गुड़गांव विधायक उमेश अग्रवाल भाजपा से बगावत पर उतारू

हरियाणा विधानसभा चुनाव (Haryana Assembly Election-2019) से पहले जहां कई लोगों के अपनी पार्टियां छोड़कर भाजपा में जाने की खबरें आ रही हैं, वहीं एक खबर यह भी है गुड़गांव के भाजपा विधायक उमेश अग्रवाल (Umesh Agarwal) ने पार्टी से बगावत कर दी है. इस बार उन्हें भाजपा का टिकट नहीं मिल रहा है, जिससे वह असंतुष्ट हैं. भाजपा ने इस बार गुड़गांव से सुधीर सिंगला (Sudhir Singla) को टिकट दे दिया है. उमेश अग्रवाल के साथ मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर (Manohar Lal Khattar) के संबंध पिछले कुछ समय से ठीक नहीं चल रहे हैं. संभवतः इसी लिए अग्रवाल का टिकट कट गया. इस बार उमेश अग्रवाल की पत्नी अनीता … Read more

विधानसभा चुनाव से पूर्व हरियाणा प्रदेश कांग्रेस में बगावत चरम पर, तंवर की बगावत पड़ेगी भारी

विधानसभा चुनाव से पूर्व हरियाणा कांग्रेस में राजनीतिक गुटबाजी अपने चरम है. हरियाणा (Haryana) में टिकट वितरण में अपने समर्थकों की अनदेखी से नाराज कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर (Ashok Tanwar) ने गुरुवार को विधानसभा चुनाव के लिए बनी एवं कांग्रेस की सभी कमेटियों से इस्तीफा दे दिया. लेकिन तंवर की इस्तीफ़ा पॉलिटिक्स का पार्टी पर कोई विशेष असर नहीं हुआ. अशोक तंवर के इस्तीफे के बाद जारी हुई कांग्रेस की दूसरी और अंतिम सूची में भी तंवर के समर्थकों की छोड़ो खुद तंवर का नाम ही नहीं था. यहां तक कि टिकट देना तो दूर कांग्रेस के किसी बड़े नेता ने तंवर से मिलने या बात करना तक उचित नहीं समझा.

अशोक तंवर हरियाणा कांग्रेस के 5 साल तक प्रदेश अध्यक्ष रहे. हाल ही में उनकी जगह कुमारी शैलजा को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है. इसके बाद से ही अशोक तंवर ने पार्टी के खिलाफ बगावती रूख अख्तियार कर लिया था. बुधवार को कांग्रेस मुख्यालय के बाहर अपने समर्थकों के साथ प्रदर्शन किया और कांग्रेस में हुडा और शैलजा पर 5 करोड़ में टिकट बेचने का गंभीर आरोप भी लगाया था. इसके बाद अशोक तंवर ने गुरुवार को दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर हुड्डा गुट पर जमकर निशाना साधा. इस दौरान तंवर ने बताया कि उन्होंने पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को चिट्ठी लिख कांग्रेस की सभी कमेटियों से इस्तीफा दे दिया है.

बड़ी खबर: अशोक तंवर का पत्ता कटा, कांग्रेस की अंतिम लिस्ट में भी नहीं आया नाम

प्रेस-कॉन्फ्रेंस में अशोक तंवर ने आरोप लगाया कि हरियाणा कांग्रेस अब ‘हुड्डा कांग्रेस’ बनती जा रही है और बताया की उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) को पत्र लिखकर कहा है कि उन्हें समितियों से मुक्त किया जाए और वह सामान्य कार्यकर्ता की तरह पार्टी के लिए काम करते रहेंगे. वह चुनाव के लिए बनी प्रदेश चुनाव समिति सहित कई समितियों में शामिल थे. तंवर ने संवाददाताओं से कहा, ‘आप सभी जानते हैं कि हरियाणा में विधानसभा चुनाव है. पिछले पांच साल का घटनाक्रम सबके सामने है. पार्टी के अंदर ऐसी ताकतें हैं जिन्होंने पार्टी को लगातार कमजोर किया. जमीन से जुड़े नेताओं को काम करने से रोका.’

इस दौरान तंवर ने सीधे-सीधे पूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा (Bhupinder Singh Hodda) पर तंज कसते हुए कहा, ‘देश में लोकतंत्र है, लेकिन हरियाणा में बड़े-बड़े राजघराने हैं. कुछ हमारी पार्टी में हैं और कुछ लोग दूसरी पार्टी में हैं. मेरे खिलाफ असहयोग आंदोलन चलाया, लेकिन लोकसभा चुनाव में छह फीसदी वोट बढ़ा.’ तंवर ने टिकट वितरण में मेहनती कार्यकर्ताओं की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि यह बताया जाए कि किन मापदंडों के आधार पर टिकट दिए गए हैं. उन्होंने पार्टी पर पैसे लेकर टिकट देने का आरोप लगाते हुए कहा कि सोहना विधानसभा सीट का टिकट 5 करोड़ में बेचा गया है.

अशोक तंवर ने कहा कि मैंने पार्टी के लिए खून और पसीना दोनों दिया है. मैं पांच साल तक प्रदेश का अध्यक्ष रहा. मैंने पूरे समर्पण के साथ पार्टी की सेवा की. मैं साधारण परिवार से राजनीति में आया हूं. पांच साल मैंने विपक्ष की भूमिका निभाई. उन्होंने कहा कि पार्टी में पुराने लोगों को टिकट नहीं दिया गया. उन लोगों को टिकट दिया गया है जिन्होंने हाल ही में पार्टी ज्वाइन की है, ये वही लोग हैं जो पहले कांग्रेस की आलोचना करते थे. उन्होंने कहा कुछ लोगों को नई लीडरशिप बर्दाश्त नहीं. उन्होंने अपनी ही पार्टी पर सवाल उठाते हुए पूछा कि जिन लोगों ने कांग्रेस को कमजोर किया उनको टिकट क्यों? उन्होंने पार्टी को आह्वान करते हुए कहा कि मैं मानव बम हूं. अब चुप नहीं बैठूंगा.

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लेकिन अशोक तंवर की इन सारी कोशिशों के बाद भी कुछ नहीं हो पाया और कांग्रेस ने उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर दी, और लिस्ट में अशोक तंवर और कुमारी शैलजा का दोनों नाम नहीं था. अशोक तंवर को इस चुनाव में टिकट नहीं दिया गया, इससे साफ पता चलता है कि टिकट वितरण में सिर्फ और सिर्फ भूपेन्द्र हुड्डा की चली है. अशोक तंवर राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के नजदीकी माने जाते हैं और राहुल गांधी ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया है उसके बाद से उनके नजदीकी माने जाने वाले सभी कांग्रेसी नेताओं का कमोबेश यही हश्र हो रहा है. बहराल, हरियाणा में 21 अक्टूबर को होने वाले चुनाव में अशोक तंवर की बगावत पार्टी को कितना नुकसान पहुंचाती, इसका पता 24 अक्टूबर को आने वाले नतीजों में सामने आएगा.

आशा खेदर के विधानसभा प्रत्याशी बनने से गांव की पर्दा प्रथा टूटी

हरियाणा के हिसार जिले के सुरक्षित विधानसभा क्षेत्र उकलाना से भाजपा उम्मीदवार आशा खेदर (Asha Khedar BJP) को उस समय आश्यर्य हुआ, जब वह अपने पति विनय खेदर के गांव खेदर पहुंची. उन्होंने गांव की परंपरा के अनुसार अपना चेहरा पूरी तरह घूंघट में छिपा लिया था. खेदर गांव में पर्दा प्रथा अभी भी सख्ती से लागू थी. आशा खेदर उम्मीदवार बनने के बाद पहली बार अपने ससुराल पहुंची थी. बाद में उन्होंने घूंघट हटाना पड़ा. इस तरह गांव में सख्ती से चली आ रही पर्दा प्रथा टूटी.

आशा खेदर प्रतिभाशाली दलित महिला है. संस्कृत और अंग्रेजी में एमए कर चुकी है. पुलित्जर और बुकर जैसे पुलस्कारों की विजेता झुंपा लाहिड़ी पर पीएचडी कर रही हैं. उन्होंने एक जाट व्यापारी से विवाह किया है, जो खेदर के निवासी हैं. इस बार विधानसभा चुनाव में उन्हें भाजपा ने टिकट दे दिया है. चुनाव प्रचार के विवाह के 13 साल बाद पहली बार उन्होंने खेदर में घूंघट हटाया.

आशा खेदर के खेदर पहुंचने पर गांव के लोग उन्हें देखने के लिए उमड़ पड़े. वह गांव की बहू थी. बहू होने के नाते उन्हें घूंघट करना जरूरी था. उन्होंने परंपरा का पालन किया. उन्हें देखने के लिए करीब दो हजार लोगों की भीड़ जुटी थी. लोगों ने उनसे घूंघट हटाकर बात करने का अनुरोध किया, जिसे मानने के अलावा आशा के सामने और कोई उपाय नहीं था. इसके बाद उन्होंने घूंघट हटाकर चुनाव प्रचार किया. इसके साथ ही वह गांव की अन्य बहू-बेटियों से भी घूंघट हटाने की अपील करने लगी.

इस प्रकार हरियाणा के रूढ़िवादी गांव खेदर की एक बहू के विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार बन जाने से गांव की कई महिलाओं को पर्दा प्रथा से मुक्ति मिली. आजकल के जमाने हमेशा घूंघट में चेहरा छुपाए रहना महिलाओं के लिए बहुत मुश्किल होता है. आशा के उम्मीदवार बनने से अकस्मात एक क्रांति हो गई. हालांकि वह क्रांति करने नहीं गई थी. वह चुनाव प्रचार करने गई थी. जब स्थानीय लोगों ने खुद ही उनसे घूंघट हटाने के लिए कह दिया तो वे अन्य महिलाओं को कैसे मना करेंगे?

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जिला परिषद सदस्य राजबीर खेदर ने कहा राजनीति कर रही महिला घूंघट में रहे, यह अच्छा नहीं लगता. अगर वह चुनाव जीत गईं तो मंत्री भी बन सकती है. तब बड़े कार्यक्रमों के मंच पर उनका घूंघट पहनकर पहुंचना किसको अच्छा लगेगा? सरपंच शमशेर सिंह ने कहा की गांव की बहू होने से उसे पर्दा करना पड़ता है, लेकिन लोगों से वोट मांगने के लिए पर्दा कैसे कर सकती है? हम सभी ने उनसे पर्दा हटाकर जनसंपर्क करने के लिए कहा है.

आशा चंडीगढ़ में पली-बढ़ी. पंजाब विश्वविद्यालय से उन्होंने संस्कृत में डिग्री ली और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से अंग्रेजी में डिग्री हासिल की. कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ही उन्होंने बीएड और एमफिल किया. रोहतक बीएमयू से उनकी पीएचडी पूरी होने के करीब है. झुंपा लाहिड़ी के उपन्यासों में पात्रों की पहचान पीएचडी का विषय है. उनके पिता हरियाणा रोडवेज के कर्मचारी थे. वह चंडीगढ़ में पली-बढ़ी. अब वह उकलाना कस्बे में अपने पति विनय और 11 वर्षीय बेटी के साथ रहती हैं. पास ही बरवाला में विनय का पेट्रोल पंप है. उनके पति के परिवार के अन्य सदस्य खेदर गांव में रहते हैं. आशा ने बताया कि वह नियमित तौर पर ससुराल जाती थी, लेकिन वहां कभी भी घूंघट नहीं हटाया.

आशा 2007 में भाजपा में शामिल हुई थी और फिलहाल भाजपा की हिसार इकाई की महासचिव हैं. लोग बताते हैं कि वह कार्यक्रमों के संचालन में कुशल है और जिले में जब भी मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर दौरा करते हैं, उनके कार्यक्रमों का संचालन आशा ही करती हैं. उन्होंने बताया कि चुनाव जीतने के बाद क्षेत्र का विकास उनकी प्राथमिकता होगी. उकलामा में कॉलेज पहले ही खुल चुका है, जिसकी मांग यहां के लोग लंबे समय से कर रहे थे. अब जल्दी ही यहां औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) खुलने वाला है. आगे इस क्षेत्र का और भी विकास होगा.

हरियाणा: अशोक तंवर का पत्ता कटा, कांग्रेस की अंतिम लिस्ट में भी नहीं आया नाम

हरियाणा में कांग्रेस के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष रहे अशोक तंवर का पत्ता कट गया है, विधानसभा चुनाव के लिए जारी हुई कांग्रेस की दूसरी और अंतिम सूची में भी अशोक तंवर का नाम नहीं आया है. हाल ही में उन्हें हरियाणा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पद से हटा कर कुमारी शैलजा को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था. ऐसे में अशोक तवंर को हरियाणा में किसी भी सीट से टिकट नहीं दिए जाने कब बाद उनके बागी होने की सम्भावना भी प्रबल हो गई है. अस्तित्व बचाने में लगी कांग्रेस ने हरियाणा विधानसभा चुनाव (Haryana Assembly Election-2019) अकेले लड़ने का फैसला किया है. यही वजह है कि हरियाणा की सभी सीटों पर कांग्रेसी … Read more

दिग्विजय सिंह का बयान- इस्लाम की तरह हिंदुओं की कट्टरता भी खतरनाक, बीजेपी ने बताया देशद्रोह

PoliTalks news

कांग्रेस के दिग्गज नेता और मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) का विवादित बयानों से पुराना नाता चला आ रहा है. आए दिन वे किसी ना किसी सभा में विवादित बयान दे ही देते हैं. इस बार दिग्विजय सिंह ने अपने बयान में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को ‘जी’ कहकर संबोधित किया. इसके साथ ही दिग्विजय ने भाजपा पर जमकर निशाना साधते हुए कहा कि जिस तरह से मुस्लिमों की कट्टरता खतरनाक है, उसी तरह हिंदुओं की भी कट्टरता खतरनाक है. बीजेपी ने कहा दिग्विजय सिंह का यह बयान देशद्रोह की श्रेणी में आता है, इनको पाकिस्तान में ही बस जाना चाहिए, बिना वीजा के रख लेगा पाकिस्तान.

पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह बुधवार को इंदौर में महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के अवसर पर लोगों को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि इमरान खान का अतिवादी (रेडिकल) इस्लाम जितना खतरनाक है, उतना ही खतरनाक उग्र हिंदुत्व भी है. इस दौरान उन्होंने इमरान को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री जी कहकर संबोधित किया. हालांकि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को ‘जी’ कहना दिग्विजय के लिए कोई आश्चर्य करने वाली बात नहीं है. क्योंकि इससे पहले भी वे ओसामा बिन लादेन और हाफिज सईद को ‘जी’ कहकर संबोधित कर चुके हैं.

लोगों को सम्बोधित करते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा कि पं. नेहरू ने कहा था कि अल्पसंख्यकों की सांप्रदायिकता के मुकाबले बहुसंख्यकों की सांप्रदायिकता कहीं ज्यादा खतरनाक होती है. आज हम जो हालात पाकिस्तान में देख रहे हैं वो इसलिए है क्योंकि वहां बहुसंख्यक सांप्रदायिक हुए हैं. भारत में यदि बहुसंख्यक सांप्रदायिक हुए तो देश को बचाना मुश्किल होगा. भारत एक धार्मिक देश है, गांधीजी ने भारत की सनातनी परंपरा और संस्कृति को समझा था. सनातन धर्म में सत्य अहिंसा की बात होती है. आज अहिंसा ही संकट में है, भगवान महावीर, भगवान बुद्ध और महात्मा गांधी की परंपरा के साथ हमारा धर्म भी संकट में है.

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वहीं अनुच्छेद-370 पर सरकार के रुख का उल्लेख करते हुए दिग्विजय ने कहा कि आज अगर गांधीजी जिंदा होते तो घोषणा कर देते कि मैं लाल किले से लाल चौक तक यात्रा करूंगा. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भी कहा था कि कश्मीर समस्या का हल जम्हूरियत, कश्मीरियत और इंसानियत से हो सकता है. सिंह ने वाट्सएप को समाज का दुश्मन करार देते हुए कहा कि झूठ को प्रचारित किया जा रहा है. आज युवा इसी में उलझे हुए हैं, बहस न करना कांग्रेसियों की सबसे बड़ी कमी है.

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के इस बयान के बाद राजनीति गरमा गई और बीजेपी नेता विश्वास सारंग ने (Vishwas Sarang BJP) कहा कि दिग्विजय सिंह का बयान बहुत आपत्तिजनक है. सारंग ने कहा, ‘दिग्विजय सिंह ने पाकिस्तान के प्रवक्ता की तरह बयान दिया है जिस भाषण को यूएन में इमरान खान ने जहां छोड़ा था उसी का एक्सटेंशन दिग्विजय सिंह का यह बयान है.’ सारंग ने आगे कहा, ‘दिग्विजय ने आतंकवाद और हिंदू को जोड़ने का प्रयास किया है और यह उनकी नई बात नहीं है. वह हर समय भगवा को लेकर, हिंदू को लेकर और हिंदुस्तान को लेकर विवादित बयान देते हैं. वह हर समय पाकिस्तानपरस्ती की बात करते हैं. मेरा मानना है उनका यह बयान देशद्रोह की श्रेणी में आता है.’

बीजेपी नेता विश्वास सारंग यहीं नहीं रुके, उन्होंने कहा, ‘हिंदुस्तान के प्रधानमंत्री को तो आप गाली देते हो जिसे 130 करोड़ जनता ने चुना है और जो पाकिस्तान का प्रधानमंत्री हिंदुस्तान में लगातार हमारे सैनिकों को मारने की बात करता है, आतंकवाद को बढ़ावा देता है आप उसको ‘जी’ बोलते हो. संत समाज के कार्यक्रम में आप भगवा आतंकवाद की बात करते हो और जाकिर नायक के कार्यक्रम में जाकर उसको शांतिदूत बोलते हो. जिस चाल से दिग्विजय सिंह चल रहे हैं, मुझे ऐसा लगता है कि वह आने वाले दिनों में पाकिस्तान जाकर ही ना बस जाएं क्योंकि वहां उन्हें बिना वीजा के भी रख लिया जाएगा.’

मध्य प्रदेश: झाबुआ में कमलनाथ और मोदी की प्रतिष्ठा पर चुनाव लड़ रही कांग्रेस-भाजपा

मध्य प्रदेश में झाबुआ विधानसभा सीट (Jhabua Assembly Seat) पर कांग्रेस और भाजपा, दोनों की अपनी पूरी ताकत लगाएंगी. यह उप चुनाव मुख्यमंत्री कमलनाथ (Kamalnath) और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Narendra Modi) की प्रतिष्ठा पर लड़ा जा रहा है. कांग्रेस विधानसभा में बहुमत से दो विधायक दूर है. अगर वह झाबुआ सीट जीत लेती है तो उसे बहुमत के लिए सिर्फ एक विधायक की कमी रहेगी. इसलिए कांग्रेस ने इस क्षेत्र के कद्दावर नेता कांतिलाल भूरिया को उम्मीदवार बनाया है, जो पांच बार लोकसभा सांसद रह चुके हैं. पिछले विधानसभा चुनाव में झाबुआ सीट से भाजपा के टिकट पर गुमान सिंह डाभोर विधायक चुने गए थे. उन्होंने कांतिलाल भूरिया के पुत्र … Read more

हरियाणा: भाजपा की 78 सीटों के लिए पहली लिस्ट जारी, करनाल से लड़ेंगे खट्टर

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भाजपा (BJP) ने हरियाणा विधानसभा चुनाव (Haryana Assembly Election-2019) के लिए अपने प्रत्याशियों की पहली सूची जारी कर दी है. 90 सीटों पर होने वाले आम चुनावों के लिए बीजेपी की ओर से जारी इस लिस्ट में 78 उम्मीदवारों के नाम है. प्रदेश के वर्तमान ​मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर (Manohar Lal Khattar) करनाल विधानसभा सीट से चुनाव लड़ेंगे. इस लिस्ट में खिलाड़ियों की एक तिगड़ी भी मौजूद है जो हाल में भाजपा में शामिल ​हुई है. बबीता फोगाट (Babita Phogat), योगेश्वर दत्त (Yogeshwar Dutt) और संदीप सिंह (Sandeep Singh) को भी टिकट मिला है. दादरी से बबीता फोगाट, सोनीपत के बरौदा से योगेश्वर दत्त और कुरुक्षेत्र के पिहोवा विधानसभा सीट … Read more

राहुल गांधी ने कहीं राजनीति से संन्यास तो नहीं ले लिया?

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) इन लंबे समय से सियासी पटल पर नजर नहीं आ रहे हैं. लोकसभा चुनाव में हार के बाद वे ऐसे गायब हुए जैसे ओस की बूंद रोशनी पड़ते ही गायब हो जाती है. लोकसभा में भी वे ज्यादा नहीं दिखे. हां, वे दो बार अपने संसदीय क्षेत्र वायनाड जरूर गए थे और उसके बाद उनका नाम जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक (Satyapal Malik) से तीखी नोक-झोंक के चलते काफी उछला था. अब लंबे समय से वे कहीं भी नहीं दिख रहे. यहां तक की वे कांग्रेस पदाधिकारियों की बैठक तक में शामिल नहीं हुए. ऐसे में सत्ताधारी पक्ष तो छोडिए खुद की पार्टी तक में ये चर्चाएं गर्म है कि आखिर राहुल गांधी इन दिनों क्या कर रहे हैं? कहीं वे राजनीति की मोह माया से दूर होकर अखंड ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए सत्य का ज्ञान करने तो नहीं पहुंच गए.

प्रश्न बड़ा सरल सा है लेकिन जवाब उतना ही कठिन. पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के बाद उन्हें कांग्रेस कार्य समिति में बतौर सदस्य शामिल किया गया लेकिन कांग्रेस की अंतरिम राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) की बुलाई बैठक से भी राहुल गांधी नदारद रहे. यहां तक कि राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और डिप्टी सीएम सचिन पायलट के बीच सत्ता को लेकर चल रहे संकट में भी प्रियंका (Priyanka Gandhi) और सोनिया ने दोनों नेताओं से बात की जबकि इससे पहले राजस्थान (Rajasthan) और मध्यप्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) व कमलनाथ (Kamalnath) के बीच राहुल गांधी ने ही सुलह कराई थी. लेकिन इस बार वे बीच में आए ही नहीं.

संसद का सत्र भी इस बार काफी लंबा चला लेकिन उसमें भी राहुल गांधी की भागीदारी कम रही. संसद में कांग्रेसी खेमा उनके अनुच्छेद 370 पर बोलने का इंतजार करता रहा लेकिन उन्होंने चुप्पी साधे रखी. यहां तक की नेता प्रतिपक्ष की सीट भी अधीर रंजन चौधरी (Adhir Ranjan Choudhary) को संभाला दी गई है.

अब हरियाणा (Haryana) और महाराष्ट्र (Maharastra) में विधानसभा चुनाव सहित अन्य 17 राज्यों की 64 सीटों पर उपचुनाव का बिगुल बज गया है. तारीखें तय हो चुकी हैं और आचार संहिता लागू हो गई है. नेताओं की दावेदारी भी शुरू हो गई है. चुनाव होने में अब सिर्फ कुछ दिन बचे हैं लेकिन यहां भी राहुल गांधी की कोई सक्रियता नहीं दिख रही. अगले कुछ महीनों में झारखंड और दिल्ली में भी विधानसभा चुनाव होने हैं. आम तौर पर चुनाव से पहले ही राज्यों में नेताओं के दौरे शुरू हो जाते हैं. मोदी-शाह झारखंड और महाराष्ट्र में चुनावी रैलियां भी कर चुके हैं लेकिन पार्टी के स्टार प्रचारक होने के बावजूद राहुल गांधी अभी तक चुनावी माहौल से दूर हैं. यहां तक की राहुल गांधी सोशल मीडिया पर भी पहले की तरह एक्टिव नहीं हैं.

इस बात से भी सभी वाकिफ हैं कि खराब स्वास्थ्य की वजह से सोनिया गांधी प्रचार कार्यों में नहीं उतरेंगी. वहीं पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी ने अपने आपको उत्तर प्रदेश तक ही सीमित किया हुआ है. ऐसे में हरियाणा-महाराष्ट्र सहित अन्य दोनों राज्यों और उपचुनावों में प्रचार का मोर्चा राहुल गांधी को ही संभालना है. इसके बावजूद राहुल गांधी का कहीं कोई पता नहीं है. उनके न किसी राजनीतिक कार्यक्रम में शामिल होने खबर आ रही है, न ही किसी राज्य पर दौरे की और न ही विदेश दौरों की कोई खबर आ रही है.

कांग्रेस के प्रमुख नेताओं की इस मृतप्राय: सोच का फायदा सत्ताधारी पक्ष पूरी तरह से कैश कराने की जुगाड़ में लगा हुआ है. इन सभी बातों से बेखबर विपक्ष के नेताओं के साथ राहुल गांधी जम्मू कश्मीर दौरे से क्या लौटे, राजनीति के ‘मिस्टर इंडिया’ बन गए. हालांकि उन्हें जम्मू हवाई अडडे से ही वापिस लौटा दिया गया था. उड़ती-उड़ती खबर आ रही है कि महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर सोनिया-राहुल-प्रियंका पदयात्रा करने वाले हैं लेकिन इसकी अधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है.

अब हमारा प्रश्न फिर से वहीं आकर खड़ा हो गया है कि आखिर राहुल गांधी इन दिनों कर क्या रहे हैं? कांग्रेस के कई सीनियर नेताओं से संपर्क साधने का प्रयास हुआ लेकिन वहां से भी कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला. अब हमारे साथ-साथ कांग्रेस को भी इंतजार है कि आखिर कब टीम के कप्तान आकर मैदान पर खड़े होते हैं और अपनी फिल्डिंग सजाते हैं.

सिंधिया ने लिखा पीएम मोदी को पत्र, राहत पैकेज जल्द से जल्द मुहैया कराने की मांग

मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के प्रिय नेता और कांग्रेस के दिग्गज़ ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) ने हाल में प्रदेश के मालवा के नीमच-मंदसौर जिलों सहित चंबल के ग्वालियर, भिड़ और मुरैना में बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों का दौरा किया. यहां उन्होंने स्थानीय किसानों से वादा किया, ‘मैं सुख में आपके साथ रहूं या ना रहूं, दुःख में हमेशा साथ रहूंगा, किसान भाइयों चिंता मत करो आपकी लड़ाई लड़ रहा हूँ, मुआवजा दिलवाकर ही रहूंगा’.

भारी बारिश और बाढ़ के कारण मध्यप्रदेश में हुई भारी तबाही का मौका मुआयना करने के बाद कांग्रेस महासचिव और पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) का पत्र लिखकर राहत राशि स्वीकृत करने की मांग की है. सिंधिया ने लिखा है कि मेरे द्वारा बीते दिनों दस से ज्यादा बाढ़ प्रभावित जिलों में दौरा किया गया है, जहां भारी नुकसान हुआ है. लगातार हुई भारी बारिश से फसलें पुरी तरह से तबाह हो गई है, सड़कें बह गई है और भयंकर जन-धन हानि हुई है, कई स्कूलों, शासकीय भवनों-कार्यालयों, बिजली के खंभों, आंगनबाड़ी केन्द्रों को भी नुकसान पहुंचा है.

गौरतलब है कि सिंधिया ने पिछले दिनों मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के 10 बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया था. राज्य में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लेने के बाद कांग्रेस के दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने गुरुवार को प्रधानमंत्री मोदी को पत्र के जरिए प्रदेश के हालातों से अवगत कराया और केन्द्र से दी जाने सहायता राशि जल्द से जल्द मुहैया करवाने की अपील की है.

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पीएम मोदी (PM Modi) को लिखा है कि राज्य में इस तबाही से 596 और 1761 पशुओं की मौत हुई है, 67033 मकान क्षतिग्रस्त हो गए, 1361773 किसान बुरी तरह से प्रभावित हुए और करीब 14 लाख एकड़ की फसल बर्बाद हो गई. अनुमान लगाया जाए तो प्रदेश में 10 से 15 हजार करोड़ का नुकसान हुआ है. बीते दिनों केन्द्रीय सरकार का दल भी सर्वे के लिए पहुंचा था और जानकारी ली थी. वहीं प्रदेश की कमलनाथ सरकार ने भी सर्वे कर दस करोड़ की राहत राशि का प्रस्ताव केन्द्र सरकार के पास भेजा था.लेकिन अबतक राशि नहीं भेजी गई है, मेरी मांग है कि जल्द से जल्द केन्द्र राज्य सरकार को राहत राशि भेजे ताकि किसानों की मदद हो सके और उन्हें इस दुख की घड़ी से बाहर निकाला जा सके.

बड़ी खबर: इंदौर में क्या बोल गए ज्योतिरादित्य सिंधिया

बता दें, कांग्रेस के दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया पिछले कई दिनों से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के दौरे पर हैं. सिंधिया मंगलवार को मालवा के नीमच-मंदसौर जिले में बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों का दौर करने पहुंचे थे, इसके बाद बुधवार को उन्होंने चंबल के ग्वालियर, भिड़ और मुरैना का दौरा किया. सर्वे के दौरान उन्होंने केन्द्र और प्रदेश सरकार के प्रति नाराजगी भी जताई थी और सरकार से जल्द से जल्द मुआजवा देने की मांग की थी. हालांकि सरकार ने किसानों को आश्वासन दिया है कि वह अक्टूबर के मध्य तक सभी प्रभावितों को मुआवजा दे देगी.