने से ज्यादा कुछ भी नहीं. पूनिया ने कहा कि कांग्रेस ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में ये साफ-साफ लिखा है कि सरकार में आने के बाद निकाय चुनाव प्रत्यक्ष पद्धति से कराए जाएंगे लेकिन सरकार ने निकाय चुनाव में हार के डर से यु-टर्न लेकर प्रदेश की जनता को ठगा है.

वहीं पूर्ववर्ती सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहे कालीचरण सर्राफ ने भी निकाय चुनाव में अप्रत्यक्ष प्रणाली पर गहलोत सरकार पर जमकर निशाना साधा. सर्राफ़ ने कहा कि चुनावी घोषणा पत्र में शामिल करने के बाद सरकार ने विपक्ष के विरोध के बावजूद बिल को विधानसभा में पास कराया था. (Gehlot Cabinet) अब अपने ही लिए गए फैसले पर यू टर्न लेना न सिर्फ जनता को धोखा देना है, बल्कि ये एक थूक कर चाटने जैसा कदम है.

महाराष्ट्र में इतनी उठा-पटक के बाद भी BJP के लिए जीत नहीं आसान

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव (Maharashtra Assembly Election-2019) से पहले इस समय चुनाव प्रचार चरम पर है. भाजपा-शिवसेना की सरकार है. पिछले विधानसभा चुनाव में शिवसेना से गंठबंधन तोड़ने के बाद भाजपा ने अकेले अपने दम पर चुनाव लड़ा था और शिवसेना से ज्यादा सीटें जीतने के बाद चुनाव बाद हुए गठबंधन में उसे शिवसेना के सहयोग से महाराष्ट्र पहली बार अपना मुख्यमंत्री बनाने का अवसर मिला था. तब नागपुर के युवा नेता देवेन्द्र फड़नवीस मुख्यमंत्री बने थे. उसके बाद पांच साल गुजर चुके हैं और महाराष्ट्र की जनता के सामने देवेन्द्र फड़नवीस के कार्यों का आकलन करने का मौका है.

महाराष्ट्र (Maharashtra) की स्थिति को देखें तो पहले उसकी राजधानी मुंबई देश की आर्थिक राजधानी हुआ करती थी, जिससे महाराष्ट्र आर्थिक विकास के मामले में शीर्ष स्थान पर बना हुआ था. देवेन्द्र फड़नवीस के कार्यकाल में महाराष्ट्र ने आर्थिक विकास के क्षेत्र में शीर्ष स्थान से काफी पिछड़ गया है. महाराष्ट्र के लोगों को यह बात अखर रही है, जिसका विधानसभा चुनाव में भाजपा की संभावनाएं पर विपरीत असर पड़ता दिखाई दे रहा है. इसके मद्देनजर भाजपा महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद सत्ता में लौटने के भरसक प्रयास कर रही है. जनभावनाओं को भांपते हुए राकांपा प्रमुख शरद पवार और कांग्रेस भी चुनाव जीतने के लिए पूरी ताकत लगा रही है. इस सिलसिले में रविवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी भी अपनी-अपनी पार्टियों के कार्यकर्ताओं में जोश फूंकने के लिए महाराष्ट्र पहुंचे.

प्रधानमंत्री मोदी (PM Narendra Modi) ने जलगांव में चुनावी आमसभा को संबोधित किया. उन्होंने राष्ट्रीय स्तर के मुद्दे उठाते हुए विपक्ष को चुनौती दी. जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने और मुस्लिमों की तीन तलाक प्रथा के खिलाफ कानून बनाने के मुद्दे को उन्होंने अपनी सरकार का कीर्तिमान बताया और विपक्षी नेताओं को चुनौती दी कि अगर उनमें साहस है तो वे इन मुद्दों का विरोध करके दिखाए और इन मुद्दों को अपने चुनाव घोषणा पत्र में शामिल करे. उन्होंने महाराष्ट्र की जनता से देवेन्द्र फड़नवीस को फिर से मुख्यमंत्री बनाने के लिए भाजपा को वोट देने की अपील की. यह मौजूदा विधानसभा चुनाव के सिलसिले में महाराष्ट्र में मोदी की पहली रैली थी. उन्होंने कहा कि विपक्ष इन मुद्दों पर राजनीति करने और मगरमच्छ के आंसू बहा रहा है. उन्होंने कांग्रेस और राकांपा का नाम लिए बगैर कहा कि इन मुद्दों विपक्ष के नेताओं के बयान देखें तो वे पड़ोसी देश की जबान बोलते हुए मालूम पड़ते हैं.

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राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने महाराष्ट्र में अपनी पहली आमसभा लातूर जिले में की. लातूर जिले के ओसा में उन्होंने कांग्रेस की रैली को संबोधित करते हुए कहा कि मोदी की पार्टी और उनकी सरकार, दोनों असली मुद्दों से लोगों का ध्यान भटका रहे हैं. उन्होंने सवाल किया कि चांद तो ठीक है, लेकिन असली मुद्दों का क्या हुआ? चीन के राष्ट्रपति की यात्रा के दौरान मोदी की उनसे मुलाकात की खबरों पर तंज कसते हुए उन्होंने पूछा कि क्या उन्होंने चीन के राष्ट्रपति से डोकलाम के बारे में बात की? उन्होंने मीडिया पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और मीडिया मुख्य मुद्दों से लोगों का ध्यान भटका रहे हैं. उन्होंने कहा कि सरकार से रोजगार के बारे में बात करें तो वह चांद की बात करने लगती है. गौरतलब है कि 2017 में डोकलाम में भारतीय क्षेत्र में चीनी सैनिकों ने चीनी सैनिकों ने घुसपैठ की थी और कई दिनों तक दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने डटी हुई थी.

भाजपा अध्यक्ष और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने कोल्हापुर जिले में भाजपा की रैली में ओजस्वी भाषण दिया. उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों ने जम्मू-कश्मीर को भारत की मुख्य धारा से जोड़ने में 56 इंच के सीने वाले व्यक्ति जैसा साहस कभी नहीं दिखाया. उन्होंने धारा 370 को निरस्त करने संबंधी सरकार के कदम पर सवाल उठाने के लिए कांग्रेस नेता राहुल गांधी और राकांपा नेता शरद पवार की आलोचना की. उन्होंने सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक को लेकर भी मोदी सरकार की जमकर तारीफ की. इसके साथ ही तीन तलाक के मुद्दे पर भी सवाल उठाने वालों को निशाने पर लिया. शाह का पूरा भाषण धारा 370 और तीन तलाक के मुद्दों पर केंद्रित रहा. इसके साथ ही उन्होंने अगस्त में कोल्हापुर और सांगली में आई बाढ़ का जिक्र करते हुए उन्होंने जनता को आश्वस्त किया कि केंद्र और राज्य, दोनों सरकारें दोनों जिलों की कायापलट कर देंगी, उन्हें और बेहतर तथा सुंदर बनाएगी.

राकांपा नेता शरद पवार (Sharad Pawar) ने चालीसगांव में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए अपने तरीके से भाजपा को घेरने का प्रयास किया. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के युवा सत्तारूढ़ दल को हराने के लिए तैयार हैं. उन्होंने पूछा कि अगर भाजपा को लगता है कि प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव में विपक्ष के साथ कोई मुकाबला नहीं है तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़नवीस इतनी बड़ी संख्या में रैलियों का आयोजन क्यों करवा रहे हैं? उन्होंने जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने पर केंद्री की मोदी सरकार को बधाई दी और सवाल किया कि क्या उनके पास अनुच्छेद 371 निरस्त करने का साहस है?

जामनेर में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए पवार ने सवाल किया कि अगर उन्हें लगता है कि महाराष्ट्र में लड़ाई नहीं है तो प्रधानमंत्री मोदी महाराष्ट्र में नौ रैलियां क्यों कर रहे हैं? केंद्रीय गृहमंत्री बीस और मुख्यमंत्री 50 रैलियां क्यों कर रहे हैं? उनकी नींद उड़ गई है क्योंकि महाराष्ट्र के युवा उन लोगों को हराने के लिए तैयार हैं. इसलिए वे महाराष्ट्र में घूम रहे हैं. अमित शाह के इस बयान पर कि उन्होंने (पवार ने) महाराष्ट्र के लिए क्या किया है, पवार ने कहा कि उन्होंने सभी क्षेत्रों में राज्य को नंबर वन बनाने का काम किया है. उन्होंने उद्योगों के विकास के लिए और उसके बाद रोजगार के लिए कदम उठाए हैं. उन्होंने कहा, जब मैं मुख्यमंत्री था, तब महाराष्ट्र में 1978 में रोजगार गारंटी योजना लागू की गई थी. जब उन्होंने राज्य का नेतृत्व किया, तब स्थानीय निकाय में महिलाओं को आरक्षण दिया गया. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक घोटाले के सिलसिले में प्रवर्तन निदेशालय ने धन शोधन मामले में उनका नाम जोड़ा है, जबकि वह बैंक के सदस्य भी नहीं हैं.

इस तरह महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव का माहौल गर्मा गया है. एक तरफ मोदी और शाह भाजपा को जिताने के लिए पूरी ताकत लगा रहे हैं, देवेन्द्र फड़नवीस भी रात-दिन एक किए हुए हैं. इन नेताओं से अब तक शरद पवार अकेले लोहा ले रहे थे. अब राहुल गांधी ने भी महाराष्ट्र पहुंचकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जोश भरने का प्रयास किया है. फड़नवीस का कहना है कि मुकाबले में विपक्ष कहीं नहीं है, भाजपा को महाराष्ट्र की जनता का भरपूर समर्थन मिल रहा है. इस पर शरद पवार का कहना है कि जब विपक्ष इतना ही कमजोर है तो प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और मुख्यमंत्री को इतनी सारी रैलियां महाराष्ट्र में करने की जरूरत क्यों पड़ रही है? उनका दावा है कि इस बार फड़नवीस सरकार जाने वाली है.

बड़ी खबर: ‘फड़नवीस इवेंट मैनेजमेंट के मास्टर, सिर्फ मोदी के नाम पर चला रहे सरकारः’

बहरहाल महाराष्ट्र का विधानसभा चुनाव घोषणा और नामांकन का सिलसिला शुरू होने से पहले चले दलबदल और उखाड़-पछाड़ का दौर थमने के बाद अब रोचक मोड़ पर पहुंच गया है. शरद पवार ने विपक्ष को फिर से मुकाबले में लाकर खड़ा कर दिया है. इसलिए महाराष्ट्र में चुनाव जीतकर फिर से सरकार बनाने का भाजपा का सपना आसानी से पूरा होने की संभावना नहीं रह गई है. विपक्ष अब पूरी ताकत से भाजपा का मुकाबला करने में जुट गया है. अब ये तो 24 अक्टूबर की सुबह ही पता चलेगा कि ऊंट किस करवट बैठता है.

वीडियो खबर: – जो नेता आज राज कर रहे हैं, वो पांच साल विधानसभा आये भी नहीं थे- डूडी

वरिष्ठ कांग्रेसी नेता डूडी ने कहा कि मैंने जाट नेता के रुप में 20 साल तक जाट समाज और किसानों के लिए संघर्ष किया, पिछले पांच साल विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में मैंने किसानों की आवाज उठाई है, मेरे खिलाफ राजनीतिक साजिश हुई है

वीडियो खबर: अमित शाह ने लगाई घुसपैठियों को ललकार

महाराष्ट्र (Maharashtra) विधानसभा चुनाव (Assembly Election 2019) के तहत BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह (Amit Shah) के चुनावी रैलियों में ताबड़तोड़ हमले जारी हैं. प्रदेश की एक चुनावी सभा में अमित शाह (Amit Shah) ने ​कहा कि देश के एक भी घुसपैठी को बक्शा नहीं जाएगा और एक-एक घुसपैठिए को चुन चुन कर देश के बाहर निकालेंगे.

फड़नवीस इवेंट मैनेजमेंट के मास्टर, सिर्फ मोदी के नाम पर चला रहे सरकारः सुप्रिया सुले

Supriya Sule

महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव का प्रचार इन दिनों चरम पर है औऱ राकांपा प्रमुख शरद पवार की बेटी, बारामती सांसद सुप्रिया सुले (Supriya Sule) प्रचार में व्यस्त हैं. वह ऐसे समय में पार्टी का प्रचार कर रही हैं, जब राकांपा के कई वरिष्ठ नेता शरद पवार को अकेला छोड़कर चले गए हैं. इस समय शरद पवार अकेले शक्तिशाली भाजपा को चुनौती दे रहे हैं. सुप्रिया सुले ने भाजपा नेतृत्व को इस बात के लिए धन्यवाद दिया है कि वह लगातार उनके परिवार को लगातार निशाना बना रहे हैं. शरद पवार इस समय महाराष्ट्र के सबसे कद्दावर नेता हैं और हमेशा से महाराष्ट्र की जनता के साथ हैं. सुप्रिया सुले (Supriya … Read more

महाराष्ट्र में अमित शाह ने तेज किया जुबानी हमला, कहा- भ्रष्टाचार कांग्रेस और एनसीपी का संस्कार है

Amit Shah हरियाणा

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. महाराष्ट्र (Maharashtra) विधानसभा चुनाव के मद्देनजर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है. बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने कांग्रेस और एनसीपी पर अपने जुबानी वार तेज हुए करते हुए कहा कि एनसीपी और कांग्रेस ने राज्य में 15 साल तक लूट मचाई है, भ्रष्टाचार कांग्रेस और एनसीपी का संस्कार है. कांग्रेस और एनसीपी अपने बेटों के विकास के लिए काम कर रही है, इन पार्टियों के नेताओं की संताने इस बार चुनावी मैदान में हैं. कांग्रेस ने विदर्भ के साथ अन्याय किया है जबकि भाजपा ने न्‍याय के साथ उसका विकास भी किया है. कांग्रेसी कह रहे हैं कि अनुच्‍छेद 370 हटाने से महाराष्ट्र वालों को क्या मतलब जबकि सिर्फ महाराष्ट्र ही नहीं देश की समग्र जनता चाहती है कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग बना रहे.

महाराष्ट्र में बुलढाणा जिला के चिखली में चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि हम राजनीति से ज्यादा भारत के भविष्य की चिंता करते हैं. महाराष्ट्र (Maharashtra) को सुरक्षित रखने और विकसित बनाने के लिए नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व वाली भाजपा-शिवसेना की सरकार बनाना जरूरी है. 70 वर्षो से आतंक के साये में जी रहे कश्मीर में हजारों लोगों की मौत हो चुकी है, कांग्रेस और एनसीपी ने हमेशा 370 हटाने का विरोध किया, लेकिन भाजपा ने इसे हटाकर दिखा दिया. कांग्रेस के नेता गुलाम नबी आजाद कहते थे कि 370 हटाने से कश्मीर में खून की नदियां बहेगी लेकिन वहां खून का एक कतरा भी नहीं बहा.

चिखली में रैली को सम्बोधित करत हुए अमित शाह (Amit Shah) ने आगे कहा कि कांग्रेस-एनसीपी देश को सुरक्षित नहीं रख सकते और न ही महाराष्ट्र को. देश को और महाराष्ट्र को सुरक्षित रखने और विकसित बनाने के लिए महाराष्ट्र में नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व वाली भाजपा-शिवसेना गठबंधन की सरकार बनाना जरूरी है. विकास कार्यों के मामले में भाजपा सरकार ने कांग्रेस-एनसीपी के मुकाबले कहीं ज्यादा काम किया है. मगर ये चुनाव अनुच्छेद 370 हटने के बाद पहला चुनाव है, इस चुनाव में दुनिया में ये संदेश जाना चाहिए कि पूरा भारत 370 हटाने के पक्ष में एकजुट है.

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अमित शाह ने जुबानी हमला जारी रखते हुए कहा भ्रष्टाचार कांग्रेस और एनसीपी का संस्कार है. मैं दावे के साथ आप सभी को कहता हूं कि नरेन्द्र मोदी जी और देवेन्द्र फडणवीस जी पर हमारे विरोधी भी भ्रष्टाचार का एक भी आरोप नहीं लगा सकते, ऐसी पारदर्शी सरकारें देने का काम भाजपा ने किया है. (Amit Shah) महाराष्ट्र (Maharashtra) में एनसीपी-कांग्रेस सरकार ने राज्य में 15 साल तक लूट मचाई है. कांग्रेस और एनसीपी अपने बेटों के विकास के लिए काम कर रही है. शरद पवार, सुप्रिया सुले, अजीत पवार और उनके बेटे, सभी इस बार चुनावी मैदान में हैं, क्यों भाई और किसी के पास टेलेंट नहीं है क्या? ये परिवारवादी पार्टियां महाराष्ट्र का विकास नहीं कर सकती हैं.

महाराष्ट्र में विकास के मुद्दे पर बोलते हुए अमित शाह ने कहा पहले कहा जाता था कि विदर्भ में बिजली बनती है मगर यहां बिजली पहुंचती नहीं है, देवेन्द्र फडणवीस सरकार ने समग्र विदर्भ में बिजली पहुंचाई है और 5 साल के अंदर उद्योगों के 2 रुपये प्रति यूनिट बिजली में छूट देकर उद्योगों को बढ़ावा देने की शुरुआत की है. कांग्रेस की जितनी भी सरकारें रहीं, सभी ने विदर्भ के साथ अन्याय किया. जबकि भाजपा ने विदर्भ को न्याय दिलाने के साथ-साथ उसे विकास के रास्ते पर आगे ले जाने का कार्य भी किया है. हमने समग्र महाराष्ट्र का विकास किया है, यही भाजपा की संस्कृति है.

बीजेपी की बड़ी कामयाबी माने जाने वाला कश्मीर से 370 हटाने के मुद्दे पर बोलते हुए शाह (Amit Shah) ने कहा कि पहले कांग्रेसी कह रहे हैं कि अनुच्‍छेद 370 हटाने से महाराष्ट्र वालों को क्या मतलब, मैं यहां की जनता को पूछना चाहता हूं कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग हो ये आप चाहते हैं या नहीं? सिर्फ महाराष्ट्र ही नहीं देश की समग्र जनता चाहती है कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग बना रहे. 70 साल से आतंकवाद झेल रहे कश्मीर में 40 हजार से ज्यादा लोग मारे गए. इसके बावजूद भी कांग्रेस और एनसीपी अपनी वोट बैंक की राजनीति के लिए 370 को हटाने का विरोध करती रही. मगर भाजपा के लिए देश की सुरक्षा, हमारी सरकारों से ज्यादा महत्वपूर्ण है, इसलिए हमने 370 हटाई.

शाह ने कहा जब अनुच्छेद 370 पर बहस हो रही थी तब कांग्रेस के नेता गुलाम नबी आजाद कहते थे कि 370 हटाने से कश्मीर में खून की नदियां बहेगी, मैं आज कांग्रेस नेताओं को बताना चाहता हूं कि कश्मीर में 370 हटने के बाद खून की नदियां क्या, खून का एक कतरा भी नहीं बहा है.

केंद्रीय मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने अपने संबोधन में कहा महाराष्ट्र में आगामी 21 तारीख को चुनाव होना है. दोनों खेमे चुनावी मैदान में खड़े हैं, एक ओर नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भाजपा और शिवसेना है, दूसरी ओर एनसीपी और कांग्रेस है. महाराष्ट्र ने पिछले पांच वर्षों में दोहरे इंजन वाले सरकार का लाभ उठाया है, केंद्र में पीएम मोदी, और महाराष्ट्र (Maharashtra) में सीएम फडऩवीस जी.

रामेश्वर डूडी अब सोनिया और राहुल गांधी से मिलकर बताएंगे RCA चुनाव की हकीकत

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पुत्र वैभव गहलोत के राजस्थान क्रिकेट संघ (RCA) अध्यक्ष बनने के बाद से गहलोत विरोधी खेमा सक्रिय हो गया है. RCA अध्यक्ष का चुनाव लड़ने से वंचित रहे कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी (Rameshwar Dudi) ने अब कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी व पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात का समय मांगा है. सूत्रों के अनुसार डूडी RCA चुनाव में खुद के साथ हुए घटनाक्रम की पूरी जानकारी से आलाकमान को अवगत करायेंगे.

सूत्रों के मुताबिक रामेश्वर डूडी ने दो दिन पहले ही सोनिया गांधी और राहुल गांधी के कार्यालय से मिलने के लिए समय मांगा है. डूडी कांग्रेस अध्यक्ष एवम पूर्व अध्यक्ष को राजस्थान की हकीकत बयां करेंगे. इस मामले ने रामेश्वर डूडी (Rameshwar Dudi) का कहना है कि मैंने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को एक माह पहले ही मिलकर बता दिया था कि मैं RCA के अध्यक्ष का चुनाव लड़ना चाहता हूं और उस समय खुद गहलोत ने मुझे RCA का चुनाव लड़ने के लिए कहा था, लेकिन गहलोत ने धृतराष्ट्र बनकर पुत्रमोह में अपने बेटे वैभव गहलोत को मैदान में उतार दिया और सरकारी मशीनरी का पूरा दुरुपयोग करते हुए मुझे और मेरे समर्थक जिला क्रिकेट संघों को चुनाव अधिकारी से अयोग्य घोषित करवा दिया.

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मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने चुनाव अधिकारी आर.आर. रश्मी को अपने पुत्र वैभव के पक्ष में करने के लिए सरकार में उच्चस्तर से मुख्य सचिव डीबी गुप्ता और सरकार के कृषिमंत्री लालचंद कटारिया को जिम्मा सौंपा गया. अब रामेश्वर डूडी (Rameshwar Dudi) ने अपने समर्थकों के साथ मीटिंग करके यह तय किया है कि पहले पार्टी की अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी से मुलाकात करके उन्हें RCA के घटनाक्रम से अवगत करवाया जाएगा और तब भी सुनवाई नहीं होती है तो उसके बाद अगला कदम उठाया जाएगा.

वरिष्ठ कांग्रेसी नेता डूडी ने कहा कि मैंने जाट नेता के रुप में 20 साल तक जाट समाज और किसानों के लिए संघर्ष किया है. पिछले पांच साल विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में मैंने किसानों की आवाज उठाई है. अपनी ही पार्टी से नाराज चल रहे डूडी ने यहां तक कहा कि जो नेता आज राज कर रहे हैं, वे पांच साल विधानसभा में आए भी नहीं थे, मैंने  भाजपा के खिलाफ संघर्ष किया और जनता की आवाज उठाई थी. अब मेरे खिलाफ साजिश करते हुए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी की शह पर मुख्यमंत्री गहलोत ने अपने पुत्र वैभव को RCA अध्यक्ष पद के लिए चुनाव मैदान में उतारा, जबकि उन्होंने पहले मुझसे वादा किया था.

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प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट के बीच की अदावत किसी से छुपी नहीं है. अब RCA चुनाव को लेकर रामेश्वर डूडी ने जिस तरह से गहलोत के खिलाफ मोर्चा खोला है, उससे पायलट खेमें में खुशी है. पायलट समर्थक कैबिनेट मंत्री भंवरलाल मेघवाल, परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास, विधायक वेदप्रकाश सोलंकी, दानिश अबरार, पीआर मीणा और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष गोपाल सिंह व सचिव प्रशांत शर्मा लगातार डूडी के संपर्क में हैं.

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार RCA चुनाव में रामेश्वर डूडी के पैनल के लोगों ने गुरुवार शाम भाजपा के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया से मुलाकात की है. प्रदेश भाजपा मुख्यालय में हुई इस मुलाकात के दौरान वैभव गहलोत के सामने RCA अध्यक्ष का चुनाव हारे जोधपुर जिला क्रिकेट संघ के रामप्रकाश चौधरी ने अपने मोबाइल से सतीश पूनिया की रामेश्वर डूडी (Rameshwar Dudi) से बात भी कराई है.

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इस सब के बीच अपने लम्बे राजनीतिक जीवन में अपनी छवि के प्रति एक्स्ट्रा सजग रहने वाले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पुत्र वैभव गहलोत के RCA अध्यक्ष बनने के बाद किसी विवाद में नहीं पड़ना चाहते. इसी के चलते सबसे पहले उन्होंने वैभव गहलोत को जयपुर में अलग घर में शिफ्ट कर दिया. दो दिन पहले जोधपुर में पत्रकारों से बात करते हुए गहलोत ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वैभव मेरे बेटे जरूर हैं, लेकिन वे मेरे साथ नहीं रहते हैं, वे किराए के मकान में रहते हैं. राजनीति को लेकर मेरा उनसे कोई रिश्ता नहीं जोड़ा जाए. साथ ही रामेश्वर डूडी (Rameshwar Dudi) की नाराजगी पर उन्होंने कहा कि डूडी मेरे बहुत करीब थे, मगर अब करीब हैं या नहीं इसका पता नहीं.